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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

शनि (Saturn) पर उपस्थित वलयों (घेरा) की आयु अनुमान से कम

  • 19 Jan 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?


हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा नासा के कैसिनी मिशन (Cassini spacecraft) के अंतिम चरण के अध्ययन से यह पता लगाया गया कि शनि ग्रह पर पाए जाने वाले वलय/छल्ले (Ring) अनुमान से बहुत कम आयु के हैं।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • हाल ही में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया गया कि कैसिनी मिशन के प्रयोगों के अंतिम चरण में शनि और इसके आंतरिक भाग में उपस्थित वलयों के बीच की जानकारियों को इकठ्ठा किया गया।
  • इसके तहत छह क्रॉसिंगों के दौरान, ग्रह के वलय में उपस्थित पदार्थों की मात्रा का सटीक अनुमान लगाने के लिये पृथ्वी के साथ एक रेडियो लिंक की निगरानी की गई थी।
  • शनि के चंद्रमा ‘मीमास’ (Mimas) के द्रव्यमान का लगभग 40%, जो पृथ्वी के चंद्रमा से 2,000 गुना छोटा है, के अध्ययन से यह पता चलता है कि शनि ग्रह पर उपस्थित गैसों के विशालकाय छल्ले हाल ही के हैं, जिनकी उत्पत्ति लगभग 100 मिलियन से 10 मिलियन वर्ष पहले हुई है।

Saturn

  • हमारे सौर मंडल के शुरुआती वर्षों में ही शनि का निर्माण हुआ था।
  • इससे पहले किये गये अध्ययनों में वलय (छल्ले) का आकार छोटा तो पाया गया, लेकिन इनकी उम्र का अनुमान लगाने के लिये आवश्यक इनके द्रव्यमान आदि महत्वपूर्ण आँकड़ों का अभाव बना रहा।
  • नासा के वायेज़र अंतरिक्ष यान के 1980 के आँकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि वलयों का द्रव्यमान (रिंग मास) इसके संबंध में व्यक्त पिछले अनुमानों की तुलना में 45% कम निकला। शोधकर्त्ताओं के अनुसार कम द्रव्यमान इनकी कम उम्र का संकेत देते हैं।

शनि ग्रह

  • शनि सौरमंडल में सूर्य के नज़दीक स्थित छठा और हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • इसमें बर्फीले वलयों की चमकदार सुसज्जित प्रणाली पाई जाती है।
  • हालाँकि यह एकमात्र वलय-युक्त ग्रह नहीं है, लेकिन अन्य ग्रह शनि के समान सुसज्जित एवं जटिल नहीं है।
  • बृहस्पति की तरह शनि भी एक विशालकाय गेंद के समान है जिसमें ज़्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम गैसें पाई जाती हैं।

महत्त्वपूर्ण तथ्य


दिन की अवधि - 10.7 घंटे 1 वर्ष - पृथ्वी के 29 वर्ष के बराबर 

त्रिज्या - 36,183.7 मील/58,232 किमी०

ग्रह का प्रकार – गैसीय

उपग्रह - 53 स्थाई, 9 अस्थाई

कैसिनी मिशन (Cassini spacecraft)

  • 15,अक्तूबर 1997 को इस मिशन को प्रारंभ किया गया तथा यह 15 सितंबर, 2017 को समाप्त हो गया।
  • कैसिनी द्वारा शनि और इसके चंद्रमाओं की परिक्रमा तथा इसका अध्ययन किया गया।
  • जनवरी 2005 में इस मिशन के द्वारा शनि के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन पर जानकारी एकत्र करने के लिये ह्यूजेंस प्रोब (Huygens probe) को भी उतारा गया था।

वलय (Ring)


शनि पर पाए जाने वाले वलय सौर मंडल के किसी भी ग्रह की सबसे व्यापक वलय प्रणाली हैं। इनमें अनगिनत छोटे-छोटे कण पाए जाते हैं, जिनका आकार मिलीमीटर (mm) से मीटर (m) तक होता है। यह वलय शनि ग्रह पर चारो ओर परिक्रमा करते हैं, जो चट्टानी पदार्थों के सूक्ष्म घटकों और बर्फ से बने होते हैं।


स्रोत – द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस ,आधिकारिक वेबसाइट

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