आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 | 30 Jan 2026

प्रिलिम्स के लिये: आर्थिक सर्वेक्षण, मुख्य आर्थिक सलाहकार, सकल स्थिर पूंजी निर्माण, वस्तु एवं सेवा कर, SASCI, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ, चालू खाता घाटा, नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, समर्थ, मेरी पंचायत

मेन्स के लिये: भारत की आर्थिक वृद्धि, आर्थिक सर्वेक्षण, राजकोषीय नीति और वित्तीय स्थिरता, आर्थिक वृद्धि के लिये चुनौतियाँ।

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 प्रस्तुत किया, जिसमें वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक दृढ़ता को रेखांकित किया गया और अर्थव्यवस्था को स्थिर, निवेश के लिये तैयार तथा संरचनात्मक रूप से सुदृढ़ होती हुई बताया गया।

नोट: आर्थिक सर्वेक्षण एक वार्षिक सरकारी रिपोर्ट है, जिसे केंद्रीय बजट से पहले प्रस्तुत किया जाता है और इसका उद्देश्य भारत की आर्थिक स्थिति तथा भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना होता है।

  • इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार के अधीन वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया जाता है। यह आर्थिक प्रदर्शन, क्षेत्रवार प्रवृत्तियों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा करता है तथा केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाता है।
  • यह पहली बार वर्ष 1950–51 में बजट के एक भाग के रूप में प्रस्तुत किया गया था और वर्ष 1964 में इसे एक स्वतंत्र दस्तावेज़ के रूप में अलग कर दिया गया।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के प्रमुख बिंदु क्या हैं?

अर्थव्यवस्था की स्थिति

  • वैश्विक आर्थिक वृद्धि में लचीलापन बना हुआ है, हालाँकि भू-राजनीतिक परिस्थितियों, व्यापार के विखंडन और वित्तीय तनावों से जुड़े जोखिम अभी भी मौजूद हैं।
  • प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.4% और सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) वृद्धि 7.3% रहने का अनुमान है। मज़बूत विकास गति के साथ भारत के वित्त वर्ष 2026–27 में 6.8% से 7.2% की दर से बढ़ने की संभावना है, जिससे यह लगातार चौथे वर्ष भी विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
  • निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 7.0% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जीडीपी का 61.5% तक पहुँच गया। यह वर्ष 2012 के बाद का उच्चतम स्तर है, जिसे कम मुद्रास्फीति, स्थिर रोज़गार, बढ़ती वास्तविक आय, कृषि से मज़बूत ग्रामीण मांग और कर युक्तीकरण के कारण बेहतर हुए शहरी उपभोग का समर्थन प्राप्त हुआ।
  • निवेश में मज़बूती आई क्योंकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) में 7.8% की वृद्धि हुई, जिससे GDP में इसकी हिस्सेदारी 30% बनी रही, यह सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और पुनरुज्जीवित होते निजी निवेश से संचालित रहा। 
  • आपूर्ति पक्ष पर, सेवाएँ विकास का मुख्य चालक बनी रहीं, जिसमें पूरे वर्ष के लिये सेवाओं के सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) में अनुमानित 9.1% की वृद्धि का अनुमान है।

राजकोषीय घटनाक्रम

  • विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन ने भारत की व्यापक आर्थिक विश्वसनीयता को मज़बूत किया है। केंद्र की राजस्व प्राप्तियाँ वित्त वर्ष 2016-20 के ~8.5% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 (PA) में GDP का 9.2% हो गईं, जिसका मुख्य कारण उच्च गैर-कॉर्पोरेट कर संग्रह (GDP का ~2.4% से ~3.3%) रहा।
  • प्रत्यक्ष कर आधार का विस्तार हुआ है, जिसमें आयकर रिटर्न की संख्या 6.9 करोड़ (FY 22) से बढ़कर 9.2 करोड़ (FY 25) हो गई है।
  • अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ₹17.4 लाख करोड़ (पिछले वर्ष की तुलना में +6.7% की वृद्धि) रहा। GST 2.0 में उपभोग को बढ़ावा देने, अनुपालन में सुधार करने और विनिर्माण प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिये एक सरल 'दो-दर वाली संरचना' का प्रस्ताव है।
    • इस सुधार-प्रेरित विकास का समर्थन करते हुए केंद्र का प्रभावी पूंजीगत व्यय महामारी से पहले के औसत 2.7% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 (FY 25) में GDP का लगभग 4% हो गया। वहीं पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता (SASCI) ने राज्यों को पूंजीगत परिव्यय को GDP के ~2.4% पर बनाए रखने के लिये सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया, जिससे सार्वजनिक निवेश को मांग और विकास के मुख्य चालक के रूप में मज़बूती मिली।
  • वित्त वर्ष 2024–25 (FY 25) में राज्यों का राजकोषीय घाटा GDP के 3.2% तक बढ़ गया, जबकि भारत ने वर्ष 2020 के बाद से सामान्य सरकारी ऋण-GDP अनुपात में लगभग 7.1 प्रतिशत अंक की कमी करते हुए उच्च सार्वजनिक निवेश बनाए रखा।

