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प्रारंभिक परीक्षा - सीसैट की रणनीति

  • जब से प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट के प्रश्नपत्र को क्वालिफाइंग किया गया है, बहुत से उम्मीदवारों ने सीसैट की पढ़ाई लगभग बंद ही कर दी है और अपनी सारी ऊर्जा सामान्य अध्ययन की तैयारी में झोंक दी है। तैयारी की इस पद्धति को भी सही नहीं कहा जा सकता है। याद रहे कि सीसैट को क्वालिफाइंग बनाया गया है, परीक्षा से हटाया नहीं गया है। सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालीफाई करने के लिये न्यूनतम 33% अंक लाना भी बिल्कुल आसान नहीं होता। हाँ, पहले की अपेक्षा इसकी चुनौतियाँ कम अवश्य हुई हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाए। 
  • सीसैट की तैयारी के लिये सभी उम्मीदवारों की एप्रोच एक-सी नहीं हो सकती। कुछ उम्मीदवार जिनकी पृष्ठभूमि गणित एवं विज्ञान विषयों की है, उनके लिये दो घंटे में गणित एवं रीज़निंग खंड को मिलाकर 27 प्रश्न हल कर लेना कोई कठिन कार्य नहीं है, जबकि मानविकी पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिये तो कई बार यह आँकड़ा पार करना भी कठिन हो जाता है। 
  • गौरतलब है कि सीसैट प्रश्नपत्र में कुल 80 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें प्रत्येक प्रश्न 2.5 अंकों का होता है। इस तरह, सीसैट में क्वालिफाई करने के लिये निर्धारित 33% अंक लाने के लिये आपको 200 अंकों में से 66 अंक लाने अनिवार्य हैं। ध्यान रहे कि प्रारंभिक परीक्षा में निगेटिव मार्किंग लागू है।
  • यह बात भी सही है कि इस आँकड़े को पार करने के लिये सभी परीक्षार्थियों की रणनीति एकसमान नहीं हो सकती है। किसी की गणित एवं रीज़निंग पर अच्छी पकड़ होती है तो कोई कॉम्प्रिहेंशन हल करने में ही सहज महसूस करता है। विगत 6 वर्षों में विभिन्न खंडों से पूछे गए प्रश्नों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अब सीसैट में किन खंडों पर ध्यान देना अधिक उचित रहेगा और किन्हें छोड़ने पर भी विशेष नुकसान नहीं है।
  • द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सीसैट’ में मुख्यतः बोधगम्यता (comprehension), संचार कौशल सहित अंतर्वैयक्तिक कौशल (Interpersonal skills including communication skills), तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता (Logical reasoning and analaytical ability), निर्णयन और समस्या समाधान (Decision-marking and problem-solving), सामान्य मानसिक योग्यता (General mental ability), आधारभूत संख्ययन (Baic numeracy) एवं आँकड़ों का निर्वचन (Data interpretation) (हाईस्कूल स्तर) से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। 
  • वर्ष 2014 में अंग्रेज़ी बोधगम्यता को सीसैट के पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है|
  • इस प्रश्नपत्र की उचित रणनीति बनाने के लिये विगत 6 वर्षों में प्रारंभिक परीक्षा में इसके विभिन्न शीर्षकों से पूछे गए प्रश्नों का सूक्ष्म अवलोकन आवश्यक है, जिनका विस्तृत विवरण इस तालिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।   

पाठ्यक्रम का खंड

2016

2015

2014

2013

2012

2011

औसत

बोधगम्यता (द्विभाषिक)

27

30

26

24

32

27

28

अंग्रेज़ी बोधगम्यता*-

-

-

6#

 8

 8

9

8

आधारभूत संख्यन/गणित

28

20 16 9 3 13 14

आँकड़ों की व्याख्या/पर्याप्तता

0

0 5 5 0 6 3

तर्कशक्ति/विश्लेषणात्मक योग्यता

25

30 27 28 30 17 26

निर्णयन, अंतर्वैयक्तिक कौशल

0

0 0 6 7 8 3

 कुल

80

80

80

80

80

80

80

 * वर्ष 2014 में अंग्रेज़ी बोधगम्यता को सीसैट के पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
# 2014 में अंग्रेज़ी बोधगम्यता से संबंधित प्रश्नों की गणना नहीं की गई थी, अर्थात कट-ऑफ अंकों के लिये केवल 74 प्रश्नों का ही मूल्यांकन किया गया था। 


