प्रिलिम्स फैक्ट्स (29 May, 2023)



एक्सपोसैट

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने बंगलूरू में ISRO मुख्यालय में 'यूज़र मीट ऑफ एक्सपोसैट' के दौरान छात्रों और वैज्ञानिकों को संबोधित किया।

  • उन्होंने विज्ञान-आधारित अंतरिक्ष मिशनों से डेटा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के महत्त्व पर बल दिया और भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों को प्रतिभाशाली छात्रों की पहचान करने तथा उन्हें एक्सपोसैट (XPoSat) जैसी उभरती डेटा तकनीकों के साथ काम करने हेतु प्रेरित करने के लिये प्रोत्साहित किया।

एक्सपोसैट: 

  • परिचय: 
    • एक्सपोसैट (XPoSat) का अर्थ एक्स-रे ध्रुवणमापी उपग्रह है। 
    • यह भारत का अग्रणी ध्रुवणमापी (पोलरिमेट्री) मिशन है जिसका उद्देश्य विषम परिस्थितियों में खगोलीय स्रोतों की विभिन्न गतिशीलता का अध्ययन करना है।
    • एक्सपोसैट ISRO और रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), बंगलूरू, कर्नाटक के सहयोग से विकसित किया गया है।  

  • एक्सपोसैट का वैज्ञानिक नीतभार: 
    • एक्सपोसैट दो वैज्ञानिक नीतभार ले जाएगा: पृथ्वी की निचली कक्षा में प्राथमिक नीतभार पोलिक्स (POLIX) (एक्स-रे में ध्रुवणमापी उपकरण) और एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी और टाइमिंग (SPECT)
      • नीतभार पोलिक्स खगोलीय स्रोतों से उत्पन्न होने वाले 8-30 केवी फोटॉन के मध्यम एक्स-रे ऊर्जा रेंज में ध्रुवणमापी प्राचल (ध्रुवीकरण की डिग्री और कोण) जैसे ध्रुवीकरण मापदंडों का मापन करेगा।
      • SPECT नीतभार एक्स-रे फोटॉन के 0.8-15 केवी की ऊर्जा सीमा में मूल्यवान समय और स्पेक्ट्रोस्कोपिक जानकारी प्रदान करेगा
  • खगोलीय स्रोतों को समझने का महत्त्व:
    • पोलारिमेट्री माप विभिन्न खगोलीय स्रोतों से उत्सर्जन प्रक्रियाओं को समझने हेतु एक उत्कृष्ट निदान उपकरण है।
    • स्पेक्ट्रोस्कोपिक और समय मापन के साथ ध्रुवीयमितीय अवलोकनों के संयोजन से शोधकर्त्ता खगोलीय उत्सर्जन प्रक्रियाओं की वर्तमान समझ के साथ सीमाओं को नियंत्रित करने का अनुमान लगाते हैं।
  • एक्सपोसैट की स्थिति: 
    • एक्सपोसैट के लिये परीक्षण लगभग पूर्ण होने के साथ मिशन अपने उन्नत चरणों में है, इसे वर्ष 2023 में किसी भी समय प्रारंभ किया जा सकता है। 

इसरो के अन्य आगामी मिशन: 

  • आदित्य- L1:  
    • भारत का पहला समर्पित सौर वेधशाला मिशन, जून-जुलाई 2023 के लिये निर्धारित है
  • चंद्रयान- 3:  
    • जून 2023 में निर्धारित चंद्रयान- 2 के लिये एक अनुवर्ती मिशन। 
  • शुक्रयान- 1:
    • शुक्र के लिये भारत का पहला ऑर्बिटर मिशन।
  • गगनयान: 
    • एक मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है जो अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी. ऊँचाई पर कक्षा में ले जाएगा।
  • निसार: 
    • इसरो और नासा के मध्य एक संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन मिशन जो वैश्विक पर्यावरणीय परिवर्तनों पर जानकारी प्रदान करेगा।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, पिछले वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? (2014)

