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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 33वीं वर्षगाँठ 
Mar 12, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र–2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड-6 : कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य-सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका)

NCRB

चर्चा में क्यों?

  • 11 मार्च, 2018 को NCRB ने अपना 33वाँ स्थापना दिवस मनाया और इस मौके पर "नागरिक सेवा" नामक मोबाइल एप जारी किया है।
  • इस एकल एप से नागरिकों द्वारा पुलिस से संबंधित विभिन्न आवश्यक सेवाओं जैसे-शिकायत पंजीकरण और स्थिति की जाँच, FIR की जानकारी देखना, SOS – Stay Safe, पुलिस स्टेशनों का पता लगाने, आपातकालीन संपर्क सूची, पुलिस स्टेशनों की टेलीफोन निर्देशिका आदि का लाभ उठाया जा सकेगा।
  • इस मौके पर स्वयं NCRB द्वारा विकसित अनुप्रयोगों जैसे-CCTNS परियोजना, फिंगर प्रिंट्स साइंस, वाहन समन्वय, 'तलाश’ मोबाइल एप, नागरिक शिकायत, व्यू FIR, पुलिस स्टेशन लोकेटर तथा NCRB के प्रकाशन ‘भारत में अपराध’, ‘भारत में दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें और आत्महत्या’ तथा ‘जेल सांख्यिकी-भारत’ आदि का भी प्रदर्शन किया गया था।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की स्थापना केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 1986 में इस उद्देश्य से की गई थी कि भारतीय पुलिस को कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये पुलिस तंत्र को सूचना प्रोधोगिकी समाधान और आपराधिक गुप्त सूचनाएँ प्रदान करके समर्थ बनाया जा सके।
  • NCRB नीति संबंधी मामलों और अनुसंधान हेतु अपराध, दुर्घटना, आत्महत्या और जेल संबंधी डाटा के प्रामाणिक स्रोत के लिये नोडल एजेंसी है।
  • NCRB ‘भारत में अपराध’, ‘दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें और आत्महत्या’, ‘जेल सांख्यिकी’ और फिंगर प्रिंट्स पर 4 वार्षिक प्रकाशन जारी करता है।
  • हाल ही में बाल यौन शौषण से संबंधित मामलों की अंडर- रिपोर्टिंग के चलते वर्ष 2017 से NCRB ने बाल यौन शौषण से संबंधित आँकड़ों को भी एकत्रित करना प्रारंभ किया है।
  • ये प्रकाशन आपराधिक आँकड़ों के संदभ में न केवल पुलिस अधिकारियों बल्कि अपराध विज्ञानी, शोधकर्त्ताओं, मीडिया और नीति निर्माताओं के लिये भी सहायक होते है। 
  • NCRB को 2016 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ‘डिजिटल इंडिया अवार्ड’ से भी सम्मानित किया गया था।
  • भारत में पुलिस बलों का कम्प्यूटरीकरण 1971 में प्रारंभ हुआ। NCRB ने CCIS (Crime and Criminals Information System) वर्ष 1995 में, CIPA (Common Integrated Police Application) 2004 में और अंतिम रूप में CCTNS वर्ष 2009 में प्रारंभ किया ।

अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क & सिस्टम 
(Crime and Criminal Tracking Networks & Systems-CCTNS)

  • NCRB भारत सरकार के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत संचालित की जा रही मिशन मोड परियोजना अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क & सिस्टम (CCTNS) का क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग कर रहा है।
  • सरकार ने पुलिस के कामकाज में पारदर्शिता तथा जवाबदेही लाने के लिये 19 जून, 2009 को CCTNS की शुरुआत की थी।
  • इसके बाद नवंबर 2015 में केंद्र सरकार ने CCTNS ट्रैकिंग परियोजना को एक प्रमुख सुधार के रूप में स्वीकार करते हुए ई-कोर्ट के साथ सीसीटीएनएस, ई-जेल, फोरेंसिक और अभियोजन-आपराधिक न्याय प्रणाली के महत्त्वपूर्ण अवयवों को एकीकृत करके एकीकृत आपराधिक न्याय प्रणाली को लागू करने का निर्णय किया था।
  • इस परियोजना का उद्देश्य देश में पुलिस व्यवस्था की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिये एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली तैयार करना है।

CCTNS की प्रगति 

  • CCTNS के माध्यम से 93% से अधिक पुलिस स्टेशनों को जोड़ा जा चुका है और वर्तमान के CCTNS के राष्ट्रीय डाटा बेस में CCIS के 4.25 करोड़ रिकॉर्ड के अतिरिक्त 12.5 करोड़ से ज़्यादारिकॉर्ड हैं।
  • इसके अलावा CCTNS पर 5 लाख से अधिक पुलिस कार्मिकों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने राज्य नागरिक पोर्टल खोल दिये हैं जहाँ नागरिक विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
  • वर्तमान में हरियाणा और राजस्थान जैसे कुछ राज्य पूरी तरह से ऑनलाइन काम कर रहे हैं और 18 राज्यों ने CCTNS से मिलने वाले आउटपुट को अदालतों में पेश करना शुरू कर दिया है।
  • CCTNS प्रेडिक्टिव पुलिसिंग के लिये डाटा एनालिटिक्स के महत्त्व को दर्शाता है जिसके माध्यम से क्राइम डाटा एनालिटिक्स एंड फिंगर प्रिंट साइंस में उत्कृष्ट केंद्रों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • एक बार CCTNS के पूर्ण रूप से प्रारंभ हो जाने पर यह राष्ट्रीय डाटाबेस अपराधी / संदिग्ध व्यक्ति की तलाश करने के साथ-साथ सिटिज़न पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सेवाएँ देना प्रारंभ कर देगा ।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.ई.बी.


Helpline Number : 87501 87501
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