बोधगम्यता से संबंधित प्रश्न  

  • सीसैट के विभिन्न खंडों में सामान्यतः सर्वाधिक प्रश्न ‘बोधगम्यता’ से पूछे जाते रहे हैं। द्विभाषिक बोधगम्यता से पूछे जाने वाले प्रश्नों को अगर देखें तो प्रतिवर्ष औसतन 28 प्रश्न इस खंड से पूछे गए हैं। 
  • ध्यातव्य है कि 2014 से पहले लगभग 8-9 प्रश्न अंग्रेज़ी बोधगम्यता से भी पूछे जाते थे, परंतु संघ लोक सेवा आयोग के निर्देशानुसार 2014 से इसके प्रश्नों को समाप्त कर दिया गया है, इसलिये अब अंग्रेज़ी बोधगम्यता के प्रश्न नहीं पूछे जाते। 
  • आमतौर पर लगभग 200-300 शब्दों वाले अनुच्छेदों से 3-4 प्रश्न पूछे जाते हैं। साथ ही, दो घंटे की परीक्षा-अवधि में उम्मीदवार को अन्य खंडों के प्रश्नों के साथ-साथ 8-10 अनुच्छेद भी पढ़ने होते हैं, जो एक जटिल और थकाऊ कार्य है। 
  • इसके अलावा, इन अनुच्छेदों का मूल पाठ अंग्रेज़ी में और उनका अनुवाद हिंदी में होता है जिससे हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अनुवाद संबंधी समस्याएँ भी झेलनी पड़ती हैं।
  • वर्ष 2015 एवं 2016 के प्रश्नपत्र में एक प्रवृत्ति यह भी देखी गई कि सामान्यतः 100-150 शब्दों वाले अनुच्छेदों से केवल एक-एक प्रश्न पूछा गया तथा 200-300 शब्दों वाले अनुच्छेद से 3-4 प्रश्न। 
  • ध्यान रहे कि 2015 व 2016 में सीसैट प्रश्नपत्र में केवल 1 प्रश्न वाले अनुच्छेद बहुलता में शामिल किये गए थे। 2016 के बोधगम्यता खण्ड की जटिलता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे प्रश्नपत्र में 27 प्रश्नों को हल करने के लिये कुल 17 अनुच्छेद दिये गए थे। इस तरह यह खंड काफी समय लेने वाला तथा उबाऊ भी रहा।
  • सामान्यतः जिन विद्यार्थियों की गणित एवं रीज़निंग पर अच्छी पकड़ हो, वे इस खंड पर कम ध्यान देकर भी अपना काम चला सकते हैं। लेकिन इसी को स्थायी रणनीति बनाकर नहीं चलना चाहिये। बेहतर यह होगा कि अगर आपके पास समय है तो सभी खंडों पर समान ज़ोर देते हुए सभी का अभ्यास करना चाहिये|

नोट: विगत वर्षों में इस खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें। 

तर्कशक्ति एवं विश्लेषणात्मक योग्यता संबंधित प्रश्न

 

  • तर्कशक्ति एवं विश्लेषणात्मक योग्यता का महत्त्व सीसैट के प्रश्नपत्र में दूसरे सोपान पर आता है। इस खंड से प्रतिवर्ष औसतन 26 प्रश्न पूछे जाते रहे हैं।
  • गौरतलब है कि इस खण्ड के प्रश्न प्रायः फॉर्मूला आधारित न होकर थोड़े घुमावदार होते हैं और उम्मीदवार से तीव्र दिमागी प्रतिक्रिया की अपेक्षा रखते हैं। 
  • आमतौर पर भाषिक तर्कशक्ति (Verbal Reasoning) एवं विश्लेषणात्मक तर्कशक्ति (Analytical Reasoning) से ज़्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें भी कुछ विशेष अध्यायों से अधिक प्रश्न पूछे जाते रहे हैं, उन पर विशेष रूप से ध्यान देने की ज़रूरत है। उदाहरणस्वरूप- दिशा संबंधी परीक्षण, श्रृंखला, रक्त-संबंध, गणितीय संक्रियाएँ, न्याय निगमन, कथन- निष्कर्ष, पूर्वधारणाएँ आदि। देखा जाए तो गैर-भाषिक तर्कशक्ति (Non-Verbal Reasoning) से अधिक प्रश्न पूछे जाने की प्रवृत्ति नहीं है। इस खंड से पूछे गए प्रश्नों में भी अधिकांश विश्लेषण पर ही आधारित होते हैं।

नोट: विगत वर्षों में इस खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें। 

गणित एवं सामान्य मानसिक योग्यता से संबंधित प्रश्न 

 