मौद्रिक प्रबंधन और वित्तीय मध्यस्थता

  • भारत के मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्रों ने वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-दिसंबर 2025) में मज़बूत प्रदर्शन किया।
  • बैंकिंग क्षेत्र की संपत्ति की गुणवत्ता में महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ, जहाँ सितंबर 2025 में सकल गैर-निष्पादित संपत्ति 2.2% और शुद्ध NPA 0.5% रहा, जबकि दिसंबर 2025 तक ऋण वृद्धि वार्षिक आधार पर 14.5% तक पहुँच गई।
  • वित्तीय समावेशन और गहरा हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के खाते 55.02 करोड़ तक पहुँच गए हैं। इसके साथ ही स्टैंडअप इंडिया, पीएम स्वनिधि और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के माध्यम से क्रेडिट पहुँच का विस्तार हुआ, जिसमें PMMY ने 55.45 करोड़ ऋण खातों में कुल 36.18 लाख करोड़ रुपये वितरित किये हैं।
  • पूंजी बाज़ाज़ार में भागीदारी में तेज़ी देखने को मिली है। जहाँ डीमैट खातों की संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई है। इसमें 12 करोड़ अनन्य निवेशक शामिल हैं (जिनमें लगभग 25% महिलाएँ हैं) और 5.9 करोड़ म्यूचुअल फंड निवेशक हैं, जिनकी संख्या गैर-मेट्रो शहरों में तेज़ी से बढ़ रही है।
  • नियामक गुणवत्ता को IMF-विश्व बैंक के 'वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन कार्यक्रम (FSAP), 2025' के माध्यम से वैश्विक मान्यता मिली है। इस कार्यक्रम ने एक लचीली और बेहतर पूंजीकृत वित्तीय प्रणाली पर प्रकाश डाला है, जिसमें कुल वित्तीय क्षेत्र की संपत्ति GDP का ~187% है और गंभीर तनाव की स्थितियों में भी पर्याप्त बफर मौजूद हैं।

बाह्य क्षेत्र

  • भारत का बाहरी क्षेत्र उल्लेखनीय रूप से मज़बूत हुआ है। वैश्विक वस्तु निर्यात में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2005 से 2024 के बीच 1% से बढ़कर 1.8% हो गई और सेवाओं के निर्यात में 2% से बढ़कर 4.3% हो गई। इसके साथ ही व्यापारिक साझेदारों में भी व्यापक विविधता देखने को मिली है।
    • यह भारत की भू-राजनीतिक जोखिम कम करने की रणनीति के अनुरूप है।
    • UNCTAD की 'व्यापार और विकास रिपोर्ट, 2025' में व्यापारिक भागीदार विविधीकरण के मामले में भारत को 'वैश्विक साउथ' में तीसरा स्थान दिया गया है, जो कि  'वैश्विक नॉर्थ' की सभी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन है।
      • भारत ने वित्त वर्ष 2026 में कच्चे तेल के आयात का विविधीकरण किया, जिसमें अमेरिका, UAE, मिस्र, लीबिया और नाइजीरिया की हिस्सेदारी बढ़ी, जबकि रूस और पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्त्ताओं पर निर्भरता कम हुई।
  • वित्त वर्ष 2024–25 (FY 25) में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड USD 825.3 अरब तक पहुँच गया (6.1% वार्षिक वृद्धि), जिसमें सेवाओं के निर्यात का योगदान सबसे अधिक रहा, जो USD 387.6 अरब (13.6% वार्षिक वृद्धि) पर पहुँचा।
    • वित्त वर्ष 2025 (FY 25) में गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न एवं आभूषण निर्यात का कुल वस्तु निर्यात में लगभग 4/5 (80%) हिस्सा रहा।
  • वर्तमान खाता घाटा (CAD) मध्यम स्तर पर बना रहा (~1.3% of GDP, Q2 FY 26), जिसका समर्थन मज़बूत सेवा निर्यात और रिकॉर्ड रेमिटेंस (USD 135.4 अरब) ने किया। इसी के साथ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर USD 701.4 अरब हो गया, जो 11 महीने के आयात कवर के बराबर है।
    • वैश्विक माहौल मंद रहने के बावजूद भारत ने अप्रैल–नवंबर 2025 में 64.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित किया और वर्ष 2024 में ग्रीनफील्ड निवेश में वैश्विक रूप से चौथे स्थान पर रहा। इसके साथ ही भारत 2020–24 के दौरान डिजिटल ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिये शीर्ष गंतव्य के रूप में उभरा।

