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डेली न्यूज़

  • 13 Dec, 2018
  • 26 min read
अंतर्राष्ट्रीय संबंध

माराकेस में संपन्न पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता

चर्चा में क्यों?


अमेरिका के नेतृत्व को लेकर आपत्तियों के बावजूद 164 देशों के बीच लोगों के माइग्रेशन पर पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता संपन्न हुआ।

प्रमुख बिंदु

  • संयुक्त राष्ट्र के इस वैश्विक ऐतिहासिक समझौते जोकि सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित माइग्रेशन पर आधारित है, के लिये माराकेस में हस्ताक्षर किये गए।
  • इस गैर-बाध्यकारी वैश्विक समझौते का उद्देश्य दुनिया भर में माइग्रेशन पर कार्रवाई हेतु समन्वय स्थापित करना है।
  • उल्लेखनीय है कि 18 महीने तक चली बहस और वार्ताओं के बाद 164 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा इस समझौते को अनुमोदित किया गया था।
  • एक साल पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते में शामिल होने से इनकार कर दिया था और तभी से ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, चिली, चेक गणराज्य, इटली, हंगरी, पोलैंड, लातविया, स्लोवाकिया और डोमिनिकन गणराज्य भी इस समझौते से बाहर हो गए थे।

समझौते का उदेश्य

  • दरअसल, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य राज्यों के सहयोग के लिये एक राजनीतिक मंच उपलब्ध कराना था।
  • इस वैश्विक समझौते में कानूनी रूप से प्रवास को स्पष्ट करने और अवैध सीमा पार को हतोत्साहित करने के लिये 23 उद्देश्यों को शामिल किया गया है।
  • यह समझौता संबंधित देशों को एक प्रतिक्रियाशील मोड में मार्गदर्शित कर सकता है। यह सहयोग के लिये एक नया मंच प्रदान कर सकता है और लोगों के अधिकारों तथा राज्यों की संप्रभुता के बीच सही संतुलन खोजने में एक संसाधन भी साबित हो सकता है।
  • यूनिसेफ ने इस समझौते को बच्चों और राज्यों के लिये समान रूप से ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताया।

समझौते की आवश्यकता क्यों?

  • दुनिया भर में 250 मिलियन से अधिक प्रवासियों की संख्या है जो दुनिया की पूरी आबादी का 3% है, लेकिन वैश्विक सकल घरेलू उत्पादन में इनका योगदान केवल 10% है। उल्लेखनीय है कि प्रवासियों द्वारा प्रेषित धन उनके मूल देश विकास में बड़ा योगदान देता है।

प्रवासन हेतु अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Oorganistion for Migration)

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो मानवीय व्यवस्थित प्रवास सुनिश्चित करती है तथा प्रवासियों को पुनर्वास अवसरों की खोज में सहायता प्रदान करती है।
  • इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित है।

उद्देश्य

  • IOM का उद्देश्य प्रवासियों (जिनमें शरणार्थी, विस्थापित तथा गृह प्रदेश से बलात् निष्कासित व्यक्ति शामिल हैं) के संगठित विस्थापन में सहायता देना और आप्रवासी एवं उत्प्रवासी दोनों देशों की ज़रूरतों को पूरा करना तथा प्रवासियों को पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।

स्रोत: द हिंदू


जीव विज्ञान और पर्यावरण

मिस्र के उपजाऊ डेल्टा पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

संदर्भ


मिस्र के उत्तरी हिस्से में नील नदी एक डेल्टा का निर्माण करती है। इस पूरे क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खेत वर्ष भर हरियाली से आच्छादित रहते हैं। इस क्षेत्र को मिस्र का कृषि हार्टलैंड भी कहा जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से यह क्षेत्र तथा ताज़े पानी के इसके महत्त्वपूर्ण संसाधन भी गर्म होती जलवायु की चपेट में आ गए हैं।

