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डेली न्यूज़

  • 24 Jan, 2019
  • 33 min read
भारत-विश्व

‘सार्क के सदस्य देशों के लिये मुद्रा विनिमय प्रबंध के प्रारूप’ में संशोधन को मंज़ूरी

चर्चा में क्यों?


प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘सार्क के सदस्‍य देशों के लिये मुद्रा विनिमय प्रबंध के प्रारूप’ ('Framework on Currency Swap Arrangement for SAARC Member Countries) में संशोधन को कार्योत्‍तर मंज़ूरी दे दी है।

  • यह मंज़ूरी अनुरोधकर्त्ता सार्क (SAARC) सदस्‍य देशों  की परिस्थितियों और भारत की घरेलू ज़रूरतों पर उपयुक्‍त रूप से ध्‍यान देने के पश्‍चात् दी गई है।
  • इसका उद्देश्य दो बिलियन डॉलर की सुविधा के तहत परिचालित 400 मिलियन डॉलर तक की राशि के ‘अतिरिक्‍त विनिमय’ (Standby Swap') को समाहित करना तथा विनिमय की अवधि, रोल ओवर आदि जैसे परिचालन के तौर-तरीकों के संबंध में लचीलापन लाना है।

स्वीकृत प्रारूप से क्या लाभ होंगे?

  • वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में अत्‍यधिक वित्‍तीय जोखिम और अस्थिरता के कारण सार्क सदस्‍य देशों की अल्‍पावधि विनिमय आवश्‍यकताएँ पूर्व सहमतियों से अधिक हो सकती हैं।
  • स्‍वीकृत सार्क प्रारूप के अंतर्गत ‘अतिरिक्‍त विनिमय’ को समाहित किये जाने से प्रारूप में आवश्‍यक लचीलापन आएगा तथा भारत, सार्क विनिमय प्रारूप (SAARC Swap Framework) के अंतर्गत निर्धारित मौजूदा सीमा से अधिक राशि की विनिमय सुविधा प्राप्‍त करने संबंधी सार्क सदस्‍य देशों के वर्तमान अनुरोध पर तत्‍काल प्रत्‍युत्‍तर देने में समर्थ हो सकेगा।

सार्क सदस्‍य देशों के लिये मुद्रा विनिमय समझौते से संबंधित प्रारूप

  • मंत्रिमंडल ने सार्क सदस्‍य देशों के लिये मुद्रा विनिमय समझौते से संबंधित प्रारूप (Framework on Currency Swap Arrangement for SAARC Member Countries) को विदेशी मुद्रा की अल्‍पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये वित्‍तीय सहायता प्रदान करने या दीर्घकालिक व्‍यवस्‍था होने तक अथवा अल्‍पकाल में ही मसले का समाधान होने तक भुगतान संतुलन के संकट को दूर करने के उद्देश्य से 01 मार्च, 2012 को मंज़ूरी दी थी।
  • इस सुविधा के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) प्रत्‍येक सार्क सदस्‍य देश को उसकी दो महीने की आयात आवश्‍यकताओं के आधार पर और कुल मिलाकर दो बिलियन डॉलर से कम राशि के डॉलर, यूरो या भारतीय रुपए में विभिन्‍न आकार में विनिमय की पेशकश करता है।
  • उपरोक्त सुविधा के तहत प्रत्‍येक देश के लिये न्‍यूनतम 100 मिलियन डॉलर और अधिकतम 400 मिलियन डॉलर की विनिमय राशि निर्धारित की गई है।
  • प्रत्‍येक आहरण तीन महीने की अवधि का और अधिकतम दो रोल-ओवर (Rollovers) तक का होगा।
  • RBI अतिरिक्‍त विनिमय (Standby Swap) की सुविधा प्राप्‍त कर रहे सदस्‍य देशों के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) के साथ द्विपक्षीय परिचालन के विवरण के बारे में विचार-विमर्श करेगा।

मुद्रा विनिमय समझौता क्या है?

