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डेली न्यूज़


भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत से गेहूंँ  निर्यात पर प्रतिबंध

  • 18 Jun 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

गेहूंँ, विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT), FCI 

मेन्स के लिये:

बढ़ती मुद्रास्फीति और मुद्दे, संवृद्धि एवं विकास, मुद्रास्फीति से निपटने के लिये सरकार के कदम 

चर्चा में क्यों? 

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत से आयातित गेहूंँ और आटे के निर्यात एवं पुनर्निर्यात को निलंबित कर दिया है। मूलतः यह एक आश्वासन है कि UAE जो कुछ भी आयात करता है उसका उपयोग केवल घरेलू खपत के लिये किया जाएगा। 

  • यह घटनाक्रम भारत द्वारा अपने घरेलू बाज़ार, पड़ोसी और कमज़ोर देशों की मांग को पूरा करने के लिये गेहूंँ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के एक महीने बाद हुआ है। 
  • संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम के मद्देनर आया है जिसने व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है। मंत्रालय ने भारत के साथ ठोस और रणनीतिक संबंधों की सराहना की है जो संयुक्त अरब अमीरात एवं भारत के बीच संबंधों को मज़बूती प्रदान करते हैं, खासकर दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किया जाने के बाद। 

भारत से गेहूंँ निर्यात की स्थिति: 

  • भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूंँ उत्पादक देश है लेकिन वैश्विक गेहूंँ व्यापार में इसका 1% से भी कम हिस्सा है। यह गरीबों के लिये रियायती भोजन उपलब्ध कराने हेतु इसका बहुत बड़ा हिस्सा अपने पास रखता है। 
  • इसके शीर्ष निर्यात बाज़ार बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका तथा साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हैं। 
  • गेहूंँ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के कारण: 
    • भारत ने 13 मई, 2022 से गेहूंँ के निर्यात को निलंबित कर दिया है। सरकारी राजपत्र में प्रकाशित एक अधिसूचना में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने इस प्रतिबंध को सही ठहराते हुए जानकारी दी है कि गेहूंँ की बढ़ती वैश्विक कीमतों ने न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी व कमजोर देशों में भी खाद्य सुरक्षा पर दबाव डाला है। 
      • हालाँकि निर्यात की अनुमति तब दी जाएगी जब भारत सरकार अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने की अनुमति देती है और यदि उनकी सरकारें अनुरोध करती हैं। 
    • गेहूंँ के उत्पादन में कमी के कारण भी प्रतिबंध पर विचार किया गया था, क्योंकि इसके उत्पादन कि अवधि में मार्च-अप्रैल के दौरान देश हीटवेव से प्रभावित हुआ था, साथ ही भारतीय खाद्य निगम (FCI) बफर स्टॉक के लिये पर्याप्त स्टॉक जुटाने में असमर्थ था। 
    • बढ़ती महंँगाई ने भी इस कदम को प्रेरित किया। भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) 2022 की शुरुआत के 2.26 प्रतिशत से बढ़कर अब 14.55 हो गया है। खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण खुदरा मुद्रास्फीति भी अप्रैल में आठ साल के उच्च स्तर (7.79 प्रतिशत) पर पहुंँच गई। 

गेहूंँ निर्यात पर भारत के प्रतिबंध का प्रभाव: 

  • भारत पर प्रभाव: 
    • भारत की घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति पर गेहूंँ के निर्यात प्रतिबंध का प्रभाव कम होने की संभावना है। यह निर्यात प्रतिबंध एक पूर्व-प्रभावी कदम है और स्थानीय गेहूंँ की कीमतों को काफी हद तक बढ़ने से रोक सकता है। 
    • हालांँकि घरेलू गेहूंँ के उत्पादन की संभावना हीटवेव कि वजह से सीमित होने के कारण स्थानीय गेहूंँ की कीमतें भौतिक रूप से कम नहीं हो सकती हैं। 
  • विश्व पर प्रभाव: 
    • यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण दुनिया के ब्रेड बास्केट के रूप में प्रसिद्ध क्षेत्र में गेहूंँ के उत्पादन में गिरावट आई है। रूस और यूक्रेन संयुक्त रूप से दुनिया में गेहूंँ निर्यात में 25% कि हिस्सेदारी रखते हैं। इससे गेहूंँ की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और आपूर्ति  के मामले में खराब स्थिति उत्पन्न हो गई है। 
    • भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूंँ उत्पादक और सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। जब सरकार ने बढ़ती कीमतों के कारण गेहूंँ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया, तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इसका विरोध हुआ। 
    • एशिया में ऑस्ट्रेलिया और भारत को छोड़कर अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाएंँ घरेलू खपत के लिये आयातित गेहूंँ पर निर्भर हैं तथा वैश्विक स्तर पर गेहूंँ की ऊंँची कीमतों के कारण इन पर जोखिम उत्पन्न हो गया हैं, भले ही वे सीधे भारत से आयात न करें। 
    • यह हालिया निर्यात प्रतिबंध दुनिया भर में कीमतों को बढ़ाएगा और अफ्रीका एवं एशिया में गरीब उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा 

भारत के लिये गेहूँ निर्यात का महत्त्व: 

