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लड़कियों को शिक्षित करने से भारत के स्वास्थ्य परिणाम बेहतर हो सकते हैं

  • 18 Jul 2018
  • 5 min read

संदर्भ

भारत दुनिया के सबसे खराब सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को दर्शाने वाले देशों में शामिल है, लेकिन लड़कियों को शिक्षित करने से यह तश्वीर बदली जा सकती है। 2017 के राष्ट्रीय स्तर के सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, प्रत्येक वर्ष 1,000 नवजात बच्चों में से 34 बच्चे अपने पहले जन्मदिन तक जीवित नहीं रहते हैं। हालाँकि, इन आँकड़ों में सुधार हो रहा है किंतु ये बहुत सुधार की स्थिति में नहीं हैं।

प्रमुख बिंदु

  • महिला साक्षरता समाज के स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण को बेहतर बनाने के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है।
  • लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करके एक व्यापक श्रृंखला जैसे-विवाह की उम्र में देरी, स्वस्थ बच्चों का जन्म और गरीबी में कमी आदि में परिवर्तन लाया जा सकता है।
  • केरल और तमिलनाडु में महिला साक्षरता दर क्रमशः 92% और 73.9% है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में यह दर क्रमशः 42.2% और 33.1% यानी आधी है।
  • लड़कियों के विवाह की औसत आयु केरल में 21.4 और तमिलनाडु में 21.2 है, जो राष्ट्रीय औसत 20.7 से ऊपर है, वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार में यह आयु क्रमश: 19.4 और 19.5 से भी कम हैं। 
  • जन्म के समय लिंग अनुपात (प्रति 1000 लड़कों पर पैदा हुई लड़कियाँ) में गिरावट आई है और कुछ उत्तर भारतीय राज्यों में यह केवल 800 है। अपर्याप्त अंतराल में गर्भधारण कई बार माँ और बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
  • अच्छी खबर यह है कि साक्षरता में सुधार होने से विवाह में देरी देखी गई है और प्रजनन दर (प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या) भी कम हो गई है।
  • इस संदर्भ में केरल (1.7) और तमिलनाडु (1.6) 2.3 के राष्ट्रीय औसत के साथ बेहतर प्रदर्शन कर रहे  हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार क्रमशः 3.1 और 3.3 पर खराब स्थिति में हैं। हालाँकि, इन आँकड़ों में सुधार जारी है।

महिला साक्षरता + विवाह विवाह + प्रति महिला कम बच्चे = उच्च बाल अस्तित्व

  • एक शिक्षित महिला जब वह विवाहित हो जाती है तो कम बच्चों के जनन की योजना बनाती हैं और साथ ही प्रसवपूर्व उचित देखभाल की ओर भी ध्यान देती है।
  • प्रसवपूर्व पूर्ण देखभाल प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत क्रमशः केरल और तमिलनाडु में 61.2 और 45 है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में ये आँकड़ें क्रमशः 5.9 और 3.3 हैं।
  • सभी राज्यों में नवजात मृत्यु दर में सुधार हो रहा है, लेकिन केरल और तमिलनाडु राज्यों में क्रमश: 6 और 15 के आँकड़े राष्ट्रीय औसत (28) से आगे हैं। केरल का आँकड़ा अमेरिका के समान ही है।
  • जैसे-जैसे परिवार का आकार छोटा होता जाता है बच्चे की जीवन प्रत्याशा भी बढ़ती है इससे ऐसे परिवार अधिक उत्पादक खर्च कर सकते हैं तथा अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं।
  • वर्ष 2004 और 2011 के बीच उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों ने गरीबी रेखा से नीचे आबादी के प्रतिशत में क्रमश: 32.8 से 2 9 .4 और 41.4 से 33.7 के साथ मामूली सुधार दर्ज किया है, जबकि केरल और तमिलनाडु में गरीबी रेखा से नीचे आबादी का प्रतिशत क्रमश: 15 से 7.1 और 22.5 से 11.3 पर आ गया है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश करने वाले देश बड़ी तेज़ी से गरीबी को कम कर रहे हैं, चीन इसका प्रमुख उदाहरण है जो दशकों पहले किये गए इन सामाजिक निवेशों के लिये वैश्विक बेंचमार्क है, जिसने तेज़ी से देश के आर्थिक विकास की नींव बनाई है।
  • अतः संदेश बहुत स्पष्ट है कि महिला साक्षरता गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य परिणामों में बेहतर साधन साबित हुई है।
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