  • मुद्रा विनिमय समझौता दो देशों के बीच ऐसा समझौता है जो संबंधित देशों को अपनी मुद्रा में व्यापार करने और आयात-निर्यात के लिये अमेरिकी डॉलर जैसी किसी तीसरी मुद्रा को बीच में लाए बिना पूर्व निर्धारित विनिमय दर पर भुगतान करने की अनुमति देता है।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (SAARC)

saarc

  • सार्क (South Asian Association for Regional Cooperation-SAARC) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है।
  • इस समूह में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं। 2007 से पहले सार्क के सात सदस्य थे, अप्रैल 2007 में सार्क के 14वें शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान इसका आठवाँ सदस्य बन गया था।
  • सार्क की स्थापना 8 दिसंबर, 1985 को हुई थी और इसका मुख्यालय काठमांडू (नेपाल) में है। सार्क का प्रथम सम्मेलन ढाका में दिसंबर 1985 में हुआ था।
  • प्रत्येक वर्ष 8 दिसंबर को सार्क दिवस मनाया जाता है। संगठन का संचालन सदस्य देशों के मंत्रिपरिषद द्वारा नियुक्त महासचिव द्वारा की जाती है, जिसकी नियुक्ति तीन साल के लिये देशों के वर्णमाला क्रम के अनुसार की जाती है।

स्रोत : पी.आई.बी


अंतर्राष्ट्रीय संबंध

फ्यूचर ऑफ वर्क रिपोर्ट: ILO

चर्चा में क्यों?


हाल ही में कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग (Global Commission On The Future of Work) ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कामकाज की दुनिया (World of Work) में आए अभूतपूर्व परिवर्तनों के कारण उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिये दुनिया भर की सरकारों से उचित कदम उठाने का आह्वान किया गया है।


प्रमुख बिंदु

  • कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग (Global Commission On The Future of Work) द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘एक बेहतर भविष्य के लिये कामकाज’ (Work for a Brighter Future) है।
    कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग ने 15 महीने की मेहनत के बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया है जिसमें व्यापार, सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के 27 प्रतिनिधि शामिल थे।
  • अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में नई खोज़ों और तकनीकों के इस्तेमाल से रोज़गार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं लेकिन निर्णायक प्रयासों और नीतियों में बदलाव के ज़रिये अगर उन्हें नहीं संवारा गया तो फिर कार्यस्थलों पर असमानताएँ और अनिश्चितताएँ और गहरा जाएंगी।
  • श्रम संगठन की स्थापना 1919 में पहले विश्वयुद्ध के बाद हुई थी और 2019 में उसका शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है।
  • कामकाज के भविष्य पर श्रम संगठन द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कामकाजी जीवन को बेहतर बनाने, विकल्पों का दायरा बढ़ाने, लैंगिक खाई को पाटने और वैश्विक असमानता से हुए नुकसान की भरपाई के अनगिनत अवसर हमारे सामने हैं।
  • लेकिन इन सभी अवसरों को भुनाने के लिये हमें उचित कदम उठाने होंगे। निर्णायक और उचित प्रयासों के बगैर हम एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे होंगे जहाँ पहले से ही कायम असमानताएँ तथा अनिश्चितताएँ और अधिक बढ़ जाएंगी।
  • आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में नई तकनीक, जनसांख्यिकी और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए बेहतरी की ओर कदम बढ़ाने हेतु विश्वव्यापी और सामूहिक मौजूद करने की अपील की गई है। इसके तहत नीतिगत बदलावों को महत्त्वपूर्ण बताया गया है।
  • रिपोर्ट बताती है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, स्वचालित यंत्रों और रोबोटिक्स का प्रभाव नौकरियो पर ज़रूर पड़ेगा। इन क्षेत्रों में नई नौकरियाँ भी पैदा होंगी लेकिन ऐसे अवसरों को पाने के लिये अपने कौशल को भी लगातार निखारना पड़ेगा और सीखने की प्रक्रिया में पीछे रह गए लोग इनका लाभ नहीं उठा पाएंगे।
  • तकनीकी आधुनिकीकरण और हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण की कोशिशों से नई नौकरियों के सृजन की भी संभावना दिखती है।

कुछ प्रमुख सिफारिशें

  • एक सार्वभौमिक श्रम गारंटी जो श्रमिकों के मौलिक अधिकारों, जैसे- पर्याप्त मज़दूरी, काम के घंटे की तय सीमा और सुरक्षित तथा स्वस्थ कार्यस्थल की सुरक्षा प्रदान करती हो।
  • जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी जो जीवन-चक्र में लोगों की ज़रूरतों में सहायक साबित हो सके।

