भारत-फ्राँस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी | 18 Feb 2026

प्रिलिम्स के लिये: इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट  2026, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियाँ, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), शांति अधिनियम, 2025, इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (IPOI), संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (UNOC-3), BBNJ संधि, युगे युगीन भारत संग्रहालय, शक्ति (सेना), वरुण (नौसेना), गरुड़ (वायु सेना), प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC), स्वच्छता और पादप स्वच्छता (SPS), सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR), महत्त्वपूर्ण खनिज, राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर।                   

मेन्स के लिये: फ्राँस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के प्रमुख परिणाम, भारत-फ्राँस रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख बिंदु, भारत-फ्राँस संबंधों में चिंता के प्रमुख क्षेत्र और आगे की राह।

स्रोत: IE

चर्चा में क्यों? 

फरवरी 2026 में भारत और फ्राँस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक ऐतिहासिक ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया। यह प्रगति इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट , 2026 में फ्राँस के राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान हुई, जहाँ उन्होंने इस शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया।

  • रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, AI और बहुपक्षीय मामलों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति बनी, जिसका आधार 25 वर्षों का रणनीतिक सहयोग और होराइज़न 2047 रोडमैप है।

सारांश

  • भारत और फ्राँस ने अपने संबंधों को एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (2026) के रूप में उन्नत किया है। इस साझेदारी के तहत रक्षा, परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष और हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाया जाएगा।
  • भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और बढ़ते रणनीतिक निवेशों के समर्थन से द्विपक्षीय व्यापार 12.67 बिलियन यूरो तक पहुँच गया।
  • रक्षा परियोजनाओं में देरी, AI विनियमन में अंतर, व्यापार बाधाएँ और भू-राजनीतिक मतभेद जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

फ्राँस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के प्रमुख परिणाम क्या हैं?

  • रक्षा एवं सामरिक सहयोग: 26 राफेल-मरीन लड़ाकू जेट विमानों की खरीद के अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया। H125 फाइनल असेंबली लाइन (टाटा-एयरबस) का उद्घाटन- भारत में निजी क्षेत्र की पहली हेलीकॉप्टर सुविधा। उभरती महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिये एक संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह का गठन।
  • परमाणु ऊर्जा सहयोग: वर्ष 2025 आशय घोषणा के तहत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (AMR) पर सहयोग को मज़बूत करना। जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना सहित मूल्य शृंखला में सहयोग।
    • फ्राँस ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के भारत के लक्ष्य और निजी निवेश की अनुमति देने वाले सुधारों (शांति अधिनियम, 2025) की सराहना की।
  • अंतरिक्ष सहयोग: तीसरा भारत-फ्राँस रणनीतिक अंतरिक्ष संवाद 2026 में आयोजित किया जाएगा। भारत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन (जुलाई 2026, फ्राँस) में भाग लेगा।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार: भारत-फ्राँस नवाचार नेटवर्क का शुभारंभ, डिजिटल विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के लिये द्विपक्षीय डिजिटल विज्ञान केंद्र (फ्राँसीसी राष्ट्रीय संस्थान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से), उन्नत सामग्री के लिये संयुक्त केंद्र की स्थापना।
  • इंडो-पैसिफिक सहयोग: इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (भारत की अध्यक्षता में) के तहत सहयोग को बढ़ावा देना। ऑस्ट्रेलिया और यूएई के साथ त्रिपक्षीय प्रारूपों में सहयोग
  • जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण: दोनों नेताओं ने जून 2025 में नीस में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (UNOC-3) की सफलता का स्वागत किया और राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग पर समझौते (BBNJ संधि) के लागू होने की सराहना की
  • स्वास्थ्य सहयोग: स्वास्थ्य क्षेत्र में AI पर शोध केंद्र जिसमें सॉर्बोन विश्वविद्यालय, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, दिल्ली और पेरिस ब्रेन इंस्टिट्यूट शामिल हैं।
    • पैरिसांटे कैंपस और सेलुलर एवं आणविक प्लेटफॉर्म केंद्र, हेल्थ डेटा हब और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के बीच सहयोग।
  • शिक्षा और संस्कृति: वर्ष 2030 तक फ्राँस में 30,000 भारतीय छात्रों का लक्ष्य (वर्तमान में 10,000)। युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय का France Muséums Développement के साथ सहयोग। रणनीतिक साझेदारी के 30 वर्ष पूरे होने पर नमस्ते फ्राँस 2028 कार्यक्रम।
  • क्षेत्रीय मुद्दे: 
    • यूक्रेन: UN चार्टर के सिद्धांतों (संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता) के आधार पर संघर्ष विराम और न्यायपूर्ण शांति के समर्थन में।
    • गाज़ा: गाज़ा के लिये शांति योजना (UNSC संकल्प 2803) और टू स्टेट सॉल्यूशन के समर्थन में।
    • ईरान: संवाद और कूटनीति पर ज़ोर।
  • बहुपक्षीय मुद्दे: फ्राँस ने भारत की UNSC की स्थायी सदस्यता के लिये दृढ़ समर्थन दोहराया; बड़े पैमाने पर अत्याचारों में वीटो के प्रयोग के नियमों पर समन्वय।
    • फ्राँसीसी राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री को फ्राँस में 2026 G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया और अफ्रीका के साथ साझेदारी को मज़बूत करने हेतु मई 2026 में नैरोबी में होने वाले अफ्रीका फॉरवर्ड समिट में भी आमंत्रित किया।

भारत-फ्राँस रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख बिंदु क्या हैं?

