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सामाजिक न्याय

‘स्वास्थ्य सेवा खंड’ हेतु एक अलग नियामक का प्रस्ताव: IRDAI

  • 04 Jan 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

IRDAI, भारत में स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान भारत

मेन्स के लिये:

अस्पतालों में अलग-अलग टैरिफ फ्रेमवर्क से जुड़े मुद्दे और इसके समाधान हेतु सुझाव।

चर्चा में क्यों?

अस्पतालों के लिये एक सामान्य टैरिफ संरचना विकसित करने के उद्देश्य से ‘भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण’ (IRDAI) ने ‘स्वास्थ्य सेवा खंड’ हेतु एक अलग नियामक का प्रस्ताव रखा है अथवा इस क्षेत्र को अस्पतालों को स्वयं विनियमित करने की अनुमति दी जानी चाहिये।

  • यह देखा गया है कि वर्तमान में अस्पताल शुल्क की मुद्रास्फीति दर लगभग 10-15% है और नियमित आधार पर टैरिफ में बदलाव किया जा रहा है।

प्रमुख बिंदु

  • अस्पतालों के वर्तमान टैरिफ फ्रेमवर्क से संबंधित मुद्दे
    • अलग-अलग टैरिफ:
      • अस्पताल नियमित आधार पर स्वयं टैरिफ बदलते रहते हैं। वर्तमान में टैरिफ संरचना और ग्रेडिंग पर उन्हें विनियमित करने हेतु कोई निकाय मौजूद नहीं है।
      • बीते वर्ष जब कोविड महामारी ने देश में प्रवेश किया था, तो कुछ अस्पतालों द्वारा मरीज़ों से अत्यधिक शुल्क लिया गया था।
    • स्वास्थ्य बीमा व्यवसायों की लागत:
      • यदि बीमाकर्त्ता इसी प्रकार अस्पतालों की मांग को पूरा करना जारी रखते हैं और अत्यधिक भुगतान करते रहते हैं, तो स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय पर दीर्घावधि में इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ज्ञात हो कि पहले से ही यह उद्योग बड़ी संख्या में दावों का सामना कर रहा है।
    • व्यक्तिगत ‘हॉस्पिटल एम्पैनल्मेंट’ प्रक्रिया
      • वर्तमान में स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं और निजी बीमा के तहत व्यक्तिगत ‘हॉस्पिटल एम्पैनल्मेंट’ प्रक्रियाएँ शामिल हैं, जो विभिन्न गतिविधियों और प्रक्रियाओं के दोहराव एवं अक्षमता में योगदान करती हैं।
    • अस्पतालों को विनियमित करने हेतु बुनियादी ढाँचे का अभाव:
      • IRDAI के पास वर्तमान में अस्पतालों को विनियमित करने हेतु किसी भी प्रकार का बुनियादी ढाँचा मौजूद नहीं है। चूँकि स्वास्थ्य सेवा राज्य का विषय है, इसलिये IRDAI के लिये अस्पतालों को विनियमित करना काफी कठिन हो जाता है।
        • भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) भारत में बीमा क्षेत्र के समग्र पर्यवेक्षण एवं विकास हेतु संसद के एक अधिनियम- बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के तहत गठित वैधानिक निकाय है।
  • सिफारिशें
    • स्वास्थ्य बीमा की बढ़ती पहुँच के साथ सामान्य और चिकित्सा मुद्रास्फीति कारकों को अलग करने की आवश्यकता है तथा यह देखते हुए कि चिकित्सा मुद्रास्फीति प्रायः ‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक’ मुद्रास्फीति से काफी अधिक होती है, मूल्य निर्धारण के दृष्टिकोण में सुधार की भी आवश्यकता है।
    • IRDAI ने बीमा कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढाँचे के मानकीकरण और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने हेतु एक कॉमन अस्पताल रजिस्ट्री, एम्पैनल्मेंट’ प्रक्रिया, अस्पतालों की ग्रेडिंग और पैकेज लागत के बीच सामंजस्य का प्रस्ताव दिया है।
    • यह सिफारिश की गई है कि एक सामान्य पैनल पोर्टल स्थापित किया जाए, जिसका उपयोग सभी योजनाओं/बीमा कंपनियों द्वारा मानकीकृत पैनल मानदंड के लिये किया जा सकता है, जो सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान देने के साथ बेहद फायदेमंद होगा।

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)

  • स्वास्थ्य देखभाल:
    • राजस्व और रोज़गार के मामले में स्वास्थ्य देखभाल भारत के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक बन गया है। बढ़ती आबादी, बढ़ता आय स्तर, बुनियादी ढाँचे में वृद्धि, जागरूकता में वृद्धि,बीमा पॉलिसियों और चिकित्सा पर्यटन तथा नैदानिक परीक्षणों के केंद्र के रूप में भारत के उदय ने भारत में स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र के विकास में योगदान दिया है।
    • चूँकि इस क्षेत्र की ज़रूरतें बढ़ रही हैं, इसलिये आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करना महत्त्वपूर्ण है। भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा गरीबों को बिना किसी खर्चे के समय पर देखभाल से लाभान्वित करने में सक्षम बनाता है।
  • स्वास्थ्य बीमा का महत्त्व:
    • स्वास्थ्य बीमा भारत में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने हेतु ‘आउट-ऑफ पॉकेट’ (OOP) व्यय की व्यवस्था करने का एक तंत्र है।
    • यह स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से पूर्व-भुगतान, जोखिम-पूलिंग और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण  होने वाले व्यापक व्यय से बचाव के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में सामने आया है।
    • इसके अलावा प्री-पेड पूल फंड भी स्वास्थ्य देखभाल प्रावधान की दक्षता में सुधार कर सकते हैं।
  • स्वास्थ्य बीमा से संबंधित मुद्दे:
    • जीवन की स्थिति असमान रूप से वितरित है:
      • स्वतंत्रता के बाद से लोगों की जीवन प्रत्याशा में 35 वर्ष से 65 वर्ष की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन जीवन की स्थिति देश के विभिन्न भागों में असमान रूप से वितरित है तथा भारत में स्वास्थ्य समस्याएँ अभी भी बड़ी चिंता का कारण हैं।
    • कम सरकारी खर्च :
      • स्वास्थ्य पर कम सरकारी व्यय ने सार्वजनिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता और गुणवत्ता को बाधित किया है।
      • यह अधिकांश व्यक्तियों- लगभग दो-तिहाई को महँगे निजी क्षेत्र में इलाज कराने को मज़बूर करता है।
    •  स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा का अभाव:
      • कम-से-कम 30% आबादी या 40 करोड़ व्यक्तियों के पास स्वास्थ्य संबंधी किसी भी प्रकार की वित्तीय सुरक्षा मौजूद नही है।
  • संबंधित सरकारी योजनाएँ:

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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