मानवीय पहलुओं पर आधारित एजेंडा

  • दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफन लोवेन की सहअध्यक्षता में वैश्विक आयोग ने मानवीय पहलुओं पर आधारित एजेंडा पर काम किया जिसमें लोगों, संस्थानों और टिकाऊ रोज़गार में निवेश करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
  • इस रिपोर्ट से दुनिया में कामकाज के तरीको में आ चुके बदलाव और भविष्य में आने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।
  • इस रिपोर्ट से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर साझेदारी और आपसी मेलजोल का रास्ता खुलना चाहिये ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और समाज में समानता, न्याय तथा समावेशिता कायम करना सुनिश्चित किया जा सके।

कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग (Global Commission On The Future of Work)

  • कामकाज के भविष्य पर ILO द्वारा वैश्विक आयोग का गठन ILO की पहल के दूसरे चरण को चिह्नित करता है।
  • इसका कार्य कामकाज के भविष्य की गहराई से जाँच करना है जो 21वीं सदी में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु विश्लेषणात्मक आधार प्रदान कर सके।
  • आयोग के उद्देश्यों में कामकाज की दुनिया में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान करना तथा भविष्य में इनसे निपटने के तरीकों के बारे में व्यावहारिक सिफारिशें करना भी शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization - ILO)

  • यह ‘संयुक्त राष्ट्र’ की एक विशिष्ट एजेंसी है, जो श्रम-संबंधी समस्याओं/मामलों, मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानक, सामाजिक संरक्षा तथा सभी के लिये कार्य अवसर जैसे मामलों को देखती है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र की अन्य एजेंसियों से इतर एक त्रिपक्षीय एजेंसी है, अर्थात् इसके पास एक ‘त्रिपक्षीय शासी संरचना’ (Tripartite Governing Structure) है, जो सरकारों, नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों का (सामान्यतः 2:1:1 के अनुपात में) इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करती है।
  • यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ शिकायतों को पंजीकृत तो कर सकती है, किंतु यह सरकारों पर प्रतिबंध आरोपित नहीं कर सकती है।
  • इस संगठन की स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् ‘लीग ऑफ नेशन्स’ (League of Nations) की एक एजेंसी के रूप में सन् 1919 में की गई थी। भारत इस संगठन का एक संस्थापक सदस्य रहा है।
  • इस संगठन का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा में स्थित है।
  • वर्तमान में 187 देश इस संगठन के सदस्य हैं, जिनमें से 186 देश संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से हैं तथा एक अन्य दक्षिणी प्रशांत महासागर में अवस्थित ‘कुक्स द्वीप’ (Cook's Island) है।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 1969 में इसे प्रतिष्ठित ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ प्रदान किया गया था।

स्रोत- ILO और संयुक्त राष्ट्र


शासन व्यवस्था

वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय पीठ (GSTAT) के गठन को मंज़ूरी

चर्चा में क्यों?


प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय पीठ (National Bench of the Goods and Services Tax Appellate Tribunal-GSTAT) के गठन को मंज़ूरी दे दी है।

  • अपीलीय अधिकरण (Appellate Tribunal) की राष्ट्रीय पीठ नई दिल्ली में स्थित होगी। GSTAT की अध्यक्षता इसके अध्यक्ष द्वारा की जाएगी एवं इसमें एक तकनीकी सदस्य (केंद्र) और एक तकनीकी सदस्य (राज्य) शामिल होंगे।
  • GSTAT की राष्ट्रीय पीठ (National Bench) के गठन पर एकमुश्त व्यय 92.50 लाख रुपए होगा, जबकि आवर्ती व्यय (Recurring Expenditure) सालाना 6.86 करोड़ रुपए होगा।

वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण

  • वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण, GST कानूनों में दूसरी अपील करने के लिये एक मंच है और केंद्र एवं राज्यों के बीच विवाद समाधान का प्रथम सार्वजनिक मंच है।
  • केंद्र और राज्य, वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकरणों (Appellate Authorities) द्वारा जारी प्रथम अपीलों में दिये गए आदेशों के विरुद्ध अपील, GST अपीलीय अधिकरण के समक्ष दाखिल होती है जो कि केंद्र तथा राज्य GST अधिनियमों (State GST Acts) के अंतर्गत एक है।

प्रभाव

  • सार्वजनिक मंच होने के कारण GST अपीलीय अधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि GST के अंतर्गत उत्पन्न विवादों के समाधान में एकरूपता आए और इस प्रकार समूचे देश में GST को समान रूप से कार्यान्वित किया जा सकेगा।

क्या कहता है केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम?