         अंतरिक्ष यान                            प्रयोजन

  1. कैसिनी-हाइगेन्स                 शुक्र की परिक्रमा करना और डेटा को पृथ्वी पर संचारित करना
  2. मैसेंजर                           बुध का मानचित्रण और अन्वेषण
  3. वॉयेजर 1 और 2                बाह्य सौर परिवार का अन्वेषण

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a)  केवल 1 

(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3 
(d) 1, 2 और 3 

उत्तर: (b) 

 स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


नीति आयोग का वार्षिक स्वास्थ्य सूचकांक 2020-21

केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना वर्ष 2020-21 के कोविड काल के लिये नीति आयोग के वार्षिक 'स्वास्थ्य सूचकांक' में 'बड़े राज्यों' के बीच शीर्ष प्रदर्शनकर्त्ता के रूप में उभरे हैं।

सूचकांक की प्रमुख विशेषताएँ:

  • समग्र प्रदर्शन के आधार पर:  
    • बड़े राज्य: 
      • 19 'बड़े राज्यों' में केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना ने समग्र प्रदर्शन के मामले में क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
      • बिहार (19वाँ), उत्तर प्रदेश (18वांँ) और मध्य प्रदेश (17वांँ) सूची में अंतिम स्थान पर हैं।
    • छोटे राज्य:
      • आठ छोटे राज्यों में त्रिपुरा ने सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन दर्ज किया है, इसके बाद सिक्किम और गोवा का स्थान है; अरुणाचल प्रदेश (6वाँ), नगालैंड (7वाँ) और मणिपुर (8वाँ) सूची में अंतिम स्थान पर हैं।
    • केंद्रशासित प्रदेश: 
      • आठ केंद्रशासित प्रदेशों में लक्षद्वीप को समग्र प्रदर्शन के मामले में शीर्ष प्रदर्शनकर्त्ता के रूप में स्थान दिया गया है, जबकि दिल्ली को सबसे अंतिम स्थान प्राप्त हुआ है।
  • वृद्धिशील प्रदर्शन के आधार पर:
    • राजस्थान, उत्तराखंड और ओडिशा वर्ष 2019-20 में अपने प्रदर्शन की तुलना में वर्ष 2020-21 में शीर्ष तीन प्रदर्शनकर्त्ताओं के रूप में उभरे हैं

नीति आयोग का वार्षिक स्वास्थ्य सूचकांक

  • परिचय:  
  • उद्देश्य:
    • वार्षिक स्वास्थ्य सूचकांक का उद्देश्य स्वास्थ्य परिणामों और स्वास्थ्य प्रणालियों के प्रदर्शन पर प्रगति को ट्रैक करना और रैंक प्रदान करना तथा एक स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा विकसित करना एवं राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मध्य क्रॉस लर्निंग को प्रोत्साहित करना है।
  • मापदंड:  
    • स्वास्थ्य सूचकांक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का दो मापदंडों पर आकलन करता है- वृद्धिशील प्रदर्शन (वर्ष-दर-वर्ष प्रगति) और समग्र प्रदर्शन
  • श्रेणी:  
    • रैंकिंग तीन श्रेणियों के तहत की जाती है: समान संस्थाओं के बीच तुलना सुनिश्चित करने के लिये विशाल राज्य, छोटे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश
  • संरचना:  
    • स्वास्थ्य सूचकांक एक समग्र स्कोर है जो तीन क्षेत्रों में 24 संकेतकों पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की उपलब्धियों एवं वृद्धिशील सुधारों को दर्शाता है: स्वास्थ्य परिणाम, शासन व सूचना तथा प्रमुख इनपुट और प्रक्रियाएँ।
      • परिणाम संकेतकों के लिये उच्च स्कोर के साथ प्रत्येक क्षेत्र को उसकी वरीयता के आधार पर महत्त्व दिया गया है। 
    • 'स्वास्थ्य परिणामों' में नवजात मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर, जन्म के समय लिंग अनुपात, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव का अनुपात, तपेदिक के कुल मामलों की अधिसूचना दर और एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी पर HIV के साथ रहने वाले लोगों के अनुपात जैसे संकेतक शामिल हैं। 
    • 'शासन और सूचना' क्षेत्र में संस्थागत वितरण का अनुपात, राज्य स्तर पर तीन प्रमुख पदों की औसत अवधि (महीनों में), मुख्य चिकित्सा अधिकारी की औसत अवधि (महीनों में) और निधि स्थानांतरण में लगने वाले दिन जैसे संकेतक शामिल हैं।
    • 'प्रमुख इनपुट/प्रक्रियाएँ' उपलब्ध स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे का एक उपाय है, जिसमें कार्यात्मक 24X7 प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र, कार्यात्मक हृदय संबंधी देखभाल इकाइयों वाले ज़िलों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पदों में रिक्तियों का अनुपात शामिल है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


