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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

पैसिफाइ: आकाश सर्वेक्षण परियोजना

  • 15 Jun 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

‘पैसिफाइ’ सर्वेक्षण परियोजना, ‘वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर’ उपकरण 

मेन्स के लिये

इन परियोजनाओं और उपकरणों का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

‘इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स’ में ‘पैसिफाइ’ (PASIPHAE) परियोजना के एक महत्त्वपूर्ण उपकरण ‘वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर’ को विकसित किया जा रहा है।

  • ‘पोलर-एरिया स्टेलर-इमेजिंग इन पोलेराइज़ेशन हाई-एक्यूरेसी एक्सपेरीमेंट’ यानी ‘पैसिफाइ’ परियोजना एक महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी आकाश सर्वेक्षण परियोजना है।

खगोलीय पोलारिमेट्री

  • पोलारिमेट्री यानी प्रकाश के ध्रुवीकरण को मापने की एक तकनीक, यह एक महत्त्वपूर्ण शक्तिशाली उपकरण होता है जो खगोलविदों को खगोलीय निकायों जैसे धूमकेतु और आकाशगंगाओं आदि के बारे में ऐसी जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, जिसे अन्य तकनीकों का उपयोग कर प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
  • ध्रुवीकरण प्रकाश का एक गुण है जो उस दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे प्रकाश तरंग दोलन करती है।
  • तकरीबन दो दशक पूर्व एक भारतीय खगोल भौतिक विज्ञानी सुजान सेनगुप्ता ने एक विचार प्रस्तुत किया कि एक ‘क्लाउडी ब्राउन ड्वार्फ’ द्वारा उत्सर्जित प्रकाश या एक एक्स्ट्रासोलर ग्रह से परावर्तित प्रकाश प्रायः ध्रुवीकृत होगा।

प्रमुख बिंदु

‘पैसिफाइ’ सर्वेक्षण के विषय में:

  • यह एक ऑप्टो पोलारिमेट्रिक सर्वेक्षण है जिसका लक्ष्य लाखों सितारों के रैखिक ध्रुवीकरण को मापना है।
  • सर्वेक्षण में उत्तरी और दक्षिणी आसमान को एक साथ देखने के लिए दो हाई-टेक ऑप्टिकल पोलीमीटर का उपयोग किया जाएगा।
  • यह सर्वेक्षण दक्षिणी गोलार्द्ध में सदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका में ‘दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला’ और उत्तर में ग्रीस के क्रीत में ‘स्किनकास वेधशाला’ से समवर्ती रूप से आयोजित किया जाएगा।
  • यह काफी दूरी पर स्थित तारों के ध्रुवीकरण पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो इतनी दूर पर स्थित है कि वहाँ से ध्रुवीकरण संकेतों का व्यवस्थित रूप से अध्ययन नहीं किया जा सकता  है।
  • इन तारों की दूरी GAIA उपग्रह के मापन से प्राप्त की जाएगी।
    • GAIA हमारी आकाशगंगा यानी ‘मिल्की वे’ के त्रि-आयामी मानचित्र के निर्माण संबंधी एक मिशन है, जिसके माध्यम से आकाशगंगा की संरचना, गठन और विकास की प्रक्रिया आदि को जानने में मदद मिलेगी।
  • इस परियोजना में क्रीत विश्वविद्यालय (ग्रीस), कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अमेरिका), ‘इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स’ (भारत), दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला और ओस्लो विश्वविद्यालय (नॉर्वे) के वैज्ञानिक शामिल हैं, जबकि इसका संचालन ग्रीस के इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स द्वारा किया जा रहा है।

परियोजना का महत्त्व

  • लगभग 14 अरब साल पूर्व अपने जन्म के बाद से, ब्रह्मांड लगातार विस्तार कर रहा है, जो कि कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) विकिरण की उपस्थिति से सिद्ध हो चुका है।
    • मिल्की वे आकशगंगा में क्लस्टर के रूप में बहुत सारे धूल के बादल मौजूद हैं और जब इन धूल के बादलों से तारों का प्रकाश गुज़रता है, तो वह बिखर जाता है और ध्रुवीकृत हो जाता है।
  • ‘पैसिफाइ’ पोलारिमेट्रिक मैप का उपयोग मिल्की वे आकाशगंगा की चुंबकीय टोमोग्राफी के लिये किया जाएगा।
    • जिसका अर्थ है कि यह हमारी आकाशगंगा की चुंबकीय क्षेत्र की त्रि-आयामी संरचना और उसमें मौजूद धूल के कणों का पता लगाएगा।
    • यह मानचित्र भविष्य के कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड संबंधी B-मोड प्रयोगों के लिये गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज हेतु अमूल्य जानकारी प्रदान करेगा।
    • B-मोड प्रयोग का उपयोग कॉस्मिक इन्फ्लेशन के सिद्धांत का परीक्षण करने हेतु किया जाता है और इसके माध्यम से कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) के ध्रुवीकरण का सटीक माप करके प्रारंभिक ब्रह्मांड के इन्फ्लेशन मॉडल के बीच अंतर किया जाता है।
    • कॉस्मिक इन्फ्लेशन के सिद्धांत के अनुसार, बिग बैंग के बाद प्रारंभिक ब्रह्मांड एक सेकंड के एक अंश के भीतर काफी तीव्रता से विस्तारित हुआ।
  • प्रारंभिक ब्रह्मांड के अध्ययन के अलावा यह सर्वेक्षण खगोल भौतिकी से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों जैसे- उच्च-ऊर्जा खगोल भौतिकी और तारकीय खगोल भौतिकी आदि में भी महत्त्वपूर्ण बढ़त प्रदान करेगा।

वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर (WALOP)

  • वर्ष 2012-2017 के दौरान ‘रोबोपोल’ प्रयोग सर्वेक्षण की सफलता के बाद इसकी योजना बनाई गई थी।
    • वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर और इसका पूर्ववर्ती ‘रोबोपोल’ दोनों ही ‘फोटोमेट्री सिद्धांत’ (आकाशीय पिंडों की चमक का मापन) साझा करते हैं।
    • किंतु ‘रोबोपोल’ के विपरीत WALOP उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुवों में समवर्ती रूप से मौजूद सैकड़ों सितारों को एक साथ देखने में सक्षम होगा, जबकि ‘रोबोपोल’ आकाश में काफी छोटा क्षेत्र कवर करने में सक्षम था।
  • कार्यविधि
    • वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर इस सिद्धांत के आधार पर कार्य करेगा कि किसी भी समय अवलोकन के दौरान आकाश के एक हिस्से से प्राप्त डेटा को चार अलग-अलग चैनलों में विभाजित किया जा सकता है।
    • प्रकाश के चार चैनलों से गुज़रने के तरीके के आधार पर तारे के ध्रुवीकरण संबंधी मूल्य प्राप्त किया जाएगा।
      • इस प्रकार प्रत्येक तारे में चार संगत चित्र होंगे जिन्हें एक साथ प्रयोग किये जाने पर किसी तारे के वांछित ध्रुवीकरण मान की गणना की जा सकेगी।
  • इंस्टॉलेशन
    • क्रीत (ग्रीस) स्थित 1.3-मीटर स्किनकास ऑब्ज़र्वेटरी और साउथ अफ्रीकन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्ज़र्वेटरी के 1 मीटर टेलीस्कोप पर प्रत्येक में एक ‘वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर’ (WALOP) स्थापित किया जाएगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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