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कक्षा कार्यक्रम

दृष्टि द विज़न

अध्यापकों की टीम

  • 27 Jul 2018
  • ‘दृष्टि: द विज़न’ के पास सबसे बड़ी पूंजी श्रेष्ठ अध्यापकों की है। हमने अध्यापकों के चयन की प्रक्रिया बेहद कठिन रखी है जिसमें कई चरणों को पूरा करने के बाद तथा विद्यार्थियों के ‘फीडबैक’ के आधार पर ही अध्यापकों की नियुक्ति व स्थायित्व का निर्णय होता है।

  • इस चयन प्रक्रिया के आधार पर हमारे यहाँ सामान्य अध्ययन एवं सीसैट के प्रत्येक खंड के लिये विशेषज्ञ अध्यापक नियुक्त किये गए हैं जो विषयों पर अपनी सूक्ष्म समझ, व्यापक जानकारी तथा रोचक प्रस्तुतीकरण के लिये विद्यार्थियों में अत्यंत लोकप्रिय हैं।

  • वैकल्पिक विषयों के लिये हमने सर्वश्रेष्ठ अध्यापकों का चयन किया है जिन्हें न केवल अपने विषय में महारथ हासिल है बल्कि मुख्य परीक्षा में उनका निष्पादन सदैव श्रेष्ठ रहा है।

  • कृपया ध्यान दें कि कभी-कभी (अत्यंत विरल परिस्थितियों में) ऐसी स्थिति बन सकती है कि विद्यार्थियों का ‘फीडबैक’ किसी अध्यापक के पक्ष में न हो। ऐसी स्थिति में दृष्टि प्रबंधन किसी भी अध्यापक को बदल सकता है। हमारी स्पष्ट नीति है कि विद्यार्थियों को सर्वश्रेष्ठ अध्यापक ही मिलने चाहिये।

हमारे अध्यापकों का संक्षिप्त परिचय एवं उनकी उपलब्धियाँ

अध्यापक

शिक्षण खंड

उपलब्धियाँ

Vikas Divyakriti

डॉ.विकास दिव्यकीर्ति

सामान्य अध्ययन:

एथिक्स

निबंध

वैकल्पिक विषय:

हिंदी साहित्य (ऑडियो वीडियो क्लासेज़)

मूल रूप से अध्यापक व लेखक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की गहरी रुचि विविध विषयों को पढ़ने और अनुसंधान करने में रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में बी.ए. (ऑनर्स) किया और उसके बाद विषय-परिवर्तन करके हिन्दी साहित्य में एम.ए, एम.फिल. तथा पी.एच.डी. की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने समाजशास्त्र तथा जन-संचार विषयों में एम.ए. किया तथा विधि की पढ़ाई करते हुए एल.एल.बी. किया। वे हिन्दी साहित्य से यू.जी.सी. नेट/जे.आर.एफ. तथा समाजशास्त्र से नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। अनुवाद कार्य में भी उनकी गंभीर रुचि रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय तथा भारतीय विद्या भवन दोनों संस्थाओं से अंग्रेज़ी-हिन्दी अनुवाद में पी.जी. डिप्लोमा किया है। दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, सिनेमा अध्ययन, सामाजिक मुद्दे और राजनीति विज्ञान (विशेषतः भारतीय संविधान) उनकी रुचि के अन्य विषय हैं।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन-कार्य से की थी। उसके बाद उन्होंने 1996 की सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले प्रयास में सफलता हासिल की और लगभग एक वर्ष तक भारत सरकार के गृह मंत्रालय में कार्य किया। इसके पश्चात् वे अपने पद से त्यागपत्र देकर पुनः शिक्षण के क्षेत्र में उतरे और ‘दृष्टि संस्थान’ की स्थापना की। आजकल वे अध्यापन कार्य के साथ-साथ समसामयिक मुद्दों की मासिक पत्रिका ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ के लिये प्रधान सम्पादक की भूमिका भी निभा रहे हैं। दृष्टि मीडिया की देखरेख भी उन्हीं के मार्गदर्शन में की जा रही है।