Egyptमहत्त्वपूर्ण बिंदु

  • मिस्र की लगभग आधी आबादी इसी उपजाऊ डेल्टा में निवास करती है। इस इलाके का भरण-पोषण करने वाली नील नदी पूरे मिस्र की जल आवश्यकतों के 90 फीसदी की पूर्ति करती है।
  • लेकिन बढ़ता तापमान शक्तिशाली नील नदी को दिन-ब-दिन शुष्क बनाता जा रहा है। वैज्ञानिकों और किसानों का कहना है कि तापमान की वज़ह से समुद्र का बढ़ता जल-स्तर और मृदा की लवणता इस समस्या के कारण हैं।
  • उक्त समस्या अरब क्षेत्र की सबसे घनी आबादी वाले इस देश में खाद्यान्न की समस्या को बढ़ावा दे सकती है।
  • डेल्टा के दक्षिणी हिस्से में खेती के सहारे जीवन-यापन करने वाले किसानों का कहना है कि नील नदी के लगातार सिकुड़ने की वज़ह से अब इस क्षेत्र में पानी नहीं आता है। पानी की कमी की वज़ह से किसानों को भूजल का सहारा लेना पड़ रहा है और बहुतायत मात्रा में पानी की खपत वाली फसलों, जैसे-चावल की बुवाई अब बंद कर दी गई है।
  • मिस्र के अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रकाशित 2016 के एक अध्ययन के अनुसार, 2050 तक यह क्षेत्र मृदा में लवणता की वृद्धि के कारण अपनी प्रमुख कृषि भूमि का 15% हिस्सा खो सकता है।
  • अध्ययन में यह भी कहा गया है कि टमाटर की उपज 50% तक गिर सकती है। गेहूँ और चावल जैसे प्रमुख अनाजों की उपज में भी क्रमश: 18 और 11 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना है।

संभावित उपाय 

  • यह डेल्टा मिस्र की खाद्य सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन समस्याओं का सामना करने के लिये ढेरों उपाय किये जा रहे हैं, मसलन-सोलर पैनल आधारित सिंचाई व्यवस्था, डीज़ल जनरेटर का सूर्यास्त के बाद ही प्रयोग आदि। 
  • हालाँकि, वैज्ञानिकों ने ऐसे उपाय सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर मिस्र जैसे देश जलवायु परिवर्तन से मुकाबला कर सकते हैं। साथ ही कृषि उत्पादन को तापमान प्रतिरोधी फसलों की ओर स्थानांतरित किया जा सकता है।

उत्तरी अफ्रीका के मिस्र जैसे देशों को अनिवार्य रूप से जलवायु अनुकूलन हेतु प्रयास करने होंगे। अन्यथा भविष्य में उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


स्रोत- द हिंदू


शासन व्यवस्था

9 राज्यों ने सौभाग्य के तहत 100% घरेलू विद्युतीकरण लक्ष्य प्राप्त किया

चर्चा में क्यों?


ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अब तक नौ राज्यों ने सौभाग्य योजना के तहत पूर्ण घरेलू विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल किया है। विद्युत मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इन 9 राज्यों में मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, मिज़ोरम, सिक्किम, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।


