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आंतरिक सुरक्षा

स्वदेशी विमान वाहक

  • 11 Jan 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

विमान वाहक, INS विक्रांत, INS विक्रमादित्य, INS विशाल

मेन्स के लिये:

आंतरिक सुरक्षा हेतु विमान वाहक का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘स्वदेशी विमान वाहक-1’ (IAC), जिसे भारतीय नौसेना में प्रवेश करने के बाद INS विक्रांत कहा जाएगा, ने समुद्री परीक्षणों का एक और चरण शुरू किया है।

  • INS विक्रांत भारत में बनने वाला सबसे बड़ा और सबसे जटिल युद्धपोत है।

Indigenous-Aircraft-Carrier

प्रमुख बिंदु

  • विमान वाहक के विषय में:
    • विमानवाहक पोत ‘एक बड़ा जहाज़ है, जो सैन्य विमानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है और इसमें जहाज़ों के लिये ‘एयर बेस’ मौजूद होती है।
      • ये ‘एयर बेस’ एक पूर्ण-लंबाई वाली उड़ान डेक से लैस होते हैं, जो विमान को ले जाने, हथियार तैनात करने और पुनर्प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं।
    • ये युद्ध और शांति के समय में नौसेना के बेड़े की कमान के रूप में कार्य करते हैं।
    • एक वाहक युद्ध समूह में विमान वाहक और उसके अनुरक्षक शामिल होते हैं, जो एक साथ एक समूह का निर्माण करते हैं। 
      • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इंपीरियल जापानी नौसेना ने पहली बार बड़ी संख्या में वाहक को एक टास्क फोर्स में इकट्ठा किया था जिसे किडो बुटाई के नाम से जाना जाता था।
      • इस टास्क फोर्स का इस्तेमाल पर्ल हार्बर अटैक के दौरान किया गया था।
  • भारत में विमान वाहक:
    • आईएनएस विक्रांत (सेवामुक्त): आईएनएस विक्रांत से शुरुआत, जिसने वर्ष 1961 से 1997 तक भारत की सेवा की।
      • भारत ने वर्ष 1961 में यूनाइटेड किंगडम से विक्रांत का अधिग्रहण किया और इस वाहक ने पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके कारण बांग्लादेश का जन्म हुआ।
      • वर्ष 2014 में आईएनएस विक्रांत का मुंबई में भंजन हुआ।
    • आईएनएस विराट (सेवामुक्त): आईएनएस विक्रांत के बाद सेंटौर-श्रेणी का वाहक एचएमएस (हर मेजेस्टीज शिप) हर्मीस आया, जिसे भारत में आईएनएस विराट के रूप में नाम दिया गया और इसने वर्ष 1987 से 2016 तक भारतीय नौसेना में सेवा प्रदान कीं।
    • आईएनएस विक्रमादित्य:
      • यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत और रूसी नौसेना के सेवामुक्त एडमिरल गोर्शकोव/बाकू से परिवर्तित युद्धपोत है।
      • INS विक्रमादित्य एक संशोधित कीव-श्रेणी का विमानवाहक पोत है जिसे नवंबर 2013 में कमीशन किया गया था।
    • INS विक्रांत:
      • INS विक्रांत की विरासत को सम्मान देने हेतु पहले IAC को INS विक्रांत के रूप में नामित किया जाएगा।
      • इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में बनाया गया है।
      • वर्तमान में इसका समुद्री परीक्षण चल रहा है और इसका परिचालन वर्ष 2023 में शुरू होने की संभावना है।
      • इसके निर्माण ने भारत को अत्याधुनिक विमान वाहक बनाने की क्षमता वाले चुनिंदा देशों में शामिल किया है।
      • संचालन के तौर-तरीके: भारतीय नौसेना के अनुसार, यह युद्धपोत मिग-29K लड़ाकू जेट, कामोव-31 हेलीकॉप्टर, MH-60R बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर और स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (ALH) का संचालन करेगा।
  • विमान वाहक का महत्त्व:
    • वर्तमान में अधिकांश विश्व शक्तियाँ अपने समुद्री अधिकारों और हितों की रक्षा के लिये तकनीकी रूप से उन्नत विमान वाहक का संचालन या निर्माण कर रही हैं।
    • दुनिया भर में तेरह नौसेनाएँ अब विमान वाहक पोत संचालित करती हैं। कुछ के नाम निम्नलिखित हैं:
      • निमित्ज़ क्लास, US
      • गेराल्ड आर फोर्ड क्लास, US
      • क्वीन एलिजाबेथ क्लास, UK
      • एडमिरल कुज़नेत्सोव, रूस
      • लिओनिंग, चीन
      • INS विक्रमादित्य, भारत
      • चार्ल्स डी गॉल, फ्रांस
      • कैवोर, इटली
      • जुआन कार्लोस, स्पेन
      • यूएसएस अमेरिका, US
    • भारत के लिये एयरक्राफ्ट कैरियर एक निवारक नौसैनिक क्षमता प्रदान करता है जो न केवल आवश्यक है बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता भी है।
      • ऐसा इसलिये है क्योंकि भारत की ज़िम्मेदारी का क्षेत्र अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर पश्चिमी प्रशांत महासागर तक है
  • भावी प्रयास:
    • वर्ष 2015 से नौसेना देश के लिये तीसरा विमानवाहक पोत बनाने की मंजूरी मांग रही है, जिसे अगर मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत का दूसरा स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी-2) बन जाएगा।
    • INS विशाल नाम के इस प्रस्तावित वाहक को 65,000 टन के विशाल पोत के रूप में उभारना  है, जो आईएसी-1 और INS विक्रमादित्य से काफी बड़ा है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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