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भारतीय रेलवे: कॉरपोरेट ट्रेन मॉडल

  • 18 Feb 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये

कॉरपोरेट ट्रेन मॉडल, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम

मेन्स के लिये

कॉरपोरेट ट्रेन मॉडल का महत्त्व और लाभ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रेलवे द्वारा संचालित काशी महाकाल एक्सप्रेस (Kashi Mahakal Express) को तीसरी कॉरपोरेट ट्रेन का दर्ज़ा प्राप्त हुआ है। इससे पूर्व यह दर्ज़ा दिल्ली-लखनऊ और मुंबई-अहमदाबाद रूट के बीच संचालित दो तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों को प्राप्त था।

कॉरपोरेट ट्रेन मॉडल

  • भारतीय रेलवे द्वारा अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (Indian Railway Catering and Tourism Corporation-IRCTC) के लिये नियमित यात्री ट्रेनों को 'आउटसोर्स' करने का एक नया सक्रिय मॉडल कॉरपोरेट ट्रेन मॉडल है।
  • यह मॉडल एक पायलट परियोजना है। इस मॉडल के सफल होने पर निजी क्षेत्र को लगभग 100 रेलवे रूट्स पर 150 ट्रेनों को संचालित करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

नए मॉडल की कार्यप्रणाली

  • इस मॉडल में किराया, भोजन, ट्रेन के भीतर मूलभूत सविधाएँ तथा शिकायत जैसी सेवाओं का संचालन IRCTC द्वारा किया जाएगा।
  • भारतीय रेलवे अब सेवा प्रदाता की भूमिका से मुक्त होगी तथा रेलवे अवसंरचना के उपयोग की अनुमति देने के लिये IRCTC से पूर्व निर्धारित राशि प्राप्त करेगी।
  • इस मॉडल के तीन प्रमुख घटक ढुलाई (Haulage), लीज़ (Lease), और कस्टडी (Custody) हैं।
  • कॉरपोरेट ट्रेन तेजस के लिये IRCTC द्वारा दिया जाने वाला ढुलाई शुल्क (Haulage Charge) 800 रुपए प्रति किलोमीटर है। इसमें ट्रैक, सिग्नलिंग, ड्राइवर, स्टेशन स्टाफ जैसे निश्चित बुनियादी ढांँचे के उपयोग का शुल्क भी सम्मिलित है।
  • इसके अतिरिक्त IRCTC को लीज़ शुल्क (Lease Charges) और कस्टडी शुल्क (Custody Charge) भी देना पड़ता है। इनमें से प्रत्येक घटक द्वारा दिल्ली-लखनऊ रूट पर भारतीय रेलवे को 2 लाख रुपए प्रतिदिन की आमदनी प्राप्त होती है।

भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम

  • IRCTC, भारतीय रेलवे का एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। यह खानपान, पर्यटन और ऑनलाइन टिकट वितरण के कार्य का संचालन करती है।
  • IRCTC ने निजी ट्रेनों के संचालन का कार्य भी प्रारंभ किया है।
  • IRCTC द्वारा 4 अक्तूबर, 2019 को भारत की पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस का संचालन दिल्ली-लखनऊ रूट पर किया गया।

IRCTC को प्राप्त शक्तियाँ

  • एक कॉर्पोरेट इकाई होने के कारण IRCTC इस बात पर बल देता है कि रेलवे से इसे मिलने वाले कोच अच्छी स्थिति में तथा नए हो, जैसा कि सामान्य ट्रेनों में देखा जाता है कि कोच पुराने और बहुत ख़राब स्थिति में होते हैं। इससे IRCTC के व्यवसाय पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • नए मॉडल में IRCTC के पास रेल मंत्रालय और इसकी समितियों द्वारा निर्मित नीतियों के मापदंडों को तय करने तथा उन्हें बदलने का भी पूर्ण अधिकार होगा।
  • IRCTC को अपने व्यवसाय मॉडल की ज़रूरतों के आधार पर किसी मार्ग पर ट्रेनों के स्टाॅपेज को बढ़ाने तथा कम करने की भी स्वतंत्रता प्राप्त है।
  • उदाहरण के तौर पर दिल्ली-लखनऊ रूट पर तेजस के दो स्टॉप हैं, जबकि मुंबई-अहमदाबाद रूट पर तेजस के छह स्टॉप हैं। स्टाॅपेज को बढ़ाने तथा कम करने का निर्णय व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

भारतीय रेलवे को प्राप्त होने वाले लाभ

  • दिल्ली-लखनऊ रूट पर तेजस एक्सप्रेस के संचालन से सामान्य तौर पर सभी शुल्कों और करों को मिलाकर भारतीय रेलवे को IRCTC से लगभग 14 लाख रुपए प्रतिदिन की आमदनी होती है।
  • इसके अतिरिक्त भारतीय रेलवे को कम किराए और अपने स्वयं के भारी ओवरहेड्स के कारण लागत की कम वसूली की स्थिति में इन ट्रेनों के संचालन के साथ जुड़े नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा।
  • इससे रेलवे के कोचों का रखरखाव भी अच्छी तरह से हो पाएगा।

क्या यह मॉडल निजी ट्रेन संचालकों के लिये भी समान है?

  • निजी ट्रेन संचालकों से संबंधित मॉडल अलग है। इसमें ढुलाई शुल्क कॉरपोरेट ट्रेन मॉडल के सापेक्ष 668 रुपए प्रति किलोमीटर है।
  • इस मॉडल में राजस्व का उच्चतम प्रतिशत साझा करने वाली कंपनियां ही अनुबंध हासिल कर पाएंगी।
  • निजी संचालकों को लीज़ और कस्टडी शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • सरकार चाहती है कि निजी संचालकों के साथ भारतीय रेलवे के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी निजी ट्रेनों के संचालन के भार को साझा करें।
  • यह मॉडल रेलवे में निजीकरण की दिशा में बढ़ने का भी एक प्रयास है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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