  • रणनीतिक साझेदारी: 1998 में स्थापित भारत–फ्राँस  रणनीतिक साझेदारी तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है: आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता और एक-दूसरे की गठबंधनों और सैन्य गठनों में भाग न लेना।
  • रक्षा सहयोग: रक्षा सहयोग भारत–फ्राँस संबंधों का मुख्य स्तंभ है, जिसमें रूस के बाद फ्राँस भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्त्ता बनकर उभरा है।
  • आर्थिक और व्यापारिक संबंध: फ्राँस भारत का तीसरा सबसे बड़ा यूरोपीय संघ व्यापारिक साझेदार है (नीदरलैंड और जर्मनी के बाद), जिसमें द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 12.67 अरब यूरो तक दोगुना हो गया और यह आँकड़ा भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के बाद और बढ़ने की संभावना है।
    • भारत में 11वें सबसे बड़े विदेशी निवेशक के रूप में फ्राँस ने अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक कुल 9.79 अरब यूरो का निवेश किया है, जो कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह का 1.61% है।
  • नागरिक परमाणु सहयोग: भारत और फ्राँस ने वर्ष 2008 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये। दोनों देशों ने लागत-कुशल SMRs (स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर) पर साझेदारी करने पर सहमति व्यक्त की, जिसे तेज़ी से लागू करने के लिये यह भारत की 20,000 करोड़ रुपये की न्यूक्लियर एनर्जी मिशन द्वारा समर्थित है।
  • अंतरिक्ष और एयरोस्पेस सहयोग: वर्ष 2021 में ISRO और CNES ने बंगलुरु के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC) में एक नया अंतरिक्ष सहयोग समझौता किया। भारत के अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को फ्राँस की AI-आधारित उपग्रह अनुप्रयोगों में विशेषज्ञता से लाभ मिल रहा है।
    • यह ISRO और CNES दोनों की एक संयुक्त उपग्रह मिशन है, जिसे त्रिशना मिशन (TRISHNA Mission) कहा जाता है, जिसका पूरा नाम है थर्मल इंफ्रारेड इमेजिंग सैटेलाइट फॉर हाई-रिज़ॉल्यूशन नेचुरल रिसोर्स असेसमेंट
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): दोनों देशों ने भारत-फ्राँस कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोडमैप जारी किया है, जो सुरक्षित, खुले, विश्वसनीय और भरोसेमंद AI पर केंद्रित है। भारतीय स्टार्टअप्स फ्राँसीसी स्टार्टअप इन्क्यूबेटर स्टेशन F में भाग ले रहे हैं।
  • सागरीय सहयोग: सागरीय सहयोग भारत-फ्राँस ब्लू इकॉनमी और महासागर शासन रोडमैप (2022) के मार्गदर्शन में किया जाता है। फ्राँस, अपने इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों के साथ, भारत की स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित सागरीय व्यवस्था की दृष्टि के साथ तालमेल रखता है।

भारत-फ्राँस संबंधों में मुख्य चिंताजनक क्षेत्र क्या हैं?

  • रक्षा खरीद और तकनीकी हस्तांतरण में विलंब: राफेल जेट, स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ और जेट इंजन सहयोग जैसे परियोजनाएँ अनुबंध वार्त्ता, नीतिगत बदलाव और स्थानीयकरण की मांगों के कारण धीमी हुईं।
  • भिन्न रक्षा और सुरक्षा प्राथमिकताएँ: भारत का क्षेत्रीय दृष्टिकोण और ‘गैर-संरेखित’ नीति कभी-कभी फ्राँस के वैश्विक हितों से टकराती है (जैसे– रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भिन्न रुख)।
  • बाज़ार पहुँच संबंधी मुद्दे: फ्राँस अपनी फार्मास्यूटिकल, लक्ज़री उत्पाद और रक्षा उद्योगों के लिये अधिक पहुँच चाहता है, जबकि भारत आईटी, कृषि और जेनेरिक दवाओं हेतु आसान प्रवेश की मांग करता है। भारत को सैनिटरी और फाइटो सैनिटरी (SPS) नियमों के कारण फ्राँस में निर्यात करने में कठिनाइयाँ आती हैं, जिससे भारतीय उत्पादों का फ्राँसीसी बाज़ार में प्रवेश बाधित होता है।
  • वैश्विक AI और डेटा नियमों पर असहमति: फ्राँस EU के कड़े सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR) मॉडल का समर्थन करता है, जबकि भारत अपनी डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के तहत लचीले और नवाचार-अनुकूल दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है।
    • ओपन-सोर्स AI, साइबर सुरक्षा मानदंडों और डिजिटल संप्रभुता पर मतभेद गहन AI सहयोग को सीमित कर सकते हैं।
  • रणनीतिक स्वायत्तता पर मतभेद: ऊर्जा और सुरक्षा के लिये रूस के साथ भारत के मज़बूत संबंध फ्राँस के साथ तनाव उत्पन्न करते हैं, जिसने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का कड़ा विरोध किया है। भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद नाटो (NATO) के नेतृत्व वाले रूस पर प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार कर दिया, हालाँकि फ्राँस यूक्रेन का एक प्रमुख सैन्य समर्थक रहा है।
  • प्रवासन और गतिशीलता पर प्रतिबंध: बढ़ते संबंधों के बावज़ूद, वीजा प्रतिबंध, वर्क परमिट की सीमाएँ अभी भी भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिये चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
    • भारत अपने कुशल कार्यबल के लिये आवास और काम के अवसरों की तलाश में है, लेकिन फ्राँस यूरोपीय संघ (EU) की व्यापक प्रवासन नीतियों को प्राथमिकता देता है, जिससे लचीलापन सीमित हो जाता है।

