राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS)
गृहमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS) का उद्घाटन किया, जिससे 1999 से अब तक हुए सभी बम विस्फोटों का भारत का पहला केंद्रीकृत राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस स्थापित हुआ।
राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS)
- परिचय: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) द्वारा विकसित राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS) एक सुरक्षित, राष्ट्रीय-स्तरीय डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IED) से संबंधित आँकड़ों का व्यवस्थित रूप से संग्रह, संकलन तथा प्रसार करना है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- द्वि-दिशात्मक, एकीकृत एवं ऑनलाइन मंच: NIA (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण), ATS (आतंकवाद-रोधी दस्ते), राज्य पुलिस बलों, CAPFs (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों) तथा अन्य एजेंसियों के लिये सुलभ।
- रीयल-टाइम डेटा साझा करना: तेज़, साक्ष्य-आधारित जाँच और अभियोजन को समर्थन प्रदान करता है।
- ‘एक राष्ट्र, एक डेटा भंडार’ दृष्टिकोण: IED से संबंधित आँकड़ों को राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति के रूप में माना जाएगा।
- AI का उपयोग करते हुए, NIDMS अनेक डेटा स्रोतों को एकीकृत करेगा ताकि एक सुदृढ़ राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण किया जा सके।
- ICJS-2 (इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम – चरण-II) से एकीकरण: ‘वन डेटा-वन एंट्री’ संरचना के अनुरूप, जैसे– CCTNS, e-Prisons, e-Forensics, NAFIS आदि प्रणालियों के साथ समन्वय।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)
- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) भारत की संघीय आकस्मिक प्रतिआतंकवादी बल (Federal Contingency Counter-Terrorism Force) है। इसकी स्थापना 1984 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद की गई और इसे औपचारिक रूप से 1986 में गठित किया गया, ताकि देश भर में आतंकवाद के सभी रूपों से निपटा जा सके।
- ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद इस प्रकार के विशेष बल के गठन की अवधारणा सामने आई।
- तेज़ प्रहार और तत्काल वापसी (Swift Strike and Immediate Withdrawal) के सिद्धांत से निर्देशित NSG एक अत्यंत विशिष्ट और कार्य-उन्मुख बल है, जिसे ब्रिटेन के SAS और जर्मनी के GSG-9 की तर्ज़ पर तैयार किया गया है।
- यह दो परस्पर पूरक घटकों से मिलकर बना है– स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG), जो प्रत्यक्ष आतंकवाद-रोधी अभियानों हेतु सेना से लिये गए कर्मियों से गठित है तथा स्पेशल रेंजर ग्रुप्स (SRG), जो परिचालन समर्थन प्रदान करने हेतु केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस से लिये गए कर्मियों से गठित हैं।
- NSG के क्षेत्रीय हब देश के विभिन्न हिस्सों मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और अहमदाबाद में संचालित होते हैं। इसके अतिरिक्त, अयोध्या में भी एक नया हब स्थापित किया जा रहा है।
- NSG के अंतर्गत राष्ट्रीय बम डेटा केंद्र (National Bomb Data Centre- NBDC) भारत तथा विदेशों में रिपोर्ट की गई सभी आतंकी बम विस्फोट घटनाओं से संबंधित सूचनाओं को एकत्र करने, संकलित करने, विश्लेषण करने और मूल्यांकन करने वाली नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
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और पढ़ें: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड |
नदी डेल्टा का निमज्जन
नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक नवीन वैश्विक अध्ययन के अनुसार, भारत के कई प्रमुख नदी डेल्टा चिंताजनक गति से धँस रहे हैं, जिससे लाखों लोगों पर बाढ़ और विस्थापन का खतरा बढ़ता जा रहा है।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?
