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भारतीय अर्थव्यवस्था

जनसांख्यिकीय संक्रमण और भारत के लिये अवसर

  • 18 Feb 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

आर्थिक सर्वेक्षण, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, कुपोषण, मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (MOOCS)।

मेन्स के लिये:

भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का महत्त्व, भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश से जुड़ी चुनौतियाँ।

चर्चा में क्यों?

विश्व, वृद्धजन जनसंख्या के रूप में जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) के दौर से गुज़र रहा है। अतः सरकारों, व्यवसायों और आम नागरिकों को महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों समायोजन हेतु अनुकूलन रणनीतियों की आवश्यकता होगी।

  • यह भारत के लिये एक बड़ा अवसर हो सकता है, जो जनसांख्यिकीय लाभांश का अनुभव कर रहा है। 

जनसांख्यिकीय संक्रमण और जनसांख्यिकीय लाभांश:

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण समय के साथ जनसंख्या की संरचना में बदलाव को संदर्भित करता है।
    • यह परिवर्तन विभिन्न कारकों जैसे जन्म और मृत्यु-दर में परिवर्तन, प्रवास के प्रतिरूप एवं सामाजिक तथा आर्थिक स्थितियों में परिवर्तन के कारण हो सकता है।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश एक ऐसी घटना है जो तब होती है जब किसी देश की जनसंख्या संरचना आश्रितों (बच्चों और बुजुर्गों) के उच्च अनुपात से काम करने वाले वयस्कों के उच्च अनुपात के रूप में स्थानांतरित हो जाती है। 
    • यदि देश मानव पूंजी में निवेश और उत्पादक रोज़गार हेतु स्थितियों का निर्माण  करता है, तो जनसंख्या संरचना में इस बदलाव का परिणाम आर्थिक वृद्धि और विकास का कारक हो सकता है।

भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का महत्त्व:

  • परिचय:  
    • भारत ने वर्ष 2005-06 में जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति में प्रवेश किया, जो वर्ष 2055-56 तक बना रह सकता है। 
    • भारत में औसत आयु अमेरिका या चीन की तुलना में काफी कम है। 
      • वर्ष 2050 तक भारतीय जनसंख्या की औसत आयु 38 तक होने की उम्मीद नहीं है, जबकि अमेरिका और चीन की औसत आयु वर्तमान में क्रमशः 38 और 39 है।
  • भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश से जुड़ी चुनौतियाँ: 
    • निम्न महिला श्रम बल भागीदारी: भारत में महिला श्रमिकों की कमी देश की श्रम शक्ति को सीमित करती है।
      • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2020- 2021 के अनुसार, महिला श्रम कार्यबल की भागीदारी 25.1% है।
    • पर्यावरणीय क्षरण: भारत के तेज़ी से शहरीकरण और आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप वनोन्मूलन, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण सहित अन्य पर्यावरणीय क्षति हुई है
      • सतत् आर्थिक विकास के लिये इन समस्याओं का समाधान किया जाना आवश्यक है।
    • उच्च ड्रॉपआउट दर: भारत के 95% से अधिक बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित होते हैं, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण इस बात की पुष्टि करता है कि सरकारी विद्यालयों के निम्न स्तरीय बुनियादी ढाँचे, कुपोषण और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों में शिक्षा के संबंध में कितना विकास हुआ इसके बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता इसके साथ ही उच्च ड्रॉपआउट दर भी देखने को मिलती है।
    • रोज़गार के अवसरों की कमी: एक बड़ी और बढ़ती कामकाज़ी आयु की जनसंख्या के साथ, भारतीय रोज़गार बाज़ार इस विस्तारित कार्यबल की मांगों को पूरा करने के लिये पर्याप्त रोज़गार सृजन करने में सक्षम नहीं है।
      • इसके परिणामस्वरूप बेरोज़गारी की उच्च दर देखी जा रही है।
    • पर्याप्त बुनियादी ढाँचे का अभाव: अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, अपर्याप्त विद्युत् सुविधा, परिवहन और संचार नेटवर्क सहित आवश्यक सेवाओं तथा रोज़गार के अवसरों तक पहुँच प्राप्त करना लोगों के लिये चुनौतीपूर्ण बना देता है।
    • ब्रेन ड्रेन: भारत में अत्यधिक कुशल और प्रतिभाशाली पेशेवरों का एक बड़ा समूह है, लेकिन उनमें से कई बेहतर रोज़गार के अवसरों और विदेशों में रहने की स्थिति की तलाश में देश छोड़ने का विकल्प चुनते हैं।  
      • यह प्रतिभा पलायन भारत के लिये एक महत्त्वपूर्ण क्षति है, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप कुशल श्रमिकों की कमी होती है तथा देश की अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरी तरह से लाभ उठाने की क्षमता सीमित हो जाती है

भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग कैसे कर सकता है? 

  • लैंगिक समानता: भारत को शिक्षा एवं रोज़गार में लैंगिक असमानता को दूर करने की ज़रूरत है, जिसमें महिलाओं के लिये शिक्षा एवं रोज़गार के अवसरों तक पहुँच में सुधार करना शामिल है।
    • कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी आर्थिक विकास को बढ़ा सकती है तथा अधिक समावेशी समाज की ओर ले जा सकती है।
  • शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना: ग्रामीण और शहरी दोनों परिवेशों में, सार्वजनिक स्कूल प्रणाली को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि प्रत्येक बच्चा हाई स्कूल तक की शिक्षा पूरी करे और कौशल, प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक शिक्षा की ओर आगे बढ़े।
    • मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (MOOCS) के कार्यान्वयन के साथ-साथ स्कूल पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण और ओपन डिजिटल विश्वविद्यालयों की स्थापना भारत में योग्य कार्यबल के सृजन में अधिक योगदान कर सकेगी।
  • उद्यमिता को प्रोत्साहन: भारत को रोज़गार के अवसर सृजित करने तथा आर्थिक विकास में योगदान देने के लिये विशेष रूप से युवाओं के बीच उद्यमशीलता और नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न.1 किसी भी देश के संदर्भ में निम्नलिखित में से किसे उसकी सामाजिक पूंजी का हिस्सा माना जाएगा? (2019)

(a) जनसंख्या में साक्षरों का अनुपात
(b) इसकी इमारतों, अन्य बुनियादी ढांँचों और मशीनों का स्टॉक
(c) कामकाजी आयु-वर्ग में जनसंख्या का आकार
(d) समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव का स्तर

उत्तर: (d)


प्रश्न. 2 भारत को "जनसांख्यिकीय लाभांश" वाला देश माना जाता है। यह किस कारण है? (2011)

(a) 15 वर्ष से कम आयु वर्ग में इसकी उच्च जनसंख्या
(b) 15-64 वर्ष के आयु वर्ग में इसकी उच्च जनसंख्या
(c) 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में इसकी उच्च जनसंख्या
(d) इसकी उच्च कुल जनसंख्या

उत्तर: (b)


मेन्स: 

प्रश्न. 1 जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों की विवेचना कीजिये तथा भारत में उन्हें प्राप्त करने के उपायों का विस्तार से उल्लेख कीजिये। (2021)

प्रश्न. 2 ''महिलाओं को सशक्त बनाना जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की कुंजी है।'' चर्चा कीजिये। (2019)

प्रश्न. 3 समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये कि क्या बढ़ती जनसंख्या गरीबी का कारण है या गरीबी भारत में जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है। (2015)

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स 

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