नीति आयोग शासी परिषद की आठवीं बैठक

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की शासी परिषद की 8वीं बैठक की अध्यक्षता की।

  • इसमें 19 राज्यों और 6 केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों ने प्रतिनिधित्व किया।

बैठक की मुख्य विशेषताएँ: 

  • थीम:
    • विकसित भारत @ 2047: टीम इंडिया की भूमिका
  • प्रधानमंत्री का संबोधन: 
    • वर्ष 2047 में "विकसित भारत" के उद्देश्य को साकार करने के लिये केंद्र और राज्यों को "टीम इंडिया" के रूप में काम करना होगा।
    • नीति आयोग अगले 25 वर्षों के लिये अपनी रणनीति विकसित करने और उसे राष्ट्रीय विकास एजेंडे के साथ संरेखित करने तथा राज्यों की सहायता करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  
    • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आयोग के साथ काम करने का आग्रह किया गया ताकि देश "अमृत काल" के अपने दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सके।
    • अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष में "श्री अन्न" को बढ़ावा देने के लिये राज्यों और केंद्र के बीच  सहयोग पर बल दिया।
    • भारत को 'श्री अन्न' (पोषक अनाज/कदन्न) हेतु एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिये ‘भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में समर्थन दिया जाएगा।
    • उन्होंने "अमृत सरोवर" कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया।

नीति आयोग शासी परिषद:

  • यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने के लिये विश्वसनीय प्रमुख निकाय है।
  • यह अंतर-क्षेत्रीय, अंतर-विभागीय और संघीय मुद्दों पर चर्चा करने हेतु एक मंच है।
  • इसमें सम्मिलित हैं: 
    • भारत का प्रधानमंत्री।
    • विधायिका वाले सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री।
    • अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल।
    • नीति आयोग के पदेन सदस्य और उपाध्यक्ष,
    • नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य।
    • विशेष आमंत्रित सदस्य।

नीति आयोग: 

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. अटल नवप्रवर्तन (इनोवेशन) मिशन किसके अधीन स्थापित किया गया है? (2019) 

(a) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
(b) श्रम और रोज़गार मंत्रालय
(c) नीति आयोग
(d) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

उत्तर: (c) 


प्रश्न. भारत सरकार ने नीति (NITI) आयोग की स्थापना निम्नलिखित में से किसका स्थान लेने के लिये की है?    (2015) 

(a) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
(b) वित्त आयोग
(c) विधि आयोग
(d) योजना आयोग

उत्तर: (d) 


मेन्स:

प्रश्न. भारत के नीति आयोग द्वारा अनुसरण किये जा रहे सिद्धांत इससे पूर्व के योजना आयोग द्वारा अनुसरित सिद्धांतों से किस प्रकार भिन्न हैं? (2018) 