मुद्रास्फीति

  • भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति अपने अब तक के न्यूनतम स्तर पर दर्ज की गई, जहाँ अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान औसत समग्र मुद्रास्फीति 1.7% रही। इसका प्रमुख कारण खाद्य और ईंधन कीमतों में गिरावट रही, जो CPI टोकरी का लगभग 52.7% हिस्से का निर्माण करते हैं।

कृषि एवं खाद्य प्रबंधन

  • भारत के कृषि क्षेत्र ने मज़बूत प्रदर्शन दिखाया, जिसमें पशुधन (livestock) का सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) FY 15 से FY 24 के बीच लगभग 195% बढ़ा, जबकि मत्स्य उत्पादन में वर्ष 2014–24 के दौरान 140% से अधिक वृद्धि हुई।
    • अनुकूल मानसून के कारण वर्ष 2024–25 में होने वाली कृषि में खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (LMT) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया, जबकि बागवानी (कृषि GVA का लगभग 33%) एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरी और खाद्यान्न उत्पादन को पार कर गई।
  • कृषि विपणन और आय समर्थन को कृषि अवसंरचना कोष (AIF), ई–नाम (e-NAM), सुनिश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), PM‑किसान तथा प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PMKMY) जैसी पेंशन योजनाओं के माध्यम से सुदृढ़ किया गया, जिससे किसानों की आय और उनकी झटकों को सहने की क्षमता में सुधार हुआ।

सेवा क्षेत्र

  • भारत 7वाँ सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है, जिसका वैश्विक हिस्सा 2% (2005) से बढ़कर 4.3% (2024) हो गया है और सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्त्ता बना हुआ है, जो FY 23–FY 25 में कुल आमद का ~80% हिस्सा है।
  • सेवा क्षेत्र शहरी रोज़गार की रीढ़ बना हुआ है, जो कुल नौकरियों का 30% और शहरी रोज़गार की  61.9% हिस्सेदारी रखता है।
  • भारत ने वैश्विक प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत की है, जहाँ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का विस्तार हो रहा है।
    • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी स्टार्टअप ईकोसिस्टम होस्ट करता है, जहाँ जनरेटिव AI स्टार्टअप्स में तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जो उन्नत डिजिटल और नवाचार-आधारित क्षेत्रों में मज़बूत गति को दर्शाता है।

उद्योग की अगली छलाँग (Industry’s Next Leap)

  • भारत उद्यमिता नीति और संस्कृति में वैश्विक स्तर पर 12वें, ट्रेडमार्क में चौथे, पेटेंट में छठे और औद्योगिक डिज़ाइनों में 7वें स्थान पर है (WIPO, 2024), जो एक सुदृढ़ नवाचार पारिस्थितिक तंत्र को दर्शाता है।
  • इसने महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सफलता भी हासिल की है, जिसके परिणामस्वरूप 64 में से 45 महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में यह विश्व के शीर्ष पाँच देशों में स्थान प्राप्त कर चुका है, जो 2003–07 की अवधि में मात्र चार से एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
  • भारत का नवाचार पारिस्थितिक तंत्र लगातार मज़बूत हुआ है, जिसका ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंक 81 (2015) से सुधरकर 38 (2025) हो गया है। DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स 2025 तक तेज़ी से बढ़कर लगभग 2 लाख तक पहुँच गए हैं।
    • पेटेंट आवेदन FY 20–FY 25 के बीच लगभग दोगुने हो गए, जो मज़बूत नवाचार और IP गतिविधि को दर्शाता है।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने 2.0 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया, 18.7 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और 12.6 लाख नौकरियाँ सृजित कीं।

