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सरकारी कामकाज में पारदर्शिता का महत्त्व

Posted By : Mr. Gaurav     Posted Date : Dec 03,14   Hits : 6500    

21वीं सदी का भारत, युवा भारत है जहाँ युवाओं की आकांक्षाओं, अभिलाषाओं, जीवन के प्रति सोच में बदलाव आया है। फेसबुक, ट्विटर की दुनिया ने अधिकाधिक खुलापन लाने को प्रेरित किया है और सशक्त व प्रभावी लोकपाल, सक्रिय, नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) और सूचना आयोग आदि को मिलता व्यापक समर्थन, ये सभी नवीन भारत के संकेत हैं और इन सब ने प्रशासन में पारदर्शिता, नवीनता व नवाचार (Innovation) लाने को प्रेरणा दी है।

आधुनिक उदारीकरण निजीकरण के दौर में सरकारी कामकाज का गोपनीयता वाला रवैया अब गौण महत्त्व का हो गया है और समाज के प्रत्येक वर्ग द्वारा शासन को अधिकाधिक पारदर्शी बनाए जाने को समर्थन दिया जा रहा है।


पारदर्शिता से तात्पर्य है- कामकाज में अधिकाधिक खुलापन, जहाँ प्रत्येक नागरिक सरकारी कामकाज की दशाओं, प्रक्रियाओं, विधियों के बारे में जान सकें। सरकारी दस्तावेजों व फाइलों तक प्रत्येक व्यक्ति की आसान पहुँच हो, शासन अधिकाधिक अनुक्रियाशील हो, और अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण, जवाबदेह व नागरिकोन्मुखी हो, कानून व नियमों की सरलता हो, नागरिकों की योजना निर्माण व उनके क्रियान्वयन में सहभागिता हो और ये सभी तत्त्व पारदर्शिता को प्रभावी व साकार बनाते हैं।


पारदर्शिता का महत्त्व केवल भारतीय शासन व्यवस्था तक सीमित नहीं है वरन् यह पूरे विश्व में व्यापक है और समस्त नागरिकों के वर्ग एवं निजी संगठन, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल जैसी संस्थाएँ इसके लिए प्रयत्नशील हैं। सूचना का अधिकार, नागरिक अधिकार पत्र (सिटीजन चार्टर), सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit), शिकायत निवारण तंत्र (ऑनलाइन पोर्टल, टॉल फ्री नंबर) आदि सभी प्रशासन में पारदर्शिता लाने के उपकरण हैं।


पारदर्शिता के बारे में इतना सब जानने के बाद स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठता है कि क्यों हमें प्रशासन में इसे अपनाने की जरूरत है? दिन-प्रतिदिन के सरकारी कामकाज में पारदर्शिता का क्या महत्त्व है? सबसे प्रमुख कारण हैं आए दिन सामने आते घोटालों व भ्रष्टाचार पर नियंत्रण की अनिवार्य आवश्यकता, समावेशी विकास की सुनिश्चितता, जन-सशक्तीकरण, सुशासन की स्थापना, कामकाज की प्रक्रियाओं का सरलीकरण ताकि बदलते भारत की आकांक्षाओं का समाधान हो, वैश्विक मंचों पर भारतीयता को प्रभावी पहचान मिल सके और भारतीय लोकतंत्र व आम आदमी का सशक्तीकरण हो। हाल के दिनों में सामने आए घोटाले (कोयला, राष्ट्रमंडल खेल, हैलीकॉप्टर रिश्वत कांड) प्रशासन में पारदर्शिता की इस कमी को ही इंगित करते हैं।


हर शासन व्यवस्था अपने आप को अधिक कुशल व प्रभावी बनाना चाहती है ताकि आम नागरिकों का विश्वास उस पद्धति के प्रति कायम रहे। पारदर्शिता का सबसे बड़ा महत्त्व यही है कि इसे अपनाना वास्तविक रूप में लोगों को सशक्त बनाता है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता अपनाकर शासन की नीतियाँ, शासन के विचार व शासन के लक्ष्य लोगों तक आसानी से पहुँचते हैं।


