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जैव विविधता और पर्यावरण

विदेशज जीव

  • 09 Nov 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

असम राज्य चिड़ियाघर-सह-वानस्पतिक उद्यान, हाइसिंथ मकाव, कैपुचिन बंदर, CITES

मेन्स के लिये: 

वन्यजीवों की तस्करी के हॉटस्पॉट के रूप में उभरता पूर्वोत्तर भारत  

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में गुवाहाटी में ‘असम राज्य चिड़ियाघर-सह-वानस्पतिक उद्यान’ (Assam State Zoo-cum-Botanical Garden) में छह नीले या हाइसिंथ मकाव (Hyacinth Macaw) और दो कैपुचिन बंदरों (Capuchin Monkey) को लाया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में इससे पहले विदेशी जानवरों की एक बड़ी खेप को राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence- DRI) द्वारा ज़ब्त कर लिया गया था। 
  • अवैध वन्यजीव व्यापार से संबंधित प्रावधान: अवैध रूप से व्यापार के लिये ले जाए जा रहे  विदेशी जीवों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (Customs Act, 1962) की धारा 111 के तहत ज़ब्त कर लिया जाता है, जो ‘वन्यजीवों और वनस्पतियों की संकटापन्न प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन’ (The Convention of International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora- CITES) और भारत में विदेशी व्यापार नीति (आयात-निर्यात नीति) के प्रावधानों से संबंधित है।
  • इसके अलावा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 48 व 49 जंगली जानवरों, जानवरों से संबंधित लेखों या ट्राफियों के व्यापार या वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाती है।

चिंताएँ: 

  • COVID-19 के मद्देनज़र ऐसी विदेशज प्रजातियों की तस्करी के कारण ज़ूनोटिक रोगों के प्रसार की आशंका एक वैश्विक मुद्दा बन रहा है।
  • नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली सामान और मानव तस्करी के बाद अवैध रूप से वन्यजीव व्यापार को वैश्विक स्तर पर चौथा सबसे बड़ा संगठित अपराध घोषित किया गया है।
  • बांग्लादेश एवं म्याँमार की सीमाओं और थाईलैंड से निकटता के कारण पश्चिम बंगाल एवं पूर्वोत्तर भारत, सीमा-पार से वन्यजीव तस्करी के हॉटस्पॉट के रूप में प्रसिद्ध है।
  • वन्यजीव अपराध में शामिल कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन विदेशी मुद्रा के अवैध संचलन के अलावा कई अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों जैसे- ड्रग्स की तस्करी, वाणिज्यिक सामान और यहाँ तक ​​कि बंदूकों की तस्करी के लिये भारत-बांग्लादेश सीमा का उपयोग करते हैं।

असम राज्य चिड़ियाघर-सह-वानस्पतिक उद्यान

(Assam State Zoo-cum-Botanical Garden):

  • इसकी स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी।
  • यह चिड़ियाघर राजधानी गुवाहाटी के ‘हेंग्राबारी रिज़र्व फॉरेस्ट’ (Hengrabari Reserve Forest) में अवस्थित है।
  • कई जीवों की मौजूदगी के कारण यह चिड़ियाघर लोकप्रिय रूप से गुवाहाटी शहर के ‘ग्रीन लंग’ (Green Lung) के रूप में जाना जाता है।

ब्लू मकाव (Blue Macaw):

  • वैज्ञानिक नाम: एनोडोरिंचुस  हाइसिंथिनुस (Anodorhynchus Hyacinthinus)
  • यह एक तोता है जो मध्य और पूर्वी दक्षिण अमेरिका का मूल निवासी है।
  • लगभग एक मीटर की लंबाई के साथ यह तोता की अन्य प्रजातियों की तुलना में लंबा है।
  • यह सबसे बड़ा मकाव तोता है और सबसे लंबी दूरी तक उड़ने वाले तोते की एक प्रजाति है।
  • खतरा: आवास के नुकसान और पालतू जीवों के व्यापार के लिये अन्य पक्षियों के साथ जाल में फँसने से इनकी आबादी तेज़ी से कम हो रही है।
  • इसे IUCN की रेड लिस्ट में सुभेद्य (Vulnerable) तथा CITES के परिशिष्ट-I (Appendix-I) की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। 

कैपुचिन बंदर (Capuchin Monkey): 

  • वैज्ञानिक नाम: सेबस (Cebus)
  • कैपुचिन बंदर, जिसे सापाजोउ (Sapajou) भी कहा जाता है, निकारागुआ से पराग्वे तक उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाया जाने वाला एक सामान्य मध्य और दक्षिण अमेरिकी प्राइमेट है।
  • इनका नाम (कैपुचिन बंदर) इनके सिर पर बालों से निर्मित ‘कैप’ के कारण रखा गया है, जो कैपुचिन भिक्षुओं के टोपयुक्त परिधान से संबंधित है।
  • इसे IUCN की रेड लिस्ट में संकटमुक्त (Least concerned) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। 

स्रोत: द हिंदू

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