Source: PIB


डांसिंग गर्ल मूर्ति

मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल मूर्ति का "समकालीन" संस्करण दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय एक्सपो 2023 के शुभंकर के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इस शुभंकर को बनाने हेतु भौगोलिक संकेतक (Geographical indication- GI) द्वारा संरक्षित चन्नापटना खिलौनों के पारंपरिक शिल्प का उपयोग किया गया था।

  • हालाँकि इसने हाल ही में मूल रूप से विकृति के कारण विवाद खड़ा कर दिया है।
  • संस्कृति मंत्रालय ने प्रेरित शिल्प कार्य और द्वारपालों या द्वारपाल के समकालीन प्रतिनिधित्व के रूप में इसका बचाव किया।

डांसिंग गर्ल मूर्ति का महत्त्व:

  • परिचय:  
    • डांसिंग गर्ल मूर्ति सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) की सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित कलाकृतियों में से एक है, जिसे हड़प्पा सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है।
    • इसकी खोज वर्ष 1926 में पुरातत्त्वविद् अर्नेस्ट मैके ने मोहनजोदड़ो में की थी, जो प्राचीन विश्व की सबसे बड़ी और सबसे उन्नत शहरी बस्तियों में से एक थी।
    • यह मूर्ति काँसे से बनी है और इसे लॉस्ट वैक्स तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है।
  • डांसिंग गर्ल का महत्त्व:
    • मूर्ति का अस्तित्व हड़प्पा समाज में उच्च कला की उपस्थिति को इंगित करता है, जो उनके कलात्मक परिष्कार को दर्शाता है।
      • डांसिंग गर्ल के अभूतपूर्व शिल्प कौशल और प्रतीकात्मक सौंदर्य से पता चलता है कि इसे उपयोगितावादी उद्देश्यों के लिये नहीं बनाया गया था बल्कि सांस्कृतिक महत्त्व के प्रतीक के रूप में बनाया गया था।
    • मूर्ति में यथार्थवाद और प्रकृतिवाद की उल्लेखनीय भावना प्रदर्शित की गई है, जो डांसिंग गर्ल की शारीरिक रचना, अभिव्यक्ति और मुद्रा के सूक्ष्म विवरणों पर प्रकाश डालती है। इतिहासकार ए.एल बाशम ने भी इसे अन्य प्राचीन सभ्यताओं के कार्यों से अलग करते हुए इसकी जीवंतता की प्रशंसा की है। 
  • डांसिंग गर्ल की वर्तमान स्थिति:
    • विभाजन के बाद मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के पाकिस्तान में शामिल होने के बावजूद डांसिंग गर्ल, एक समझौते के तहत भारत को प्राप्त हुई
    • वर्तमान में इस काँस्य मूर्ति को भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है, जो संग्रहालय की सिंधु-घाटी सभ्यता गैलरी में आगंतुकों को "स्टार ऑब्जेक्ट" के रूप में आकर्षित करती है।

लॉस्ट वैक्स तकनीक:

  • इस प्रक्रिया में वांछित वस्तु का मोम का मॉडल बनाना शामिल है, जिसे बाद में एक साँचे में बंद कर दिया जाता है। साँचा प्राय: ऊष्मा प्रतिरोधी सामग्री जैसे प्लास्टर या सिरेमिक से बना होता है।
    • एक बार साँचा बन जाने के बाद इसे पिघलाने और मोम को हटाने के लिये गर्म किया जाता है जिससे मूल मोम मॉडल के आकार का एक खोखला साँचा बन जाता है।
  • पिघला हुआ धातु, जैसे कांस्य या चाँदी को फिर साँचे में डाला जाता है, जिससे मोम द्वारा छोड़ा गया स्थान भर जाता है।
    • मूल मोम मॉडल का आकार लेते हुए धातु को ठंडा और जमने दिया जाता है। एक बार जब धातु ठंडी हो जाती है तो साँचा टूट जाता है या अन्यथा हटा दिया जाता है जिससे अंतिम धातु की वस्तु का पता चलता है।
  • लॉस्ट वैक्स तकनीक अंतिम धातु की ढलाई में बड़ी सटीकता तथा विस्तार की अनुमति देती है, क्योंकि मोम मॉडल को बनाने से पहले जटिल रूप से उकेरा या तराशा जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग प्राय: मूर्तियों, गहनों और अन्य सजावटी धातु की वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है जहाँ बारीक विवरण वांछित होते हैं।
  • समकालीन अभ्यास में लॉस्ट वैक्स तकनीक को प्राय: प्रारंभिक मोम मॉडल बनाने के लिये 3D प्रिंटिंग या कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन (Computer-Aided Design- CAD) जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जाता है, जिससे प्रक्रिया की सटीकता और दक्षता बढ़ जाती है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सी सिंधु सभ्यता के लोगों की विशेषता/विशेषताएँ है/हैं? (2013)