पारदर्शिता को अपनाकर सरकारी योजनाओं व कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है। छात्रवृत्ति, पेंशन, सब्सिडी, भत्ता आदि को वास्तविक जरूरतमंद तक पहुँचाया जा सकता है और वितरण की बाधाओं को न्यून करने में मदद मिलती है ताकि अंतिम लक्ष्य के रूप में वित्तीय समावेशन, समावेशी विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है। वास्तविक रूप में पारदर्शिता, प्रशासन को अधिक सरलता व सहाजता प्रदान करती है तथा प्रशासन व सरकारी कर्मचारियों को अधिक संवेदनशील व जन-अभिमुखी बनाती है व पारदर्शिता वास्तव में सरकारी कामकाज का वह उपकरण माध्यम है जो गांधीजी द्वारा कथित ‘अंतिम छोर के व्यक्ति’ की प्रशासन तक और प्रशासन की उस अंतिम व्यक्ति तक आसान पहुँच सुनिश्चित करता है।


पारदर्शिता को अपनाकर सरकारी कामकाज के तरीके में नवीनता, इलैक्ट्रॉनिक पद्धति, तकनीकी कुशलता आदि का समावेशी किया गया है और इसने सरकारी कर्मचारी को भी सक्रिय व सजग रूप से कार्य करने की प्रेरणा दी है क्योंकि कामकाज के पुराने व बोसिल तरीकों में बदलाव आया है। ई-फाइलिंग, ई-टेंडर, वीडियो कॉफ्रेंसिंग, CCTV कैमरों का दफ्तरों में प्रयोग इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।


सरकारी कामगाज में पारदर्शिता को अपनाने से शासन की कुशलता में वृद्धि हुई है, शासन को सुदृढ़ता मिली है तथा शासन की इस कुशलता ने लोगों को जागरूक बनाया है, शासन के प्रति अनुक्रियाशील बनाया है और इससे लोगों का लोकतंत्र के प्रति विश्वास दृढ़ हुआ है। लोकपाल गठन के लिए लोगों द्वारा जन आंदोलन को समर्थन इस बात का संकेत है कि आम-नागरिक प्रशासन में सकारात्मक बदलाव जाने, पारदर्शिता को और बढ़ावा देने के समर्थक हैं।


प्रशासन में पारदर्शिता का महत्त्व चुनाव सुधार व चुनावी प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। इसी को अपनाते हुए उम्मीदवार की पृष्ठभूमि का पता लगता है, राजनीतिक दलों के द्वारा धन के प्रयोग की निगरानी की जाती है और हाल में सर्वोच्च न्यायालय व सूचना आयोग के निर्णयों ने राजनीति में भी पारदर्शिता लाने की कोशिश की है।


पारदर्शी प्रशासन से लोकतंत्र के प्रति लोगों के विश्वास में वृद्धि होती है जिससे पंचायती राज व तृणमूल स्तर पर (Grassroot Level) लोकतंत्र को अधिक गहरा, विकेंद्रीकृत (Decentratised) व प्रभावी बनाया जा सकता है। मिड-डे मील की निगरानी, मनरेगा का प्रभावी क्रियान्वयन, प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (Cash Subsidy) पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से प्रभावी बनाया जा सकता है। प्रशासन को पारदर्शी व प्रभावी बनाकर नक्सलवाद की चुनौती पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इससे जुड़े लोगों को पुनः राष्ट्र की मुख्यधारा में लाकर राष्ट्र की एकता व अखंडता को मजबूत व दृढ़ बनाया जा सकता है।


वास्तविक रूप में सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, दोनों पक्ष सेवा-दाता व सेवा-ग्राही (प्रशासन व नागरिक) की सक्रियता पर निर्भर है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के माध्यम को अपनाकर साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता, शिक्षा का स्तर, व्यापक सामाजिक व आर्थिक समानता आदि ऐसे अनिवार्य तत्त्व हैं जो प्रशासन में लाई गई पारदर्शिता को अधिक प्रभावी बनाते हैं। यही पारदर्शिता प्रशासन व नागरिकों, दोनों को अधिकाधिक जवाबदेह, योग्य, कुशल व बदलती परिस्थितियों में समय बनाएगी ताकि उभरते भारत की विश्व में एक प्रभावी व सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत की जा सके और प्रत्येक सजग व जागरूक नागरिक अपने अधिकार व कर्त्तव्यों के प्रति जागरूक बने तथा स्वयं के भारतीय होने पर गर्व महसूस कर सकें और इन सबके आधार पर भारतीय तिरंगा एक प्रगतिशील भारत की पहचान बन सके।

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