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mains Test Series 2018
UPSC, Civil Services Main Exam,2013 (Hindi Literature- 2nd paper)
Dec 07, 2013

SECTION ‘A’

1. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों की ससन्दर्भ व्याख्या करते हुए उनके काव्य-सौन्दर्य का उद्घाटन कीजिएः 10 × 5 = 50

(क) डारे ठोड़ी-गाड़, गहि नैन-बटोही मारि।
चिलक चौंध में रूप ठग, हाँसी-फाँसी डारि।।
तंत्रीनाद, कवित्त रस, सरस राग, रति-रंग।
अनबूड़े बूड़े, तरे से बूड़े सब अंग।।

(ख) जौ रोऊँ तौ बल घटे, हँसौं तौ राम रिसाइ।
मन ही मांहि बिसूरणां, ज्यूं घुंण काठहि खाइ।।
हँसि हँसि कन्त न पाइए, जिनि पाया तिनि रोइ।
जो हाँसे ही हरि मिले, तौ नहीं दुहागनि होइ।।

(ग) हम बाह्य उन्नति पर कभी मरते न थे संसार में,
बस मग्न थे अन्तर्जगत के अमृत-पारावार में।
जड़ से हमें क्या, जबकि हम थे नित्य चेतन से मिले,
हैं दीप उनके निकट क्या जो पद्म दिनकर से खिले।

(घ) ईश जानें, देश का लज्जा-विषय
तत्त्व है कोई कि केवल आवरण
उस हलाहल-सी कुटिल द्रोहाग्नि का
जो कि जलती आ रही चिरकाल से
स्वार्थ-लोलुप सभ्यता के अग्रणी
नायकों के पेट में जठराग्नि-सी।

(ड़) सुरा सुरभिमय वदन अरुण वे
नयन भरे आलस अनुराग;
कल कपोल था जहाँ बिछलता
कल्पवृक्ष का पीत पराग।
विकल वासना के प्रतिनिधि वे
सब मुरझाये चले गये।
आह! जले अपनी ज्वाला से
फिर वे जल में गले, गये।

2.
(क) "कबीर जनता के कवि थे और जनता के प्रति उनके हृदय में असीम करुणा और अनुराग का भाव था।" इस कथन की सोदाहरण समीक्षा कीजिए। 25
(ख) क्या समकालीन आलोचना तुलसीदास के काव्य की प्रगतिशीलता को अनदेखा कर रही है? उदाहरणों से पुष्ट युक्तियुक्त उत्तर दीजिए। 25

3.
(क) बताइए कि किस प्रकार सूर की काव्यकला पौराणिकता में नवीनता का संचार करके प्रसंगों को विशिष्ट और लोकग्राह्य बना देती है। 25
(ख) ‘पद्मावत’ में कल्पना में इतिहास का पैबन्द लगाने वाली काव्य-चेतना के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? 25

4.
(क)
अन्तस् और बाह्य जगत की एकाकारता के सजीव प्रतीक के रूप में ‘असाध्यवीणा’ की समीक्षा कीजिए। 25
(ख) इस बात पर विचार कीजिए कि ‘राम की शक्तिपूजा’ की संरचना में एक पराजित और दूसरे अपराजित मन की अस्तित्वानुभूति के साथ-साथ ‘तुलसीदास’ और ‘सरोज स्मृति’ का सार भी सन्निहित है। 25


SECTION - ‘B’

5. निम्नलिखित गद्यांशों की सन्दर्भ-सहित व्याख्या करते हुए उसके रचनात्मक सौन्दर्य को उद्घाटित कीजिए- (10 × 5 = 50 अंक)

(क) "महाराज, वेदान्त ने बड़ा ही उपकार किया। सब हिन्दू ब्रह्म हो गये। किसी की इतिकर्त्तव्यता बाकी ही न रही। ज्ञानी बनकर ईश्वर से विमुख हुए, रुक्ष हुए, अभिमानी हुए और इसी से स्नेहशून्य हो गए। जब स्नेह ही नहीं तब देशोद्धार का प्रयत्न कहाँ!"
(ख) मनुष्य सारी पृथ्वी छेंकता चला जा रहा है। जंगल कट-कट कर खेत, गाँव और नगर बनते चले जा रहे हैं। पशु-पक्षियों का भाग छिनता चला जा रहा है। उनके सब ठिकानों पर हमारा निष्ठुर अधिकार होता चला जा रहा है। वे कहाँ जायँ।...
(ग) तुलसीदास की भक्ति वर्ण, जाति, धर्म आदि के कारण किसी का बहिष्कार नहीं करती। जो ‘अति अघ-रूप’ समझे जाते हैं, उन ‘आभीर जवन किरात खस स्वपचादि’ के लिए भी वह कहते हैं कि राम का नाम लेकर वे भी पवित्र हो जाते हैं। इससे उनकी भक्ति का जनवादी तत्त्व अच्छी तरह प्रकट हो जाता है। जिन तमाम लोगों के लिए पुरोहित वर्ग ने उपासना और मुक्ति के द्वार बन्द कर दिये थे, उन सब के लिए तुलसी ने उन्हें खोल दिया। तुलसी की जाति और कुलीनता पर पुरोहितों के आक्षेपों का यही कारण था।
(घ) "कवित्व वर्णमय चित्र है, जो स्वर्गीय भावपूर्ण संगीत गाया करता है। अन्धकार का आलोक से, सत् का असत् से, जड़ का चेतन से, और बाह्य जगत का अन्तर्जगत से सम्बन्ध कौन कराती है? कविता ही न!"
(ङ) और यह राजधानी! जहाँ सब अपना है, अपने देश का है... पर कुछ भी अपना नहीं है, अपने देश का नहीं है।

तमाम सड़कें हैं जिन पर वह जा सकता है, लेकिन वे सड़कें कहीं नहीं पहुँचातीं। उन सड़कों के किनारे घर हैं; बस्तियाँ हैं पर किसी भी घर में वह नहीं जा सकता। उन घरों के बाहर फाटक हैं, जिन पर कुत्तों से सावधान रहने की चेतावनी है, फूल तोड़ने की मनाही है और घंटी बजाकर इन्तजार करने की मजबूरी है।

6.
(क) जिस तरह से अपने ललित निबन्धों में कुबेरनाथ राय भारत ही नहीं, विश्व-भर के नये-पुराने रूपों को हृदय और बुद्धि की कसौटी पर जाँचते हैं, निबन्ध-क्षेत्र के लिए यह नया बौद्धिक रस संजीवनी बना है- इसका विवेचन कीजिए। 25
(ख) श्रद्धा और भक्ति के सामाजिक उपयोग एवं दुरुपयोग पर विचार कीजिए। 25

7.
(क) रंगमंचीय सम्भावनाओं की दृष्टि से किए गए एक प्रयोग के रूप में ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक पर विचार कीजिए। 25
(ख) ‘महाभोज’ में समकालीन दलगत राजनीति का जन-विरोधी चरित्र विश्वसनीय तरीके से उभारा गया है- इस बात की परीक्षा कीजिए। 25

8.
(क)
"रेणु पाठक को छपे हुए पृष्ठों की सुरक्षित दुनिया से बाहर खींचते हैं और मौखिक परम्परा में प्रवेश कराते हैं।" ‘मैला आँचल’ के सन्दर्भ में इस वक्तव्य का विवेचन कीजिए। 25
(ख) प्रेमचन्द की कहानियों में आधुनिक विमर्शों के स्वरूप की पड़ताल कीजिए। 25

 


 

 


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