  1. उनके पास बड़े-बड़े महल और मंदिर थे। 
  2. वे देवी और देवताओं दोनों की पूजा करते थे। 
  3. उन्होंने युद्ध में घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथों का उपयोग किया।

नीचे दिये गए कूट का उपयोग करके सही विकल्प चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1, 2 और 3
(d) उपर्युक्त कोई भी कथन सही नहीं है

उत्तर: (b)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 29 मई, 2023

खीर भवानी मेला 

कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में माता खीर भवानी मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा पर जाते हैं। हालाँकि हाल के वर्षों में कश्मीरी पंडितों को लक्ष्य कर किये जा रहे आतंकवादी हमलों में वृद्धि के कारण तीर्थयात्रा में लोगों की भागीदारी में गिरावट आई है। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के बाद से कई कश्मीरी पंडित क्षेत्र में इस तरह के हमलों का शिकार हुए हैं। खीर भवानी मेले का इतिहास सदियों पुराना है, जो दिव्य माँ रागनी देवी के प्रति लोगों की श्रद्धा एवं भक्ति का प्रतीक है। यह ज्येष्ठ माह (जून-जुलाई) में शुक्ल पक्ष या चंद्रमा के बढ़ते चरण के दौरान अष्टमी के दिन मनाया जाता है। यह जीवंत उत्सव इस क्षेत्र में प्रचलित सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्त्व एवं सांप्रदायिक सद्भाव को प्रदर्शित करता है, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, साथ ही कश्मीर की समृद्ध साझा विरासत की सराहना करता है। यह आतंकवादी हमलों की चुनौती के बावजूद कश्मीरी पंडित समुदाय का मेले के प्रति अटूट विश्वास और परंपराओं को बनाए रखने के दृढ़ संकल्प प्रदर्शित करता है। यह सहिष्णुता व लचीलेपन के शक्तिशाली प्रतीक के रूप में है, क्योंकि यह त्योहार एकजुटता बनाए रखता है एवं विपरीत परिस्थितियों में आशा की ओर प्रेरित करता है।