D Kumar

श्री डी.कुमार

सामान्य अध्ययन:

भारतीय अर्थव्यवस्था

विगत 20 वर्षों से सिविल सेवा परीक्षार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे श्री डी. कुमार, देश भर के सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच अर्थशास्त्र (वैकल्पिक विषय) और अर्थव्यवस्था (सामान्य अध्ययन) के अध्यापन की पहली पसंद हैं। अर्थव्यवस्था जैसे जटिल एवं तकनीकी विषय को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से संबंधित घटनाओं के साथ जोड़कर अत्यंत सहज ढंग से पढ़ाने की वजह से वे सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच एक लोकप्रिय और विश्वसनीय अध्यापक हैं।

Akhil Murti

श्री अखिल मूर्ति



वैकल्पिक विषय: 

इतिहास

सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच इतिहास (वैकल्पिक विषय एवं सामान्य अध्ययन) के अध्यापन के लिये सबसे लोकप्रिय नाम हैं- श्री अखिल मूर्ति। तथ्यों की अधिकता की वजह से, विशेषकर गैर-मानविकी पृष्ठभूमि के सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिये वैकल्पिक विषय एवं सामान्य अध्ययन के एक खंड के रूप में इतिहास उपेक्षा एवं अनिच्छा का विषय रहा है, लेकिन अगर इतिहास के प्रति अरुचि रखने वाला कोई अभ्यर्थी श्री अखिल मूर्ति की दो कक्षाएँ भी कर ले तो इस बात का पूरा विश्वास है कि इतिहास के प्रति उसकी अरुचि संबंधी सभी धारणाएँ निर्मूल साबित हो जाएंगी।

सिविल सेवा परीक्षा में दो बार साक्षात्कार का अनुभव रखने वाले श्री अखिल मूर्ति विगत 15 वर्षों से सिविल सेवा अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। श्री मूर्ति ने इतिहास विषय में विश्वसनीय पाठ्य पुस्तकों की कमी को दूर करने का बीड़ा उठाया और भारतीय इतिहास (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा) तथा विश्व इतिहास से संबंधित 4 पुस्तकों का लेखन कार्य भी किया है। इतिहास के अतिरिक्त श्री अखिल मूर्ति की रुचि रक्षा अध्ययन (Defence study) में भी है, इस विषय पर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी है।

Kumar Gaurav

श्री कुमार गौरव

सामान्य अध्ययन:

भूगोल, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी और आपदा प्रबंधन
 
वैकल्पिक विषय: 

भूगोल

श्री कुमार गौरव की अकादमिक पृष्ठभूमि भूगोल एवं विज्ञान की रही है। उन्होंने अपने अध्यापकीय जीवन की शुरुआत करीब 20 वर्ष पूर्व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के छात्रों के अध्यापन से की। इसके पश्चात् रुचि परिवर्तन एवं अपने कुछ पूर्व छात्रों (जो मेडिकल की पढ़ाई करके सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे) के अनुरोध पर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षार्थियों के मार्गदर्शन की और रुख किया और अत्यंत कम समय में ही सिविल सेवा परीक्षार्थियों के बीच एक लोकप्रिय अध्यापक बन गए।

मानचित्र एवं आरेखों के माध्यम से भूगोल की जटिलतम अवधारणाओं को बहुत ही सहज ढंग से विद्यार्थियों को समझाने वाले श्री कुमार गौरव आज देश भर में सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच भूगोल, पर्यावरण व पारिस्थितिकी तथा आपदा प्रबंधन के अध्यापन की पहली पसंद बन चुके हैं। वे विगत 15 वर्षों से भूगोल (वैकल्पिक विषय तथा सामान्य अध्ययन) तथा पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी का अध्यापन कर रहे हैं।

Ritesh R Jaiswal

श्री रीतेश जायसवाल

सामान्य अध्ययन:

