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सहायक प्रजनन तकनीक नियमन विधेयक

  • 20 Feb 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये

ART, IVF

मेन्स के लिये

प्रमुख प्रावधान व लाभ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में महिलाओं के कल्‍याण हेतु एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘सहायक प्रजनन तकनीक नियमन विधेयक 2020’ को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

पृष्ठभूमि

  • ‘सहायक प्रजनन तकनीक नियमन विधेयक 2020’ महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की रक्षा एवं संरक्षण के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किये गए अनेक कानूनों की शृंखला में नवीनतम कदम है।
  • इस विधेयक के जरिये राष्‍ट्रीय बोर्ड, राज्‍य बोर्ड, नेशनल रजिस्‍ट्री और राज्‍य पंजीकरण प्राधिकरण सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी से जुड़े क्लिनिकों एवं सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी बैंकों का नियमन एवं निगरानी करेंगे।
  • पिछले कुछ वर्षों के दौरान सहायक प्रजनन तकनीक (Assisted Reproductive Technology-ART) का चलन काफी तेज़ी से बढ़ा है। प्रतिवर्ष ART केंद्रों की संख्‍या में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज करने वाले देशों में भारत भी शामिल है।
  • इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (In Vitro Fertilization-IVF) सहित सहायक प्रजनन तकनीक ने बाँझपन के शिकार तमाम लोगों में नई उम्‍मीदें जगा दी हैं, लेकिन इससे जुड़े कई कानूनी, नैतिक और सामाजिक मुद्दे भी सामने आए हैं।

सहायक प्रजनन तकनीक

  • सहायक प्रजनन तकनीक का प्रयोग बाँझपन की समस्या के समाधान के लिये किया जाता है। इसमें बाँझपन के ऐसे उपचार शामिल हैं जो महिलाओं के अंडे और पुरुषों के शुक्राणु दोनों का प्रयोग करते हैं।
  • इसमें महिलाओं के शरीर से अंडे प्राप्त कर भ्रूण बनाने के लिये शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद भ्रूण को दोबारा महिला के शरीर में डाल दिया जाता है।
  • इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन, ART का सबसे सामान्य और प्रभावशाली प्रकार है।

प्रमुख बिंदु

  • संसद में पारित हो जाने एवं इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद केंद्र सरकार इस अधिनियम के लागू होने की तिथि को अधिसूचित करेगी। इसके पश्चात राष्‍ट्रीय बोर्ड का गठन किया जाएगा।
  • राष्‍ट्रीय बोर्ड प्रयोगशाला एवं नैदानिक उपकरणों, क्लिनिकों एवं बैंकों के लिये भौतिक अवसंरचना तथा यहाँ नियुक्त किये जाने वाले विशेषज्ञों हेतु न्‍यूनतम मानक तय करने के लिये आचार संहिता निर्धारित करेगा, जिसका पालन करना अनिवार्य होगा।
  • केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के तीन महीनों के भीतर राज्‍य एवं केंद्रशासित प्रदेश इसके लिये राज्‍य बोर्डों और राज्‍य प्राधिकरणों का गठन करेंगे।
  • संबंधित राज्‍य में क्लिनिकों एवं बैंकों के लिये राष्‍ट्रीय बोर्ड द्वारा निर्धारित नीतियों एवं योजनाओं को लागू करने का उत्तरदायित्व राज्‍य बोर्ड पर होगा।
  • विधेयक में केंद्रीय डेटाबेस के रख-रखाव तथा राष्‍ट्रीय बोर्ड के कामकाज में सहायता के लिये राष्‍ट्रीय रजिस्‍ट्री एवं पंजीकरण प्राधिकरण का भी प्रावधान किया गया है।
  • विधेयक में उन लोगों के लिये कठोर दंड का भी प्रस्‍ताव किया गया है, जो लिंग जाँच, मानव भ्रूण अथवा जननकोष की बिक्री का काम करते हैं और इस तरह के गैर-कानूनी कार्यों के लिये संगठन चलाते हैं।

लाभ

  • यह देश में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी सेवाओं का नियमन करेगा। जिससे बाँझ दंपत्तियों में ART के अंतर्गत अपनाए जाने वाले नैतिक तौर-तरीकों के प्रति विश्वास पैदा होगा।
  • इस सेवा के कानूनी रूप से लागू होने पर भारत वैश्विक प्रजनन उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
  • यह अनैतिक तौर-तरीकों को नियंत्रित कर इसके वाणिज्यीकरण पर रोक लगाएगा।
  • ये विधायी उपाय महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को और अधिक सशक्त करेंगे।

स्रोत: PIB

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