निवेश और बुनियादी ढाँचा

  • FY 18 से भारत का बुनियादी ढाँचा प्रयास तेज़ हुआ है, केंद्रीय पूंजीगत व्यय 2.63 लाख करोड़ रुपये (FY 18) से बढ़कर 4.2 गुना अधिक होकर 11.21 लाख करोड़ रुपये (FY26 BE) हो गया है और प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये (FY26 BE) है।
    • FY 14–FY 26 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में 60% वृद्धि, अक्तूबर 2025 तक रेल विद्युतीकरण लगभग 100% पूरा होने और भारत के वर्ष 2025 तक तीसरे सबसे बड़े घरेलू विमानन बाज़ार बनने के साथ कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है।
    • राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 91,287 किमी. (FY 14) से बढ़कर 1,46,572 किमी. (FY 26, दिसंबर 2025 तक) हो गया है, जो त्वरित बुनियादी ढाँचा निर्माण को दर्शाता है।
    • रेलवे नेटवर्क की लंबाई 69,439 रूट किमी. (मार्च 2025 तक) है, जो विश्व के सबसे बड़े रेल सिस्टम में से एक बना हुआ है।
    • ऊर्जा का मांग-आपूर्ति अंतर 4.2% (FY 14) से घटकर शून्य (नवंबर 2025) हो गया है, जो लगभग चौबीसों घंटे विद्युत् उपलब्धता को दर्शाता है।
  • ऊर्जा क्षेत्र नवंबर 2025 तक मज़बूत हुआ है, क्षमता 509.74 GW तक पहुँच गई है, इसके साथ ही विद्युत वितरण कंपनियाँ (DISCOM) FY 25 में लाभदायक हुई हैं।
  • दूरसंचार घनत्व 86.76% तक पहुँच गया है और 5G सेवाएँ अब देश के 99.9% ज़िलों में उपलब्ध हैं।
  • अक्तूबर 2025 तक, 81% से अधिक ग्रामीण परिवारों की जल जीवन मिशन के तहत स्वच्छ नल के जल तक पहुँच प्राप्त हुई।
  • भारत ने स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग (SpaDeX) हासिल करने वाला चौथा राष्ट्र बनकर अंतरिक्ष बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया है।

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन

  • दिसंबर 2025 तक 30.16 GW सौर, 4.47 GW पवन, 3.24 GW जल और 0.03 GW बायो-पावर के नेतृत्व में 38.61 GW अक्षय क्षमता जोड़ी गई।
  • राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य वर्ष 2033 तक 5 स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किये गए स्माल मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) को शुरू करना है, जिससे SHANTI अधिनियम, 2025 के समर्थन से परमाणु क्षमता को 8,780 MW से बढ़ाकर 2047 तक 100 GW किया जाएगा, जो निजी भागीदारी को सक्षम बनाता है।
  • पर्यावरणीय शासन को PARIVESH 3.0 सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, चक्रीय अर्थव्यवस्था कार्ययोजनाओं के माध्यम से सुव्यवस्थित किया गया।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य

  • भारत शिक्षा में सार्वभौमिक पहुँच की ओर बढ़ रहा है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) और वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% GER हासिल करना है।
  • भारत ने स्वास्थ्य में मज़बूत प्रगति की है, जहाँ मातृ मृत्यु दर (MMR) वर्ष 1990 के बाद से 86% कम हुई है, पाँच वर्ष से कम बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) 78% कम हुई है और नवजात मृत्यु दर (NMR) 70% कम हुई है, जो समग्र वैश्विक औसत की तुलना में बेहतर हैं।
    • शिशु मृत्यु दर (IMR) में 37% से अधिक की कमी आई है, जो 2013 में प्रति हज़ार जीवित जन्मों पर 40 से घटकर 2023 में 25 रह गई।