  • शुद्ध विदेशी मुद्रा अर्जक: यह भारत को एफसीआई के गोदामों में गेहूँ के खराब स्टॉक को कम करने में मदद करेगा और निर्यात बढ़ाकर विदेशी बाज़ारों पर कब्ज़ा करने का अवसर प्रदान करेगा। 
    • निर्यात में वृद्धि से विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी और भारत के चालू खाता घाटे में कमी आएगी। 
  • भारत की सद्भावना छवि: भारत ज़रूरतमंद और कमज़ोर देशों को गेहूँ का निर्यात करके उन देशों के साथ अपने संबंधों को मज़बूत कर सकता है, जिनके साथ उसके भावनात्मक संबंध थे एवं अन्य देशों के साथ संबंधों को सामान्य बनाने में मदद मिलेगी। 
  • विविध अवसर: अवसरों में गेहूँ जैसे खाद्यान्न का निर्यात और विनिर्मित वस्तुओं के उन गंतव्यों को निर्यात किये जाने की संभावना शामिल थी जिनके लिये आपूर्ति अविश्वसनीय हो गई थी। 
  • लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता: जब वैश्विक कीमतों में वृद्धि हुई है, तब भारत की गेहूँ की दरें अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्द्धी हैं। 
  • निर्यात टोकरी में विविधता लाना: यह भारत को उन देशों के साथ व्यापार संबंध बनाने में मदद करेगा जिनके साथ उसका व्यापार नगण्य या कम था। 

आगे की राह 

  • यद्यपि भारत द्वारा कदम खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू कीमतों को स्थिर करने के वास्तविक आधार पर यह उठाया गया है, लेकिन इसे दुनिया को उसी तरह से संप्रेषित करने की आवश्यकता है, अन्यथा इससे विश्व राजनीति में भारत की प्रतिष्ठा का नुकसान होगा और इसकी छवि ख़राब होगी। 
  • भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि कमज़ोर और पड़ोसी देशों की खाद्य सुरक्षा बाधित न हो, अन्यथा इससे राजनयिक संबंधों में तनाव पैदा होगा। 

गेहूंँ: 

  • गेहूंँ के बारे में:  
    • यह चावल के बाद भारत में दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। 
    • यह देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भाग की मुख्य खाद्यान्न फसल है। 
    • गेहूँ रबी की एक फसल है जिसे पकने के समय ठंडे मौसम और तेज़ धूप की आवश्यकता होती है। 
    • हरित क्रांति की सफलता ने रबी फसलों विशेषकर गेहूँ के विकास में योगदान दिया। 
    • कृषि हेतु मैक्रो मैनेजमेंट मोड, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना गेहूँ की खेती को समर्थन प्रदान करने के लिये कुछ सरकारी पहलें हैं। 
  • तापमान: तेज़ धूप के साथ 10-15 डिग्री सेल्सियस (बुवाई के समय) और 21-26 डिग्री सेल्सियस (पकने व कटाई के समय) के बीच। 
  • वर्षा: लगभग 75-100 सेमी.। 
  • मृदा का प्रकार: अच्छी तरह से सूखी उपजाऊ दोमट और चिकनी दोमट (गंगा-सतलुज मैदान तथा दक्कन का काली मिट्टी क्षेत्र)। 
  • शीर्ष गेहूँ उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश> पंजाब> हरियाणा> मध्य प्रदेश>> राजस्थान> बिहार> गुजरात 

यूपीएससी सिविल सेवा, विगत वर्षों के प्रश्न: 

प्रश्न. निम्नलिखित फसलों पर विचार कीजिये: 

  1. कपास 
  2. मँंगफली 
  3. चावल 
  4. गेहूँ 

इनमें से कौन सी खरीफ फसलें हैं? 

(a) केवल 1 और 3  
(b) केवल 2 और 3 
(c) केवल 1, 2 और 3  
(d) केवल 2, 3 और 4  

उत्तर: C 

व्याख्या: 

  • भारत में फसल के तीन मौसम हैं, रबी, खरीफ और ज़ायद। रबी की फसल अक्तूबर से दिसंबर तक सर्दियों में बोई जाती है और गर्मियों में अप्रैल से जून तक काटी जाती है। 
  • देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की शुरुआत के साथ खरीफ की फसलें उगाई जाती हैं और इनकी कटाई सितंबर- अक्तूबर में की जाती है। 
  • रबी और खरीफ के मौसम के बीच गर्मियों के महीनों के दौरान एक छोटा मौसम होता है जिसे ज़ायद के मौसम के रूप में जाना जाता है। ज़ायद' के दौरान उत्पादित कुछ फसलें तरबूज, कस्तूरी, ककड़ी, सब्जियांँ और चारा फसलें हैं। 
  • खरीफ फसलें: चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, फिंगर बाजरा या रागी (अनाज), अरहर (दाल), सोयाबीन, मँंगफली (तिलहन), कपास, आदि। अत: 1, 2 और 3 सही हैं। 
  • रबी की फसलें: गेहूंँ, जौ, जई (अनाज), चना (दाल), अलसी, सरसों (तिलहन), आदि। अत: 4 सही नहीं है। 

अत: विकल्प (C) सही उत्तर है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस  

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