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राजनीतिक चंदे के लिये ‘इलेक्टोरल बॉण्ड स्कीम’ की रूपरेखा जारी 
Jan 03, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड- 5: संसद और राज्य विधायिका- सरंचना, कार्य, कार्य संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इससे उत्पन्न होने वाले विषय)

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में सरकार ने राजनीतिक दलों को प्राप्त होने वाले चंदे (donation) के लिये इलेक्टोरल बॉण्ड स्कीम की रूपरेखा जारी की  है। राजनीतिक पार्टियों को बॉण्ड के माध्यम से चंदा देने की इस योजना की घोषणा पिछले बजट में की गई थी।

इसके अंतर्गत भारत का कोई भी नागरिक, कंपनी या संस्था चुनावी चंदे के लिये बॉण्ड खरीद सकेंगे। ये बॉण्ड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की विशेष शाखाओं में मिलेंगे और ये एक हज़ार, दस हज़ार, एक लाख और एक करोड़ रुपए के गुणक (मल्टीपल) में हो सकते हैं।  बॉण्डखरीदे जाने के 15 दिन तक मान्य होंगे।

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड?

  • यदि हम बॉण्ड की बात करें तो यह एक ऋण सुरक्षा है। चुनावी बॉण्ड का जिक्र सर्वप्रथम वर्ष 2017 के आम बजट में किया गया था।
  • दरअसल, यह कहा गया था कि आरबीआई एक प्रकार का बॉण्ड जारी करेगा और जो भी व्यक्ति राजनीतिक पार्टियों को दान देना चाहता है, वह पहले बैंक से बॉण्ड खरीदेगा फिर वह जिस भी राजनैतिक दल को दान देना चाहता है दान के रूप में बॉण्ड दे सकता है। 
  • राजनैतिक दल इन चुनावी बॉण्ड की बिक्री अधिकृत बैंक को करेंगे और वैधता अवधि के दौरान राजनैतिक दलों के बैंक खातों में बॉण्ड के खरीद के अनुपात में राशि जमा करा दी जाएगी।
  • गौरतलब है कि चुनाव बॉण्ड एक प्रॉमिसरी नोट की तरह होगा, जिस पर किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि चुनाव बॉण्ड को चैक या ई-भुगतान के ज़रिये ही खरीदा जा सकता है।

अन्य प्रमुख तथ्य

  • चुनावी बॉण्ड का उद्देश्य राजनीतिक दलों को दिये जाने वाले नकद व गुप्त चंदे के चलन को रोकना है। जब चंदे की राशि नकदी में दी जाती है, तो धन के स्रोत के बारे में, दानदाता के बारे में तथा यह धन कहां खर्च किया गया, इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिलती। इसलिये चुनावी बॉण्ड से वर्तमान प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। इससे पहले सरकार ने पिछले वर्ष के बजट में नकद चंदे की सीमा 20 हज़ार से घटाकर मात्र 2 हज़ार कर दी थी।
  • राजनीतिक दलों को चंदे के लिये ब्याज मुक्त बॉण्ड भारतीय स्टेट बैंक से खरीदे जा सकते हैं। चुनावी बॉण्ड एक हज़ार रुपए, दस हज़ार रुपए, एक लाख रुपए, दस लाख रुपए और एक करोड़ रुपए के मूल्य में उपलब्ध होंगे।
  • इन बॉण्ड का विक्रय वर्ष के चार महीनों-जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में 10 दिनों के लिये होगा। इसी दौरान इन्हें खरीदा जा सकेगा। आम चुनाव के वर्ष में बॉण्ड खरीदी की सुविधा 30 दिनों के लिये होगी।
  • दानकर्त्ता ये बॉण्ड एसबीआई की शाखाओं से खरीदकर किसी भी दल को दान कर सकेंगे।
  • दानकर्त्ता चुनाव आयोग में पंजीकृत उसी राजनीतिक दल को ये दान दे सकते हैं, जिस दल ने पिछले चुनावों में कुल मतों का कम से कम 1 प्रतिशत मत हासिल किया है।
  • बॉण्ड से मिलने वाली चंदे की राशि संबंधित दल के अधिकृत बैंक खाते में जमा होगी। इलेक्टोरल बॉण्ड की वैलिडिटी सिर्फ 15 दिनों की होगी। बॉण्ड को कम अवधि के लिये वैध रखे जाने के पीछे उद्देश्य इसके दुरूपयोग को रोकना है, साथ ही राजनीतिक दलों को वित्त उपलब्ध कराने में कालेधन के उपयोग पर अंकुश लगाना है।
  • दानदाता को बॉण्ड खरीदते समय केवाईसी नियमों का पालन करना होगा।
  • इसके ज़रिये पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। एक ओर बैंक इससे अवगत होगा कि कोई चुनावी बॉण्ड किसने खरीदा और दूसरे, बॉण्ड खरीदने वाले को उसका उल्लेख अपनी बैलेंस शीट में भी करना होगा।

निष्कर्ष

इस बात पर संदेह है कि चुनावी बॉण्ड का प्रचलन राजनीति में कालेधन के इस्तेमाल को पूर्णतः रोक देगा, लेकिन काफी हद तक इस पर नियंत्रण संभव दिख रहा है। पिछले कुछ समय से कालेधन को खपाने के लिये फर्ज़ी राजनीतिक दलों का सहारा लिये जाने की बात भी सामने आई है, अतः चुनावी बॉण्ड की इस व्यवस्था के अतिरिक्त चुनाव आयोग को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। 

स्रोत: द हिंदू बिज़नेस लाइन
Source title: The name is bond, electoral bond
Sourcelink:http://www.thehindubusinessline.com/news/political-funding-clean-up-electoral-bonds-scheme-takes-off/article10009047.ece


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