रोज़गार और कौशल विकास

  • भारत का श्रम बाज़ार लचीला बना हुआ है, कुल रोज़गार Q2 FY 26 में 56.2 करोड़ (15+ आयु वर्ग) है, जो आर्थिक विस्तार के साथ-साथ Q1 FY 26 की तुलना में लगभग 8.7 लाख शुद्ध रोज़गार सृजन को दर्शाता है।
  • श्रम शक्ति भागीदारी दर अप्रैल में ~55% से बढ़कर दिसंबर तक ~56.1% हो गई, जबकि FY 26 के Q1–Q2 में बेरोज़गारी लगभग 5% पर निचले स्तर पर बनी रही।
    • महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 23.3% (2017–18) से बढ़कर 41.7% (2023–24) हो गई, साथ ही महिला बेरोज़गारी में तेज़ी से गिरावट (5.6% से 3.2%) हुई, जो अधिक मज़बूत और समावेशी श्रम बाज़ार के परिणामों का संकेत देती है।
  • संगठित विनिर्माण रोज़गार FY 24 में 6% वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़ा (10 लाख से अधिक नौकरियाँ), जबकि श्रम संहिताओं ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार किया।
  • ई-श्रम ने 31 करोड़ असंगठित श्रमिकों (54% महिलाएँ) को पंजीकृत किया और राष्ट्रीय कॅरियर सेवा ने 5.9 करोड़ नौकरी चाहने वालों को 53 लाख नियोक्ताओं से जोड़ा, जिससे लगभग 8 करोड़ रिक्तियों को भरा गया।

ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रगति

  • विश्व बैंक द्वारा निर्धारित संशोधित 3.0 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के अनुसार 2022–23 में अत्यधिक गरीबी घटकर 5.3% रह गई। इस उपलब्धि को प्रौद्योगिकी-आधारित ग्रामीण पहलों से बल मिला है, जिनमें SVAMITVA (3.28 लाख गाँवों का मानचित्रण तथा 2.76 करोड़ संपत्ति कार्डों का निर्गमन), नमो ड्रोन दीदी और ड्रोन, सौर ऊर्जा व टेलीमेडिसिन का उपयोग करने वाले स्मार्ट गाँव मॉडल शामिल हैं।
  • समर्थ, मेरी पंचायत और ई-ग्राम स्वराज जैसे सहभागी शासन प्लेटफॉर्मों ने स्थानीय योजना और निगरानी में सुधार किया है। बुनियादी ढाँचे के विस्तार ने 99.6% ग्रामीण कनेक्टिविटी, 81% से अधिक नल के पानी कवरेज और 2.9 करोड़ घरों के निर्माण को सुनिश्चित किया है।
  • कौशल विकास और आजीविका को DDU-GKY और DAY-NRLM के माध्यम से मज़बूत किया गया, जहाँ 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन से संबंधित व्यक्तियों ने महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों, खाद्य सुरक्षा और स्थिर ग्रामीण आय का समर्थन किया।
  • सर्वेक्षण ने MGNREGS को समाप्त करने को उचित ठहराया, जिसमें गहन संरचनात्मक खामियों का हवाला दिया गया और विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को एक व्यापक विधायी पुनर्निर्धारण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

भारत में AI ईकोसिस्टम का विकास

  • भारत में AI की मज़बूत बुनियाद है, जिसमें उच्च स्तरीय अनुसंधान उत्पादन, प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह, अमेरिका के बाद विश्व स्तर पर दूसरा सबसे अधिक AI-साक्षर कार्यबल और प्रमुख क्षेत्रों में विशाल लेकिन कम उपयोग किया जाने वाला घरेलू डेटा शामिल है।
  • भारत के लगभग 1 अरब कनेक्टेड उपयोगकर्त्ताओं के आधार पर निर्मित AI डेटा ढाँचा प्रोत्साहन-आधारित अनुपालन के माध्यम से खुलेपन, निगरानी तथा घरेलू मूल्य-सृजन के बीच संतुलन स्थापित करता है।
    • यह भारत की विकास संबंधी ज़रूरतों के लिये क्षेत्र-विशिष्ट AI समाधान तैयार करने हेतु स्थानीय मॉडल प्रशिक्षण, घरेलू अनुसंधान एवं विकास वित्तपोषण और कौशल विकास को बढ़ावा देता है।

