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जीव विज्ञान और पर्यावरण

अपमार्जकों द्वारा जल प्रदूषण

  • 15 Jul 2021
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

अपमार्जक, जल प्रदूषण

मेन्स के लिये:

अपमार्जक/डिटर्जेंट द्वारा जल प्रदूषण से हानियाँ

चर्चा में क्यों?

अपमार्जक/डिटर्जेंट से होने वाला जल प्रदूषण वैश्विक संदर्भ में एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

  • भारत में प्रति व्यक्ति डिटर्जेंट की खपत प्रतिवर्ष लगभग 2.7 किलोग्राम है।
    • यह फिलीपींस और मलेशिया में लगभग 3.7 किलोग्राम और संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 किलोग्राम है।

जल प्रदूषण:

  • जल प्रदूषण तब होता है जब हानिकारक पदार्थ जैसे-रसायन या सूक्ष्मजीवों द्वारा धारा, नदी, झील, महासागर, जलभृत या पानी के अन्य निकायों को दूषित किया जाता है, जो पानी की गुणवत्ता को खराब करते हैं और इसे मनुष्यों या पर्यावरण के लिये विषाक्त बनाते हैं।
  • जल विशिष्ट रूप से प्रदूषण की चपेट में है। इसे एक "सार्वभौमिक विलायक" के रूप में जाना जाता है, पृथ्वी पर जल किसी भी अन्य तरल पदार्थ की तुलना में अधिक पदार्थों के विलीनीकरण में सक्षम है।
  • जल प्रदूषण के कुछ कारण सीवेज का पानी, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि स्रोत, थर्मल और विकिरण प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियाँ, भूमिगत जल प्रदूषण आदि हैं।

नोट:

  • बिंदु स्रोत: जब प्रदूषकों को एक विशिष्ट स्थान से छोड़ा जाता है जैसे- औद्योगिक अपशिष्टों को ले जाने वाली पाइप सीधे जल निकाय में छोड़ी जाती है तो यह बिंदु स्रोत प्रदूषण का प्रतिनिधित्व करती है।
  • गैर-बिंदु स्रोत: इसमें फैलने वाले स्रोतों से या बड़े क्षेत्र से प्रदूषकों का निर्वहन शामिल है, जैसे कि कृषि क्षेत्रों, चराई भूमि, निर्माण स्थलों, परित्यक्त खानों और गड्ढों आदि से अपवाह।

प्रमुख बिंदु   

अपमार्जक (Detergent) :

  • अपमार्जक (Detergent) ऐसे पृष्‍ठ संक्रियक (Surfactant) या पृष्‍ठ संक्रियक पदार्थों का मिश्रण है जिनके तनु विलयन में सफाई करने की क्षमता होती है। अपमार्जक साबुन के समान होता है।
    • पृष्‍ठ संक्रियक जिसे सतह-सक्रिय एजेंट भी कहा जाता है, एक अपमार्जक जैसे पदार्थ को जब एक तरल में मिश्रित किया जाता है, तो वह इसके पृष्ठ तनाव को कम कर देता है, जिससे इसके फैलाव और गीलेपन की अवस्था में वृद्धि होती है।
    • पृष्ठ तनाव एक तरल का सतही गुण है जो इसे अपने अणुओं के एकत्रित होने के कारण बाह्य बल का विरोध करने की अनुमति देता है।
  • वे साबुन की तुलना में कठोर जल में अधिक घुलनशील होते हैं क्योंकि कठोर जल में डिटर्जेंट का सल्फोनेट, कैल्शियम और अन्य आयनों को उतनी आसानी से नहीं बांधता जितना साबुन में कार्बोक्सिलेट यह कार्य करता है।

अपमार्जक और प्रदूषण :