सामान्य विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

विगत 10 वर्षों से सामान्य अध्ययन के सामान्य विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंडों का अध्यापन कर रहे श्री रीतेश जायसवाल सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच एक स्थापित और विश्वसनीय नाम हैं। विज्ञान से संबंधित सामान्य अध्ययन के विभिन्न खंडों पर मज़बूत पकड़ तथा विषय से संबंधित जटिल संकल्पनाओं की सहज व्याख्या के चलते श्री रीतेश जायसवाल अपने अध्यापन करियर के शुरुआती वर्षों में ही विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय चेहरा बन गए थे। इनकी खास विशेषता यह है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को सामाजिक-आर्थिक सन्दर्भों से जोड़कर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का निर्माण करते हैं। साथ ही, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास से हमेशा विद्यार्थियों को अद्यतन रखते हैं।

Rrajesh Mishra

श्री राजेश मिश्रा

सामान्य अध्ययन:

भारतीय राजव्यवस्था एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध

देश भर में सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच राजनीति विज्ञान (वैकल्पिक विषय), भारतीय राजव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्यापन की सबसे पहली पसंद श्री राजेश मिश्रा हैं। सिविल सेवा अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करने में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्री राजेश मिश्रा अत्यंत सरल स्वभाव के व्यक्तित्त्व के धनी हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंध जैसे जटिल विषय को बहुत ही सहज ढंग से विद्यार्थियों को समझा देने वाले श्री राजेश मिश्रा अपनी अध्यापन शैली में व्यावहारिक उदाहरणों पर अधिक ज़ोर देते हैं, यही वजह है कि वे विद्यार्थियों के बीच इतने अधिक लोकप्रिय हैं।

हिन्दी माध्यम में राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय में हमेशा से ही स्तरीय पाठ्य सामग्री का अभाव रहा है। देश भर के सिविल सेवा परीक्षार्थियों की इस समस्या के समाधान के लिये श्री राजेश मिश्रा ने राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर तीन स्तरीय पुस्तकों का लेखन कार्य भी किया है। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें हैं- राजनीति विज्ञान का समग्र अध्ययन, भारतीय राजव्यवस्था, भूमंडलीकरण के दौर में भारतीय विदेश नीति।

Nishant Shrivastava

श्री निशांत श्रीवास्तव

सामान्य अध्ययन:

कर्रेंट अफेयर्स 

मेकैनिकल इंजीनियरिंग से स्नातक श्री निशांत श्रीवास्तव ने अपने अध्यापन करियर की शुरुआत कैट (CAT) परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन से की। सिविल सेवा परीक्षा के प्रति गहरे रुझान के चलते उन्होंने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में ही कॉर्पोरेट जगत में जाने की बजाय सिविल सेवा अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन की ओर रुख किया। विभिन्न विषयों में गहरी रुचि रखने वाले श्री निशांत श्रीवास्तव की सामान्य अध्ययन के विभिन्न विषयों में गहरी समझ है।

विगत 10 वर्षों से सिविल सेवा अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे श्री निशांत श्रीवास्तव ने अपनी अध्यापन शैली में व्यावहारिक अध्ययन पर ज़ोर देते हुए करेंट अफेयर्स जैसे उबाऊ और बोझिल लगने वाले विषय के अध्यापन की एक नई शैली विकसित की। इसी का परिणाम है कि करेंट अफेयर्स के साथ-साथ समाज और सामाजिक कल्याण विषयों से संबंधित परीक्षा में पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्न प्रत्यक्ष रूप से उनके क्लास नोट्स से संबंधित होते हैं।

Sourabh Chaturavedi

श्री सौरभ चतुर्वेदी

सामान्य अध्ययन:

आंतरिक सुरक्षा एवं गवर्नेंस से संबंधित मुद्दे

विगत 15 वर्षों से सिविल सेवा परीक्षार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे सौरभ चतुर्वेदी भारतीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों एवं आंतरिक सुरक्षा संबंधी विषयों पर अपनी गहरी समझ के चलते, विद्यार्थियों को इन विषयों से संबंधित अवधारणाओं को रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ी घटनाओं के माध्यम से बहुत ही सहज ढंग से समझाते हैं।

