Postal Course | Test Series | Crash Course
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 12 मार्च, 2019

  • 12 Mar 2019
  • 10 min read

पिनाका रॉकेट सिस्टम

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन Defence Research and Development Organisation-DRDO) ने राजस्थान स्थित पोखरण रेंज में पिनाका (PINAKA) मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम का सफल परीक्षण किया है।

  • यह हथियार प्रणाली अत्याधुनिक गाइडेंस किट और आधुनिक नेवीगेशन तथा नियंत्रण प्रणाली से लैश है।
  • गौरतलब है कि परीक्षण के दौरान यह प्रणाली सटीक निशाना लगाने में पूरी तरह सफल रही।
  • उड़ान के दौरान टेलिमैट्री प्रणाली की सहायता से वाहन की मॉनीटरिंग की गई।
  • पिनाका स्वदेश विकसित रॉकेट प्रणाली है और सटीक निशाना लगाने में सेना की मदद करेगी।

सिरसी सुपारी को जीआई टैग

हाल ही में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ ज़िले की ‘सिरसी सुपारी’ को जीआई टैग प्रदान किया गया है। सिरसी सुपारी को जीआई नंबर 464 प्रदान किया गया है।

  • ध्यातव्य है कि इसकी खेती येल्पुरा, सिदपुरा और सिरसी तालुका में की जाती है।
  • सिरसी सुपारी की कुछ अनूठी विशेषताएँ-

♦ आकार में गोल और सिक्के जैसी चपटी
♦ विशेष बनावट, अनुप्रस्थ काट (cross-sectional) दृश्य
♦ अनूठा स्वाद

  • उक्त विशेषताएँ किसी अन्य क्षेत्र में उगाई जाने वाली सुपारी में नहीं पाई जाती हैं। सिरसी सुपारी का औसत वज़न 7.5 ग्राम (सूखा) होता है।

जीआई टैग

  • भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication- GI) का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के लिये किया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र होता है।
  • इन उत्पादों की विशिष्ट विशेषता एवं प्रतिष्ठा भी इसी मूल क्षेत्र के कारण होती है।
  • इस तरह का संबोधन उत्पाद की गुणवत्ता और विशिष्टता का आश्वासन देता है।
  • वर्ष 2004 में ‘दार्जिलिंग टी’ जीआई टैग प्राप्त करने वाला पहला भारतीय उत्पाद है।
  • भौगोलिक संकेतक का पंजीकरण 10 वर्ष के लिये मान्य होता है।
  • जीआई टैग प्राप्त कुछ उत्पाद इस प्रकार हैं- कांचीपुरम सिल्क साड़ी, अल्फांसो मैंगो, नागपुर का ऑरेंज, कोल्हापुरी चप्पल, बीकानेरी भुजिया, इत्यादि।

और पढ़ें...

सांगली की हल्दी को मिला जीआई टैग


फ्लू महामारी से लड़ने के लिये डब्ल्यूएचओ की रणनीति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO ) ने अगले दशक में दुनिया भर के लोगों की रक्षा के लिये इन्फ्लुएंज़ा के खतरे से निपटने हेतु नई रणनीति की शुरुआत की है।

  • WHO ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इन्फ्लुएंज़ा का महामारी के रूप में फैलना ‘अवश्यंभावी’ है।
  • WHO की नई रणनीति, 2030 के माध्यम से 2019 हेतु सीज़नल इन्फ्लुएंज़ा की रोकथाम के लिये जानवरों से मनुष्यों में वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने और महामारी को रोकने हेतु उपाय करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • WHO के अनुसार, इन्फ्लुएंज़ा महामारी काफी हद तक सीज़नल है जो लगभग एक अरब लोगों को प्रभावित करती है और इसके कारण प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में लोगों की मृत्यु हो जाती है।
  • WHO ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक के रूप में वर्णित किया है।
  • नई रणनीति के तहत सभी देशों को नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मज़बूती से लागू करने और बीमारी की निगरानी, प्रतिक्रिया, रोकथाम, नियंत्रण तथा आवश्यक तैयारियों के साथ इन्फ्लुएंज़ा की रोकथाम के लिये अधिक-से-अधिक कार्यक्रमों के संचालन का आह्वान किया गया है।
  • WHO ने इस रोग के प्रसार को रोकने के लिये सबसे प्रभावी तरीके के रूप में वार्षिक फ्लू के टीके लगाने की सिफारिश की है।
  • WHO ने अधिक प्रभावी और अधिक सुलभ टीकों और एंटीवायरल उपचारों के विकास का भी आह्वान किया है।

नवाचार केंद्र (Innovation Centre)