- अध्ययन के संबंध में: इस शोध में 29 देशों के 40 प्रमुख नदी डेल्टाओं का विश्लेषण किया गया, जिनमें 236 मिलियन से अधिक लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जो निकट भविष्य में बाढ़ के खतरे के संपर्क में हैं।
- भारत में इस अध्ययन ने गंगा–ब्रह्मपुत्र, ब्राह्मणी, महानदी, गोदावरी, कावेरी और काबिनी डेल्टाओं में उल्लेखनीय भूमि धँसाव/निमज्जन पाए जाने की पहचान की गई है।
- समुद्र-स्तर वृद्धि से अधिक तेज़ धँसाव: भूमि धँसने की गति वैश्विक औसत समुद्र-स्तर वृद्धि (~4 मिमी. प्रति वर्ष) से आगे निकल चुकी है। 2014–23 की अवधि में आधे से अधिक डेल्टा 3 मिमी. प्रति वर्ष से अधिक की दर से धँसते पाए गए। वैश्विक स्तर पर कुल डेल्टा क्षेत्र का लगभग 35% हिस्सा धँसाव की चपेट में है और 40 में से 38 डेल्टाओं में आधे से अधिक क्षेत्र में भूमि धँसने की प्रवृत्ति दर्ज की गई है।
- भारत से जुड़े निष्कर्ष: ब्राह्मणी (77%) और महानदी (69%) सबसे तेज़ी से डूबने वाले डेल्टा में से हैं, जिनके बड़े हिस्से प्रतिवर्ष 5 मिमी. से ज़्यादा नीचे धँस रहे हैं।
- गंगा–ब्रह्मपुत्र, ब्राह्मणी और महानदी जैसे डेल्टाओं सहित लगभग 50% डेल्टा अपने 90% से अधिक क्षेत्र में भूमि धँसाव का सामना कर रहे हैं।
- भारत से जुड़े निष्कर्ष: ब्राह्मणी (77%) और महानदी (69%) सबसे तेज़ी से डूबने वाले डेल्टा में से हैं, जिनके बड़े हिस्से प्रतिवर्ष 5 मिमी. से ज़्यादा नीचे धँस रहे हैं।
- डेल्टा भूमि क्षरण के प्रमुख केंद्र: गंगा–ब्रह्मपुत्र, नील, मेकांग, यांग्त्ज़े, अमेज़न, इरावदी और मिसिसिपी जैसे 7 बड़े डेल्टा मिलकर विश्व स्तर पर धँस रहे कुल डेल्टा क्षेत्र (लगभग 2.65 लाख वर्ग किमी.) में करीब 57% योगदान करते हैं।
- कोलकाता, अलेक्ज़ेंड्रिया, बैंकॉक, ढाका और शंघाई जैसे प्रमुख डेल्टा शहर अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में समान या उससे भी अधिक गति से धँस रहे हैं। जमीन धँसने की इस प्रक्रिया ने इन शहरों में शहरी बाढ़ के खतरे को और अधिक गंभीर बना दिया है।
- कोलकाता, अलेक्ज़ेंड्रिया, बैंकॉक, ढाका और शंघाई जैसे विश्व के प्रमुख डेल्टा शहर अपने ग्रामीण परिवेश की तुलना में कहीं अधिक तीव्र गति से धँस रहे हैं। शहरी क्षेत्रों के जमीन के नीचे धँसने की यह प्रक्रिया वहाँ आने वाली बाढ़ की विभीषिका और जोखिम को कई गुना बढ़ा रही है।
- धँसाव के कारण: गंगा–ब्रह्मपुत्र और कावेरी जैसे डेल्टाओं में अत्यधिक और असंतुलित भूजल दोहन भूमि धँसने का मुख्य कारण है, जिसके परिणामस्वरूप तलछटी परतों का स्थायी संपीडन हो जाता है।
- अन्य डेल्टा, जैसे– महानदी तथा काबिनी, भूजल संकट, नदी नियमन के कारण तलछट के प्रवाह में गिरावट और बढ़ती जनसंख्या के कारण भूमि उपयोग में आ रहे बदलावों ने दबाव को और बढ़ा दिया है।
- प्रभाव: आदिवासी और ग्रामीण समुदाय, जो अक्सर समुद्र तल से एक मीटर से भी कम ऊँचाई पर रहते हैं, असमान रूप से जोखिम में हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर पुनर्वास की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- यदि भूजल दोहन को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दशकों में डेल्टाओं में बाढ़, भूमि ह्रास और विस्थापन के खतरे तेज़ी से बढ़ सकते हैं।
नदी डेल्टा
- परिचय: नदी डेल्टा तलछट के जमा होने से बनी भू-आकृति है, जो नदी के मुहाने पर विकसित होता है, जहाँ नदी किसी बड़े जलाशय, जैसे– महासागर, सागर या झील में गिरती है।
- समय के साथ यह जमा तलछट (कीचड़, रेत और मिट्टी) एकत्रित होकर उपजाऊ, नीची भूमि का विशिष्ट पंख या त्रिकोणीय आकार का क्षेत्र तैयार करती है।
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विशेषता |
डेल्टा |
ज्वारनदमुख/एश्चुअरी |
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प्रकृति |
भू-आकृति – नदी के मुहाने पर जमा तलछट से बनी हुई। |
जल निकाय– एक तटीय प्रवेश मार्ग जहाँ नदी का मीठा पानी और समुद्र का खारा पानी आपस में मिलते हैं। |
