Study Material | Test Series
Drishti


 16 अगस्त तक अवकाश की सूचना View Details

DRISHTI INDEPENDENCE DAY OFFER FOR DLP PROGRAMME

Offer Details

Get 1 Year FREE Magazine (Current Affairs Today) Subscription
(*On a Minimum order value of Rs. 15,000 and above)

Get 6 Months FREE Magazine (Current Affairs Today) Subscription
(*On an order value between Rs. 10, 000 and Rs. 14,999)

Get 3 Months FREE Magazine (Current Affairs Today) Subscription
(*On an order value between Rs.5,000 and Rs. 9,999)

Offer period 11th - 18th August, 2018

स्वच्छता एवं स्टंटिंग : समस्या क्या है? 
Feb 09, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड - 13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र - 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)
(खंड–2 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)

sanitation

चर्चा में क्यों?
विकासशील देशों में निम्न स्तरीय स्वच्छता के बीच उचित रूप से बच्चों का विकास न हो पाना (Stunting) अथवा उम्र के अनुरूप वज़न और ऊँचाई न होना इत्यादि आम बातें हैं। इस संबंध में वैज्ञानिकों द्वारा यह अनुमान व्यक्त किया जाता है कि यह सब इसलिये होता है क्योंकि खुले शौच और अशुद्ध पानी के प्रयोग से बच्चों को मल वाले कीड़ों (faecal bugs) और गंदगी से रूबरू होना पड़ता है। इतना ही नहीं यदि किसी कारणवश इन रोगजनकों के परिणामस्वरूप दस्त जैसी बिमारी नहीं भी होती है तो भी इनके कारण बच्चों की आंत में जलन के साथ-साथ भोजन अवशोषण में बाधा तो उत्पन्न करते ही है।

बांग्लादेश और केन्या के अध्ययन 

  • हाल ही में बांग्लादेश और केन्या में हुए दो अध्ययनों से पता चलता है कि इस परिकल्पना के संबंध में पुनर्विचार किये जाने की आवश्यकता है।
  • इसका कारण यह है कि तकरीबन 13,000 परिवारों को लक्षित करने वाले इन अध्ययनों के अनुसार, चुनिंदा परिवारों में जल शोधन, सैनिटरी शौचालयों और हाथ धोने (water purification, sanitary latrines and hand-washing – WASH) जैसी पहलों को केवल कुछ घरों में क्रियान्वित किया गया है, ये सभी पहलों बच्चों को इन पहलों को स्टंटिंग (stunting) की समस्या से निजाद दिलाने में सक्षम नहीं है।
  • 29 जनवरी को द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित निष्कर्ष के अनुसार इस सबमें दो बातें प्रमुख है।
    ► सर्वप्रथम, यदि इस दिशा में उल्लेखनीय सुधार करना है तो WASH इंटरवेंशन का वृहद स्तर पर प्रसार करना होगा।
    ► दूसरा, WASH इंटरवेंशन के अतिरिक्त अन्य कारक स्टंटिंग के लिये बेहद महत्त्वपूर्ण साबित हो सकते है।
  • उपरोक्त दोनों अध्ययनों को वर्ष 2012 में शुरू किया गया। इन अध्ययनों का मुख्य उद्देश्य यह पता करना था कि क्या wash इंटरवेंशन के माध्यम से पेट की सूजन कम होने के साथ-साथ स्टंटिंग के संबंध में कार्य किया जा सकता है?
  • इन अध्ययनों के अंतर्गत बांग्लादेश एवं केन्या में गर्भवती महिला द्वारा बच्चे को जन्म दिये जाने के बाद दो साल तक स्टंटिंग, दस्त और मृत्यु दर के संबंध में निरंतर बच्चे की जाँच एवं निरीक्षण किया गया। 
  • उपरोक्त अध्ययन में यह बात सामने आई कि wash समूह में शामिल बच्चों की लंबाई में कोई विशेष वृद्धि देखने को नहीं मिली।
  • इतना ही नहीं इन बच्चों के भोजन में पोषक तत्त्वों की मात्रा में वृद्धी करने से कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हुआ। यहाँ सबसे अधिक आश्चर्यचकित करने वाली बात यह थी कि wash इंटरवेंशन के तहत स्वच्छता संबंधी बहुत-सी समस्याओं से निजाद पा ली गई, तथापि बहुत से ऐसे मुद्दे थे जो मल-बाधाओं और आंत-सूजन का पूरी तरह से निवारण करने में सफल नहीं हो पाए।
  • ऐसे जोखिम कई तरह के कारणों से उत्पन्न हो सकते हैं। यह और बात है कि इन बच्चों को घर में एक स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया गया तथापि बाहर के वातावरण और जानवरों के मल के संपर्क में आने से बच्चों के स्वास्थ्य पर वितरित प्रभाव स्पष्ट हुआ हैं।

इस बारे में और अधिक जानकारी के लिये इन लिंक्स पर क्लिक करें:

⇒ राष्ट्रीय पोषण मिशन और ‘कुपोषण’ की समस्या

⇒ राष्ट्रीय पोषण रणनीति 

⇒ भारत में कुपोषण के प्रभाव का मूल्यांकन करें। राष्ट्रीय पोषण रणनीति कुपोषण से लड़ने में किस प्रकार सक्षम है?

⇒ कुपोषण से निपटने के लिये फूड-फोर्टीफिकेशन

⇒ बच्चों में कुपोषण की समस्या: विकास में एक बड़ी बाधा

स्रोत : द हिंदू


Helpline Number : 87501 87501
To Subscribe Newsletter and Get Updates.