  • गणित खंड में सामान्यतः 10वीं कक्षा के स्तर तक के प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें भी ज़्यादातर प्रश्न आधारभूत अंकगणित से पूछे जाते हैं। साथ ही, आँकड़ों के निर्वचन (चार्ट, ग्राफ, तालिका आदि) से भी ठीक-ठाक संख्या में प्रश्न पूछे जाते हैं। 
  • इस तरह देखें तो अंकगणित की आधारभूत संकल्पनाओं एव आँकड़ों के निर्वचन का अभ्यास कर इस खंड में अच्छी पकड़ बनाई जा सकती है। 
  • गणित में भी कुछ अध्यायों से प्रायः ज़्यादा सवाल पूछे जाने की प्रवृत्ति रही है। उदाहरण के लिये- प्रतिशतता (लाभ और हानि, साधारण ब्याज एवं चक्रवृद्धि ब्याज, अनुपात आदि इसी के अंतर्गत आ जाते हैं), समय और कार्य, समय और दूरी, प्रायिकता (Probabilty) आदि अध्यायों पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • निश्चित तौर पर यह नहीं बताया जा सकता कि इस खंड से कितने प्रश्न पूछे जाएंगे, लेकिन इतना ज़रूर है कि प्रश्न ऐसे पूछे जाते हैं जो सिर्फ फॉर्मूले पर आधारित होने की बजाय मानसिक सावधानी की अपेक्षा रखते हों।
  • इसकी तैयारी के लिये बाज़ार में उपलब्ध किसी स्तरीय पुस्तक जैसे- संख्यात्मक अभियोग्यता- आर.एस. अग्रवाल एवं परफेक्ट वर्बल एवं नॉन वर्बल रीज़निंग से प्रश्नोत्तर अभ्यास करने के साथ-साथ दृष्टि संस्थान के प्रैक्टिस सेटों को हल करना उचित रहेगा। 
  • प्रारंभिक परीक्षा में गलत उत्तर के लिये ऋणात्मक अंक (Negative marking) का प्रावधान होने के कारण अभ्यर्थियों से अपेक्षा है कि तुक्का पद्धति से बचते हुए सावधानीपूर्वक प्रश्नों को हल करें।

नोट: विगत वर्षों में इस खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें। 

निर्णयन’ तथा ‘अंतर्वैयक्तिक कौशल’ से संबंधित प्रश्न

 

  • इन खंडों से कुल मिलाकर 6-8 प्रश्नों पूछे जाने की संभावना रहती है। खास बात यह है कि इन प्रश्नों में ऋणात्मक अंक (Negative marking) की व्यवस्था लागू नहीं होती अर्थात् चारों विकल्पों में से कोई गलत विकल्प चुनने पर भी उम्मीदवार के अंक काटे नहीं जाते। 
  • वस्तुतः इस खंड से संबंधित प्रश्नों में ‘भेदात्मक अंकन’ (Differential Marking) की व्यवस्था लागू है। इसका अर्थ है कि इनमें एक ही उत्तर को ठीक मानने की बाध्यता नहीं होती, बल्कि प्रश्न में दिये गए सभी विकल्पों के लिये अंकों का वितरण होता है यानी किसी प्रश्न के लिये निर्धारित 2.5 अंकों को प्रश्न के विभिन्न विकल्पों के लिये वरीयता क्रम में आवंटित कर दिया जाता है| 
  • ऋणात्मक अंक न होने तथा ‘भेदात्मक अंकन’ (Differential Marking) होने के कारण परीक्षा में इस खंड के प्रश्नों को बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिये। खुद को प्रशासनिक अधिकारी समझते हुए सामान्य बुद्धि (Common Sense) से इनका उत्तर दिया जाए तो इनके ठीक हो जाने की संभावना बनती है, पर बेहतर है कि ऐसे प्रश्नों का समुचित अभ्यास भी कर लिया जाए।
  • अगर संभव हो तो किसी स्तरीय कोचिंग संस्थान की मॉक टेस्ट टेस्ट सीरीज़ में सम्मिलित हो सकते हैं। ‘दृष्टि’ की मॉक टेस्ट सीरीज़ सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है। आप इस कार्यक्रम में शामिल होकर इसका लाभ उठा सकते हैं। 
  • प्रारंभिक परीक्षा तिथि से पूर्व प्रैक्टिस पेपर्स एवं विगत वर्षों में प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों  को निर्धारित समय सीमा (सामान्यत: दो घंटे) के अंदर हल करने का अभ्यास करना लाभदायक रहता है। 

नोट: विगत वर्षों में इस खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें। 


Helpline Number : 87501 87501
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