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सामाजिक न्याय

मेघालय की अल्पसंख्यक जनजातियाँ

  • 10 Oct 2019
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

छठी अनुसूची, जनजातियाँ- हाज़ोंग जनजाति, राभा जनजाति, कोच जनजाति, बोडो-कचहरी जनजाति

मेन्स के लिये:

अनारक्षित जनजातियों (Unrepresented Tribes) को संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों से बाहर करने पर उनके हित किस प्रकार प्रभावित होंगे?

चर्चा में क्यों?

हाल ही में मेघालय सरकार ने ‘अनारक्षित जनजातियों’ (Unrepresented Tribes) को संविधान की छठी अनुसूची ( Sixth Schedule) के प्रावधानों से बाहर करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • पाँच अल्पसंख्यक जनजातियों- बोडो-कछारी, हाज़ोंग, कोच, मान तथा राभा को मेघालय की स्वायत्त आदिवासी परिषदों में ‘अनारक्षित जनजातियों’ के रूप में नामांकित किया गया है।
  • ये आदिवासी परिषदें गारो, खासी तथा जयंतिया जनजातियों के नाम पर आधारित हैं, जो राज्य के तीन प्रमुख मातृसत्तात्मक समुदाय हैं।
  • 26 सितंबर, 2019 को मेघालय राज्य सरकार द्वारा छठी अनुसूची में संशोधन के लिये गठित एक उप-समिति ने संशोधित विशेष प्रावधान से ‘अनारक्षित जनजातियाँ’ शब्द को हटाने हेतु संसद की स्थायी समिति से सिफारिश करने का निर्णय लिया था।
  • राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन जनजातियों को स्वायत्त ज़िला परिषदों में संवैधानिक अधिकारों तथा प्रतिनिधित्व करने के अवसर से वंचित कर सकता है क्योंकि उनका निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर संभव नहीं होगा।

हाज़ोंग जनजाति (Hajong Tribe):

  • हाज़ोंग जनजाति अधिकांशतः पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों तथा बांग्लादेश में निवास करती है।
  • ये लोग मुख्यतः चावल की खेती करते हैं।
  • यह जनजाति संगोत्री विवाह (Endogamy) का अनुसरण करती है।
  • यह जनजाति हिंदू है तथा हिंदू संस्कारों और रीति-रिवाज़ों का पालन करती है।

राभा जनजाति (Rabha Tribe):

  • यह नेपाल, भूटान, थाईलैंड, म्याँमार और बांग्लादेश तथा भारत के असम, मेघालय एवं पश्चिम बंगाल के मंगोलियाई समुदाय से संबंधित हैं।
  • राभा जनजाति राभा भाषा के अतिरिक्त असमिया भाषा का भी प्रयोग करती है।
  • मेघालय की गारो पहाड़ी के ज़िलों में अधिकतर राभा जनजाति निवास करती है।

कोच जनजाति (Koch Tribe):

  • यह असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश का एक टिबेटो-बर्मन नृजातीय समुदाय (Tibeto-Burman Ethnolinguistic Group) है।
  • इनकी भाषा टिबेटो-बर्मन भाषायी समूह से मिलती जुलती है।
  • 1881 की जनगणना के अनुसार, कोच, बोडो-कछारी समुदाय से संबंधित है।

बोडो-कछारी (Bodo-Kachari):

  • यह पूर्वोत्तर भारतीय राज्य असम में निवास करने वाले कई जातीय समूहों को संबोधित किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है।
  • ये लोग आम तौर पर असमिया और अन्य टिबेटो-बर्मन (Tibeto-Burman) भाषा बोलते हैं।

स्रोत: द हिन्दू

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