  • नोनीलफेनॉल का जैव-संचयन:
    • अपमार्जक में पाए जाने वाले एक खतरनाक रसायन नोनीलफेनॉल (Nonylphenol) को जल निकायों और खाद्य शृंखलाओं में प्रवेश करने के लिये जाना जाता है। यह जैव-संचयन (Bio-accumulation) करता है और गंभीर पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
    • यह मानव  दुग्ध, रक्त और मूत्र में पाया जाता है तथा यह कृन्तकों में प्रजनन एवं विकासात्मक प्रभावों से जुड़ा है।
  • जैव निम्नीकरण का निषेध :
    • कई कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट में लगभग 35 प्रतिशत से 75 प्रतिशत फॉस्फेट लवण होते हैं​। फॉस्फेट विभिन्न प्रकार के जल प्रदूषण की समस्याओं को उत्पन्न करने का कारण बन सकते हैं।
    • उदाहरण: फॉस्फेट कार्बनिक पदार्थों के जैव निम्नीकरण को रोकता है। गैर-बायोडिग्रेडेबल पदार्थों को सार्वजनिक या निजी अपशिष्ट जल उपचार द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता है।
      • जैव-निम्नीकरण या बायोडिग्रेडेशन (Biodegradation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों को छोटे यौगिकों में तोड़ दिया जाता है।
    • कुछ फॉस्फेट-आधारित अपमार्जक भी यूट्रोफिकेशन का कारण बन सकते हैं। फॉस्फेट-संवर्द्धन से जल निकाय में शैवाल और अन्य पौधों का प्रस्फुटन हो सकता है।
      • यूट्रोफिकेशन (Eutrophication): जब एक जल निकाय खनिजों और पोषक तत्त्वों से अत्यधिक समृद्ध हो जाती है जो शैवाल या शैवाल के अत्यधिक विकास को प्रेरित करती है। इस स्थिति में उपलब्ध जलीय ऑक्सीजन कम हो जाती जिससे अन्य जीवों की मृत्यु हो जाती है।
      • बेल्जियम में वर्ष 2003 से घरेलू अपमार्जक के रूप में उपयोग के लिये फॉस्फेट को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  • ऑक्सीजन की मात्रा को कम करने वाले पदार्थ:
    • डिटर्जेंट में ऑक्सीजन कम करने वाले पदार्थ भी होते हैं (यानी एक रासायनिक यौगिक जो आसानी से ऑक्सीजन परमाणुओं को स्थानांतरित करता है) जो मछलियों और अन्य समुद्री जानवरों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
  • श्लेष्म का विनाश:
    • जल में डिटर्जेंट सांद्रता 15 पीपीएम (Parts per Million) के करीब होने पर अधिकांश मछलियाँ मर जाती हैं, जबकि जल में 5 पीपीएम डिटर्जेंट सांद्रता मछलियों के अंडों को नुकसान पहुँचता है।डिटर्जेंट बाहरी श्लेष्म (Mucus) परतों को नष्ट करने में सक्षम होता है जो मछली को बैक्टीरिया और परजीवी से बचाते हैं, इससे गलफड़ों को गंभीर नुकसान होता है।
  • पानी को गंदा करता है:
    • डिटर्जेंट के कुछ मानवजनित हानिकारक घटक हैं जैसे- शाकनाशी, कीटनाशक तथा भारी धातु (जस्ता, कैडमियम और सीसा) जो कि पानी के खराब होने के कारक हैं। इससे प्रकाश अवरुद्ध होता है एवं पौधों का विकास बाधित होता है।
    • पानी का गंदापन मछलियों की कुछ प्रजातियों के श्वसन तंत्र को अवरुद्ध कर देता है। ये ज़हरीले जल निकाय कुछ घातक मानव या पशु रोगों के कारण बनते हैं।
  • इंसानों के लिये खतरनाक:
    • डिटर्जेंट में संदिग्ध कार्सिनोजेन्स (Carcinogen) और ऐसे तत्त्व होते हैं जो पूरी तरह से बायोडिग्रेड नहीं होते हैं।
      • कार्सिनोजेन एक ऐसा घटक है जो मनुष्यों में कैंसर पैदा करने की क्षमता रखता है।
  • भारतीय पहल:
    • इकोमार्क स्कीम (ECOMARK Scheme): सरकार ने यह योजना पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की लेबलिंग को लेकर शुरू की है।
    • यह योजना राष्ट्रीय आधार पर संचालित है और घरेलू तथा अन्य उपभोक्ता उत्पादों के लिये मान्यता एवं लेबलिंग प्रदान करती है, जो उस उत्पाद हेतु भारतीय मानकों की गुणवत्ता आवश्यकताओं के साथ-साथ कुछ पर्यावरणीय मानदंडों को पूरा करते हैं।
    • इकोमार्क योजना में विभिन्न उत्पाद श्रेणियाँ जैसे- साबुन और डिटर्जेंट, पेंट, खाद्य पदार्थ आदि शामिल हैं।

जैवसंचय बनाम जैव-आवर्द्धन

(Bioaccumulation vs Biomagnification): 

  • जैवसंचय तब होता है जब किसी जीव या प्रजाति के भीतर रसायनों की सांद्रता बढ़ जाती है। यह उस स्थिति में हो सकता है जब जीवों द्वारा ज़हरीले पदार्थ निगल लिये जाते हैं। जीवों के लिये इन विषाक्त पदार्थों का उत्सर्जन करना बहुत कठिन होता है, इसलिये ये उनके ऊतकों में जमा हो जाते हैं।
  • जैव-आवर्द्धन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिकारियों के भीतर ज़हरीले रसायन बनते हैं। यह प्रायः संपूर्ण खाद्य शृंखला में होता है और सभी जीवों को प्रभावित करता है परंतु शृंखला में शीर्ष पर रहने वाले जानवर अधिक प्रभावित होते हैं।

Bioaccumulation

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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