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prelims Test Series 2019
बेसिक इंग्लिश का दूसरा सत्र (कक्षा प्रारंभ : 22 अक्तूबर, शाम 3:30 से 5:30)
आरएएस मुख्य परीक्षा-2012 का परिणाम रद्द
Mar 05, 2014

आरएएस मुख्य परीक्षा-2012 के मूल्यांकन में अपनाई गई स्केलिंग पद्धति को अवैध ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने मुख्य परीक्षा का परिणाम रद्द कर दिया है। न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास ने बाड़मेर निवासी भंवरलाल की रिट याचिका को मंजूर करते हुए आयोग को रॉ-मार्क्स के आधार पर एक माह में संशोधित परिणाम घोषित करने का आदेश भी दिया। न्यायालय ने कहा कि स्केलिंग पद्धति को उचित नहीं ठहराया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्केलिंग और मॉडरेशन पद्धति को अनुचित माना है।

न्यायालय ने कहा कि मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद बढ़ाए गए पद भी इस भर्ती में शामिल नहीं किए जा सकते। बढ़ाए गए पद नए नियमों के तहत ही भरे जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि रिट याचिका में स्केलिंग पद्धति को चुनौती दी गई थी, जिस पर उच्च न्यायालय  ने 25 फरवरी को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था। पुरानी पद्धति से यह आरएएस भर्ती की आखिरी परीक्षा थी। इसके बाद नई पद्धति से भर्ती की जानी है। नई पद्धति के तहत केवल चार प्रश्न-पत्र होंगे और स्केलिंग जैसी प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना होगा।

भर्ती परीक्षा में स्केलिंग पद्धति अपनाने को लेकर उच्च न्यायालय ने आरपीएससी से बिन्दुवार जवाब मांगे थे। आरपीएससी ने स्केलिंग पद्धति को सही ठहराया तो याचिकाकर्ता की ओर दो ऎसे अभ्यर्थियों की अंक-तालिकाएं पेश की गईं, जिनके स्केलिंग के बाद अंक 0 से 47 और 47 से 0 हो गए। आरपीएससी के अधिवक्ताओं ने इसे लिपिकीय त्रुटि बताया।

निर्णय उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने सुनाया है। ऎसे में आयोग इसकी अपील खंडपीठ में कर सकता है। वहां भी राहत नहीं मिलने पर सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है। यदि संभावित संशोधित परिणाम घोषित किया जाता है और उसमें अभ्यर्थी अंदर-बाहर होते हैं तो बाहर हुए अभ्यर्थी फिर न्यायालय की शरण ले सकते हैं।

आरएएस मुख्य परीक्षा 2012 के परिणाम के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए आदेश से राजस्थान लोक सेवा आयोग के समक्ष संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अब यदि आयोग रॉ मार्क्स के आधार पर मुख्य परीक्षा का परिणाम संशोधित करता है तो आरएएस प्री 2012 के परिणाम पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में आरएएस प्री में सफल नहीं हो पाए अभ्यर्थी भी मुख्य परीक्षा के संशोधित परिणाम को आधार बनाकर न्यायालय में जा सकते हैं। आयोग ने 27 जनवरी को स्केलिंग के आधार पर परिणाम जारी किया था।

क्या है स्केलिंग?

आरएएस 2012 में और इससे पूर्व की आरएएस परीक्षाओं में वैकल्पिक विषयों की संख्या 30 से अधिक होती थी। कला वर्ग के साथ ही, वाणिज्य एवं विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी भी इस परीक्षा में प्रविष्ट होते हैं। गणित और विज्ञान के विषय स्कोरिंग होते हैं। इसके विपरीत कला व साहित्य से जुड़े विषयों में खूब लिखने के बाद भी बहुत अच्छे अंक नहीं मिल पाते। ऐसे में कोई विषय का अभ्यर्थी आरएएस में सफल होने से वंचित नहीं हो जाए, इसे देखते हुए ही एक पैमाना तय किया गया, जिसे स्केलिंग का नाम दिया गया।

स्केलिंग इसलिए अनिवार्य

 किसी भी परीक्षा में दो कारणों से स्केलिंग की जाती है। पहला एक ही परीक्षा में विषय अलग-अलग हों। ऐसे में अलग-अलग विषयों के लिए समान प्रश्न-पत्र नहीं बनाए जा सकते। उदाहरणार्थ, समाज शास्त्र और भौतिक विज्ञान के प्रश्न-पत्र समान नहीं हो सकते। समाज शास्त्र में अभ्यर्थियों के अंक कम आ रहे हैं और भौतिक विज्ञान में अधिक आ रहे हैं। यदि यहां स्केलिंग नहीं अपनाई जाएगी, तो जिस विषय का प्रश्न-पत्र सरल होगा, उसके सब अभ्यर्थी सलेक्ट हो जाएंगे और दूसरे विषय से यही परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी परीक्षा से बाहर हो जाएंगे।

दूसरा कारण कॉपियां जांचने के तरीके  को लेकर है। यदि माना जाए कि दो अलग-अलग परीक्षकों को 100-100 उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए दी जाएं। अब इनमें से एक परीक्षक लिबरल है, उसने मुक्त-हस्त अभ्यर्थी को अंक दिए। इसके विपरीत दूसरे परीक्षक ने हार्ड मार्किंग की तो, अभ्यर्थियों का नुकसान होता है। इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए और सभी विषयों के अभ्यर्थियों को संबंधित भर्ती में लाभ मिले, इसके लिए ही स्केलिंग अनिवार्य की गई। यदि स्केलिंग नहीं अपनाई जाए, तो विषय विशेष के ही अभ्यर्थी अधिक चुने जाएंगे।

आरपीएससी ने 1992 में स्केलिंग पद्धति अपनाई थी। उस समय यतींद्र सिंह आयोग के अध्यक्ष थे। इसके बाद से जितनी भी परीक्षाएं हुईं, वे स्केलिंग पद्धति पर ही हुई। यह पद्धति अकेले आरपीएससी में ही नहीं, बल्कि देश भर की लोक सेवा आयोग परीक्षाओं में यह पद्धति लागू है।


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