भारत-फ्राँस संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिये किन उपायों की आवश्यकता है?

  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करना: रक्षा प्रौद्योगिकियों में संयुक्त उत्पादन और अनुसंधान को गति देना, जिसमें प्रिसीजन-गाइडेड मिसाइलों, हेलीकॉप्टरों और उन्नत जेट इंजनों का सह-निर्माण शामिल है। साथ ही आत्मनिर्भरता के लिये भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल पर बल देना।
  • ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना: आपसी जलवायु लक्ष्यों का समर्थन करने के लिये नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार करना, जिसमें महत्त्वपूर्ण खनिजों और उन्नत सामग्रियों में संयुक्त निवेश शामिल है।
  • आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को बढ़ाना: व्यापार असंतुलन और टैरिफ को कम करने के लिये हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का लाभ उठाना, जिसका लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार में संतुलित विकास करना है। 
    • बाज़ार पहुँच संबंधी बाधाओं को दूर करने और वैमानिकी, अंतरिक्ष और हाई-स्पीड रेल जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिये समर्पित संयुक्त कार्य समूहों की स्थापना करना।
  • तकनीकी साझेदारी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में 'उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित करके 'भारत-फ्राँस नवाचार वर्ष 2026' का शुभारंभ करना, जिससे स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिले।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना: शैक्षिक, सांस्कृतिक और गतिशीलता कार्यक्रमों का विस्तार करना, जिसमें पेरिस में 'स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र' जैसे सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना और लोथल में 'राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर' जैसी विरासत परियोजनाओं पर सहयोग शामिल है।

निष्कर्ष

होराइज़न 2047 रोडमैप के तहत यह साझेदारी सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष और बहुपक्षीय कूटनीति सहित कई क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ी और रणनीतिक रूप से व्यापक हुई है। प्रमुख परिणामों में राफेल-मरीन जेट, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और भारत-प्रशांत सहयोग शामिल हैं। हालाँकि दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक प्रभाव के लिये निरंतर संवाद के माध्यम से खरीद में विलंब, व्यापार असंतुलन और भू-राजनीतिक मतभेदों को सुलझाना आवश्यक बना हुआ है।

दृष्टि मेंस प्रश्न:

प्रश्न. भारत-फ्राँस संबंध रक्षा खरीद से परे एक व्यापक सामरिक भागीदारी के रूप में विकसित हुए हैं। परीक्षण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारत-फ्राँस रणनीतिक साझेदारी की स्थापना कब हुई थी?
इसकी स्थापना वर्ष 1998 में हुई थी, यह तीन स्तंभों पर आधारित है: आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता और एक-दूसरे के गठबंधनों और गठबंधन समूहों में शामिल होने से बचना।

2. वर्ष 2026 में फ्राँस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के प्रमुख रक्षा परिणाम क्या थे?
26 राफेल-मरीन फाइटर जेट की खरीद के अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया और भारत की पहली निजी क्षेत्र की हेलीकॉप्टर निर्माण सुविधा, H125 फाइनल असेंबली लाइन (TATA-एयरबस) का उद्घाटन किया गया।

3. भारत-फ्राँस AI रोडमैप क्या है?
यह सुरक्षित, संरक्षित, खुले और विश्वसनीय AI पर केंद्रित है, जिसमें डिजिटल विज्ञान और 'स्टेशन एफ' (Station F) जैसे स्टार्टअप ईकोसिस्टम में सहयोग शामिल हैं।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

  1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को 2015 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में प्रारंभ किया गया था।
  2. इस गठबंधन में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश सम्मिलित हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (a)


मेंस 

प्रश्न. I2U2 (भारत, इज़रायल, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका) समूहन वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति को किस प्रकार रूपांतरित करेगा? (2022)