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भारतीय राजनीति

ओडिशा में विधानपरिषद

  • 19 Nov 2019
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

विधानपरिषद

मेन्स के लिये:

ओडिशा में विधानपरिषद से संबंधित सभी पारंपरिक मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार से ओडिशा में एक विधानपरिषद की स्थापना के लिये राज्यसभा में एक प्रस्ताव लाने का आग्रह किया है।

मुख्य बिंदु:

  • ओडिशा विधानसभा ने 7 सितंबर, 2018 को विधानपरिषद की स्थापना के लिये एक प्रस्ताव पारित किया था।
  • ओडिशा सरकार के अनुसार, ओडिशा में विकास की गति में वृद्धि के लिये विधानपरिषद के माध्यम से व्यापक परामर्श की आवश्यकता है।

विधानपरिषद:

विधानपरिषद का गठन एवं विघटन

(Creation and Abolition of Legislative Council):

  • संविधान का अनुच्छेद 171 किसी राज्य में विधानसभा के अलावा एक विधानपरिषद के गठन का विकल्प भी प्रदान करता है। राज्यसभा की तरह विधानपरिषद के सदस्य सीधे मतदाताओं द्वारा निर्वाचित नहीं होते हैं।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 168 राज्य में विधानमंडल का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 169 के अनुसार, किसी राज्य में विधानपरिषद के गठन तथा उत्सादन/समाप्ति (Abolition) के लिये राज्य विधानसभा द्वारा दो-तिहाई बहुमत से विधान परिषद के गठन तथा उत्सादन का संकल्प पारित कर संसद के पास भेजा जाता है। तत्पश्चात् संसद उसे साधारण बहुमत से पारित कर दे तो विधानपरिषद के निर्माण व उत्सादन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
  • हालाँकि इस प्रकार के संशोधन से संविधान में परिवर्तन आता है किंतु इसे अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।

विधानपरिषद की संरचना

(Composition of Legislative Council):

  • संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, विधानपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं होगी, किंतु यह सदस्य संख्या 40 से कम नहीं चाहिये।
  • राज्यसभा सांसद की ही तरह विधानपरिषद सदस्य का कार्यकाल भी 6 वर्ष का होता है, जहाँ प्रत्येक दो वर्ष की अवधि पर इसके एक-तिहाई सदस्य कार्यनिवृत्त हो जाते हैं।
  • संविधान के अनुच्छेद 171(3) के अनुसार, विधानपरिषद के एक-तिहाई सदस्य राज्य के विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं, एक-तिहाई सदस्य एक विशेष निर्वाचक-मंडल द्वारा निर्वाचित होते हैं जिसमें नगरपालिकाओं, ज़िला बोर्डों और अन्य स्थानीय प्राधिकारों के सदस्य शामिल होते हैं, इसके अतिरिक्त, सदस्यों के बारहवें भाग का निर्वाचन राज्य के हायर सेकेंडरी या उच्च शिक्षा संस्थाओं में कम-से-कम 3 वर्ष से पढ़ा रहे शिक्षकों के निर्वाचक-मंडल द्वारा और एक अन्य बारहवें भाग का निर्वाचन पंजीकृत स्नातकों के निर्वाचक-मंडल द्वारा किया जाता है, जो कम-से-कम तीन वर्ष पहले स्नातक कर चुके हैं।
  • ⅙ सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किये जाते हैं जो कि राज्य के कला, विज्ञान, साहित्य, समाजसेवा एवं सहकारिता से जुड़े होते हैं।

सदस्यता हेतु अर्हताएँ

(Qualifications for Membership):

  • संविधान के अनुच्छेद 173 के अनुसार, विधानपरिषद सदस्यता के लिये निम्नलिखित अर्हताएँ होनी चाहिये-
    • भारत का नागरिक हो।
    • 30 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
    • मानसिक रूप से विकृत न हो अर्थात् न्यायालय द्वारा उसे पागल या दिवालिया न घोषित किया गया हो।

विधानपरिषद वाले राज्य

(States with Legislative Council):

  • वर्तमान में छह राज्यों में विधानपरिषद अस्तित्व में हैं।
  • जम्मू-कश्मीर में भी इसके विभाजन (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश) के पूर्व विधानपरिषद मौजूद थी।
  • तमिलनाडु की तत्कालीन सरकार ने विधानपरिषद गठित करने के लिये एक अधिनियम पारित किया था, लेकिन वर्ष 2010 में सत्ता में आई नई सरकार ने इसे वापस ले लिया।
  • वर्ष 1958 में गठित आंध्र प्रदेश विधानपरिषद को वर्ष 1985 में समाप्त कर दिया गया था। वर्ष 2007 में इसका पुनर्गठन किया गया।
  • ओडिशा विधानसभा ने वर्ष 2018 में विधानपरिषद के गठन के लिये संकल्प पारित किया है।
  • राजस्थान और असम में विधानपरिषद के गठन के प्रस्ताव संसद में लंबित हैं।

विधानपरिषद की सीमाएँ:

(Limitations of Legislative Council):

  • विधानपरिषद की शक्तिविहीन और प्रभावहीन भूमिका के कारण विशेषज्ञों द्वारा इस सदन की आलोचना की जाती रही है।
  • आलोचक इसको द्वितीयक चैंबर, सफेद हाथी, खर्चीला सदन आदि की संज्ञा देते हैं।
  • यह ऐसे व्यक्तियों की शरणस्थली है जिनकी सार्वजनिक स्थिति कमज़ोर होती है तथा जो लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं होते हैं अथवा जनता द्वारा नकार दिये जाते हैं ऐसे लोगों को सरकार में शामिल करने अर्थात् मुख्यमंत्री या मंत्री बनाने हेतु इस सदन का उपयोग किया जाता है।

स्रोत-द इंडियन एक्सप्रेस

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