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मुख्य परीक्षा - प्रश्नपत्र-2 रणनीति

सामान्य अध्ययन-2 (शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

राजव्यवस्था

  • सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के द्वितीय प्रश्नपत्र के अंतर्गत शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध आदि विषयों को रखा गया है। यहाँ पर हम अंतर्राष्ट्रीय संबंध को छोड़कर शेष खंडों की मुख्य परीक्षा रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
  • यदि इस प्रश्नपत्र में शामिल विषयों की विषयवस्तु का विश्लेषण करें तो एक सामान्य बात यह सामने आती है कि अंतर्राष्ट्रीय संबंध वाले खंड के अलावा अन्य विषय शासन-प्रशासन और सामाजिक परिप्रेक्ष्य के व्यापक आयाम को समाहित किये हुए हैं। अगर इन विषयों/खंडों की तैयारी सुनियोजित ढंग से की जाए तो इस प्रश्नपत्र में आसानी से बेहतर अंक अर्जित किये जा सकते हैं।
  • द्वितीय प्रश्नपत्र में विगत 2-3 वर्षों में पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति का आकलन किया जाए तो हम पाएंगे कि पाठ्यक्रम में दिये गए टॉपिकों को लक्षित करते हुए ही कई प्रश्न पूछे गए हैं, जैसे पाठ्यक्रम में ‘नागरिक चार्टर’ का उल्लेख मिलता है और वर्ष 2013 में इसी से संबंधित एक प्रश्न पूछ लिया गया था- "यद्यपि अनेक लोक सेवा संगठनों ने नागरिक घोषणा-पत्र (चार्टर) बनाए हैं, पर दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और नागरिकों के संतुष्टि स्तर के अनुकूल सुधार नहीं हुआ है। विश्लेषण कीजिये।"
  • इस प्रश्न के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि मुख्य परीक्षा की प्रकृति विषयवस्तु को रटने की बजाय विश्लेषणात्मक और मूल्यांकनपरक अध्ययन की अपेक्षा करती है। अतः आपको किसी टॉपिक के बारे में गहरी समझ होनी चाहिये तभी आप एक प्रभावी उत्तर लिखने में सफल हो पाएंगे। यहाँ गहरी समझ से आशय है- संबद्ध टॉपिक के संवैधानिक/वैधानिक परिप्रेक्ष्य, उसके प्रभाव, उसकी विशेषताओं आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेना।
  • भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय जैसे उपखंडों की परंपरागत विषयवस्तु का विस्तार से अध्ययन करना महत्त्वपूर्ण है। इससे राजव्यवस्था के प्रति आपकी समझ स्पष्ट होने लगती है। इसके अतिरिक्त, इनसे सम्बद्ध समसामयिक घटनाक्रमों पर भी नज़र रखना उपयोगी होगा। 
  • सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की प्रमुख विशेषताएँ, लक्षित वर्ग, योजना की प्रासंगिकता, क्रियान्वयन में उत्पन्न कठिनाइयाँ, इन कठिनाइयों  का समाधान। इसके अतिरिक्त, योजना की सफलता के लिये सुझाव के रूप में अध्ययन-सामग्री तैयार करें। ऐसा करके योजनाओं के संबंध में आप स्पष्ट समझ विकसित कर सकेंगे, और यह प्रभावी उत्तर लिखने में उपयोगी होगा।
  • भारतीय संविधान की विशेषताओं, संविधान की प्रस्तावना की प्रकृति, संविधान का संघात्मक ढाँचा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट समझ विकसित कर लें।
  • केंद्र-राज्य संबंधों के विशेष संदर्भ में हालिया गतिविधियों पर नज़र रखें।
  • चर्चा में रहे कुछ महत्त्वपूर्ण टॉपिक्स, जैसे- संसदीय सत्र के दौरान हंगामा एवं इसके प्रभाव, राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग, भूमि अधिग्रहण विधेयक आदि पर बिंदुवार नोट्स तैयार कर लें।
  • उत्तर लेखन के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि यदि उत्तर में किसी संवैधानिक प्रावधान/संशोधन, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय आदि का उल्लेख करना उपयुक्त है, तो इसका उल्लेख अवश्य करें। इससे यह पता चलता है कि आप विषय के न केवल सामयिक पक्ष अपितु संवैधानिक/वैधानिक पक्ष से भी अवगत हैं।
  • उपरोक्त विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकलता है कि किसी भी एक उपखंड को अनेदखा नहीं किया जा सकता। इसके लिये आप दिये गए सभी टॉपिक्स के लिये समय सीमा निर्धारित कर लीजिये ताकि आप ऊहापोह में न फँसें।

नोट:
  ⇒ यूपीएससी द्वारा आयोजित मुख्य परीक्षा में, विगत वर्षों में भारतीय संविधान एवं शासन व्यवस्था खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें।
  ⇒ यूपीएससी द्वारा आयोजित मुख्य परीक्षा में, विगत वर्षों में शासन प्रणाली तथा सामाजिक न्याय खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध 

