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भारत में वन आवरण: प्रगति और पहल

  • 05 Aug 2023
  • 6 min read

हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में भारत में वनावरण को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न पहलों पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।

भारत में वन संरक्षण संबंधी प्रमुख पहलें: 

  • भारत में वनावरण: 
    • भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India- FSI), देहरादून द्वारा वर्ष 1987 से वन आवरण का द्विवार्षिक (प्रत्येक दो वर्ष पर) आकलन किया जा रहा है और इसके निष्कर्ष भारत वन स्थिति रिपोर्ट (India State of Forest Report- ISFR) में प्रकाशित किये जाते हैं।
    • ISFR 2021 के नवीनतम आकलन के अनुसार, भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण 8,09,537 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 24.62% है।
    • यह ISFR 2019 के मूल्यांकन की तुलना में 2261 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि और वन संरक्षण प्रयासों में सकारात्मक प्रगति का संकेत देता है।

वनावरण को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहल:

  • ग्रीन इंडिया मिशन: इसे वित्तीय वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था, यह वनीकरण गतिविधियों पर केंद्रित है।
    • पिछले पाँच वर्षों में वनीकरण प्रयासों में योगदान देने के लिये सत्रह राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेशों को 755.28 करोड़ रुपए जारी किये गए हैं।
  • राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम: इसे नष्ट हुए वनों और आसपास के क्षेत्रों को रिकवर करने के लिये कार्यान्वित किया गया था।
    • राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम अब हरित भारत मिशन का हिस्सा है।
  • नगर वन योजना: यह वर्ष 2020 में शुरू किया गया था, इसका लक्ष्य वर्ष 2024-25 तक शहरी और गैर-शहरी क्षेत्रों में 600 नगर वन और 400 नगर वाटिका बनाना है।
    • इस पहल का उद्देश्य हरित आवरण को बढ़ाना, जैव विविधता को संरक्षित करना तथा शहरी निवासियों के जीवन गुणवत्ता में सुधार करना है।
  • प्रतिपूरक वनीकरण निधि (Compensatory Afforestation Fund- CAF): इसका उपयोग विकासात्मक परियोजनाओं के लिये आवंटित वन भूमि की भरपाई हेतु प्रतिपूरक वनीकरण के लिये  राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है।
    • CAF का 90% पैसा राज्यों के लिये, जबकि 10% केंद्र के लिये होता है।
  • बहु-विभागीय प्रयास: केंद्रीय पहलों के अलावा संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज तथा कॉर्पोरेट निकायों के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के तहत वनीकरण गतिविधियाँ शुरू की जाती हैं।
  • राष्ट्रीय वन नीति का मसौदा: यह नीति वन प्रबंधन प्रथाओं में जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन उपायों को एकीकृत करने पर केंद्रित है। यह विशेष रूप से वन-निर्भर समुदायों के बीच जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन पर ज़ोर देता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न . राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये कौन-सा मंत्रालय केंद्रक अभिकरण (नोडल एजेंसी) है? (2021)

(a) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
(b) पंचायती राज मंत्रालय
(c) ग्रामीण विकास मंत्रालय
(d) जनजातीय कार्य मंत्रालय

उत्तर: (d)


प्रश्न . भारत का एक विशेष राज्य निम्नलिखित विशेषताओं से युक्त हैः (2012)

1- यह उसी अक्षांश पर स्थित है, जो उत्तरी राजस्थान से होकर जाता है
2- इसका 80% से अधिक क्षेत्र वन आवरणन्तर्गत है।
3- 12% से अधिक वनाच्छादित क्षेत्र इस राज्य के रक्षित क्षेत्र नेटवर्क के रूप में है।

निम्नलिखित राज्यों में से कौन-सा ऊपर दी गई सभी विशेषताओं से युक्त है?

(a) अरूणाचल प्रदेश
(b) असम
(c) हिमाचल प्रदेश
(d) उत्तराखंड

उत्तर: (a)


मेन्स:

प्रश्न. “भारत में आधुनिक कानून की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पर्यावरणीय समस्याओं का संविधानीकरण है।” सुसंगत वाद विधियों की सहायता से इस कथन की विवेचना कीजिये। (2022)

स्रोत:पी.आई.बी.

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