कंप्यूटर साइंस से परास्नातक श्री सौरभ चतुर्वेदी ने दो बार सिविल सेवा परीक्षा का साक्षात्कार भी दिया है। प्रशासन एवं कानूनी विषयों में अपनी रुचि के चलते उन्होंने विधि से स्नातक (एल.एल.बी.) और परास्नातक (एल.एल.एम.) भी किया है।

अनिल केशरी:

सामान्य अध्ययन: 

भूगोल 

श्री अनिल केशरी विगत 18 वर्षों से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। भूगोल जैसे वैज्ञानिक रुझान वाले विषय को अत्यंत व्यावहारिक एवं सहज ढंग से पढ़ाने के कारण आज वह सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच एक लोकप्रिय नाम हैं। वैकल्पिक विषय हो या फिर सामान्य अध्ययन, इनकी कक्षा में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिये भूगोल जैसा जटिल विषय इतना सहज बन जाता है कि वे इसकी अवधारणाओं को सामान्य जीवन की घटनाओं के तौर पर समझने लगते हैं। मानचित्र एवं रेखाचित्रों के माध्यम से अध्यापन की विशिष्ट शैली के चलते विद्यार्थी भूगोल की जटिल अवधारणाओं को बहुत ही सहजता से समझ लेते हैं।
भूगोल एवं इतिहास जैसे विषयों में मानचित्र अध्ययन का महत्त्व बहुत अधिक है लेकिन जिन विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि भूगोल की नहीं रही है उनके लिये मानचित्र को समझना बहुत मुश्किल होता है। इसी समस्या को दूर करने के लिये श्री अनिल केशरी ने मानचित्र के अध्ययन हेतु 3 पुस्तकें भी लिखी हैं- भारत का भूगोल : मानचित्रों में, विश्व का भूगोल : मानचित्रों में, इतिहास : मानचित्रों में। इनके अलावा, एक पुस्तक भूगोल के अध्ययन हेतु अंग्रेज़ी भाषा में भी लिखी है- ELEMENTARY PHYSICAL GEOGRAPHY.

प्रवीण कुमार पांडे:

सामान्य अध्ययन: 

सामाजिक मुद्दे और सामाजिक न्याय

समाजशास्त्र वैकल्पिक विषय के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिये प्रवीण कुमार पांडे एक प्रतिष्ठित नाम है। हिंदी और अंग्रेज़ी माध्यम पर एक सामान मज़बूत पकड़ रखने वाले श्री प्रवीण कुमार पांडे विगत 15 वर्षों से सिविल सेवा अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में समाजशास्त्र वैकल्पिक विषय से सैकड़ों अभ्यर्थी देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं में चयनित हो चुके हैं। समाजशास्त्र के अध्यापन के लंबे अनुभव के चलते सामान्य अध्ययन में ‘सामाजिक मुद्दे और सामाजिक न्याय’ विषय के लिये अभ्यर्थियों की पहली पसंद श्री प्रवीण कुमार पांडे ही हैं। हिंदी माध्यम में समाजशास्त्र की स्तरीय पाठ्य सामग्री के अभाव को देखते हुए उन्होंने कुछ पुस्तकों का लेखन भी किया है।

ए.के. अरुण:

सामान्य अध्ययन: 

भारतीय अर्थव्यवस्था

सहज और बोधगम्य अध्यापन शैली की वजह से श्री ए.के अरुण ने लगभग 10 वर्षों के अपने अध्यापन काल में ही सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच ऐसी पहचान बनाई है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और श्री ए.के. अरुण एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। अर्थव्यवस्था की तकनीकी अवधारणाओं को रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की घटनाओं के साथ जोड़कर पढ़ाने की वजह से विद्यार्थी अर्थशास्त्र एवं अर्थव्यवस्था की जटिलतम अवधारणों एवं सिद्धांतों को भी बहुत ही सहज ढंग से समझ लेते हैं। एक बार श्री ए.के. अरुण की कक्षा कर लेने के बाद विद्यार्थी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के किसी भी जटिल प्रश्न को हल करने की स्थिति में आ जाते हैं।

