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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार

  • 06 Nov 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, यूरेनियम संवर्द्धन, ईरान का यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम

मेन्स के लिये:

यूरेनियम संवर्द्धन से संबंधित मुद्दे, वर्ष 2015 का परमाणु समझौता

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ईरान की परमाणु एजेंसी ने बताया कि उसके 20% यूरेनियम संवर्द्धन के साथ इसका भंडार लगभग 210 किलोग्राम से अधिक तक पहुँच गया है।

  • अप्रैल 2021 में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा कि ईरान ने नत्ज़ान में स्थित एक सतही परमाणु संयंत्र में यूरेनियम को 60% विखंडनीय शुद्धता तक संवर्द्धित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
  • ईरान और विश्व शक्तियों के बीच ऐतिहासिक वर्ष 2015 के परमाणु समझौते के तहत, ईरान 3.67% से अधिक यूरेनियम को संवर्द्धित करने में सक्षम नहीं था। 90% से अधिक समृद्ध क्षमता वाले यूरेनियम का उपयोग परमाणु हथियारों के लिये किया जा सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • यूरेनियम संवर्द्धन:

    • प्राकृतिक यूरेनियम में दो अलग-अलग समस्थानिक विद्यमान होते हैं जिसमें लगभग 99%, U-238 तथा 0.7%, U-235 की मात्रा पाई जाती है।
      • U-235 एक विखंडनीय सामग्री (Fissile Material) है जो परमाणु रिएक्टर में शृंखला अभिक्रिया को संचालित करने में सहायक है।
    • यूरेनियम संवर्द्धन में आइसोटोप सेपरेशन (Isotope Separation) प्रक्रिया के माध्यम से यूरेनियम U-235 की मात्रा को बढ़ाया जाता है (U-238 को U-235 से अलग किया जाता है)।
    • परमाणु हथियारों के निर्माण में 90% या उससे अधिक तक यूरेनियम संवर्द्धन की आवश्यकता होती है जिसे अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम/हथियार-ग्रेड यूरेनियम (Highly Enriched Uranium/Weapons-Grade Uranium) के रूप में जाना जाता है।
    • परमाणु रिएक्टरों के लिये U-235 की 3-5% तक यूरेनियम संवर्द्धन की आवश्यकता होती है जिसे निम्न संवर्द्धित यूरेनियम के रूप में जाना जाता है। इसका उपयोग वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिये ईंधन का उत्पादन करने हेतु किया जा सकता है।
    • अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम की शुद्धता 20% या उससे अधिक होती है और इसका उपयोग अनुसंधान रिएक्टरों में किया जाता है।

  • संबंधित मुद्दे:

    • संवर्द्धन की जटिल प्रक्रिया इसके द्वारा अधिक आसान हो जाती है और उच्च शुद्धता की ओर बढ़ने पर कम सेंट्रीफ्यूज/अपकेंद्रक की आवश्यकता होती है।
    • दूसरे शब्दों में युरेनियम के संवर्द्धन की 90% शुद्धता प्राप्त करने हेतु इसकी 20% मात्रा से शुरू करना बहुत आसान है और 60% से शुरू करना अधिक स्थिर और सुगम होगा।

  • वर्ष 2015 का परमाणु समझौता:

    • वर्ष 2015 में वैश्विक शक्तियों (P5 + 1) के समूह जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्राँस, चीन, रूस और जर्मनी शामिल हैं, के साथ ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम के लिये दीर्घकालिक समझौते पर सहमति व्यक्त की गई।
      • इस समझौते को ‘संयुक्त व्यापक क्रियान्वयन योजना’ (Joint Comprehensive Plan of Action- JCPOA) तथा आम बोल-चाल की भाषा में ईरान परमाणु समझौते (Iran Nuclear Deal) के रूप में में नामित किया गया था।
      • इस समझौते के तहत ईरान द्वारा प्रतिबंधों को हटाने और वैश्विक व्यापार में अपनी पहुँच सुनिश्चित करने हेतु अपने परमाणु कार्यक्रमों की गतिविधि पर अंकुश लगाने पर सहमति व्यक्त की गई।
      • समझौते के तहत ईरान को अपने शोध कार्यों के संचालन हेतु थोड़ी मात्रा में यूरेनियम जमा करने की अनुमति दी गई परंतु उसके द्वारा यूरेनियम संवर्द्धन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसका उपयोग रिएक्टर ईंधन और परमाणु हथियार बनाने के लिये किया जाता है।
      • ईरान को एक भारी जल-रिएक्टर (Heavy-Water Reactor) के निर्माण की भी आवश्यकता थी, जिसमें ईंधन के रूप में प्रयोग करने हेतु भारी मात्रा में प्लूटोनियम (Plutonium) की आवश्यकता के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति देना भी आवश्यक है।
    • मई 2018 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे त्रुटिपूर्ण बताते हुए मसौदे से खुद को अलग कर लिया और प्रतिबंधों को बहाल करते हुए उन्हें और कड़ा कर दिया।
      • अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया गया क्योंकि ईरान लगातार शेष हस्ताक्षरकर्त्ताओं के साथ विभिन्न समझौता करते हुए P+5 प्रतिबद्धताओं का उल्लघंन कर रहा था।
    • हाल ही में यूरोपीय संघ, ईरान और अमेरिका ने घोषणा की है कि मसौदे को फिर से शुरू करने के लिये अप्रत्यक्ष वार्ता 29 नवंबर, 2021 को वियना में फिर से शुरू होगी।

स्रोत: द हिंदू

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