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स्तन कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि

  • 04 Jun 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में टेक्सास विश्वविद्यालय के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर (University of Texas MD Anderson Cancer Center) के शोधकर्त्ताओं के एक समूह ने राइबोसिक्लिब (Ribociclib) नामक दवा पर पर एक अध्ययन किया। यह दवा स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं (अपेक्षाकृत युवा महिलाओं) की हार्मोन थेरेपी में काफी उपयोगी मानी जा रही है।

  • इस अध्ययन में 40-50 वर्ष की महिलाओं को शामिल किया गया जो हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव (Hormone Receptor-Positive/ HR+) स्तन कैंसर और ह्यूमन एपिडर्मल रिसेप्टर 2 नेगेटिव (Human Epidermal Receptor 2- Negative/‘HER2-’) बीमारी से पीड़ित थी।
  • HR+कैंसर में ट्यूमर शामिल होता है जो हार्मोन को अवरुद्ध करने के उद्देश्य से एंटी-एस्ट्रोजन (अंतःस्रावी) के उपचार के लिये ग्राह्य होते हैं जबकि ‘HER2-’ का अर्थ है कि रोगी में इस नाम के प्रोटीन की कमी हो जाती है।

अध्ययन का निष्कर्ष

  • हाल के दशकों में महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में भारी वृद्धि हुई है, जिसमें सबसे ज़्यादा आक्रामक वृद्धि कम उम्र की महिलाओं में देखने को मिली है।
  • भारत में महत्त्व
    • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लगभग 35% रोगियों में ‘HR+’ स्तन कैंसर और ‘HER2-’ बीमारी का निदान किया जाता है जिनकी उम्र 40 वर्ष से भी कम है।
  • भारत में स्थिति
    • प्रत्येक 28 भारतीय महिलाओं में से एक (शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक 22 महिलाओं में से 1, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 60 महिलाओं में से 1) में स्तन कैंसर विकसित होने की संभावना है।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, महिलाओं में सबसे अधिक स्तन कैंसर की समस्या सामने आती है, प्रत्येक वर्ष 2.1 मिलियन महिलाएँ स्तन कैंसर से प्रभावित होती हैं।
    • वर्ष 2018 में 6,27,000 (15%) महिलाओं की स्तन कैंसर से मृत्यु हुई।
    • भारत में महिलाओं में सभी प्रकार के कैंसर में से स्तन कैंसर का प्रतिशत 14% है।

भारत में कैंसर के दवा की स्वीकार्यता

  • भारत में खाद्य और औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) ने वर्ष 2017 में इस दवा को पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं के इलाज के लिये अनुमोदित किया था। वर्ष 2018 में कम उम्र की महिलाओं के लिये भी इस दवा के इस्तेमाल को स्वीकार्यता दे दी गई। तब से कई निज़ी अस्पतालों में इसका उपयोग किया जा रहा है।
  • हालाँकि यह दवा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। लेकिन उक्त परीक्षण के सकारात्मक परिणाम से अब सरकारी अस्पतालों में यह उपलब्ध हो सकेगी।
  • वर्तमान में ‘HR+’ स्तन कैंसर और ‘HER2-’ बीमारी से पीड़ित महिलाओं के लिये तीन प्रकार की दवाएँ उपलब्ध हैं: CDK4/6- राइबोसिक्लिब (Ribociclib), पैलोबिक्लिब (Palbociclib) और अबेमासिक्लिब (Abemaciclib)।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण

National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA)

  • हाल ही में एनपीपीए द्वारा डीपीसीओ [Drugs (Prices Control) Order –DPCO], 2013 के तहत अनुसूची एक में निहित आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य वाले प्रावधान को संशोधित किया गया है।
  • उन दवाओं के संदर्भ में जो कि कीमत नियंत्रण के अधीन नहीं हैं, निर्माताओं को अधिकतम खुदरा मूल्य 10% सालाना बढ़ाने की अनुमति दी गई है।
  • NPPA भारत सरकार का एक संगठन है जिसे थोक दवाओं और फॉर्मूलों की कीमतों को व्यवस्थित करने/संशोधित करने और दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 1995 के तहत देश में दवाइयों की कीमतों और इनकी उपलब्धता को बनाए रखने के लिये स्थापित किया गया था।

प्रमुख कार्य

  • इसका कार्य दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों को कार्यान्वित करना और उन्हें लागू करना है।
  • प्राधिकरण के निर्णय से उत्पन्न सभी कानूनी मामलों का निपटान करना।
  • दवाओं की उपलब्धता पर नज़र रखना, दवाओं की कमी की स्थिति का अवलोकन करना तथा आवश्यक कदम उठाना। थोक दवाओं और फॉर्मूलों के उत्पादन, निर्यात और आयात, कंपनियों की बाज़ार में हिस्सेदारी, मुनाफे आदि के संबंध में आँकड़ों को एकत्रित करना/व्यवस्थित करना।
  • दवाओं/फार्मास्यूटिकल्स के मूल्य निर्धारण के संबंध में संबंधित अध्ययनों को आयोजित करना।
  • सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य सदस्यों की भर्ती/नियुक्ति करना।
  • दवा नीति में परिवर्तन/संशोधन पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
  • नशीली दवाओं के मूल्य से संबंधित संसदीय मामलों में केंद्र सरकार को सहायता प्रदान करना।

अति उच्च लागत

  • स्तन कैंसर के उपचार हेतु प्रयुक्त दवा अत्यंत महंगी होती है जिसका खर्च उठा पाना प्रत्येक रोगी के लिये संभव नहीं होता है। दवा की लागत लगभग 50,000-60,000 रुपए प्रति माह है जिसकी आवश्यकता अलग अलग रोगियों में अलग अलग होती है।
  • हाल ही में नेशनल फार्मास्यूटिकल एंड प्राइसिंग अथॉरिटी (National Pharmaceutical and Pricing Authority) ने विभिन्न प्रकार के कैंसरों के इलाज के लिये इस्तेमाल की जाने वाली 42 दवाओं की कीमतों में कटौती की है जिसमें राइबोसिक्लिब भी शामिल है।

दवा विनिर्माण कंपनियों को विभिन्न श्रेणियों से संबंधित रोगियों को आवश्यक दवा उपलब्ध कराने के उपायों के बारे में विचार करना चाहिये ताकि सभी के लिये कम कीमतों पर इनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकें। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के माध्यम से महंगी दवाओं तक सामान्य लोगों की पहुँच सुनिश्चित किये जाने का भी प्रयास किया जाना चाहिये।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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