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वैश्विक भुखमरी सूचकांक- 2020

  • 17 Oct 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वैश्विक भुखमरी सूचकांक- 2020, कुपोषण के प्रकार 

मेन्स के लिये:

वैश्विक भुखमरी सूचकांक- 2020

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘वैश्विक भुखमरी सूचकांक’ (Global Hunger Index- GHI)- 2020 जारी किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • 'वैश्विक भुखमरी सूचकांक', भुखमरी की समीक्षा करने वाली वार्षिक रिपोर्ट है, जो वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से भुखमरी की स्थिति का मापन करती है।

भारत की स्थिति:

  • 'वैश्विक भुखमरी सूचकांक- 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर रहा है।
    • वर्ष 2019 में भारत 117 देशों में से 102वें स्थान पर रहा था, जबकि वर्ष 2018 में भारत 103वें स्थान पर था।
  •  भारत भुखमरी सूचकांक में 27.2 के स्कोर के साथ 'गंभीर' (Serious) श्रेणी में है।

वैश्विक परिदृश्य:

  • कुल 107 देशों में से केवल 13 देश भारत से खराब स्थिति में हैं, जिनमें रवांडा (97वें), नाइजीरिया (98वें), अफगानिस्तान (99वें), लाइबेरिया (102वें), मोजाम्बिक (103वें), चाड (107वें) आदि देश शामिल हैं।
  • GHI- 2020 के स्कोर के अनुसार, 3 देश- चाड, तिमोर-लेस्ते और मेडागास्कर भुखमरी के  खतरनाक स्तर पर हैं।
  • GHI- 2020 के अनुसार दुनिया भर में भुखमरी की स्थिति ‘मध्यम’ स्तर पर है।

क्षेत्रीय परिदृश्य:

  • भारत इस सूचकांक में श्रीलंका (64वें), नेपाल (73वें), पाकिस्तान (88वें), बांग्लादेश (75वें), इंडोनेशिया (70वें) जैसे अन्य देशों से पीछे है।

India-stands

प्रमुख संकेतकों पर भारत का प्रदर्शन:

Trend-for-Indicator

  • भारत की 14 प्रतिशत आबादी ‘अल्पपोषित’ (Undernourishment) है।
    • इसका निर्धारण अपर्याप्त कैलोरी लेने की मात्रा के आधार पर किया जाता है।
  • भारत में बच्चों में ‘स्टंटिंग’ (Stunting) की दर 37.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।
    • यह उम्र की तुलना में कम ऊँचाई को दर्शाता है तथा यह स्थायी/क्रोनिक कुपोषण को दर्शाता है। यह आमतौर पर गरीब, सामाजिक-आर्थिक स्थितियों, कमज़ोर मातृ स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ा होता है।  
  • भारत में ‘बाल मृत्यु’ (Child Mortality) दर में सुधार हुआ है, जो अब 3.7 प्रतिशत है।
    • बाल मृत्यु दर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को बताता है।
  • चाइल्ड ‘वेस्टिंग’ (Wasting) में भारत की स्थिति में गिरावट देखी गई है। भारत का स्कोर 17.3 प्रतिशत रहा है।
    • इसमें ऊँचाई की तुलना में कम वजन होता है तथा यह ‘तीव्र’/एक्यूट (Acute) कुपोषण को दर्शाता है। तीव्र कुपोषण, कुपोषण का सबसे चरम और दृश्य रूप (जो शरीर के बाहर से दिखाई देता है) होता है।

रिपोर्ट संबंधी प्रमुख निष्कर्ष:

  • स्टंटिंग मुख्यत: बच्चों के बीच केंद्रित है। गरीबी, आहार की विविधता का अभाव, मातृ शिक्षा का निम्न स्तर सहित कई प्रकार की वंचनाओं का होना इसका मुख्य कारण हैं।
  • बहुत से देशों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, जबकि कई देशों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
  • नवीनतम GHI अनुमानों से पता चलता है कि 37 देश वर्ष 2030 तक भुखमरी (सतत्  विकास लक्ष्य'- 2) को नियंत्रित करने में असफल रहेंगे।

COVID-19 महामारी का प्रभाव:

  • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगभग 690 मिलियन लोग कुपोषित हैं। COVID-19 महामारी, वैश्विक स्तर पर भुखमरी और गरीबी को कम करने की दिशा में हुई प्रगति को प्रभावित कर सकती है।
  • COVID-19 ने इस बात को और अधिक स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में हमारी खाद्य प्रणालियाँ, 'ज़ीरो हंगर' स्थिति प्राप्त करने करने के लिये अपर्याप्त हैं।

वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI):

  • ‘वैश्विक भुखमरी सूचकांक’ को आयरलैंड स्थित एक एजेंसी ‘कंसर्न वर्ल्डवाइड’ (Concern Worldwide) और जर्मनी के एक संगठन ‘वेल्ट हंगर हिल्फे’ (Welt Hunger Hilfe) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाता है।
  • GHI स्कोर, चार घटक संकेतकों के आधार पर निकाला जाता है: 
    1. अल्पपोषण 
    2. चाइल्ड वेस्टिंग  
    3. चाइल्ड स्टंटिंग 
    4. बाल मृत्यु दर
  • इन चार संकेतकों के मूल्यों के आधार पर 0 से 100 तक के पैमाने पर भुखमरी को निर्धारित किया जाता है जहाँ 0 सबसे अच्छा संभव स्कोर (भूख नहीं) है और 100 सबसे खराब है।
  • प्रत्येक देश के GHI स्कोर को निम्न से अत्यंत खतरनाक स्थिति के रूप वर्गीकृत किया जाता है।

GHI गंभीरता स्केल (GHI Severity Scale)

कम 

(Low)

मध्यम

(Moderat)

गंभीर (Serious)

खतरनाक
(Alarming)

बेहद चिंताजनक
(Extremely Alarming)

≤ 9.9 

10.0–19.9 

20.0–34.9 

35.0-49.9 

≥ 50.0 

GHI-Somposition

निष्कर्ष:

  • GHI-2020 में भारत के प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा कुपोषण स्थिति में सुधार की दिशा में किये जा रहे प्रयासों में महत्त्वपूर्ण बदलाव करने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि भारत ने वर्ष 2022 तक ‘कुपोषण मुक्त भारत’ के लिये एक कार्ययोजना विकसित की है। वर्तमान रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए इस योजना में अपेक्षित सुधार किया जाना चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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