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गुजरात में अग्नि सुरक्षा संबंधित प्रावधान

  • 28 May 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल के दिनों में गुजरात के सूरत शहर में एक गैर-कानूनी बहुमंज़िला इमारत में भीषण आग लगी जिसमें 22 छात्रों की मृत्यु हो गई। इसी संदर्भ में गुजरात सरकार सभी बिल्डरों को तीन दिनों के भीतर सभी इमारतों में अग्निकाण्ड की रोकथाम के लिये पर्याप्त इंतज़ाम करने के आदेश दिये हैं।

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 के दौरान भारत में आग की वज़ह से कुल 17,700 लोगों की मृत्यु हुई, जिसमें 62% महिलाएँ थी।
  • देश में आग की वज़ह से होने वाली कुल मौतों में से 30% गुजरात और महाराष्ट्र में होती हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन दोनों राज्यों में शहरीकरण अत्यधिक है। ऐसा कहा जा सकता है कि आग से होने वाली मौतों और जनसंख्या घनत्व में सीधा संबंध है।
  • भारत जोखिम सर्वेक्षण 2018 (India Risk Surveys) के अनुसार, अग्निकांड की घटनाएँ व्यापार की निरंतरता और संचालन को बाधित करती है। आग की घटनाओं के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। विशेष रूप से भारत के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाएँ अधिकांशतः घटित होती है।

भारत में आग की घटनाओं की वज़हें

  • अग्नि सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन और लापरवाही बरतने से ही ऐसे भीषण अग्निकांड होते हैं क्योंकि राष्ट्रीय भवन निर्माण कोड मे वर्णित प्रावधानों की अनदेखी करते हुए वाणिज्यिक भवनों और मल्टीप्लेक्स में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किये जा रहे हैं।
  • ऊँची इमारतों में आग लगने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनमें पर्याप्त अग्नि सुरक्षा संयंत्रों का अभाव होता है जिससे बचाव कार्य कठिन हो जाता है।
  • फायर सेफ्टी ऑडिट (Fire Safety Audit) का उद्देश्य किसी संगठन इमारतों में  अग्नि सुरक्षा मानकों का आंकलन और निरीक्षण करना है जो यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण कार्य में भारत सरकार/राज्य सरकार/स्थानीय निकायों द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन किया गया है या नहीं।
  • अग्नि शमन विभाग अपर्याप्त संसाधन और लापरवाही जैसे कारणों से अग्निकाण्ड से लोगों का बचाव करने में असमर्थ रहता है।
  • वर्ष 2011 के एक अध्ययन के आधार पर, फायर स्टेशनों की संख्या में 65% की कमी बताई गई थी। गृह मंत्रालय के अनुसार, 1 लाख से अधिक आबादी वाले 144 शहरों में, अग्निशमन के बुनियादी ढाँचे का अभाव है।

रोकथाम के उपाय

  • सरकार को अग्निशमन यंत्रों के आधुनिकीकरण हेतु आर्थिक सहायता देते हुए अग्नि शमन विभागों के कर्मियों को समय-समय पर नई तकनीकों द्वारा प्रशिक्षित करना चाहिये।
  • साल में कम-से-कम एक बार बिजली की फिटिंग और तारों की जाँच करते रहना चाहिये।
  • स्थानीय पार्षदों/निर्वाचित प्रतिनिधियों को साथ मिलकर इलाकों/मुहल्लों/स्कूलों में छह महीने में एक बार अग्निशमन कार्यशाला आयोजित करके नागरिकों को आग से बचाव उपायों के बारे में जागरूक करना चाहिये।
  • अग्निशमन विभाग को समय-समय पर सभी इमारतों में सुरक्षा उपकरणों का जायज़ा लेना चाहिये ताकि अवैध और अनियंत्रित रूप से निर्माण एवं सुरक्षा उपकरणों के अभाव में उचित कार्यवाही की जा सके।
  • सभी बहुमंजिला इमारतों एवं भीड़-भाड वाले इलाकों में प्रवेश और निकास स्थानों का उचित चयन करना एवं अग्निकांडों से निपटने की व्यवस्था करने के साथ ही पुराने व बेकार उपकरणों के स्थान पर नए उपकरण प्रयोग करना चाहिये तथा बिल्डिंग मालिकों को सुरक्षा उपकरणों व व्यवस्थाओं की जाँच करवा कर सरकार से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना चाहिये।
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