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‘रोज़गार’ की परिभाषा में बदलाव लाएगी सरकार 
Dec 05, 2017

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-01: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)

   Empyoment

चर्चा में क्यों?

देश में हाल के कुछ वर्षों में रोज़गार सृजन की हालत चिंतनीय रही है। पर्याप्त रोज़गार सृजन के लिये आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करना सरकार के लिये एक बड़ी चुनौती रही है।
लेकिन, इस समस्या के एक समाधान के तौर पर सरकार ‘रोज़गार’ की परिभाषा में बदलाव करने वाली है और इसके लिये पहले से गठित एक टास्क फोर्स की रिपोर्ट की सहायता लेने वाली है।

टास्क फोर्स की रिपोर्ट से संबंधित महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • ‘टास्क फोर्स ऑन इम्प्रोविंग एम्प्लॉयमेंट डाटा’ (Task Force on Improving Employment Data) नाम से गठित टास्क फोर्स को अपनी अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2018 में देनी है।
  • इसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ‘रोज़गार’ की मौज़ूदा परिभाषा के अनुसार उन्हें भी बेरोज़गार माना जाता है जो कि बड़ी फर्मों में काम नहीं करते या फिर जिन्होंने ‘कॉन्ट्रैक्ट साइन’ नहीं किया है।
  • टास्क फोर्स ने रोज़गार सृजन में मुद्रा (Micro Units Development and Refinance Agency-MUDRA) की महत्त्वपूर्ण भूमिका होने का जिक्र किया है।

Labour buredi

परिभाषा में बदलाव की ज़रूरत क्यों?

  • अधिकारिक आँकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में ‘औपचारिक क्षेत्र’ में रोज़गार सृजन की दर सबसे धीमी रही है।
  • हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि रोज़गार सृजन के संबंध में वास्तविक और व्यावहारिक आँकड़ों को संज्ञान में लिये बिना ही इस तरह के निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं।
  • आधिकारिक आँकड़ों में  केवल औपचारिक क्षेत्र में काम कर रही आबादी को ही रोज़गार प्राप्त जनसंख्या माना जाता है, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र में एक बड़ी आबादी कार्य कर रही है।

क्या है मुद्रा बैंक योजना?

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में सूक्ष्म इकाई विकास एवं पुनर्वित्त एजेंसी लिमिटेड (MUDRA-मुद्रा) बैंक योजना की शुरुआत की गई थी। मुद्रा’ के प्रमुख कार्य हैं:

► सूक्ष्म उपक्रम वित्त पोषण व्यवसायों के लिये नीति एवं दिशा-निर्देश निर्धारित करना।
► एमएफआई इकाइयों का पंजीकरण। 
► एमएफआई इकाइयों का प्रमाणन/मूल्यांकन।
► कर्जधारिता से मुक्ति पाने के लिये ज़िम्मेदार वित्त पोषण प्रचलनों का निर्धारण।
► उचित ग्राहक सुरक्षा सिद्धांतों और वसूली की पद्धतियाँ सुनिश्चित करना। 
► सूक्ष्म उपक्रमों को ऋण देने वाले स्थानीय वित्तदाताओं को प्रशासित करने के लिये एक मानक नियम पत्रों के समूह का विकास।
► सभी के लिये सही प्रौद्योगिकी समाधानों को बढ़ावा देना।
► सूक्ष्म उपक्रमों को कर्ज़ देने वाले ऋणदाताओं को गारंटी मुहैया करने के लिये एक ऋण गारंटी योजना का निर्माण।
► संचालन क्षेत्र में विकास एवं प्रवर्तन गतिविधियों का समर्थन।

स्रोत: द हिन्दू
Source title:Change in definition of ‘employment’ coming
Sourcelink:http://www.thehindu.com/business/Industry/change-in-definition-of-employment-coming/article21261322.ece


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