प्रमुख बिंदु

  • मंत्रालय ने हाल ही में लगभग 10 मिलियन घरों या पहले के लक्ष्य के लगभग एक- चौथाई तक घरेलू विद्युतीकरण लक्ष्य को कम कर दिया था।
  • ऐसा इसलिये किया गया था क्योंकि कुछ उपयोगकर्त्ताओं ने विद्युतीकरण कार्यक्रम का चयन किया है, जबकि कुछ घर नियमित रूप से अधिवासित नहीं हैं। इसके साथ ही अब देश के 16 राज्यों में 100 प्रतिशत घर विद्युतीकृत हैं।
  • महाराष्ट्र, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे कई अन्य राज्य ऐसे हैं जहाँ कुछ ही घर गैर-विद्युतीकृत हैं और उम्मीद है कि वे किसी भी समय 100% विद्युतीकरण का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।
  • विद्युत मंत्रालय के अनुसार, 31 दिसंबर, 2018 तक भारत द्वारा 100 प्रतिशत घरों में विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लेने की उम्मीद की गई है।
  • विद्युत मंत्रालय ने यह भी कहा कि ‘सभी के लिये किफायती एलईडी के ज़रिये उन्नत ज्योति- उजाला’ (Unnat Jyoti by Affordable LED for All –UJALA) योजना के तहत 31.68 करोड़ एलईडी बल्बों का वितरण किया गया है जिसके परिणामस्वरूप 16,457 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष की अनुमानित लागत की बचत हुई।
  • अधिकतम मांग के समय 8,237 मेगावाट की बचत करते हुए प्रतिवर्ष 41.14 बिलियन किलोवाट की अनुमानित ऊर्जा बचत और ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में प्रतिवर्ष 33.32 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड की कमी की गई है।
  • विद्युत मंत्रालय का लक्ष्य मार्च 2019 तक 1.34 करोड़ पारंपरिक स्ट्रीट लाइट्स के स्थान पर स्मार्ट और ऊर्जा कुशल एलईडी बल्बों को प्रतिस्थापित करना है।
  • अब तक 74.79 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाए गए हैं जिसके परिणामस्वरूप अधिकतम मांग के समय 837 मेगावाट की बचत करते हुए प्रतिवर्ष 5.02 बिलियन किलोवाट की अनुमानित ऊर्जा बचत की जा रही है और GHG उत्सर्जन में प्रतिवर्ष 3.46 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड की कमी की जा रही है।

सौभाग्य योजना

  • सौभाग्य योजना का शुभारंभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण सुनिश्चित करने के लिये किया गया। इस योजना के तहत केंद्र सरकार से 60% अनुदान राज्यों को मिलेगा, जबकि राज्य अपने कोष से 10% धन खर्च करेंगे और शेष 30% राशि बैंकों से बतौर ऋण के रूप में प्राप्त करनी होगी।
  • विशेष राज्यों के संदर्भ में केंद्र सरकार योजना का 85% अनुदान देगी, जबकि राज्यों को अपने पास से केवल 5% धन लगाना होगा और शेष 10% बैंकों से कर्ज़ लेना होगा। ऐसे सभी चार करोड़ निर्धन परिवारों को बिजली कनेक्शन प्रदान किया जाएगा, जिनके पास अभी कनेक्शन नहीं है।
  • ये मुफ्त बिजली कनेक्शन गरीब परिवारों को 2018 तक प्रदान किये जाएंगे। केंद्र सरकार द्वारा बैटरी सहित 200 से 300 वाट क्षमता का सोलर पावर पैक दिया जाएगा, जिसमें हर घर के लिये 5 एलईडी बल्ब, एक पंखा भी शामिल है।
  • बिजली कनेक्शन के लिये 2011 की सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना को आधार माना जाएगा। जो लोग इस जनगणना में शामिल नहीं हैं, उन्हें 500 रुपए में कनेक्शन दिया जाएगा और इसे 10 किश्तों में वसूला जाएगा। इस योजना की लागत 16000 करोड़ रुपए से अधिक है।

स्रोत : द हिंदू बिजनेस लाइन


विविध

‘हेल्प अस ग्रीन’ को मिला UN सम्मान

चर्चा में क्यों?