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गठन |
तलछट का जमाव, उसके हटने (लहरों/ज्वार द्वारा) की तुलना में अधिक होता है, जिससे नई भूमि का निर्माण होता है। |
नदी घाटी का जलमग्न होना (जैसे समुद्र के स्तर में वृद्धि के कारण), इसके परिणामस्वरूप तलछट बाहर बह जाती है। |
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जल |
शुद्ध जल/मीठे जल से लेकर खारे जल तक फैलाव। |
ब्रैकिश जल: जिसमें लवणता भिन्न होती है; अत्यंत उत्पादक पारिस्थितिकी तंत्र। |
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आकार |
त्रिकोणीय/पंखी आकार वाला, जिसमें कई नाले होते हैं। |
फनल के आकार का या असमान आकार का, आमतौर पर एक मुख्य ज्वारीय नाला होता है। |
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प्रमुख भूमिका |
उपजाऊ कृषि भूमि |
महत्त्वपूर्ण समुद्री नर्सरी, पोषक तत्त्वों के मिश्रण से उत्पन्न उच्च जैव विविधता। |
- डेल्टा के प्रकार:
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प्रकार |
मुख्य विशेषताएँ |
उदाहरण |
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चापाकार/आर्कुएट |
पंखे के आकार का, समुद्र की ओर उत्तल; मोटे तलछट से बनता है, नदी और लहरों की गतिविधि संतुलित होती है। |
नील डेल्टा (मिस्र), गंगा डेल्टा (भारत) |
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बर्ड्स फुट |
पक्षी के पंजे जैसा रूप, प्रबल नदी प्रवाह और कमज़ोर लहर वाले वातावरण में महीन तलछट से बनता है। |
मिसिसिपी डेल्टा (अमेरिका) |
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कस्पेट |
दाँत के समान आकार, प्रबल लहरें सीधे तटरेखा के साथ तलछट धकेलती हैं। |
टाइबर नदी (इटली) |
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एस्टुराइन |
तलछट का संचय किसी निमग्न (Submerged) नदी घाटी या पहले से मौजूद मुहाने के भीतर होता है। |
सीन नदी (फ्राँस), नर्मदा और तापी (भारत) |
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लेकस्ट्राइन |
तब बनता है जब नदी झील में प्रवाहित होती है। |
लॉफ लीने (आयरलैंड) |
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एबैंडंड |
एक निष्क्रिय लोब बाईं ओर होता है जब नदी अपनी मुख्य धारा को बदलती है। |
ओल्ड येलो रिवर डेल्टा (चीन), पश्चिमी गंगा (हुगली) डेल्टा |
- भारत में प्रमुख नदी डेल्टा:
- गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन डेल्टा): यह विश्व का सबसे बड़ा नदी डेल्टा है, जो गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के द्वारा निर्मित है। यह पश्चिम बंगाल (भारत) और बांग्लादेश में विस्तृत है और विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन (सुंदरबन) क्षेत्र है।
- गोदावरी डेल्टा: यह डेल्टा आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी द्वारा निर्मित है और भारत के पूर्वी तट के सबसे बड़े डेल्टाओं में से एक है।
- ब्राह्मणी डेल्टा: यह डेल्टा ब्राह्मणी नदी द्वारा निर्मित है और ओडिशा में स्थित है।
- महानदी डेल्टा: यह ओडिशा में स्थित है और महानदी नदी द्वारा निर्मित है।
- कावेरी (कावेरि) डेल्टा: यह तमिलनाडु में कावेरी नदी द्वारा निर्मित है। यह डेल्टा दक्षिण भारत के सबसे अधिक कृषि-उपज वाले क्षेत्रों में से एक है और इसे अक्सर ‘दक्षिण भारत का अन्न भंडार’ कहा जाता है।
- डेल्टाओं का महत्त्व: हालाँकि नदी डेल्टा विश्व के कुल स्थल क्षेत्र का केवल 1% भाग घेरते हैं, फिर भी वे 350-500 मिलियन लोगों (विश्व की जनसंख्या का लगभग 6%) और विश्व की 34 मेगासिटीज़ में से 10 को आश्रय प्रदान करते हैं।
- डेल्टा कृषि, मत्स्य पालन, बंदरगाहों, परिवहन, समुद्री व्यापार और ऊर्जा प्रणालियों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, किंतु वे पृथ्वी के सबसे अधिक संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में भी शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. नदी डेल्टा क्या है?
