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 मॉडल पेपर: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा - 2018 (सामान्य अध्ययन - प्रश्नपत्र - I)  Download

बेसिक इंग्लिश का दूसरा सत्र (कक्षा प्रारंभ : 22 अक्तूबर, शाम 3:30 से 5:30)

स्वच्छ वायु अभियान 
Feb 09, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र -3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

Clean-Air-Campaign

चर्चा में क्यों?

  • 10 फरवरी, 2018 से दिल्ली में ‘स्वच्छ वायु अभियान’ (Clean Air Campaign) शुरू किया जाएगा जो 23 फरवरी तक चलेगा।
  • एक पखवाड़े तक चलने वाला ‘स्वच्छ वायु अभियान’ राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर में महत्त्वपूर्ण कटौती करने का एक गंभीर प्रयास है, जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार मिलकर दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ इस मुहिम का संचालन करेंगे।

प्रमुख बिंदु 

  • प्रदूषण स्तर में कमी लाने के लिये इस अभियान को केवल इन्हीं दो सप्ताहों तक सीमित न रखते हुए पूरे वर्ष लगातार चलाया जाएगा। प्रदूषण हमारी आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने के साथ ही इससे हमारी राष्ट्रीय छवि भी जुड़ी हुई है। 
  • इसके समाधान के लिये शुरू किये जा रहे इस अभियान के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), दिल्ली सरकार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), नगर निगम और NDMC के अधिकारियों के 70 संयुक्त दल गठित किये जाएंगे।
  • ये दल दिल्ली के सभी प्रशासनिक प्रभागों का दौरा करेंगे, प्रदूषण के कारणों की निगरानी करेंगे और उपचारात्मक उपाय करेंगे। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध मौके पर ही दंडात्मक कार्रवाई किये जाने का भी प्रावधान शामिल है।
  • अभियान के तहत वाहनों के लिये प्रदूषण नियंत्रण उपाय, वाहन चालन अनुशासन और दिल्ली में बिजली संयंत्रों का निरीक्षण किया जाना भी शामिल हैं ताकि प्रदूषण में कमी लाई जा सके।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा इस अभियान में दिल्ली पुलिस, शिक्षा संस्थान, गैर-सरकारी संगठन, उद्योग, प्रमुख औद्योगिक इकाइयाँ, आवासीय कल्याण संघ और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों इत्यादि को भी शामिल किया जाएगा।
  • इसके अलावा प्रदूषण में कमी लाने के लिये अभियान के दौरान संगोष्ठियों का आयोजन भी किया जाएगा। इनमें वायु प्रदूषण एवं स्वास्थ्य कार्यशाला, वायु प्रदूषण रोकने वाली प्रौद्योगिकियों, गैर-सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटी, नागरिकों इत्यादि का सहयोग लिया जाएगा।
  • अभियान के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यावरण मंत्रियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।
  • दैनिक प्रगति का जायजा लेने के लिये CPCB में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जो केंद्र और राज्य सरकारों के साथ अपनी रिपोर्ट साझा करेगा और सुधार के संबंध में सुझाव देगा।

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिये किये गए अन्य उपाय 

  • दिल्ली में प्रदूषण का एक मुख्य कारण पड़ोसी राज्यों में पराली दहन है जिसके संबंध में बजट में भी विशेष प्रावधान किया गया है। इसके तहत हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सरकारों को पराली दहन की समस्या को हल करने और फसल अवशेषों का प्रबंध करने के लिये सब्सिडी मशीनरी में समर्थन देने हेतु एक विशेष योजना शुरू की जाएगी।
  • उल्लेखनीय है कि हाल में ‘ग्रीन गुड डीड्स’ नामक एक राष्ट्रीय अभियान लॉन्च किया गया है। इस जनोन्मुखी अभियान का उद्देश्य लोगों और छात्रों को विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में संवेदनशील बनाना है।
  • पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार दिल्ली में रोजाना 131 टन धूल पैदा होती है, जिस पर नियंत्रण करने मात्र से वायु प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकती है। दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर होने वाली निर्माण गतिविधियों से वायु प्रदूषण बढ़ता है।
  • केंद्र ने हवा में धूल कणों को रोकने के लिये नियमों को अधिसूचित किया है, जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
    1 जिन इमारती या संरचनात्मक परियोजनाओं के लिये पर्यावरण अनुमति आवश्यक है, उन्हें धूल कणों को कम करने के उपायों सहित स्वीकृत पर्यावरण प्रबंधन योजना के बिना क्रियान्वित नहीं किया जाएगा।
    2. निर्माण स्थलों से जुड़ी सड़कों को पक्का किया जाना अनिवार्य होगा।
    3. धूल कणों में कटौती करने वाले उचित उपायों के अभाव में मिट्टी की खुदाई नहीं की जाएगी।
    4. मिट्टी का ढेर या बालू या निर्माण मलबा या किसी प्रकार की निर्माण सामग्री को खुले में नहीं छोड़ा जाएगा।
    5. इमारत की ऊँचाई के एक-तिहाई आकार के बराबर और अधिकतम दस मीटर की ऊँचाई तक के विंड-ब्रेकर उपलब्ध कराए जाएंगे।
    6. पानी के छिड़काव की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
    7. धूल कणों में कटौती करने के उपायों को निर्माण स्थल पर स्पष्ट रूप में प्रदर्शित करना होगा, ताकि लोग उसे आसानी से देख सकें।

स्रोत : द हिंदू एवं इकनॉमिक टाइम्स


Helpline Number : 87501 87501
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