शहरीकरण

  • नमो भारत क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (RRTS) यह दर्शाती है कि कैसे उच्च गति वाली क्षेत्रीय कनेक्टिविटी यात्रा के समय को कम करती है, रोज़गार के अवसरों का विस्तार करती है, बहुकेंद्रित विकास का समर्थन करती है और प्रमुख शहरों पर दबाव कम करती है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन में तेज़ी से सुधार हुआ है, जिसमें घर-घर जाकर ठोस अपशिष्ट (MSW) का संग्रह शहरी वार्डों के 98% हिस्से को कवर करता है और अपशिष्ट प्रसंस्करण 16% (वर्ष 2014-15) से बढ़कर 80% (वर्ष 2024-25) हो गया है।

रणनीतिक लचीलापन और सामरिक अपरिहार्यता का निर्माण

  • सर्वेक्षण में रणनीतिक लचीलेपन से सामरिक अपरिहार्यता की ओर बदलाव का आह्वान किया गया है, जिसमें भारत से रक्षात्मक आयात प्रतिस्थापन से आगे बढ़कर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बनने का आग्रह किया गया है।
    • यह एक स्तरीय स्वदेशीकरण ढाँचे के माध्यम से बुद्धिमानीपूर्ण, समयबद्ध आयात प्रतिस्थापन की वकालत करता है, जबकि राज्य की क्षमता को प्रमुख बाधा के रूप में पहचानता है जिसके लिये एक उद्यमशील राज्य, नियामक प्रयोग और सद्भावनापूर्ण निर्णय लेने के लिये संरक्षण की आवश्यकता होती है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किन प्रमुख चुनौतियों को उजागर किया गया है?

  • वैश्विक अनिश्चितता: सर्वेक्षण नियमों पर आधारित वैश्वीकरण से भू-राजनीतिक विखंडन की ओर बदलाव को उजागर करता है, जो रणनीतिक व्यापार, आपूर्ति शृंखला के शस्त्रीकरण, अस्थिर पूंजी प्रवाह और बढ़ते संसाधन राष्ट्रवाद (पैक्स सिलिका) द्वारा चिह्नित है, जिससे क्रिटिकल मिनरल, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और वित्त तक पहुँँच तेज़ी से अनिश्चित हो जाती है।
  • बाध्यकारी प्रतिबंध के रूप में राज्य क्षमता: भारत की मूल चुनौती कमज़ोर राज्य क्षमता है, जो नौकरशाही जोखिम-परिहार, पूर्वव्यापी ऑडिट तथा सतर्कता जाँच के भय और अस्थायी नीतियों को वापस लेने में असमर्थता (पाॅलिसी हिस्टेरिसिस) से प्रेरित है; मिशन-उन्मुख शासन के अभाव में यह समस्या और गहरी होती है।
    • सर्वेक्षण में चेतावनी दी गई है कि बिना शर्त नकद हस्तांतरण (वित्त वर्ष 26 में 1.7 लाख करोड़ रुपये) का तेज़ी से विस्तार, हालाँकि अल्पकालिक राहत प्रदान करता है, राजकोषीय स्थिरता और मध्यम अवधि के विकास के लिये जोखिम पैदा करता है।
    • यह चेतावनी देता है कि बढ़ते अंतरण विशेषकर राजस्व-घाटे वाले राज्यों में उत्पादक पूंजीगत व्यय को विस्थापित कर देते हैं।
  • प्रतिस्पर्द्धा संबंधी मुद्दे: उच्च ऊर्जा, रसद और कच्चे माल की लागतें उत्पादन प्रक्रिया पर एक अप्रत्यक्ष कर के रूप में कार्य करती हैं, जिससे निर्यात कमज़ोर होता है।
    • रुपया संरचनात्मक रूप से कमज़ोर बना हुआ है और यह स्थायी निर्यात अधिशेष के बजाय पूंजी प्रवाह द्वारा समर्थित है, परिणामस्वरूप बाह्य लचीलापन सीमित रहता है।
  • कम अनुसंधान एवं विकास: निजी क्षेत्र उत्पादकता-संचालित वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा की तुलना में अल्पकालिक लाभ और नियामक प्रबंधन को प्राथमिकता देता है।
    • अनुसंधान एवं विकास तथा अत्याधुनिक विनिर्माण में अपर्याप्त निवेश और राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता के लिये कंपनियों की ज़िम्मेदारी का अभाव दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता को बाधित करता है।
  • सामाजिक व्यवहार संबंधी बाधाएँ: विलंबित संतुष्टि की कमी, शॉर्टकट अपनाने का व्यवहार, कमज़ोर नागरिक अनुशासन और लोक संसाधनों की उपेक्षा विश्वसनीय प्रणाली निर्माण को क्षीण करती है तथा राज्य की क्षमता को विकास के बजाय प्रवर्तन की ओर प्रेरित करती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिये क्या उपाय किये जा सकते हैं?

