अवैध सट्टेबाज़ी और गैंबलिंग साइटों पर प्रतिबंध
हाल ही में केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्द्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 के तहत रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध के बाद 242 अवैध सट्टेबाज़ी और जुआ वेबसाइटों को ब्लॉक किया, जिससे इस श्रेणी में कुल ब्लॉक की गई वेबसाइटों की संख्या 7,800 हो गई है।
ऑनलाइन गैंबलिंग/जुआ
- परिचय: ऑनलाइन जुआ में इंटरनेट के माध्यम से धन या पुरस्कार जीतने के लिये सट्टेबाज़ी शामिल है, जिसमें कैसीनो गेम्स, खेल सट्टेबाज़ी, पोकर और लॉटरी शामिल हैं। नियम और विनियम देश-देश में भिन्न होते हैं।
- कार्यप्रणाली: अवैध संचालक GST से बचकर नियामक अंतरालों का दुरुपयोग करते हैं, ब्लॉकिंग से बचने के लिये बार-बार URL बदलते हैं और म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से धन को विदेश भेज देते हैं, जिससे प्रवर्तन तथा वित्तीय वसूली जटिल हो जाती है।
- भारत में स्थिति: हालाँकि सट्टेबाज़ी और जुआ पारंपरिक रूप से राज्य सूची की एंट्री 34 के अंतर्गत आते हैं, ऑनलाइन गेमिंग संवर्द्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 ने सभी रियल-मनी ऑनलाइन गेम्स पर पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया है।
- यह अधिनियम रियल-मनी गेमिंग की पेशकश, विज्ञापन या सुविधा प्रदान करने पर रोक लगाता है और बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को ऐसे प्लेटफॉर्म से जुड़े भुगतान को प्रोसेस करने से रोकता है।
- प्राधिकरणों को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2000 के तहत अवैध ऑनलाइन गेमिंग और जुआ प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने का अधिकार प्राप्त है।
- GST प्रावधान: ऑनलाइन मनी गेमिंग, कैसीनो और हॉर्स रेसिंग पर 28% GST लागू है।
- ऑनलाइन गेमिंग बनाम जुआ: मुख्यतः कौशल/स्किल पर आधारित गतिविधियों को गेमिंग माना जाता है, जबकि संयोग/भाग्य पर आधारित गतिविधियों को जुआ माना जाता है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) स्थापना दिवस
प्रधानमंत्री ने 19 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के स्थापना दिवस के अवसर पर NDRF के वीर कर्मियों के साहस, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा की सराहना की।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF)
- परिचय: NDRF की स्थापना 19 जनवरी, 2006 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत की गई थी और यह 8 बटालियनों से बढ़कर 16 बटालियनों तक पहुँच गया है। इसमें 18,556 कर्मी तैनात हैं, जो 68 स्थानों पर स्थित हैं, जिनमें क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र और सामरिक पूर्व-स्थिति स्थान शामिल हैं।
- संरचना: यह चार संचालनात्मक क्षेत्रों के माध्यम से संचालित होता है, जिनका मुख्यालय नई दिल्ली में है, प्रत्येक बटालियन में 18 विशेषीकृत खोज और बचाव टीमें शामिल हैं, जबकि NDRF अकादमी (2018) सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान के रूप में कार्य करती है और इसका नागपुर में नया परिसर निर्माणाधीन है।
- अधिकार और कार्यक्षेत्र: NDRF को सभी प्राकृतिक तथा मानवजनित आपदाओं का सामना करने का दायित्व सौंपा गया है, जिसमें ढहे हुए ढाँचे, बाढ़, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु (CBRN) घटनाएँ, पर्वतीय व रस्सी बचाव, प्राथमिक चिकित्सा प्रतिक्रिया और पशु बचाव शामिल हैं। इसके साथ ही वनाग्नि प्रतिक्रिया को वर्ष 2022 में शामिल किया गया।
- वैश्विक आपदा प्रतिक्रिया अनुभव: NDRF के पास महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय अनुभव है, जिसमें जापान आपदा (2011), नेपाल भूकंप (2015) और तुर्की में ऑपरेशन दोस्त (2023) शामिल हैं। वर्तमान में यह अंतर्राष्ट्रीय खोज एवं बचाव सलाहकार समूह (INSARAG) प्रमाणन के लिये एक हेवी अर्बन सर्च एंड रेस्क्यू (HUSAR) टीम का मार्गदर्शन कर रहा है।
- CBRN प्रतिक्रिया और प्रशिक्षण: उभरते जोखिमों को पहचानते हुए NDRF ने वर्ष 2024 को “CBRN तैयारी का वर्ष” घोषित किया तथा राष्ट्रीय कार्यशालाएँ, विशेष प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का निर्माण एवं समन्वय अभ्यास आयोजित किये।
|
और पढ़ें: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष |
सम्मक्का-सरलम्मा जतारा
तेलंगाना मुलुगु ज़िले के मेदराम गाँव में 28 जनवरी, 2026 से सम्मक्का–सरलम्मा जतारा (मेदराम जतारा) का आयोजन करेगा।
सम्मक्का-सरलम्मा जतारा
