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शासन व्यवस्था

क्रोनी कैपिटलिज़्म

  • 11 Feb 2023
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

क्रोनी कैपिटलिज़्म, संसदीय समिति, भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI), सकल घरेलू उत्पाद (GDP), भ्रष्टाचार विरोधी कानून, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व,

मेन्स के लिये:

क्रोनी कैपिटलिज़्म से संबद्ध मुद्दे, क्रोनी कैपिटलिज़्म को संबोधित करने के उपाय।

चर्चा में क्यों?  

अडानी-हिंडनबर्ग (Adani-Hindenburg) मुद्दे पर संसद में विपक्ष द्वारा क्रोनी कैपिटलिज़्म का आरोप लगाते हुए संयुक्त संसदीय समिति या भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा नामित समिति द्वारा जाँच की मांग की जा रही है।

क्रोनी कैपिटलिज़्म  

  • परिचय:  
    • क्रोनी कैपिटलिज़्म एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था का वर्णन करने के लिये किया जाता है जिसमें राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ करीबी संबंध रखने वाले व्यक्ति या व्यवसाय बाज़ार में अनुचित लाभ हासिल करने के लिये अपने राजनीतिक संबंधों का उपयोग करते हैं।
    • द इकोनॉमिस्ट इंडिया द्वारा प्रकाशित क्रोनी कैपिटलिज़्म इंडेक्स 2021 में 7वें स्थान पर था, जहाँ देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में क्रोनी सेक्टर की संपत्ति 8% थी।
  • क्रोनी कैपिटलिज़्म से संबंधित मुद्दे:
    • मार्केटप्लेस में अनुचित लाभ: क्रोनी कैपिटलिज़्म भ्रष्टाचार को जन्म दे सकता है क्योंकि व्यवसाय अक्सर सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर बाज़ार में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिये अपने राजनीतिक संबंधों का उपयोग करते हैं।
      • यह कानून के शासन को कमज़ोर करने की साथ ही सरकारी संस्थानों में जनता के विश्वास को खत्म कर सकता है।
    • विकृत बाज़ार प्रतिस्पर्द्धा: जब कुछ व्यवसायों को उनके राजनीतिक संबंधों के माध्यम से अनुचित लाभ दिया जाता है, तो यह बाज़ार की प्रतिस्पर्द्धा को विकृत कर देता है और छोटे व्यवसायों एवं उद्यमियों के लिये सफलता प्राप्त करना कठिन हो जाता है। 
      • इससे कुछ व्यक्तियों या निगमों के हाथों में धन और शक्ति का संकेद्रण हो सकता है।
    • नवाचार में गिरावट: बड़े व्यवसायों की प्रमुख स्थिति अक्सर प्रतिस्पर्द्धा को खत्म कर देती है और उन्हें अपने उत्पादों/सेवाओं को आगे बढ़ाने या सुधारने के लिये हतोत्साहित करती है। 
      • यह समग्र अर्थव्यवस्था में नवाचार को खत्म सकता है और प्रतिस्पर्द्धात्मकता में गिरावट ला सकता है।
    • सरकार और अर्थव्यवस्था के प्रति जनता में अविश्वास: व्यापक रूप से क्रोनी कैपिटलिज़्म सरकारी संस्थानों और आर्थिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को कम कर सकता है।
      • इससे नीति निर्माताओं के लिये सुधारों को लागू करना और व्यवसायों को प्रभावी ढंग से संचालित करना मुश्किल हो सकता है।

भारत द्वारा क्रोनी कैपिटलिज़्म से संबंधित मुद्दों का समाधान: 

  • पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार: भारत ओपन डेटा पहल, नियामक एजेंसियों की स्वतंत्रता में वृद्धि और सरकारी अनुबंधों एवं सब्सिडी की पारदर्शिता में सुधार जैसे उपायों को लागू करके अपनी राजनीतिक तथा आर्थिक प्रणालियों में पारदर्शिता व जवाबदेही में सुधार कर सकता है।
  • प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना: भारत छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के लिये प्रवेश की बाधाओं को कम करके प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित कर सकता है, जैसे कि लालफीताशाही को कम करना एवं नियमों को सुव्यवस्थित करना।
  • इससे नए प्रवेशकों के लिये स्थापित व्यवसायों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करना और कुछ व्यक्तियों अथवा निगमों के हाथों में धन एवं शक्ति के केंद्रीकरण को कम करना आसान हो सकता है
    • कॉर्पोरेट नैतिक उत्तरदायित्त्व की ओर: भारत यह सुनिश्चित करने के उपायों को लागू करके ज़िम्मेदार व्यवसाय प्रथाओं को बढ़ावा दे सकता है कि कोई भी व्यवसाय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व और स्थिरता संबंधी पहलों के अनुसार नैतिक तथा स्थायी रूप से कार्य करें।
    • इससे आर्थिक व्यवस्था में जनता के विश्वास में वृद्धि हो सकती है और यह व्यवसायों को समग्र रूप से समाज के सर्वोत्तम हित में कार्य करने के लिये प्रोत्साहित कर सकता है।
    • ज़िम्मेदार राजनीतिक व्यवहार को प्रोत्साहित करना: भारत राजनीतिक चंदा/दान और पैरवी गतिविधियों की पारदर्शिता बढ़ाकर ज़िम्मेदार राजनीतिक व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है।
    • इससे भ्रष्टाचार में कमी आ सकती है और यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि निर्वाचित अधिकारियों को उनके कार्यों के लिये जवाबदेह ठहराया जाए।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड

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