  • विनिर्माण को बढ़ावा: इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और फार्मास्यूटिकल्स में मज़बूत गति के साथ PLI योजनाओं द्वारा समर्थित मध्यम और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण की ओर संक्रमण को तीव्र करना।
  • कृषि पुनर्रचना: सर्वेक्षण वैश्विक औसत की तुलना में उपज-अंतर को रेखांकित करता है तथा बेहतर बीज, फसल विविधीकरण, सुदृढ़ विस्तार सेवाओं, FPO–PACS–SHG एकीकरण और जलवायु-संवेदनशील (नम्य) कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादकता एवं स्थिरता बढ़ाने का आह्वान करता है।
  • अवसंरचना-आधारित निवेश: निजी निवेश को आकर्षित करने के लिये उच्च सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बनाए रखना, जिसे राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स दक्षता के तीव्र विस्तार द्वारा समर्थित करना।
  • मानव पूंजी और कौशल विकास: PMKVY 4.0, स्किल इंपैक्ट बॉण्डस, शिक्षुता और NEP के नेतृत्व में अनुकूल, क्रेडिट-आधारित शिक्षण मार्गों के साथ व्यवसायीकरण के माध्यम से शिक्षा एवं कौशल को उद्योग की आवश्यकताओं के साथ संरेखित करना।
  • ऊर्जा संक्रमण एवं धारणीयता: राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मिशन को आगे बढ़ाना, बैटरी ऊर्जा भंडारण का विस्तार करना तथा EPR और अपशिष्ट कार्ययोजनाओं के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना।
  • शहरी परिवर्तन: शहरी उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिये FSI को बढ़ाना, ULB के वित्त को मज़बूत करना, जाम और शहरी विस्तार से निपटने के लिये सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो, ई-बस) का विस्तार करना।
  • AI एवं डिजिटल रणनीति: एप्लीकेशन-विशिष्ट AI पर केंद्रित “फ्रूगल AI” दृष्टिकोण अपनाना, घरेलू मूल्य संरक्षण के साथ विश्वसनीय सीमा-पार डेटा प्रवाह से समर्थन देना, ताकि भारतीय डेटा स्थानीय नवाचार एवं अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सुदृढ़ करे।
  • जलवायु रणनीति: सर्वेक्षण विकास-संरेखित जलवायु रणनीति का समर्थन करता है, जिसमें निकट अवधि के शमन की तुलना में अनुकूलन को प्राथमिकता दी गई है तथा विकास को समुत्थानशीलता के एक मुख्य माध्यम के रूप में देखा गया है।
    • यह तेज़, अवसंरचना-उपेक्षित ऊर्जा संक्रमण के विरुद्ध चेतावनी देता है, यूरोप में ग्रिड पर पड़े दबाव का उल्लेख करता है तथा नवाचार, संस्थागत क्षमता और परमाणु ऊर्जा जैसी विश्वसनीय गैर-जीवाश्म ऊर्जा की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य: सर्वेक्षण में डिजिटल आदत और स्क्रीन से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों को उजागर किया गया है, विशेष रूप से बच्चों में एवं स्कूल-संबंधित उपायों तथा संकटकालीन देखभाल से परे टेली मानस (Tele MANAS) के विस्तार का आह्वान किया गया है।