निशांत श्रीवास्तव: 

सामान्य अध्ययन:

भारतीय राजव्यवस्था

विगत दस वर्षों में भारतीय राजव्यवस्था पढ़ाने वाले जिन शिक्षकों का नाम उभरकर आया है, उनमें श्री निशांत श्रीवास्तव विद्यार्थियों की पहली पसंद हैं। राजव्यवस्था से जुडी विभिन्न अवधारणाओं को अत्यंत व्यावहारिक ढंग से पढ़ाने की अपनी अध्यापन शैली के कारण लगभग एक दशक के अपने अध्यापन काल में वे सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच खासे लोकप्रिय हो गए हैं। चूँकि राजव्यवस्था हमारी दैनिंदिन की ज़िन्दगी से जुड़ा विषय है, इसीलिये श्री निशांत श्रीवास्तव इस विषय को इतनी सहजता से पढ़ाते हैं कि एकबारगी ऐसा प्रतीत होता है कि आप किसी कक्षा में नहीं बैठे हैं बल्कि अपनी सामान्य ज़िन्दगी को समझ रहे हैं। वह विषय को इतनी समग्रता से कवर करते हैं कि अगर आपने एक बार इनकी कक्षा में पढ़ाई कर ली तो फिर प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा का शायद ही ऐसा कोई प्रश्न हो जिसे आप सहजता से हल न कर सकें।

दिलीप कुमार पांडे: 

सामान्य अध्ययन:

 इतिहास

सामान्य अधययन के पाठ्यक्रम में इतिहास सर्वाधिक व्यापक खंड है, साथ ही इसमें तथ्यों की प्रचुरता भी है जिन्हें याद करना बहुत कठिन कार्य है। यही कारण है कि अत्यंत रोचक विषय होते हुए भी विद्यार्थियों में (विशेषकर ऐसे विद्यार्थी जिनकी अकादमिक पृष्ठभूमि विज्ञान की रही है) इतिहास के अध्ययन को लेकर एक ख़ास तरह की अरुचि देखने को मिलती है। जैसा कि सर्वविदित है, अच्छा अध्यापक किसी भी जटिल और अरुचिकर विषय को भी रोचक और सहज बना सकता है; यह बात श्री दिलीप कुमार पांडे के विषय में एकदम सटीक प्रतीत होती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इतिहास में परास्नातक श्री दिलीप कुमार पांडे विगत डेढ़ दशक से सिविल सेवा अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। कोई भी विद्यार्थी अगर एक बार श्री दिलीप कुमार पांडे की कक्षा में इतिहास की पढ़ाई कर ले तो उसके लिये इतिहास एक विषय की बजाय बचपन में सुनी हुई कहानियों का संकलन बन जाता है, जिनके बारे में उसे सबकुछ हमेशा याद रहता है।

संतोष तिवारी:

विशेष/क्वालीफाइंग :

अंग्रेज़ी 

हिंदी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अधिकांश विद्यार्थियों के लिये अंग्रेज़ी समझना एक बहुत बड़ी समस्या रही है, फिर चाहे अंग्रेज़ी के समाचार पत्रों को पढ़ना हो, अंग्रेज़ी में लिखी अच्छी पुस्तकों को पढ़ना हो अथवा प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट के प्रश्नपत्र में द्विभाषी बोधगम्यता के लेखांशों को समझना (क्योंकि हम सभी जानते हैं कि इन लेखांशों का हिंदी अनुवाद अच्छा नहीं होता है), या फिर मुख्य परीक्षा में अंग्रेज़ी क्वालीफाइंग का प्रश्नपत्र हो। इसकी मुख्य वजह होती है, हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों की अकादमिक पृष्ठभूमि। लेकिन अगर कोई विद्यार्थी व्यक्तिगत प्रयास के माध्यम से अंग्रेज़ी सीखना चाहे या फिर अपनी अंग्रेज़ी सुधारना चाहे तो इस कार्य में सबसे बड़ी मुश्किल है समय, क्योंकि इस प्रक्रिया में समय काफी ज़्यादा लगता है और साथ ही किसी भी अवधारणा या व्याकरण संबंधी समस्या के समाधान के लिये विशेषज्ञ मार्गदर्शन का अभाव रहता है।
इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ‘टीम दृष्टि’ ने ‘बेसिक इंग्लिश कोर्स’ शुरू किया है। इस कोर्स का संचालन श्री संतोष तिवारी जी करेंगे। श्री संतोष तिवारी जी अंग्रेज़ी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएट हैं और लगभग 17 वर्षों से नियमित रूप से विभिन्न कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में अंग्रेज़ी भाषा का अध्यापन कर रहे हैं।

