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अंतर्राज्यीय परिषद की स्थायी समिति द्वारा पुंछी आयोग की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श

  • 26 May 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में अंतर्राज्यीय परिषद की स्थायी समिति ने पुंछी आयोग की सभी 273 अनुशंसाओं पर विचार-विमर्श किया। यह स्थायी समिति की 13वीं बैठक थी।

  • स्थायी समिति की पिछले वर्ष की दो बैठकों में पुंछी आयोग की रिपोर्ट के खंड 2 से खंड 5 के तहत की गई अनुशंसाओं पर विचार-विमर्श किया गया था। 13वीं बैठक में शेष 2 खंडों 6 और 7 पर विचार-विमर्श किया गया। इन 2 खंडों में कुल 88 अनुशंसाएँ की गई हैं।
  • खंड 6 में की गई अनुशंसाएँ पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन तथा अवसंरचना से संबंधित हैं। इसके अंतर्गत (1) पर्यावरण, (2) जल, (3) वन, (4) खनिज तथा (5) अवसंरचना के विषय शामिल हैं। 
  • खंड 7 सामाजिक-आर्थिक विकास, लोक नीति तथा उत्तम प्रशासन से संबंधित है। इसके अंतर्गत (1) लोकनीति, संवैधानिक प्रशासन व लोक प्रशासन, (2) सामाजिक राजनीतिक विकास तथा प्रशासन पर इसका प्रभाव, (3) लोगों की मौलिक ज़रूरतें, नीति-निर्देशक तत्त्व तथा राज्य का उत्तरदायित्व, केंद्र द्वारा प्रायोजित विकास योजनाएँ व केंद्र-राज्य संबंध, (4) पलायन, मानव विकास तथा संवैधानिक प्रशासन के समक्ष चुनौतियाँ तथा (5) उत्तम प्रशासन तथा जनसेवा के विषय शामिल हैं।
  • स्थायी समिति की अनुशंसाओं को निर्णय के लिये अंतर्राज्यीय परिषद के समक्ष रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि अंतर्राज्यीय परिषद की बैठक 10 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात् 2016 में आयोजित की गई थी।

पुंछी आयोग

  • भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित नए मुद्दों पर विचार करने के लिये 2005 में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया।
  • रिपोर्ट 7 खंडों में है और अनुशंसाएँ केंद्र-राज्य संबंध, संवैधानिक व केंद्र-राज्य संबंधों का प्रदर्शन, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध तथा योजना निर्माण, स्थानीय स्वशासन एवं विकेंद्रीकृत प्रशासन, आंतरिक सुरक्षा, आपराधिक न्याय व केंद्र-राज्य सहयोग, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन और अवसंरचना तथा सामाजिक आर्थिक विकास, लोक नीति व उत्तम प्रशासन आदि विषयों से संबंधित हैं।

सरकारिया आयोग

  • केंद्र सरकार ने केंद्र और राज्यों के बीच वर्तमान व्यवस्थाओं के कार्यकरण की समीक्षा करने के लिये न्यायमूर्ति आर.एस. सरकारिया की अध्यक्षता में 1988 में एक आयोग गठित किया था।
  • सरकारिया आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार परिभाषित अधिदेश के अनुसरण में परामर्श करने के लिये एक स्वतंत्र राष्ट्रीय फोरम के रूप में अंतर्राज्यीय परिषद स्थापित किये जाने की महत्त्वपूर्ण सिफारिश की थी।

अंतर्राज्यीय परिषद

  • इस सिफारिश के अनुसरण में संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति के दिनांक 28 मई, 1990 के आदेश के तहत, अंतर्राज्यीय परिषद का गठन किया गया था, जिसकी पहली बैठक 10 अक्टूबर, 1990 को हुई थी|
  • सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश के मुख्यमंत्री, बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासक और छह केंद्रीय मंत्री परिषद के सदस्य होते हैं।
  • अंतर्राज्यीय परिषद को राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करने और सलाह देने, कुछ या सभी राज्यों या केंद्र और एक या अधिक राज्यों के समान हित वाले विषयों की पड़ताल और विमर्श करने का अधिकार है। 
  • इस पर, ऐसे विवादों पर सिफारिशें देने और नीति तथा कार्यं के बीच बेहतर समन्वय के लिये सुझाव देने का दायित्व भी है।
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