काटोवाइस (पोलैंड) में 12 दिसंबर को एक भारतीय स्टार्टअप, जो मंदिरों के हज़ारों टन पुष्प अपशिष्ट को रिसाइकल करके गंगा नदी को साफ और स्वच्छ बनाने हेतु काम करता है, को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित किया गया।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • संयुक्त राष्ट्र के आह्वान के बाद उत्तर प्रदेश स्थित 'हेल्प अस ग्रीन' (HelpUsGreen) ने मंदिर के कचरे की समस्या के लिये दुनिया के पहले लाभदायक समाधान (profitable solution) के रूप में काम शुरू किया।
  • इस पहल द्वारा अब तक 1,260 महिलाओं को स्टार्टअप के माध्यम से समर्थन दिया गया है, इसी के परिणामस्वरूप वे 19 बच्चों जिनकी माँ मैनुअल स्केवेंजर्स के रूप में काम करती थीं, अब स्कूल जाने लगे हैं।
  • इस स्टार्टअप के द्वारा उत्तर प्रदेश के मंदिरों से दैनिक आधार पर 8.4 टन पुष्प अपशिष्ट एकत्र किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि देश भर में लोग प्रतिदिन 800 मिलियन मीट्रिक टन फूलों को उत्सव के लिये, सुखी जीवन के लिये आशीर्वाद की कामना हेतु देवताओं को उपहारस्वरूप मंदिरों में अर्पित करते हैं।
  • बाद में इन फूलों को गंगा नदी और भारत की अन्य पवित्र नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है जो दुर्भाग्य से नदियों के पारिस्थितिक तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
  • इस पहल के तहत एकत्र किये गए 'फूलों की पुनर्चक्रण तकनीक’ के माध्यम से इन पवित्र फूलों से हस्तनिर्मित चारकोल/धुँआ मुक्त धूपबत्ती, कार्बनिक वर्मीकंपोस्ट और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग सामग्री आदि तैयार की जाती है।

पहल के लाभ

  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस भारतीय पहल के साथ काम करने वाली महिलाओं द्वारा अब तक 11,060 मीट्रिक टन मंदिरों से एकत्र अपशिष्ट यानी फूलों को रिसाइकल किया गया है।
  • मंदिरों के इस कचरे को रिसाइकल किये जाने से नदी में प्रवेश करने वाली 110 मीट्रिक टन रासायनिक कीटनाशकों को रोकने का प्रयास किया गया है तथा इससे 73 मैनुअल स्केवेंजर परिवारों की आय में कम-से-कम छह गुना वृद्धि हुई है।
  • इस पहल ने महिलाओं की भागीदारी और भारतीय सामुदायिक भावना को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पहचान दिलाई है।
  • इसके अतिरिक्त इस पहल ने हमारी आध्यात्मिकता में पहले से ही विद्यमान स्वच्छता के आदर्श को पुनःस्थापित करने का प्रयास किया है।

स्रोत: बिज़नेस लाइन


प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स : 13 दिसंबर, 2018

अंडमान सी क्रेट्स (Andaman Sea Kraits)

andaman sea kraits

उभयचर साँपों की दो प्रजातियों पीले होंठो वाले (Yellow lipped) तथा नीले होंठों वाले (Blue lipped) अंडमान सी क्रेट्स (Andaman Sea Kraits) को अंडमान के समुद्री तटों पर पाए जाने वाले वृक्षों (विशेष रूप से उखड़े हुए खिरनी (Manilkara littoralis ), एक मैंग्रोव पेड़) की जड़ों पर देखा गया है।

  • अंडमान सी क्रेट्स रंगीन समुद्री साँप हैं जो अंडमान द्वीप के लिये स्थानिक हैं।
  • अंडमान सी क्रेट्स जो अधिकांशतः रात्रिचर होते हैं, मूंगा चट्टानों (Coral Reefs) में अपने शिकार की तलाश करते हैं। यद्यपि वे पानी में बहुत अधिक समय बिताते हैं लेकिन भोजन को पचाने, अंडे देने और अपने शरीर के ऊपर की मृत त्वचा को उतारने के लिये ज़मीन पर वापस आते हैं।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये समुद्र तट को साफ करने हेतु उखड़े हुए पेड़ों को हटाने से समुद्री क्रेट्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • रेतीले समुद्र तटों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने, रेत खनन और पर्यटन जैसी गतिविधियों पर विनियमन को लागू करने से उपेक्षा का शिकार हुए अंडमान सी क्रेट्स को बचाने में मदद मिल सकती है।