Abhishek Karan
श्री अभिषेक कर्ण

सीसैट: 

लॉजिकल रीज़निंग तथा नॉन-वर्बल रीज़निंग

 

विगत चार वर्षों से सीसैट के रीज़निंग एवं गणित खंडों का अध्यापन करने वाले श्री अभिषेक कर्ण ने विषय पर मज़बूत पकड़ एवं प्रश्नों को हल करने की बहुआयामी अध्यापन शैली की वजह से अपने छोटे से अध्यापन करियर में विद्यार्थियों के बीच एक अलग पहचान बनाई है। रीज़निंग से संबंधित प्रश्नों को सहज तरीकों से हल करवाने और व्यावहारिक घटनाओं के माध्यम से विभिन्न संकल्पनाओं को समझाने के कारण आज विद्यार्थियों के लिये वे एक विश्वसनीय नाम बन गए हैं।

अभिषेक शुक्ला:

सीसैट: 

रीज़निंग 

 

सामान्य रूप से देखने पर सिविल सेवा परीक्षा में सीसैट का महत्त्व सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा में है, वहाँ भी इसकी प्रकृति क्वालीफाइंग विषय की है। इस तरह देखने पर आपको सीसैट एक अल्प महत्त्व वाला विषय प्रतीत होता है, लेकिन यही अल्प महत्त्व वाला विषय सिविल सेवा अभ्यर्थियों की सफलता की पहली सीढ़ी पर ही सबसे बड़ी बाधा बन जाती है, जब सीसैट क्वालीफाई न कर पाने के चलते उनकी पूरी तैयारी निरर्थक साबित हो जाती है। बेशक सीसैट की प्रकृति क्वालीफाइंग विषय की है, लेकिन एक विषय के तौर पर यह एक कठिन विषय है क्योंकि इसकी प्रकृति बहुत अधिक विविधतापूर्ण है। इसमें विभिन्न खंड शामिल हैं, जैसे कि गणित, रीज़निंग और द्विभाषी बोधगम्यता; साथ ही इन सभी खंडों की प्रकृति अपने आप में विशिष्ट है। अगर सीसैट के इन सभी खंडों पर गौर करें तो परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की दृष्टि से रीज़निंग सबसे परिवर्तनशील प्रकृति वाला विषय है क्योंकि हर वर्ष इससे पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति में बदलाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि रीज़निंग की अच्छी समझ होनी आवश्यक है ताकि प्रश्नों की प्रकृति बदलने पर भी आप उनको सहजता से हल कर सकें।
श्री अभिषेक शुक्ला जी विगत 5-6 वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को रीज़निंग पढ़ा रहे हैं। विषय पर मज़बूत पकड़ और सहज एवं व्यावहारिक अध्यापन शैली की वजह से अपने छोटे अध्यापन काल में ही श्री अभिषेक शुक्ला जी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए हैं। कक्षा के दौरान रीज़निंग के विभिन्न अध्यायों की मूलभूत अवधारणों को बहुत ही अच्छे से समझाने के बाद उनका अधिकांश ज़ोर प्रश्नोत्तर अभ्यास पर रहता है, यही कारण है कि इनकी कक्षा में रीज़निंग की पढ़ाई कर चुका कोई भी विद्यार्थी (चाहे उसकी अकादमिक पृष्ठभूमि गणित की न रही हो) रीज़निंग के प्रश्नों को सहजता से हल कर सकता है।

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