निष्कर्ष

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत को न केवल एक अनुकूल अर्थव्यवस्था के रूप में, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में एक उभरते हुए आधार स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करता है, जो "रणनीतिक लचीलेपन" से "सामरिक अनिवार्यता" की ओर अग्रसर है। यद्यपि व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांत मज़बूत बने हुए हैं, भारत का एक विकसित राष्ट्र बनने का सफर नीतिगत इरादों को क्रियान्वयन के साथ संरेखित करने, यह सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगा कि विकास सतत, समावेशी और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में गहराई से एकीकृत हो।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. विश्लेषण कीजिये कि रणनीतिक लचीलेपन से सामरिक अपरिहार्यता की ओर भारत का बदलाव वैश्विक मूल्य शृंखलाओं और औद्योगिक नीति के प्रति उसके दृष्टिकोण को किस प्रकार नया आकार देता है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. आर्थिक सर्वेक्षण क्या है?
आर्थिक सर्वेक्षण भारत सरकार का एक वार्षिक प्रमुख दस्तावेज़ है, जो केंद्रीय बजट से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति, क्षेत्रीय रुझानों, चुनौतियों और संभावनाओं की समीक्षा करता है।

2. आर्थिक सर्वेक्षण कौन तैयार करता है और प्रस्तुत करता है?
यह वित्त मंत्रालय के आर्थिक विभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के अधीन तैयार किया जाता है और केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है।

3. संसद में आर्थिक सर्वेक्षण कब प्रस्तुत किया जाता है?
यह सामान्यतः संसद के दोनों सदनों में केंद्रीय बजट से एक दिवस पूर्व प्रस्तुत किया जाता है।

4. आर्थिक सर्वेक्षण पहली बार कब प्रस्तुत किया गया था?
यह सर्वेक्षण पहली बार वर्ष 1950-51 में बजट के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया था और वर्ष 1964 में एक अलग दस्तावेज़ बन गया।

5. आर्थिक सर्वेक्षण के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
व्यापक आर्थिक प्रदर्शन का आकलन करना, क्षेत्रीय विकास का विश्लेषण करना, संरचनात्मक चुनौतियों की पहचान करना और भविष्योन्मुखी आर्थिक दृष्टिकोण प्रदान करना।

6. आर्थिक सर्वेक्षण केंद्रीय बजट से किस प्रकार भिन्न है?
सर्वेक्षण विश्लेषणात्मक और निदानात्मक होता है, जबकि बजट राजकोषीय एवं नीति-उन्मुख होता है, जिसमें करों, व्यय तथा आवंटनों की घोषणा की जाती है।

7. आर्थिक सर्वेक्षण में सामान्यतः किन क्षेत्रों को शामिल किया जाता है?
वृद्धि, मुद्रास्फीति, राजकोषीय नीति, मौद्रिक क्षेत्र, बाह्य क्षेत्र, कृषि, उद्योग, सेवाएँ, अवसंरचना, सामाजिक क्षेत्र, पर्यावरण और AI तथा जलवायु परिवर्तन जैसे उभरते मुद्दे।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स:

प्रश्न. वित्त मंत्री संसद में बजट प्रस्तुत करते हुए उसके साथ अन्य प्रलेख भी प्रस्तुत करते हैं जिनमें 'बृहद् आर्थिक रूपरेखा विवरण' (The Macro Economic Framework Statement) भी सम्मिलित रहता है। यह पूर्वोक्त प्रलेख निम्न आदेशन के कारण प्रस्तुत किया जाता है: (2020)

(a) चिरकालिक संसदीय परंपरा के कारण

(b) भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 तथा अनुच्छेद 110(1) के कारण

(c) भारत के संविधान के अनुच्छेद 113 के कारण

(d) राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के कारण

उत्तर: (d) 


मेन्स:

प्रश्न. पूंजी बजट तथा राजस्व बजट के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिये। इन दोनों बजटों के संघटकों को समझाइये। (2021)

प्रश्न. क्या आप सहमत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने हाल ही में V-आकार के पुनरुत्थान का अनुभव किया है? कारण सहित अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये। (2021)

प्रश्न. "सुधारोत्तर अवधि में सकल-घरेलू-उत्पाद (जीडीपी) की समग्र संवृद्धि में औद्योगिक संवृद्धि दर पिछड़ती गई है।" कारण बताइये। औद्योगिक-नीति में हाल में किये गए परिवर्तन औद्योगिक संवृद्धि दर को बढ़ाने में कहाँ तक सक्षम हैं ?  (2017)