  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (CGST Act) के अध्याय XVIII में GST प्रशासन (GST Regime) के अंतर्गत विवाद समाधान हेतु अपीलीय और समीक्षा तंत्र की व्यवस्था (Appeal and Review Mechanism) की गई है।
  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 109 केंद्रीय सरकार को यह शक्ति प्रदान करती है कि वह परिषद की सिफारिश पर अधिसूचना जारी करेगा और सिफारिश में विनिर्दिष्ट तारीख से प्रभावी बनाते हुए वस्तु एवं सेवा कर अपील के रूप में पारित किये गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करेगा।

GST पृष्ठभूमि

  • ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवा कर 1 जुलाई, 2017 को लागू हुआ था। 1 जुलाई, 2018 को GST लागू किये जाने के एक वर्ष पूरा होने पर भारत सरकार द्वारा इस दिन को GST दिवस के रूप में मनाया गया था।
  • GST एक अप्रत्यक्ष कर है जिसे भारत को एकीकृत साझा बाज़ार बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
  • यह निर्माता से लेकर उपभोक्ताओं तक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर लगने वाला एकल कर है।
  • यह 122वाँ संविधान संशोधन विधेयक था जिसे राज्यसभा द्वारा 3 अगस्त, 2016 और लोकसभा द्वारा 6 अगस्त, 2016 को पारित किया गया था।
  • राज्यों के अनुसमर्थन के पश्चात् 8 सितंबर, 2016 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद इसे संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 के रूप में अधिनियमित किया गया।
  • 29 मार्च, 2017 को लोकसभा में वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित चार विधेयक विचारार्थ एवं पारित करने हेतु पेश किये गए।

♦ केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विधेयक, 2017
♦ एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर, 2017
♦ संघ शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर विधेयक, 2017
♦ GST (राज्यों की क्षतिपूर्ति) विधेयक, 2017

  • ये सभी विधेयक लोकसभा ने 29 मार्च, 2017 को और राज्यसभा ने 6 अप्रैल, 2017 को पारित कर दिये।

GST परिषद

  • संविधान में नया अनुच्छेद 279A जोड़कर GST परिषद के गठन का प्रावधान किया गया। इसके तहत 12 सितंबर, 2016 को GST परिषद के गठन की अधिसूचना जारी की गई थी।
  • इस परिषद का अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होता है तथा केंद्रीय राज्य मंत्री (वित्त राजस्व के प्रभारी) एवं राज्यों के वित्त या कर मंत्री या वे जिन्हें नामित राज्य शामिल करें, सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
  • यह परिषद संघ/राज्य/क्षेत्रीय निकाय द्वारा लगाए जाने वाले करों, उपकरों तथा अधिभारों के GST में सम्मिलन या छूट के संदर्भ में सिफारिशें देती है।
  • यह GST से संबंधित मानकों का निर्धारण करती है।

स्रोत : पी.आई.बी.


शासन व्यवस्था

उत्तर-पूर्वी राज्यों के ज़िला परिषदों को स्वायत्तता

चर्चा में क्यों?


हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उत्तर-पूर्वी राज्यों - असम, मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा में ज़िला परिषदों की स्वायत्तता और वित्तीय संसाधनों तथा कार्यकारी शक्तियों को बढ़ाने के लिये अनुच्छेद 280 एवं संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन की मंजूरी दी गई है।


महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • केंद्र के अनुसार, यह संशोधन असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में रहने वाले लगभग 1 करोड़ आदिवासियों की आबादी को प्रभावित करेगा।
  • इसके अनुसार किये जाने वाले संशोधन से असम, मिज़ोरम और त्रिपुरा में गाँवों एवं नगरपालिका परिषदों में महिलाओं के लिये 30% आरक्षण सुनिश्चित हो जाएगा।
  • सरकार द्वारा दिये गए एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि अब वित्त आयोग द्वारा ज़िला परिषदों के वित्तीय संसाधनों से विकास कार्य किया जाएगा। अब तक स्वायत्त परिषदें केंद्रीय मंत्रालयों और विशिष्ट परियोजनाओं के लिये राज्य सरकारों के अनुदान पर निर्भर थीं।
  • इस संशोधन के अनुसार, असम में स्थित कार्बी आंग्लोंग स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद और दीमा हसाओ स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद में सार्वजनिक कार्य, वन, सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, शहरी विकास तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित अन्य 30 विषयों को भी स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया है।
  • इस ऐतिहासिक संशोधन का महत्त्वपूर्ण कार्य असम, मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा राज्यों में स्वायत्त ज़िला परिषदों के वित्तीय संसाधनों और शक्तियों में सुधार करना है जिसकी मांग पूर्वोत्तर राज्यों के आदिवासी आबादी द्वारा बहुत लंबे समय से की जा रही है।