  • संयुक्त राष्ट्र की दूरसंचार संस्था अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunications Union- ITU) ने भारत में दक्षिण एशिया के लिये अपने पहले क्षेत्रीय कार्यालय के साथ-साथ पहला नवाचार केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।
  • ITU दूरसंचार क्षेत्र में नए प्रौद्योगिकी मानकों को स्थापित करने के लिये विश्व स्तर पर देशों और कंपनियों के साथ समन्वय करता है।
  • पिछले चार वर्षों में भारत ने तकनीकी योगदान के मामले में अपनी भागीदारी पाँच गुना बढ़ा दी है।
  • ITU ने इसे मान्यता दी है और इसीलिये उक्त निर्णय लिया गया है।
  • ITU पूर्णकालिक सदस्यता के लिये प्रत्येक संगठन से 32,000 स्विस फ़्रैंक, लगभग 32,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर शुल्क लेता है।
  • ITU का नवाचार केंद्र उत्पादकता बढ़ाने के लिये छोटे और मध्यम व्यवसायों द्वारा प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर काम करेगा।
  • केंद्र 5 जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आगामी नई प्रौद्योगिकियों के मानकीकरण के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिये फर्मों के साथ सहयोग करेगा।

गिरनार वन्यजीव अभयारण्य

  • गिरनार वन्यजीव अभयारण्य गुजरात के जूनागढ़ ज़िले में स्थित है।
  • यहाँ पेड़ों की कई प्रजातियाँ, लगभग 179 पक्षियों की प्रजातियाँ, 33 सरीसृप प्रजातियाँ और 30 स्तनधारी प्रजातियाँ उपलब्ध हैं।
  • गुजरात में गिर का जंगल दुनिया का एकमात्र स्थान है जहाँ शेरों को जंगल में घूमते हुए देखा जा सकता है।
  • वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के अनुसार, वर्तमान में गिर जंगल एशियाई शेर का एकमात्र निवास स्थान है।

वुड स्नेक (Wood Snake)

  • वुड स्नेक की एक प्रजाति, जिसे पिछले 140 वर्षों से नहीं देखा गया था, को मेघमलाई वन्यजीव अभयारण्य में वैज्ञानिकों द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण में पुन: पाया गया।
  • यह मेघमलाई जंगलों और पेरियार टाइगर रिज़र्व की स्थानीय प्रजाति मानी जाती है।
  • हाल ही में आर चैतन्य (सरीसृप पर अध्ययन करने वाले) और वरद गिरी (फाउंडेशन फॉर बायोडायवर्सिटी कंज़र्वेशन के निदेशक) द्वारा इसे फिर से खोजा गया है।
  • वुड स्नेक की इस स्थानीय प्रजाति को आखिरी बार 1878 में ब्रिटिश सैन्य अधिकारी और प्रकृतिवादी कर्नल रिचर्ड हेनरी बेड्डोम द्वारा देखा गया था।
  • उन्होंने इसे एक नई प्रजाति ‘ज़ाइलोफ़िस इंडिकस’ के रूप में वर्णित किया।
  • गौरतलब है कि मेघमलाई वन्यजीव अभयारण्य तमिलनाडु के थेनी ज़िले में स्थित है।
  • यहाँ बड़े स्तनधारियों के अलावा साँपों, तितलियों और चींटियों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

स्वर्ण भंडार में भारत का 11वाँ स्थान
India ranks 11th in gold holding

हाल ही में जारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्वर्ण जमा पूंजी में 11वाँ स्थान है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास सोने के सबसे बड़े 117 भंडार हैं, जो वर्तमान में 607 टन है।
  • भारत विश्व में सोने का उपभोग करने वाला सबसे बड़ा देश है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) 2,814 टन के कुल सोने के भंडार के साथ सूची में तीसरे स्थान पर है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका 8,133.5 टन के साथ प्रथम, ज़र्मनी 3,369.7 टन के साथ द्वितीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) 2,814 टन के कुल सोने के भंडार के साथ सूची में तीसरे स्थान पर है।
  • सोने के भंडार वाले शीर्ष 5 देश संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, इटली और फ्राँस हैं।

विश्व स्वर्ण परिषद
World Gold Council

  • विश्व स्वर्ण परिषद स्वर्ण उद्योग के लिये बाज़ार विकास संगठन है।
  • इसका उद्देश्य सोने की मांग को प्रोत्साहित करना और बनाए रखना है, साथ ही उद्योग का नेतृत्व प्रदान करना और सोने के बाज़ार पर वैश्विक अधिकार कायम करना है।
  • यह एक अद्वितीय संगठन है जो स्वर्ण उद्योग को मूर्त लाभ प्रदान करता है।
एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close