    • मुख्य परीक्षा में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से संबंधित प्रश्न सामान्य अध्ययन के द्वितीय प्रश्नपत्र में पूछे जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अधिकांश प्रश्न विश्लेषणात्मक प्रकृति के होते हैं जिन्हें लिखने के लिये गहन जानकारी आवश्यक है।
    • अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से संबंधित प्रश्नों को केवल पुस्तकीय अध्ययन द्वारा हल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि संबंधित पुस्तकें केवल आधारभूत जानकारी उपलब्ध कराती हैं जबकि प्रश्नों की प्रकृति विश्लेषणात्मक होती है। इनमें तथ्यों की जानकारी के साथ-साथ व्यापक परिप्रेक्ष्य में सोचने की भी आवश्यकता होती है। 
    • इस प्रश्नपत्र में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से संबंधित समसामयिक घटनाक्रमों व सूचनाओं की जानकारी व उनके वैश्विक प्रभाव को जानना महत्त्वपूर्ण है, जैसे विश्व की महाशक्तियों व ईरान के मध्य हाल में हुए परमाणु समझौते के मुख्य बिंदुओं को जान लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस मुद्दे से संबंधित वैश्विक प्रभावों यथा-ईरान, पश्चिमी देशों तथा भारत पर इस समझौते का क्या प्रभाव पड़ेगा आदि के बारे में भी समझ विकसित होनी चाहिये। 
    • अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को पढ़ते समय मात्र यह जान लेना महत्त्वपूर्ण नहीं है कि संस्था क्या है, बल्कि संस्था की संरचना, उसके कार्य, अधिदेश, वैश्विक एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी भी बेहद महत्त्वपूर्ण है।
    • विगत दो वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के परिप्रेक्ष्य में दक्षिण चीन सागर, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं, न्यू डेवलपमेंट बैंक, एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर बैंक, विश्व व्यापार संगठन, चीन-पाक आर्थिक गलियारा, स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, अफगानिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायक बल, भारत-जापान संबंध, शाहबाग स्क्वायर, भारत-श्रीलंका, गुजराल डॉक्ट्रिन, मालदीव, विश्व बैंक तथा आई.एम.एफ. से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे, इन प्रश्नों के सही व गुणवत्तायुक्त उत्तर लिखने के लिये इन प्रश्नों के विषय में अवधारणात्मक जानकारी के साथ-साथ विश्लेषणात्मक क्षमता होना एक आवश्यक शर्त है।

नोट: यूपीएससी द्वारा आयोजित मुख्य परीक्षा में, विगत वर्षों में इस खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें।

समाज एवं सामाजिक न्याय

    • सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र-1 एवं 2 में समाज एवं सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है।
    • विगत दो वर्षों में इससे क्रमशः 100-150 अंकों के 10-12 प्रश्न पूछे गए हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि हाल के दिनों में सामाजिक मुद्दे एवं सामाजिक न्याय महत्त्वपूर्ण विषय बनकर उभरे हैं। अतः इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
    • शिक्षा के प्रसार और आर्थिक उन्नति ने धीरे-धीरे समाज में व्यापक बदलाव लाने शुरू कर दिये हैं। इसलिये, आजकल सामाजिक मसले बहुत ज़ोर-शोर से उठाए जाते हैं। महिलाओं की समस्या, जाति व्यवस्था, पितृसत्तात्मक समाज, धार्मिक कर्मकांड या अंधविश्वास तथा सामाजिक रीति-रीवाज़ एवं नियम-कानून की वैधता से जुड़े मामले आज ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो गए हैं। सूचना क्रांति के इस दौर में लोगों में जागरूकता आई है और सामाजिक न्याय की मांग तेज़ हुई है। 
    • सामाजिक न्याय के विशेष संदर्भ में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिये-
      1. भारत के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की देख-रेख में संचालित कार्यक्रमों, योजनाओं की विशेषताओं और महत्त्व आदि पर ध्यान दें।
      2. भारत सरकार द्वारा विगत 6-8 महीनों में आरंभ की गई योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी रखें। यदि इनसे सीधे-सीधे प्रश्न न भी आए तो अन्य प्रश्नों के उत्तर लिखने के दौरान इनका उपयोग उदाहरण के तौर पर सहजता से किया जा सकता है।
      3. अतिसंवेदनशील वर्गों के लिये योजनाओं के आलोक में प्राथमिक तौर पर अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं, वृद्धजनों, निःशक्तजनों, बालश्रम के शिकार बच्चों आदि के लिये सरकार द्वारा संचालित योजनाओं पर विशेष बल दें।
      4. स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित विषयों का अध्ययन करने के दौरान ध्यान रखें कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में इन परिप्रेक्ष्यों में कितनी प्रगति हुई है, सरकार द्वारा प्रत्येक व्यक्ति तक उत्तम स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था के क्या प्रबंध किये जा रहे हैं एवं क्या ये प्रबंध पर्याप्त हैं या इनमें सुधार की आवश्यकता है आदि।5. जून से नवंबर माह के दौरान घटित राजनैतिक घटनाओं, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों, विभिन्न आयोगों के क्रियाकलापों से संबद्ध पृथक नोट्स बनाकर रख लें। रिवीज़न के अंतिम दौर में ये आपके लिये सहायक साबित होंगे।

नोट:
  ⇒ यूपीएससी द्वारा आयोजित मुख्य परीक्षा में, विगत वर्षों में समाज एवं सामाजिक न्याय खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें।
  ⇒ यूपीएससी द्वारा आयोजित मुख्य परीक्षा में, विगत वर्षों में सुरक्षा खंड से पूछे गए प्रश्नों के लिये इस link पर क्लिक करें।


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