- परिचय: मेदराम जतारा कोया समुदाय का तीन दिवसीय द्विवार्षिक आदिवासी उत्सव है, जो माघ माह (फरवरी) में आयोजित होता है। इसे विश्व के सबसे बड़े स्वदेशी आध्यात्मिक समागमों में से एक माना जाता है और वर्ष 1996 में इसे राज्य उत्सव घोषित किया गया था।
- स्थान: यह उत्सव दंडकारण्य के वन में स्थित एटुरनागरम वन्यजीव अभयारण्य के भीतर, गोदावरी नदी की सहायक नदी जंपन्ना वागु के तट पर आयोजित किया जाता है।
- जंपन्ना वागु का नाम योद्धा जंपन्ना के नाम पर रखा गया है, जो काकतीय सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
- ऐतिहासिक और लोककथात्मक उत्पत्ति: सम्मक्का को शैशव अवस्था में बाघों के बीच पाया गया थ, आगे चलकर वे आदिवासी समुदाय की नेता बनीं और पागिदिद्दा राजू से विवाह किया, जिनसे सरलम्मा, नागुलम्मा और जंपन्ना का जन्म हुआ।
- सम्मक्का ने अकाल और अन्यायपूर्ण कर‑वसूली के खिलाफ काकतीय शासकों का डटकर विरोध किया। इस संघर्ष में उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए और युद्ध के बाद सम्मक्का रहस्यमय ढंग से वन में लापता हो गईं। जाते समय उन्होंने अपने कड़े (चूड़ियाँ) और कुमकुम पीछे छोड़ दिये, जो आज भी उनके पवित्र प्रतीक माने जाते हैं और श्रद्धापूर्वक पूजे जाते हैं।
- सम्मक्का ने अकाल और अन्यायपूर्ण कराधान के विरोध में काकतीय शासकों का प्रतिरोध किया। एक भीषण युद्ध में अपने परिवार को खोने के बाद वे जंगल में ओझल हो गईं और अपने पीछे चूड़ियाँ और कुमकुम छोड़ गईं, जो आज भी उनके पवित्र प्रतीक माने जाते हैं।
- मुख्य आस्था प्रणाली: यह उत्सव कुटुंब/रिश्तेदारी आधारित पूजा पर केंद्रित है, जिसमें सम्मक्का, सरलम्मा, पागिदिद्दा राजू और गोविंदा राजू का किसी दूरस्थ दैवी पंथ के रूप में नहीं, बल्कि एक परिवार के रूप में आह्वान किया जाता है।
- इस पर वैदिक या ब्राह्मणिक परंपराओं का कोई प्रभाव नहीं है, यह पूरी तरह से कोया समुदाय की जीववादी (एनिमिस्ट) तथा कबीलाई/वंश-आधारित आस्था प्रणालियों में निहित है।
- मुख्य अनुष्ठान: श्रद्धालु अपने शरीर के वज़न के बराबर “बंगारम” (गुड़) अर्पित करते हैं और जंपन्ना वागु में पवित्र स्नान करते हैं। देवी-देवताओं को हर दो वर्ष में एक बार चिलकलागुट्टा पहाड़ी से प्रतीकात्मक रूप से गड्डे (मंच) तक लाया जाता है, जबकि सामान्यतः श्रद्धालु पूजा के लिये पहाड़ी पर नहीं जाते।
- सांस्कृतिक महत्त्व: यह जतारा आदिवासी स्मृति, प्रतिरोध और पहचान का प्रतीक है। यह आदिवासी ब्रह्मांड-दृष्टि तथा रिश्तेदारी-आधारित पूजा परंपरा को प्रतिबिंबित करती है तथा अब इसमें गैर-आदिवासी श्रद्धालुओं की भागीदारी भी देखने को मिलती है।
|
और पढ़ें: मेदराम जतारा |
ईरान व्यापार पर अमेरिका के द्वितीयक टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। हालाँकि, भारत-ईरान के बीच पहले से ही घटे हुए द्विपक्षीय व्यापार के कारण इसका भारत पर सीधा आर्थिक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
भारत-ईरान आर्थिक संबंध
- न्यूनतम व्यापार: भारत-ईरान व्यापार 2020 से पहले लगभग 15 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। इससे ईरान भारत के शीर्ष 50 व्यापारिक साझेदारों में शामिल नहीं है और प्रत्यक्ष टैरिफ प्रभाव सीमित हो जाता है।
- प्रभावित प्रमुख क्षेत्र: कम व्यापार मात्रा के बावजूद भारत के कुछ लक्षित निर्यात, जैसे– अनाज, चाय, कॉफी, मसाले, पशु आहार तथा फल एवं मेवे पर दबाव पड़ सकता है।
- चाबहार बंदरगाह में निवेश: व्यापार से इतर भारत का ईरान के चाबहार बंदरगाह में महत्त्वपूर्ण रणनीतिक निवेश है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिये एक प्रवेश द्वार है। इसमें 10 वर्ष का संचालन अनुबंध, 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान तथा 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा (Line of Credit) शामिल है।
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: भारत वर्ष 2018 तक ईरान के कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक था। ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह आयात रोकना पड़ा, जिससे अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों के प्रति भारत की पूर्व संवेदनशीलता स्पष्ट होती है।
- वैश्विक निहितार्थ: प्रस्तावित टैरिफ का मुख्य प्रभाव चीन पर पड़ेगा, जो ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीन ने वर्ष 2025 में ईरान के निर्यातित तेल का 80% से अधिक खरीदा और वर्ष 2022 में ईरान के कुल निर्यात (USD 22 बिलियन) में इसकी प्रमुख हिस्सेदारी रही। ईरान के अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्किये और यूरोपीय संघ (EU) शामिल हैं।
|
और पढ़ें: भारत को चाबहार बंदरगाह हेतु अमेरिका से छह माह की छूट |