संशोधन से लाभ

  • प्रस्तावित संशोधन द्वारा चुने हुए ग्रामों एवं नगरपालिका परिषदों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे ज़मीनी स्तर पर लोकतंत्र सुनिश्चित होगा।
  • ग्राम सभाओं को उनके कृषि, भूमि सुधार, भूमि सुधारों के कार्यान्वयन, लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, पशुपालन, ग्रामीण विद्युतीकरण, लघु उद्योग और सामाजिक वानिकी सहित आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजना तैयार करने की स्वायत्तता होगी।
  • राज्य चुनाव आयोग असम, मिज़ोरम और त्रिपुरा क्षेत्रों में स्वायत्त परिषदों, ग्राम और नगरपालिका परिषदों का चुनाव संपन्न करेगा। इसके अंतर्गत दलबदल विरोध के लिये भी प्रावधान किया जाएगा।
  • मेघालय में कुछ समय के लिये कुछ चुने हुए ग्राम एवं नगरपालिका परिषदों के निर्वाचन में महिलाओं हेतु एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

उद्देश्य

  • संशोधन में कुछ मौजूदा स्वायत्त परिषदों का नाम परिवर्तन का प्रस्ताव किया गया है क्योंकि इन परिषदों का वर्तमान क्षेत्राधिकार एक से अधिक ज़िलों में है इनमें कुछ परिषदें निम्नलिखित हैं - करबी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद (KAATC), दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद (DHATC), गारो हिल्स स्वायत्तशासी प्रादेशिक परिषद (GHATC), खासी हिल्स स्वायत्त प्रादेशिक परिषद (KHATC), जयंतिया हिल्स स्वायत्तशासी प्रादेशिक परिषद (JHATC), त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनॉमस टेरिटोरियल काउंसिल (TTAATC)।
  • इस प्रकार स्वायत्त प्रादेशिक परिषदों की सीटों की संख्या में भी वृद्धि होगी जैसे कि - KAATC (30 से 50), DHATC (30 से 40), GHATC (30 से 42), KHATC (30 से 40) और JHATC (30 से 34)।

स्रोत – द हिंदू,लाइवमिंट


विविध

Rapid Fire करेंट अफेयर्स (24 जनवरी)

