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  • 20 Nov 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 3 आपदा प्रबंधन

    सेंदाई घोषणा के तहत वर्ष 2030 तक के लिये निर्धारित लक्ष्य और प्राथमिकता वाले क्षेत्र क्या हैं? इस दिशा में भारत सरकार द्वारा किये गए प्रयासों की चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

    उत्तर

    दृष्टिकोण:

    • परिचय में सेंदाई फ्रेमवर्क के बारे में संक्षिप्त में बताएँ।
    • सेंदाई घोषणा के तहत वर्ष 2030 तक प्राप्त होने वाले लक्ष्यों और प्राथमिक क्षेत्रों के बारे में बताएँ।
    • उक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा कीजिये।
    • उपयुक्त निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये 18 मार्च, 2015 में जापान के सेंदाई में संपन्न तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में ह्योगो फ्रेमवर्क के एक्शन (2005-2015) के उपकरण के रूप में अपनाया गया था।
    • यह एक गैर-बाध्यकारी समझौता है, जिसका पालन भारत सहित हस्ताक्षरकर्त्ता राष्ट्र स्वैच्छिक आधार पर करने का प्रयास करेंगे।

    प्रारूप:

    वैश्विक लक्ष्य

    • वर्ष 2030 तक वैश्विक आपदा मृत्यु दर को कम करना इसके तहत 2005-2015 की अवधि की तुलना में 2020-2030 के दशक में प्रति 100,000 वैश्विक मृत्यु दर को कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
    • वर्ष 2030 तक विश्व स्तर पर प्रभावित लोगों की संख्या को कम करना।

    जीडीपी के संबंध में प्रत्यक्ष आपदा आर्थिक नुकसान को कम करना।

    • महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांँचे एवं बुनियादी सेवाओं के विघटन के लिये आपदा क्षति को कम करता है।
    • वर्ष 2020 तक राष्ट्रीय और स्थानीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों वाले देशों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि करना।
    • विकासशील देशों के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
    • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपदा जोखिम की जानकारी तथा आकलन के लिये विविध खतरों की पहचान करना एवं उनका समाधान करना।

    सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित प्राथमिकता वाले क्षेत्र:

    (i) आपदा जोखिम को समझना।
    (ii) आपदा जोखिम प्रबंधन के लिये आपदा जोखिम शासन के प्रयासों को मज़बूत करना।
    (iii) आपदा जोखिम में निवेश कर आपदा जोखिम को कम करना।
    (iv) आपदा जोखिम की प्रभावी प्रतिक्रिया के लिये आपदा तैयारी को बढ़ाना और पुनः बहाली, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का बेहतर निर्माण करना।

    भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

    • यह एक गैर-बाध्यकारी समझौता है जिसका पालन भारत सहित हस्ताक्षरकर्त्ता राष्ट्र स्वैच्छिक आधार पर पालन करने का प्रयास करेंगे।
      • भारत सेंदाई फ्रेमवर्क की सिफारिशों का पालन कर और वैश्विक रूप से स्वीकृत सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर संपूर्ण आपदा प्रबंधन चक्र में सुधार करके वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान का प्रयास कर रहा है।
    • भारत द्वारा सेंदाई फ्रेमवर्क का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2016 में भारत ने सेंदाई फ्रेमवर्क पर आधारित देश की पहली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) पर एक दस्तावेज जारी किया साथ ही भारत सेंदाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये प्रतिबद्ध है।
      • इस योजना की खास बात यह है कि यह सेंदाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। इस योजना को शुरू करके भारत ने उप-राष्ट्रीय स्तर पर सेंदाई फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन का रास्ता भी खोल दिया है, जिसे वैश्विक स्तर पर अन्य देशों द्वारा दोहराया जा सकता है।
    • आपदा जोखिम में कमी के लिये एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन एक अंतर सरकारी सम्मेलन है जिसे आपदा न्यूनीकरण के बारे में चर्चा करने के लिये आयोजित किया जाता है। आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये सेंदाई फ्रेमवर्क की शुरुआत के बाद नवंबर 2016 में नई दिल्ली में इसकी उद्घाटन बैठक आयोजित की गई थी। इसके उद्देश्य हैं-
      • सरकारों द्वारा सेंदाई में की गई प्रतिबद्धताओं को दृश्य कार्रवाई में परिवर्तित करना।
      • सेंदाई फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन और निगरानी की दिशा तय करना।

    निष्कर्ष:

    • आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु लोगों को शिक्षित करना समय की ज़रूरत है जिसे विकेंद्रीकृत योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और नियंत्रण के माध्यम से किया जा सकता है।
    • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये जिन प्रमुख रणनीतियों को प्रमुखता मिलनी चाहिये उनमें राष्ट्रीय प्रणालियों और क्षमताओं को संस्थागत बनाना, स्थानीय स्तर पर शासन तंत्र को मज़बूत करना, सामुदायिक लचीलापन, जोखिमों के प्रति समुदायों की भेद्यनता को कम करना तथा सार्वजनिक-निजी लोगों की भागीदारी इत्यादि को बढ़ावा देना है।
    • समग्र मानव विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन हेतु एक रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है जो सतत विकास लक्ष्यों, नीतियों और प्रथाओं को एकीकृत करती हो तथा जिसमें लोगों की कमज़ोरियों के बजाय उनकी ताकत का दोहन/प्रयोग किया जा सके।
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