‘आयुषाचार्य’ सम्मेलन ('Ayushacharya' Conference)


अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (All India Institute of Ayurveda-AIIA) ने 10 और 11 दिसंबर, 2018 को नई दिल्ली में जनस्वास्थ्य प्रोत्साहन के लिये दिनचर्या (Daily Regimen) और ऋतुचर्या (Seasonal Regimen) पर ‘आयुषाचार्य’ सम्मेलन आयोजित किया। पूरे देश से लगभग 200 शिक्षाविदों, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया।


AIIA

AIIA

      • अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान है जिसकी परिकल्पना आयुर्वेद के क्षेत्र में एक शीर्ष संस्थान के रूप में की गई है।
      • इसका उद्देश्य आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक औजारों एवं प्रौद्योगिकी के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।


बायोब्लिट्ज़ (BioBlitz)

      • हाल ही में बंगलूरू के नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज़ द्वारा आयोजित बायोब्लिट्ज़ में पूरे भारत से लोगों ने भाग लिया।
      • प्रतिभागियों ने अपने आस-पास के परिसरों में वृक्षों का अवलोकन किया तथा वृक्षों की प्रजातियों, इनका स्थान, फूलों का अनुपात, फल और पत्तियों की पूरी जानकारी एकत्रित की।
      • यह कुछ वर्षों में पूरे भारत में वृक्षों के अध्‍ययन (जलवायु संबंधी प्रभावों की दृष्टि से) के लिये आधार तैयार करेगा जो वैज्ञानिकों को यह विश्लेषण करने में मदद करेगा कि जलवायु परिवर्तन भविष्य में वृक्षों में बदलाव ला रहा है या नहीं।

क्या है बायोब्लिट्ज़ (BioBlitz)?

    • बायोब्लिट्ज़ एक ऐसी घटना है जो छोटी अवधि के दौरान किसी विशिष्ट क्षेत्र में जितनी संभव हो उतनी प्रजातियों को खोजने और पहचानने पर केंद्रित होती है।
    • इसे जैविक सूची या जैविक जनगणना के रूप में भी जाना जाता है जिसका प्राथमिक लक्ष्य पौधों, जानवरों, कवक और किसी स्थान पर पाए जाने वाले अन्य जीवों की समग्र गणना प्राप्त करना है।
    • यह कई मायनों में किसी वैज्ञानिक सूची से अलग होती है। वैज्ञानिक सूची आमतौर पर जीवविज्ञानी, भूगोलवेत्ता और अन्य वैज्ञानिकों तक ही सीमित होती है, जबकि बायोब्लिट्ज़ स्वयंसेवी वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम परिवारों, छात्रों, शिक्षकों और समुदाय के अन्य सदस्यों को एक साथ लाता है।
    • उक्त अंतर बायोब्लिट्ज़ को एक अद्वितीय जैविक सर्वेक्षण बनाते हैं जो किसी प्रदत्त क्षेत्र की प्रकृति और इंसानों के बीच संबंधों को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य जैव विविधता को बेहतर ढंग से समझने और संरक्षित करने हेतु नागरिकों को सशक्त बनाकर स्थानीय प्राकृतिक स्थलों को बढ़ावा देना और उनमें सुधार लाना है।