और पढ़ें…इन डेप्थ: जम्मू और कश्मीर 

75 रुपए मूल्यवर्ग के स्मारक सिक्के का अनावरण 

नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75 रुपए मूल्यवर्ग के एक स्मारक सिक्के का अनावरण किया। भारत द्वारा वर्ष 1960 के दशक से विभिन्न उद्देश्यों के लिये स्मारक सिक्के जारी किये गए हैं, जैसे- उल्लेखनीय व्यक्तित्वों का सम्मान, सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना या महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का स्मरण करना। इस नए 75 रुपए के सिक्के की आकृति 44 मिमी. व्यास के साथ गोलाकार है। यह चार मिश्र धातुओं से बना है, जिसमें 50% चाँदी, 40% ताँबा, 5% निकल और 5% जस्ता शामिल है। जारी किये गए इस नए सिक्के के शीर्ष पर अशोक स्तंभ को दर्शाया गया है, जिसके नीचे सत्यमेव जयते अंकित किया गया है। देवनागरी लिपि में 'भारत' शब्द बाईं परिधि पर अंकित है, जबकि अंग्रेज़ी में "इंडिया" दाईं परिधि पर अंकित है। इस सिक्के के दूसरी तरफ नए संसद भवन की छवि चित्रित की गई है, जिसमें ऊपरी परिधि पर देवनागरी लिपि में "संसद संकुल" और निचली परिधि पर अंग्रेज़ी में "संसद परिसर" अंकित किया गया है। यह स्मारक सिक्का सिक्योरिटीज़ ऑफ प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) की वेबसाइट से प्राप्त किया जा सकता है। ये सिक्के संग्रहणीय मूल्य रखते हैं, जिससे इनका वास्तविक मूल्य इनके अंकित मूल्य के अनुरूप नहीं हो सकता है, क्योंकि इनमें सामान्यतः चाँदी या सोने जैसी कीमती धातुएँ होती हैं। वर्ष 2011 के सिक्का अधिनियम के अनुसार, केंद्र सरकार के पास सिक्कों को डिज़ाइन और ढालने का अधिकार है, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इनके वितरण में सीमित भूमिका निभा रहा है। सभी सिक्के मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा में स्थित सरकारी टकसालों में ढाले जाते हैं। भारत में प्रथम स्मारक सिक्का वर्ष 1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने के रूप में जारी किया गया था।

UPI हस्तांतरण, 2027 तक भारतीय डिजिटल भुगतान परिदृश्य पर हावी
 

PwC इंडिया की "द इंडियन पेमेंट्स हैंडबुक- 2022-27" शीर्षक वाली एक रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) हस्तांतरण का मूल्य वित्तीय वर्ष 2026-27 तक प्रतिदिन 1 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इसके तहत देश में खुदरा डिजिटल भुगतानों के मामले में 90% की  वृद्धि हुई है, जो भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली में UPI की स्थिति को और मज़बूत करेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान खुदरा क्षेत्र में कुल हस्तांतरण का लगभग 75% UPI में किया गया। वित्त वर्ष 2022-23 के 103 बिलियन हस्तांतरण से वित्त वर्ष 2026-27 में 411 बिलियन हस्तांतरण की अनुमानित वृद्धि के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान बाज़ार में हस्तांतरण की मात्रा के मामले में 50% की उल्लेखनीय चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की उम्मीद है। इसके अलावा रिपोर्ट क्रेडिट कार्ड व्यवसाय की लाभप्रदता को दर्शाती है, जो वर्ष 2022-2023 में कुल कार्ड के राजस्व का लगभग 76% है। इसमें कहा गया है कि क्रेडिट कार्ड जारी करने से राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में 42% की पर्याप्त वृद्धि देखी गई और इसके अगले पाँच वर्षों में 33% की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है।

और पढ़ें… यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)  

बाल विवाह मुक्त अभियान, उदयपुर 

उदयपुर, राजस्थान में ज़िला प्रशासन ने गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से ज़िले में बाल विवाह को रोकने के लिये एक सक्रिय अभियान प्रारंभ किया है। सूचना देने में सुविधा हेतु कॉल करने वालों की पहचान की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिये एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है तथा बाल विवाह के मामलों की सूचना देने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहन के रूप में 2,100 रुपए का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। बाल विवाह में शामिल परिवारों के विरुद्ध निषेधाज्ञा जारी करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए ज़िला प्रशासन ने अभियान के लिये समर्पित टीमों का गठन किया है। ये आदेश विवाह को प्रारंभ से ही शून्य घोषित कर देते हैं, जिससे दूल्हा और दुल्हन पर कानूनी कार्रवाई करने के लिये वयस्क होने तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

 उल्लेखनीय है कि उदयपुर में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 13(1) के अंतर्गत निषेधाज्ञा जारी किया जाना एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

और पढ़ें… बाल विवाह