  • 24 जनवरी: राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस Child Day)। हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस मनाया जाता है। देश और समाज में लड़कियों की स्थिति को और मज़बूत करने तथा उन्हें नए मौके देने के लिये इस दिवस की शुरुआत की गई। इस वर्ष राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस की थीम बेहतर कल के लिये बालिकाओं का सशक्तीकरण (Empowering Girls for a Better Tomorrow) रखी गई है।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 122वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के लाल किले में सुभाष चंद्र बोस और सेना के संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस परिसर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और आजाद हिन्द फौज संग्रहालय, याद-ए-जालियाँ संग्रहालय (जालियाँवाला बाग और प्रथम विश्व युद्ध), भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 पर संग्रहालय और तीन शताब्दियों की 450 से अधिक कलाकृतियों वाली फोटो गैलरी शामिल है। पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 122वीं जयंती को ‘सुभाष उत्सव’ के रूप में मनाया।
  • केंद्र सरकार ने सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार देने का फैसला किया है। इस पुरस्कार का एलान प्रत्येक वर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर किया जाएगा।
  • केंद्र सरकार ने GST अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय पीठ के गठन को मंज़ूरी दे दी है। अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय पीठ (GSTAT) नई दिल्ली में स्थित होगी और इसमें अध्यक्ष के साथ केंद्र और राज्य का एक-एक तकनीकी सदस्य शामिल होगा। GST अधिनियम के अध्याय XVIII में GST प्रशासन के तहत विवाद समाधान हेतु अपीलीय और समीक्षा तंत्र की व्यवस्था की गई है।
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त तथा कॉर्पोरेट मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वित्त मंत्री अपने उपचार के लिये अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित एक अस्पताल में हैं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों की वज़ह से इस बार अंतरिम बजट 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाना है।
  • भारत-अफ्रीका फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास (IAFTX)-2019 की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिये पुणे में एक सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में मिस्र, घाना, नाइजीरिया, सेनेगल, सूडान, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, नामीबिया, मोजाम्बिक, युगांडा, नाइज़र और जाम्बिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गौरतलब है की IAFTX-2019 18 से 27 मार्च 2019 तक पुणे के औंध मिलिट्री स्टेशन और कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग में होना प्रस्तावित है।
  • 15वें भारतीय प्रवासी सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस में प्रवासी भारतीय तीर्थ दर्शन कार्यक्रम की शुरुआत की। इस योजना के तहत केंद्र सरकार 45 से 65 आयु वर्ग के प्रवासी भारतीयों को भारत के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों का भ्रमण कराएगी। हर साल 40 प्रवासी श्रद्धालुओं को भ्रमण कराया जाएगा। तीर्थ दर्शन यात्रा 25 दिनों की होगी और इस दौरान श्रद्धालुओं के आने-जाने से लेकर ठहरने एवं खान-पान सहित सभी खर्च सरकार उठाएगी।
  • तेलंगाना में बाघों के संरक्षण के लिये स्टेट टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स गठित की जाएगी। तेलंगाना सरकार ने राज्य में स्थित दोनों अभयारण्यों में बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के मद्देनज़र यह फैसला किया है। अमराबाद और कवाल बाघ अभयारण्यों में 112-112 सदस्यों वाली यह स्पेशल फोर्स सहायक वन संरक्षक कैडर के अधिकारियों के नेतृत्व में काम करेगी। इनके रखरखाव पर होने वाला खर्च 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाएगा।
  • जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) की एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2040 तक विश्व का तापमान डेढ़ डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ सकता है। इससे बचने के लिये रिपोर्ट में ग्रीनहाउस गैसों पर प्रभावकारी तथा बाध्य नियंत्रण लगाने का सुझाव दिया गया है ।
  • अपनी युद्धक क्षमताएं बढ़ाने के क्रम में चीन की सेना ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल से हमले का अभ्यास किया है। यह अभ्यास चीन की सेना की रणनीतिक मिसाइल ऑपरेटर रॉकेट फोर्स ने एक भूमिगत बंकर में काल्पनिक दुश्मन के खिलाफ किया। गौरतलब है कि चीन की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल 12 हजार किलोमीटर तक उड़ान भर सकती है और अमेरिका में स्थित किसी भी लक्ष्य को भेद सकती है। चीन के इसकी तीन पीढ़ियाँ (डीएफ-5, डीएफ-31 और डीएफ-41) हैं। ये सभी 10 हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा दूरी वाले लक्ष्यों को भेदने की क्षमता रखती हैं।
  • इज़राइल और अमेरिका ने एरो-3 मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया है। इसे इज़राइल में तैनात किया गया है। लंबी दूरी की मिसाइलों को मार गिराने के लिये निर्मित इस इंटरसेप्टर का परीक्षण मध्य इज़राइल में तटीय सैन्य लॉन्चिंग पैड से किया गया। गौरतलब है कि दो वर्ष पूर्व इज़राइली अंतरिक्ष उद्योग और अमेरिका की मिसाइल रक्षा एजेंसी ने इसे तैनात किया था। एरो-3 मिसाइल उस बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली का हिस्सा है, जिसका निर्माण इज़राइल ने किया है।
  • वेनेज़ुएला ने अमेरिका पर तख्तापलट करने का आरोप लगाते हुए उससे कूटनीतिक संबध तोड़ लिये हैं। वेनेज़ुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज ने अमेरिका के अपने समकक्ष पर ‘खुले तौर पर तख्ता पलटने का आह्वान’ करने का आरोप लगाया है। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ऐसा तानाशाह बताता है जिनके पास सत्ता में रहने का कोई वैध दावा नहीं है।
  • हाल ही में सामने आई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ गई है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्त्ताओं ने लंबे समय से ग्रीनलैंड के दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। वहाँ ग्लेशियर पिघल कर अटलांटिक सागर में मिल रहे हैं। इसका ऐसे द्वीपीय देशों पर गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है, जो समुद्र के बढ़ते जलस्तर को लेकर खतरे का सामना कर रहे हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2018-19 के लिये अवॉर्ड्स की घोषणा कर दी है। पुरुषों की टेस्ट और एकदिवसीय टीम ऑफ द ईयर का कप्तान भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को बनाया गया है। इसके अलावा उन्हें ICC क्रिकेटर ऑफ द ईयर भी चुना गया है। इसके लिये उन्हें लगातार दूसरी बार सर गारफील्ड सोबर्स अवॉर्ड से नवाज़ा गया है।

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