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राष्ट्रीय ई-मोबिलिटी कार्यक्रम की शुरुआत 
Mar 08, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 :प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)
(खंड-2 :
समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)
(खंड-9 :
बुनियादी ढाँचा- ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)
(खंड-14 :
संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

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चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ई-मोबिलिटी कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य वाहन निर्माताओं, चार्जिंग अवसंरचना कंपनियों, फ्लीट ऑपरेटरों, सेवा प्रदाताओं सहित संपूर्ण ई-मोबिलिटी पारितंत्र को प्रोत्साहन देना है।

प्रमुख बिंदु 

  • इस कार्यक्रम को ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (Energy Efficiency Services Limited-EESL) द्वारा लागू किया जाएगा, जो इकॉनोमीज़ ऑफ़ स्केल प्राप्त करने के लिये बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के माध्यम से मांग संचयन (Demand Aggregation) सुनिश्चित करेगा।
  • EESL सरकार के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिये उत्तरदायी है। ये विद्युत वाहन सरकार के मौजूदा पेट्रोल और डीजल वाहनों को प्रतिस्थापित करेंगे।
  • EESL ने पिछले वर्ष 10,000 ई-वाहनों की खरीद की थी और इनकी मांग को बढ़ावा देने के लिये 10,000 नए ई-वाहनों के लिये जल्द ही एक नई निविदा जारी करेगा।
  • 2030 तक 30% से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन सुनिश्चित करने हेतु सरकार चार्जिंग अवसंरचना और नीतिगत ढाँचे के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
  • इस कार्यक्रम की लॉन्चिग के दौरान यह भी कहा गया कि देश में चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करने हेतु लाइसेंस की कोई आवश्यकता नहीं होगी और इसके लिये टैरिफ 6 रुपए से भी कम होगा
  • उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने कहा था कि देश में शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य वर्ष 2047 तक प्राप्त किया जा सकेगा। 2030 तक वाहनों की समग्र बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा 40% तक ही ले जाया सकेगा। 

इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभ 

  • इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण और आर्थिक दोनों ही दृष्टिकोणों से लाभकारी हैं। 
  • इन 20,000 इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा देश में प्रतिवर्ष 5 करोड़ लीटर ईंधन की बचत के साथ 5.6 लाख टन से अधिक वार्षिक कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।
  • सामान्य कारों के लिये प्रति किलोमीटर 6.5 रुपए की लागत की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों हेतु यह मात्र 85 पैसे ही है।
  • इससे महँगे पेट्रोलियम आयातों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL)

EESL

  • ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन 2010 में स्थापित EESL चार राष्ट्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों - NTPC लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) लिमिटेड, रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) लिमिटेड और पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का एक संयुक्त उद्यम है।
  • EESL ऊर्जा दक्षता को मुख्यधारा में शामिल करने के लिये देश में विश्व के सबसे बड़े ऊर्जा दक्षता पोर्टफोलियो को लागू कर रहा है।
  • EESL एक सुपर एनर्जी सर्विस कंपनी (ESCO) है। EESL की ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकियों और उपकरणों ने भारत में सालाना 35 बिलियन KWh ऊर्जा की बचत की है।
  • EESL ने अब तक 29 करोड़ LED बल्ब वितरित किये हैं और आत्मनिर्भर व्यावसायिक मॉडल के ज़रिये पूरे देश में 50 लाख LED स्ट्रीटलाइट्स की रेट्रोफिटिंग की है।
  • EESL का उद्देश्य अपने पोर्टफोलियो के विविधीकरण के लिये इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के अनुभव का तथा विदेशी बाज़ारों में नए अवसरों का लाभ उठाना है। EESL ने ब्रिटेन, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी अपने कार्यक्रम शुरू किये हैं।
  • दक्षिण एशिया की पहली और अग्रणी ऊर्जा दक्षता संस्था के रूप में EESL संवर्द्धित ऊर्जा दक्षता पर राष्ट्रीय मिशन (National Mission for Enhanced Energy Efficiency-NMEEE) की बाज़ार संबंधी गतिविधियों का नेतृत्व भी करता है।
  • NMEEE जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत 8 राष्ट्रीय मिशनों में से एक प्रमुख मिशन है।

इस बारे में और अधिक जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें
⇒ विद्युत वाहनों हेतु बैटरी से संबंधित अनुसंधान एवं विकास
⇒ राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन से उत्पन्न चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ

स्रोत : द इंडियन एक्सप्रेस


Helpline Number : 87501 87501
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