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सेबी ने विदेशों में शेयरों को सूचीबद्ध करने के लिये विशेषज्ञ समिति गठित की

  • 14 Jun 2018
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

भारतीय शेयर बाज़ार नियामक  सेबी घरेलू कंपनियों को विदेश में अपने शेयर सूचीबद्ध कराने की इज़ाज़त दे सकता है| उसने विदेश में लिस्टिंग के नियमों का खाका तैयार करने के लिये एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है| पैनल की सिफारिश लागू होने के बाद घरेलू कंपनियाँ विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में अपने शेयर सूचीबद्ध करा सकेंगी| 

महत्त्वपूर्ण बिंदु 

  • मौजूदा नियम के अनुसार, भारत में निगमित कंपनियों के इक्विटी शेयरों का कारोबार विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हो सकता| इसी तरह विदेशों में निगमित कंपनियों के इक्विटी शेयरों की खरीद-फरोख्त भारतीय शेयर बाज़ार में नहीं की जा सकती|
  • सेबी का कहना है कि पूंजी बाजारों के विकास एवं अंतर्राष्ट्रीयकरण को देखते हुए भारत में गठित कंपनियों को सीधे विदेशों में अपने शेयर सूचीबद्ध कराने तथा विदेशी कंपनियों को भारतीय शेयर बाज़ारों में सूचीबद्धता की सुविधा देने का विचार पूर्णतः युक्तिसंगत है|
  • वर्तमान में, भारत में निगमित कंपनियाँ अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीप्ट या ग्लोबल डिपाजिटरी रिसीप्ट के माध्यम से विदेशों में सूचीबद्ध हो सकती हैं।
  • इसी प्रकार, भारतीय एक्सचेंजों पर व्यापार करने की इच्छा रखने वाली विदेशी कंपनियों को भारतीय डिपाजिटरी रिसीप्ट के माध्यम से सूचीबद्ध होना ज़रूरी है| 
  • पूंजी बाज़ार के विकास और उसके ग्लोबल बनने के मद्देनजर, यह माना जा रहा है कि भारतीय कंपनियों को विदेशी शेयर बाज़ारों में सूचीबद्ध होने का अवसर दिया जाए और विदेशी कंपनियों को भी भारत में ऐसा ही मौका मिले|
  • अब तक नियामक और सरकार भारतीय कंपनियों को विदेशों में सूचीबद्ध करने की अनुमति देने के लिये अनिच्छुक रही है, इस बात पर चिंता जताई गई है कि पूंजी देश छोड़ देगी, घरेलू प्राथमिक बाज़ार कम हो जाएगा  और कंपनियाँ अपनी नियामक परिधि से बाहर जा सकती हैं।
  • अब तक  नियामक एक ही पहलू पर गौर कर रहा था कि इससे भारत पूंजी खो सकता है, लेकिन अब एक नई सोच के अनुसार, इससे विदेशों में भारतीय कंपनियों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने और भारत में अच्छी गुणवत्ता वाली विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने का अवसर मिलेगा|
  • इससे भारत को प्रत्यक्ष लिस्टिंग व्यवस्था के लिये पारस्परिक क्षेत्राधिकारों तक पहुँचने की आवश्यकता होगी| अतः उन अधिकार क्षेत्र में नियामकीय  संशोधन की भी आवश्यकता होगी।
  • यह फायदेमंद होगा यदि कुछ विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में प्रभावी मूल्य खोज, लचीले लिस्टिंग नियम, उच्च तरलता आईपीओ करने के लिये कम लागत के साथ होता है|
  • 2014 में  सरकार ने असूचीबद्ध भारतीय कंपनियों को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नीति में संशोधन के माध्यम से शुरू में दो साल की अवधि के लिये भारत में सूचीबद्ध किये बिना विदेशों में पूंजी जुटाने की इजाजत दे दी थी, लेकिन इस योजना में कुछ ही लोग शामिल थे।
  • यह सिद्धांत रूप में एक अच्छा प्रस्ताव है  क्योंकि इसमें भारतीय कंपनियों के लिये धन उगाहने के मार्गों को बढ़ाने की क्षमता है।
  • यह बाज़ार को और अधिक प्रतिस्पर्द्धी बना सकता है क्योंकि विदेशी कंपनियाँ भारतीय एक्सचेंजों पर सीधे पूंजी जुटा सकती हैं और कुछ भारतीय कंपनियाँ जिन्होंने अपनी विदेशी संस्थाओं को पूंजी जुटाने के लिये सूचीबद्ध किया है, उनके पास विकल्प होगा|

9 सदस्यीय समिति का गठन 

  • सेबी ने इस कदम के आर्थिक, कानूनी, नियामकीय प्रभावों की जाँच और उपयुक्त ढाँचे की सिफारिश करने के लिये नौ सदस्यीय समिति बनाई है।
  • समिति में शामिल हैं- रेनू वोहरा (सह-संस्थापक, प्रबंध निदेशक और सीईओ, एवेंडस कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड), सिरिल एस श्रॉफ (प्रबंध भागीदार, अमरचंद मंगलदास), कमल यादव (प्रबंध निदेशक, मॉर्गन स्टेनली प्रौद्योगिकी, मीडिया और टेलीकॉम बैंकिंग), एस रमेश (प्रबंध निदेशक और सीईओ, कोटक इनवेस्टमेंट बैंकिंग), नीरज भार्गव (वरिष्ठ प्रबंध निदेशक और सीईओ, ज़ोडियस कैपिटल एडवाइज़र्स), दीप कालरा (अध्यक्ष और ग्रुप सीईओ, MakeMyTrip.com), राजीव गुप्ता (पार्टनर, सिंगापुर लथम और वाटकिंस एलएलपी), जमील खत्री (लेखा सलाहकार सेवाओं के वैश्विक प्रमुख, केपीएमजी एलएलपी) और सुजीत प्रसाद (कार्यकारी निदेशक, सेबी और संयोजक)।
  • अलग-अलग  बाज़ार नियामकों ने मौजूदा संस्थागत ट्रेडिंग प्लेटफार्म (ITP) ढाँचे की देखभाल के लिये एक समूह गठित किया है और स्टार्टअप की सूची को सुविधाजनक बनाने के उपायों पर सुझाव दिया है।
  • समूह वर्तमान संदर्भ में आईटीपी ढाँचे की समीक्षा करेगा, वर्तमान आईटीपी ढांचे पर फिर से विचार करेगा तथा क्षेत्रों की पहचान करेगा ( यदि कोई है, जिसके लिये और परिवर्तन की आवश्यकता है)।
  • समूह एक महीने में सेबी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
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