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10 महीने के निचले स्तर पर पहुँची खुदरा मुद्रास्फीति 
Sep 14, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र - 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)

Inflation

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistical Organisation- CSO) ने अगस्‍त, 2018 के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) पर आधारित महँगाई दर के आँकड़े जारी किये।

जुलाई की तुलना में CPI आधारित महँगाई दर 

  • अगस्त 2018 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिये CPI आधारित महँगाई दर 3.41 फीसदी (अनंतिम) रही, जो अगस्‍त 2017 में 3.22 फीसदी थी।
  • इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिये CPI आधारित महँगाई दर अगस्‍त, 2018 में 3.99 फीसदी (अनंतिम) आँकी गई, जो कि अगस्‍त 2017 में 3.35 फीसदी थी।
  • उल्लेखनीय है कि जुलाई 2018 में ये दरें क्रमशः 4.11 तथा 4.32 फीसदी (अंतिम) थीं।
  • CSO के अनुसार, महँगाई दर में कमी का कारण दालों, सब्जियों तथा चीनी जैसे खाद्य पदार्थों के मूल्यों में कमी है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 
(Consumer Price Index- CPI)

  • किसी अर्थव्यवस्था के उपभोग व्यय का प्रतिनिधित्व करने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कीमत परिवर्तन का आकलन करने वाली व्यापक माप को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कहा जाता है।
  • इसमें वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें खुदरा मूल्य के रूप में ली जाती हैं।   
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ( CPI ) में मुद्रास्फीति की माप खुदरा स्तर पर की जाती है जिससे उपभोक्ता प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहते हैं। यह पद्धति आम उपभोक्ता पर मुद्रास्फीति के प्रभाव को बेहतर तरीके से मापती है।
  • इसे मासिक आधार पर ज़ारी किया जाता है।
  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने उपभोक्ता‍मूल्य सूचकांक (CPI) के लिये आधार वर्ष को 2010=100 से संशोधित करके 2012=100 कर दिया है।

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित महँगाई दर 

  • केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अगस्‍त 2018 के लिये उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (Consumer Food Price Index- CFPI) पर आधारित महँगाई दर के आँकड़े भी जारी किये। 
  • इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिये CFPI आधारित महँगाई दर 1.22 फीसदी (अनंतिम) रही, जो अगस्‍त 2017 में 1.38 फीसदी थी। 
  • इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिये CFPI आधारित महँगाई दर अगस्‍त 2018 में (-) 1.21 फीसदी (अनंतिम) आँकी गई, जो अगस्‍त 2017 में 1.67 फीसदी थी। 
  • ये दरें जुलाई 2018 में क्रमशः 2.18 तथा (-) 0.36 फीसदी (अंतिम) थीं। 

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक 
(Consumer Food Price Index-CFPI)

  • उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) को देश की आबादी द्वारा उपभोग किये गए खाद्य पदार्थों के खुदरा मूल्यों में परिवर्तन के रूप में मापा जाता है।
  • CFPI के तहत ग्रामीण, शहरी और अखिल भारतीय आधार पर खाद्य मूल्य स्तर में आने वाले परिवर्तन की जानकारी दी जाती है।
  • CFPI का आधार वर्ष 2012 है।

शहरी तथा ग्रामीण दोनों के लिये समग्र आँकड़े

  • यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर किया जाए तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महँगाई दर अगस्‍त 2018 में 3.69 फीसदी (अनंतिम) आँकी गई है, जो अगस्‍त 2017 में 3.28 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, CPI पर आधारित महँगाई दर जुलाई 2018 में 4.17 फीसदी (अंतिम) थी। 
  • इसी तरह यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित महँगाई दर अगस्‍त 2018 में 0.29 फीसदी (अनंतिम) रही है, जो अगस्‍त 2017 में 1.52 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, CFPI पर आधारित महँगाई दर जुलाई 2018 में 1.30 फीसदी (अंतिम) थी।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

  • CSO द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र द्वारा संचालित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में जुलाई 2018 के दौरान 6.6% की वृद्धि हुई।
  • जुलाई 2017 की तुलना में IIP में केवल 1% की वृद्धि हुई। उल्लेखनीय है यह IIP जून 2018 की IIP 6.8% से कम थी।
  • जुलाई में विनिर्माण क्षेत्र में 7% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उपभोक्ता टिकाऊ क्षेत्र में 14.4% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह, समीक्षाधीन माह के दौरान पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 3% की वृद्धि हुई।
  • उद्योगों के संदर्भ में, विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 20 ने जुलाई 2018  के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्शाई, जिसमें 'फर्नीचर निर्माण' श्रेणी में 42.7% की उच्च वृद्धि के साथ, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टिकल उत्पादों के निर्माण में 30.8% और तंबाकू उत्पादों के निर्माण की श्रेणी में 28.4% की वृद्धि हुई।
  • 'पेपर और पेपर उत्पादों का निर्माण' एवं 'रिकॉर्डिंग मीडिया के मुद्रण और प्रसारण' जैसे उद्योग समूहों ने क्रमशः 2.7% और 0.9% की नकारात्मक वृद्धि दर्शाई। 

औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक 
(Index of Industrial Production-IIP)

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक ऐसा सूचकांक है जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे- खनन, विद्युत, विनिर्माण आदि के लिये संवृद्धि (growth) का विवरण प्रस्तुत करता है। 
  • 14 स्रोत एजेंसियों से प्राप्‍त आँकड़ों के आधार पर आईआईपी का आकलन किया जाता है। इन एजेंसियों में औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक विभाग को शामिल किया जाता है। 
  • केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा जारी किया जाने वाला यह सूचकांक किसी चयनित अवधि के दौरान औद्योगिक उत्पादों की एक बास्केट के उत्पादन की मात्रा में अल्पावधि में होने वाले परिवर्तनों का मापन करता है। 
  • CSO ने अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को ग्रहण करने वाले सूचकांकों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये IIP हेतु आधार वर्ष को 2004-05 के बदले 2011-12 कर दिया।

स्रोत : द हिंदू


Helpline Number : 87501 87501
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