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जीव विज्ञान और पर्यावरण

यंग चैंपियंस ऑफ द अर्थ: UN

  • 19 Dec 2020
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme- UNEP) द्वारा घोषित प्रतिष्ठित "यंग चैंपियंस ऑफ द अर्थ" (Young champions Of The Earth) के सात विजेताओं में एक 29 वर्षीय भारतीय उद्यमी भी शामिल है। यह पुरस्कार नए विचारों और नवोन्मेषी कदमों के माध्यम से पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में काम करने वालों को  दिया जाता है।

प्रमुख बिंदु

यंग चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ के संबंध में:

  • यंग चैंपियंस ऑफ द अर्थ की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी, इसका उद्देश्य 18 से 30 वर्ष की आयु के ऐसे व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना है, जिनमें सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव पैदा करने की क्षमता है। 
  • वर्ष 2020 में, विश्व के प्रत्येक से सात युवा चैंपियंस चुने जाएंगे, ये हैं- अफ्रीका, यूरोप, लैटिन अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, पश्चिम एशिया तथा दो का चयन एशिया एवं प्रशांत से। 
  • प्रत्येक विजेता को निम्नलिखित लाभ होंगे-
    • सीड फंडिंग में 10,000 अमेरिकी डॉलर।
    • संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में उपस्थिति।
    • चैंपियंस ऑफ़ अर्थ अवार्ड समारोह में गणमान्य लोगों से परिचय।
    • साक्षात्कार और ऑनलाइन तथा वैश्विक मीडिया के माध्यम से प्रचार और मान्यता।

वर्ष 2020 के 7 विजेता:

  • फतेहमा अल्ज़ेला, कुवैत: फतेहमा ने एक गैर-लाभकारी रीसाइक्लिंग पहल ‘इको स्टार’ की स्थापना की। यह कुवैत में स्कूलों, घरों और व्यवसायों से कचरे के बदले पेड़ों और पौधों का आदान-प्रदान करता’ है। 
  • लेफतेरिस अरपाकिस, ग्रीस: (मेडिटेरेनियन क्लीनअप) ये समुद्र से प्लास्टिक एकत्र करने के लिये स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदाय को प्रशिक्षित, सशक्त और प्रोत्साहित करते हैं तथा एकत्र किये गए प्लास्टिक का पुनर्चक्रण किया जाता है।
  • मैक्स हिडाल्गो क्विंटो, पेरू (यावा): इन्होंने पोर्टेबल पवन टरबाइन का निर्माण किया, जो वायुमंडलीय आर्द्रता और धुंध से प्रतिदिन 300 लीटर पानी का उत्पादन करने में सक्षम  है।
  • निरिया एलिसिया गार्सिया, संयुक्त राज्य अमेरिका: (Run4Salmon) संयुक्त राज्य अमेरिका में गार्सिया ने चिनूक सामन प्रजातियों की रक्षा के लिये अपने कई साल समर्पित किये हैं, जिनकी संख्या काफी लंबे समय से पश्चिम अमेरिका में लुप्तप्राय स्थिति में रही है।
  • नजांबी मती, केन्या: (हरित केन्या का निर्माण) इन्हें पुनर्चक्रित प्लास्टिक, कचरे और रेत से कम लागत वाली निर्माण सामग्री बनाने के लिये यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है।
  • शियाओयुआन रेन, चीन: ( MyH2O) यह स्वच्छ पानी के लिये एक डेटा प्लेटफ़ॉर्म है जो ग्रामीण चीन के एक हजार गाँवों में भूजल की गुणवत्ता का परीक्षण और रिकॉर्ड का पता लगाता है, जिससे उन्हें स्वच्छ जल की उपलब्धता वाले स्थान का पता चल सके है।
  • विद्युत मोहन, भारत: (टेकाचार) इन्होंने सस्ते और पोर्टेबल बायोमास अपग्रेडिंग उपकरण बनाए हैं।

टेकाचार:

टेकाचार के संबंध में:

  • टेकाचार एक सामाजिक उद्यम है जिसकी स्थापना वर्ष 2018 में विद्युत मोहन द्वारा की गई थी।
  • यह उद्यम किसानों को अपनी फसल का अपशिष्ट न जलाने के लिये प्रेरित करता है और इन अपशिष्टों का इस्तेमाल से उन्हें अतिरिक्त आमदनी के उपाय बताता है।
  • यह जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और प्रदूषण के त्रिस्तरीय संकट का एक सार्थक और तत्काल समाधान है।

प्रक्रिया: 

  • टेकाचार में किसानों से चावल की भूसी, पुआल और नारियल के छिलके खरीदकर उन्हें चारकोल में परिवर्तित किया जाता है।

लाभ: 

  • कृषि अवशेषों को खुले में जलाना विश्व के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारक है और यह अभिनव तकनीक किसानों को यह समझाने में मदद कर सकती है कि वर्तमान में हमारे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करने के लिये कचरे को कैसे एक मूल्यवान संसाधन के रूप में बदला जा सकता है।
  • यह ग्रामीण किसानों को उनकी फसल के अवशेषों को ईंधन, उर्वरकों और मूल्यवर्द्धित रसायनों जैसे सक्रिय कार्बन (AC) में परिवर्तित करके 40% अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाता है।

क्षमता: 

  • वर्ष 2030 तक टेकाचार इस समस्या से प्रभावित 300 मिलियन किसानों की समस्या को हल कर सकता है, यह ग्रामीण आय में अतिरिक्त 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की  और रोजगार में भी वृद्धि करेगा तथा CO2 के उत्सर्जन में भी कमी करेगा है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम

(United Nations Environment Programme- UNEP):

  • यह संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है। इसकी स्थापना 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान हुई थी।
  • इसका मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है। इस संगठन का उद्देश्य मानव द्वारा पर्यावरण को प्रभावित करने वाले सभी मामलों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना तथा पर्यावरण संबंधी जानकारी का संग्रहण, मूल्यांकन एवं पारस्परिक सहयोग सुनिश्चित करना है।
  • UNEP पर्यावरण संबंधी समस्याओं के तकनीकी एवं सामान्य निदान हेतु एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
  • UNEP अन्य संयुक्त राष्ट्र निकायों के साथ सहयोग करते हुए सैकड़ों परियोजनाओं पर सफलतापूर्वक कार्य कर चुका है।
  • प्रमुख रिपोर्ट: उत्सर्जन गैप रिपोर्ट, वैश्विक पर्यावरण आउटलुक, फ्रंटियर्स, इन्वेस्ट इनटू हेल्थी प्लानेट।
  • प्रमुख अभियान: बीट पोल्यूशन, UN75, विश्व पर्यावरण दिवस, वाइल्ड फॉर लाईफ।

स्रोत:  इंडियन एक्सप्रेस

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