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 इतिहास (मुख्य परीक्षा) दृष्टिकोण एवं रणनीति


1. विषय का चयन 


संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) एवं राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाओं में सफलता के लिए सर्वप्रथम और सर्वप्रमुख चरण है - सही वैकल्पिक विषय का चयन। सही वैकल्पिक विषय का चयन सफलता के मार्ग को आसान बना देता है। अतः वैकल्पिक विषय के चयन में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। वैकल्पिक विषय का चयन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अत्यावश्यक है-

  • विषय के अध्ययन के लिए किसी विशेष 'दक्षता' या डिग्री की जरूरत न हो अर्थात् विषय की प्रकृति विशेषीकृत न हो, बल्कि सामान्यीकृत हो।

  • विषय की अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध हो।

  • विषय में सामान्य अध्ययन के सहायक विषय बनने की क्षमता हो।

  • विषय परीक्षा की दृष्टि से सुरक्षित (Safe) अथवा न्यूनतम जोखिम वाला तथा अंकदायी एवं चयन में सहायक हो।

  • विषय के अध्ययन में 'भाषा' का महत्त्व नगण्य हो अर्र्थात् विषय हिन्दी और अंग्रजी दोनों भाषाओं के परीक्षार्थियों के लिए समान हो।

  • विषय व्यक्तित्व के विकास में सहायक हो।

  • विषय रुचिकर हो। किन्तु यहाँ इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि यदि 'रुचिकर' और अंकदायी' में प्राथमिकता की बात आये तो 'अंकदायी' होने को प्राथमिकता देकर विषय का चयन करना चाहिए।

  • विषय में सफलता का प्रतिशत अधिक हो।

  • विषय ऐसा हो जो शहरी-ग्रामीण परीक्षार्थियों में कोई अंतर न करे। अर्थात् यदि कोई विद्यार्थी उस विषय को शहर में रहकर पढ़े या ग्राम में, इस बात का 'अंक' पर कोई प्रभाव न पड़े।


2. इतिहास : एक श्रेष्ठ वैकल्पिक विषय 

सिविल सेवा परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय के चयन हेतु ऊपर जिन अत्यावश्यक बातों पर चर्चा की गई हैं, वे सभी इतिहास के संदर्भ में पूरी तरह से लागू होती हैं, जैसे-

  • इतिहास एक ऐसा विषय है जिसे मुख्य परीक्षा में रखकर सर्वाधिक छात्र सफल होते हैं।

  • एक वैकल्पिक विषय के रूप में इतिहास का अध्ययन करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आपने इस विषय को 'डिग्री' स्तर पर पढ़ा ही हो। किसी भी संकाय (कला/विज्ञान/वाणिज्य) के छात्र इस विषय का चयन करके अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। इसमें जटिल सैद्धांतिक पक्षों का अभाव है अतः इसे कोई भी सामान्य छात्र पढ़ सकता है।

  • सामान्य अध्ययन के एक सहायक विषय के रूप में 'इतिहास' की भूमिका अति महत्त्वपूर्ण है। प्रारम्भिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन में लगभग 18-20 प्रश्न इतिहास से ही पूछे जाते हैं और प्रश्नों की प्रकृति आजकल ऐसी रहती है कि दूसरे विषय के छात्र को हल करना थोड़ा कठिन होता है जबकि इतिहास विषय के छात्र इन प्रश्नों को आसानी से हल करके G.S. में अन्य छात्रों से बढ़त ले सकते हैं।

  • सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र में भी इतिहास की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 250-300 अंकों की भागीदारी देखी जा सकती है। गौर करने की बात यह है कि वर्ष 2013 से मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र में विश्व इतिहास का खंड भी जुड़ गया है। अतः यहाँ पर भी इतिहास विषय के अभ्यर्थी लाभप्रद स्थिति में हैं।

  • इतिहास एक ऐसा विषय है जो हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही माध्यम के छात्रों के लिए समान रूप से अंकदायी है।

  • मुख्य परीक्षा में इतिहास के प्रथम प्रश्न पत्र में मानचित्र आधारित प्रश्न होने से इस प्रश्न पत्र में 160-170 अंक आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।

  • इतिहास विषय के माध्यम से प्रति वर्ष कई अभ्यर्थी 350 से भी अधिक अंक (600 अंकों में से) प्राप्त कर अपनी सफलता सुनिश्चित करते हैं। प्रांतीय सिविल सेवा के लिए भी यह विषय अंकदायी रहा है।

  • इतिहास के अध्ययन से भारत सहित विश्व के उन महान व्यक्तियों एवं उनके कायरें के बारे में जानकारी प्राप्त होती है और यह जानकारी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व के विकास में महती भूमिका निभाती है।

  • सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इतिहास एक भरोसेमंद विषय है। आपके प्रयास व प्रस्तुति के अनुपात में अंक आपको अवश्य मिलते हैं। अतः अंक के स्तर पर यह विषय आपको धोखा देने वाला नहीं है।

 

 

 

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