विविध

Rapid Fire 13 December

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की हालिया म्यांमार यात्रा के दौरान भारत ने रखाइन प्रांत में विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिये बनाए गए 50 घर म्यांमार को सौप दिये; म्यांमार के साथ हुए समझौते के तहत भारत 250 ऐसे घर बनवा रहा है; इसके अलावा म्यांमार में न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिये हुए समझौते
  • पोलैंड के काटोवाइस में जलवायु सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप ‘हेल्प अस ग्रीन’ को मिला विशेष UN सम्मान; 13 अन्य देशों के स्टार्टअप्स के साथ यूनाइटेड नेशन क्लाइमेट एक्शन अवार्ड के विजेता के तौर पर किया गया सम्मानित; कानपुर का यह स्टार्टअप मंदिरों में चढ़ाए जाने वालों फूलों को एकत्र कर उन्हें रिसाइकिल कर गंगा को प्रदूषण से बचाने का करता है काम; संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में इसे दिया गया है ‘फ्लावरसाइकिलिंग’ नाम
  • भारतीय रेल में शिमला-कालका हैरिटेज ट्रैक पर चलाया गया विस्टाडोम कोच; 12mm मोटे शीशे की बनाई गई है इस कोच की छत; दरवाज़ों और खिड़कियों पर भी हार्ड अनब्रेकेबल यानी कठोर शीशे का किया गया है इस्तेमाल; पुराने द्वितीय श्रेणी के कोचों को किया गया है रेनोवेट, सीटों को बेहतर बनाया गया है; एक बार में 36 लोग बैठ सकते हैं विस्टाडोम कोच में
  • गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव प्रणाली औपचारिक रूप से मुम्बई की नौसेना गोदी में शामिल; भारतीय नौसेना की यह थर्ड जेनरेशन आधुनिक पनडुब्बी बचाव प्रणाली है, जो विश्वभर में वर्तमान में संचालित अत्याधुनिक प्रणालियों में से एक है; यह किसी खराब पनडुब्बी को 650 मीटर तक गहरे समुद्र में बचा सकती है; भारतीय नौसेना अब ऐसे देशों में शामिल हो गई है, जिनके पास खराब पनडुब्बी के चालक दल की तलाश करने, उसका पता लगाने और बचाव की बेहतर क्षमता है
  • बी.बी. व्यास ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार पद से दिया इस्तीफा; बनाए गए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्य; फिलहाल UPSC में अध्यक्ष अरविंद सक्सेना सहित आठ सदस्य; 11 तक हो सकती है सदस्यों की संख्या
  • बाज़ार नियामक सेबी ने स्टार्टअप लिस्टिंग के नियमों को उदार बनाया; निवेशकों के रिटर्न की सुरक्षा के लिये म्यूचुअल फंड्स को दबाव वाली संपत्तियों को अलग करने की मिली अनुमति; 50% से अधिक सम्मिलित स्वामित्व वाली विदेशी इकाइयों को माना जाएगा एक ही निवेशक समूह; इंस्टीट्यूशनल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का नाम बदलकर ‘इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म’ करने को भी मिली मंज़ूरी
  • दबावग्रस्त विद्युत परियोजनाओं पर उच्चस्तरीय पैनल की सिफारिशों पर विचार करने के लिये केंद्र सरकार ने वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में किया मंत्री समूह का गठन; सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु, रेल मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिजली मंत्री आर.के. सिन्हा इसके सदस्य; यह मंत्री समूह कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्हा की अध्यक्षता वाले पैनल की रिपोर्ट पर करेगा विचार
  • ब्रिटेन ने गोल्डन वीज़ा रद्द करने का फैसला लियावापस; भारतीयों सहित काफी अमीर विदेशी नागरिक करते हैं इस श्रेणी के वीज़ा का इस्तेमाल; गोल्डन वीज़ा से लोगों को ब्रिटेन में त्वरित निपटान के अधिकार हो जाते हैं हासिल; ब्रिटिश सरकार ने इस वीज़ा के दुरुपयोग की आशंका के चलते लिया था यह फैसला
  • मनिका बत्रा बनीं Breakthrough Table Tennis Award पाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी; दक्षिण कोरिया के इंचियोन में अंतर्राष्ट्रीय टेबल टेनिस फेडरेशन स्टार अवॉर्ड्स समारोह में दिया गया यह पुरस्कार; अर्जुन अवार्ड से सम्मानित मनिका को 2018 में मिली करियर की बेस्ट रैंकिंग; विश्व में 52वाँ स्थान हासिल कर सबसे उच्च रैंक हासिल करने वाली भारत की महिला खिलाड़ी बनीं

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