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लैंगिक पक्षपात पाँच साल से कम उम्र की बालिकाओं की अतिरिक्त मौतों का प्रमुख कारण : लांसेट अध्ययन  
May 15, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)

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चर्चा में क्यों
 ‘द लांसेट ग्लोबल हेल्थ’ जर्नल के अनुसार भारत में पाँच साल से कम उम्र की बालिकाओं की ‘अतिरिक्त मौतों’ (excess deaths) के पीछे लैंगिक पक्षपात प्रमुख कारण है। भारत में पाँच साल से कम उम्र की बालिकाओं की  प्रतिवर्ष 2,39,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं, जिसमें 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 का योगदान है।

प्रमुख बिंदु

  • ये अतिरिक्त मौतें देश के 90 प्रतिशत जिलों में हुई हैं।
  • एक दशक में यह संख्या लगभग 2.4 मिलियन हो जाती है, जो काफी चिंताजनक है।
  • ‘अतिरिक्त मृत्यु’ दोनों लिंगों के अंतर्गत अपेक्षित मृत्यु दर और वास्तव में दर्ज की गई मृत्यु दर के मध्य का अंतर होता है।
  • वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिये शोधकर्त्ताओं ने उन 46 देशों में इन दो संख्याओं के बीच अंतर की गणना की, जहाँ लैंगिक पक्षपात की समस्या नहीं थी। 
  • तत्पश्चात् उन्होंने इस अंतर का उपयोग एक समीकरण को परिभाषित करने के लिये किया, जिसकी सहायता से भारत में अतिरिक्त मौतों की वास्तविक संख्या का पता लगाया जा सका।
  • यह अध्ययन जन्म के पश्चात् की मौतों पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि यह समस्या मुख्य रूप से उत्तर भारत में व्याप्त है।
  • इस क्षेत्र के चार बड़े राज्य (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश) भारत में होने वाली पाँच साल से कम उम्र की बालिकाओं की अतिरिक्त मौतों में दो-तिहाई का योगदान देते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में अतिरिक्त महिला मृत्यु दर (excess female mortality) 30.5 दर्ज की गई, जबकि बिहार में यह आँकड़ा 28.5, राजस्थान में 25.4, और मध्य प्रदेश में यह 22.1 था।
  • 2000-2005 की अध्ययन अवधि में 0-4 वर्ष की आयु वर्ग की बालिकाओं में अतिरिक्त मृत्यु दर का औसत स्तर 18.5 प्रति 1000 जीवित जन्म था। 
  • अध्ययन के अनुसार, इस समस्या से सर्वाधिक प्रभावित ग्रामीण और कृषि गतिविधियों में संलग्न क्षेत्र थे।
  • इन क्षेत्रों में शिक्षा का निम्न स्तर, उच्च जनसंख्या घनत्व, निम्न सामाजिक-आर्थिक विकास जैसी समस्याएँ विद्यमान पाई गईं।

स्रोत : द हिंदू


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