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 मॉडल पेपर: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा - 2018 (सामान्य अध्ययन - प्रश्नपत्र - I)  Download

बेसिक इंग्लिश का दूसरा सत्र (कक्षा प्रारंभ : 22 अक्तूबर, शाम 3:30 से 5:30)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायों को युक्तिसंगत बनाने का प्रयास 
Feb 08, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड - 13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र - 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)
(खंड–2 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)

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चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायों को युक्तिसंगत बनाने को मंजू़री दी गई है। इन निकायों में राष्ट्रीय आरोग्य निधि (Rashtriya Arogya Nidhi - RAN) और जनसंख्या स्थिरता कोष (Jansankhya Sthirata Kosh - JSK) शामिल हैं। इनके कामकाज को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायों को युक्तिसंगत बनाने में अंतर-मंत्रालयी परामर्श तथा इन निकायों के मौजूदा उप-नियमों की समीक्षा शामिल है।
  • राष्ट्रीय आरोग्य निधि का गठन एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में किया गया था, ताकि केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने वाले निर्धन मरीज़ों को वित्तीय चिकित्सा सहायता दी जा सके।
  • अग्रिम धनराशि इन अस्पतालों को चिकित्सा निरीक्षकों को दी जाएगी, जो हर मामले को देखते हुए सहायता प्रदान करेंगे।
  • चूँकि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अस्पतालों को धनराशि प्रदान करता है इसलिये विभाग द्वारा अस्पतालों को सीधे अनुदान दिया जा सकता है।

राष्ट्रीय आरोग्य निधि 

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 1997 में राष्ट्रीय आरोग्य निधि का गठन किया गया। 
  • इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले ऐसे रोगियों को वित्तीय सहायता देना प्रदान करना था जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, ताकि वे सरकारी अस्पतालों में उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकें। 
  • इसके अंतर्गत गंभीर बीमारियों से त्रस्त लोगों को सुपर स्पेशिलिटी वाले अस्पतालों/संस्थानों और सरकारी अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। रोगियों को प्रदत्त वित्तीय सहायता एक मुश्त अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
  • यह राशि उस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को प्रेषित की जाती है जहाँ’ रोगी का इलाज चल रहा होता है।
  • आरएएन, सोसायटी की प्रबंध समिति सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के प्रावधानों के तहत स्वायत्तशासी निकायों को रद्द करने के लिये बैठक करता है।

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जनसंख्या स्थिरता कोष

  • जनसंख्या स्थिरता कोष (राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरीकरण कोष) की स्थापना का उद्देश्य वर्ष 2045 तक सतत् आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए उसी स्तर पर जनसंख्या स्थिरीकरण को बढ़ावा देना और इससे संबंधी कार्य करना है।
  • जनसंख्या स्थिरता कोष को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक स्वायत्त सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया है।
  • सरकार ने इसके लिये 100 करोड़ रुपए की समग्र निधि की व्यवस्था की है ताकि कोष के कार्यकलापों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को यह पूरा कर सके।
  • जनसंख्या स्थिरता कोष को यह अधिदेश प्राप्त है कि वह ऐसी गतिविधियों को उत्प्रेरित करे जो जनसंख्या स्थिर करने और इसे आम जनता के कार्यक्रम में परिवर्तित करने में सहायक हों।

उद्देश्य

  • इसका उद्देश्य जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
  • इसके अंतर्गत लक्षित आबादी के मद्देनज़र विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। 
  • मंत्रालय द्वारा जेएसके के संदर्भ में कोई लगातार वित्तपोषण नहीं किया जाता है।
  • जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों हेतु निजी एवं कॉर्पोरेट वित्तपोषण की ज़रूरत होती है, जिसे जेएसके के माध्यम से पूरा किया जाता है।
  • यह और बात है कि जेएसके, जनसंख्या स्थिरीकरण रणनीतियों में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन एक स्वायतशासी निकाय के रूप में उसका अस्तित्व आवश्यक नहीं होगा।
  • इस प्रकार एक स्वायत्त्तशासी निकाय के रूप में जेएसके को बंद किया जा सकता है क्योंकि निधि के तौर पर उसका कामकाज विभाग द्वारा संभव है।

पृष्‍ठभूमि

  • व्यय प्रबंधन आयोग कि सिफारिशों के आधार पर नीति आयोग ने 19 स्वायत्त्तशासी निकायों की समीक्षा की थी।
  • ये सभी निकाय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन थे और उन्हें सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत कायम किया गया था।
  • नीति आयोग ने समीक्षा समिति को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें इन निकायों को युक्तिसंगत बनाने की सिफारिशें की गई हैं।
  • सरकार का मुख्य प्रयास यह है कि स्वायत्त्तशासी निकायों की समीक्षा की जाए और उन्हें युक्तिसंगत बनाया जाए, ताकि उनके कामकाज, प्रभाव और कार्यकुशलता में सुधार हो, वित्तीय और मानव संसाधनों का उचित इस्तेमाल हो, मौजूदा नीति में उनकी प्रासंगिकता एवं प्रशासन में इज़ाफा हो और उनकी निगरानी उचित तरीके से हो सके।
  • समिति ने आरएएन और जेएसके को बंद करने की तथा उनके कामकाज को मंत्रालय के अधीन लाने की सिफारिश की है।

इस संबंध में अधिक जानकारी के लिये क्लिक करें:

⇒ विशेष: जनसंख्या स्थिरता की ओर बढ़ रहा भारत

स्रोत : द हिंदू, बिज़नेस लाइन एवं पी.आई.बी.


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