नदी का डेल्टा एक निक्षेपण भू-आकृति है, जो नदी के मुहाने पर तब विकसित होती है जब वह किसी बड़े जलाशय, जैसे महासागर, समुद्र या झील में गिरती है।
2. नेचर पत्रिका में किन भारतीय नदी डेल्टाओं को उच्च-जोखिम वाला माना गया है?
गंगा-ब्रह्मपुत्र, ब्राह्मणी, महानदी, गोदावरी, कावेरी और कबानी डेल्टाओं में महत्त्वपूर्ण धँसाव (Subsidence) देखा जा रहा है।
3. अपनी संवेदनशीलता के बावजूद नदी डेल्टा भारत के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
भूमि क्षेत्र का केवल 1 प्रतिशत भाग घेरने के बावजूद, डेल्टा कृषि, मत्स्य पालन, बंदरगाहों, मेगासिटीज़ और लाखों लोगों की आजीविका का समर्थन करते हैं, जिससे उनका संरक्षण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन जाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. सिंधु नदी प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित चार नदियों में से तीन नदियाँ इनमें से किसी एक नदी में मिलती हैं जो सीधे सिंधु से मिलती है। निम्नलिखित में से वह नदी कौन-सी है जो सीधे सिंधु से मिलती है? (2021)
(a) चिनाब
(b) झेलम
(c) रावी
(d) सतलुज
उत्तर: (d)
प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2019)
हिमनद नदी
- बंदरपूँछ : यमुना
- बारा शिग्री : चेनाब
- मिलाम : मंदाकिनी
- सियाचिन : नुब्रा
- जेमू : मानस
उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) 1, 2 और 4
(b) 1, 3 और 4
(c) 2 और 5
(d) 3 और 5
उत्तर: (a)
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिससे 2016 के नियमों को प्रतिस्थापित किया गया है।
- 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी ये नियम शहरी और ग्रामीण दोनों स्थानीय निकायों में अपशिष्ट पृथक्करण तथा जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।
- स्रोत के आधार पर ठोस अपशिष्ट का चार-भागों में बँटवारा: SWM नियम, 2026 के तहत अपशिष्ट को चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है-
- गीला अपशिष्ट: रसोई का अपशिष्ट, भोजन के अवशेष, फल एवं सब्ज़ियों के छिलके
- सूखा अपशिष्ट: प्लास्टिक, कागज़, धातु, काँच
- सैनिटरी: डायपर, सैनिटरी नैपकिन
- विशेष देखभाल अपशिष्ट: बल्ब, बैटरी, दवाइयाँ
- गीले अपशिष्ट का कंपोस्ट या बायो-मीथनेशन किया जाएगा, सूखे अपशिष्ट को मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) में पुनर्चक्रण के लिये भेजा जाएगा, सैनिटरी अपशिष्ट को सुरक्षित रूप से पैक कर अलग रखा जाएगा, जबकि विशेष देखभाल अपशिष्ट केवल अधिकृत एजेंसियों या निर्धारित संग्रह केंद्रों को सौंपा जाएगा।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत: नियमों का पालन न करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी, जिसके लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) दिशा-निर्देश तैयार करेगा और उनका प्रवर्तन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा प्रदूषण नियंत्रण समितियों द्वारा किया जाएगा।
- थोक अपशिष्ट उत्पादक (BWG) की परिभाषा: जिन संस्थाओं का फर्श क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या अधिक, जल उपभोग 40,000 लीटर/दिन या अपशिष्ट उत्पादन 100 किग्रा./दिन है, उन्हें BWG के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- इसमें आवासीय परिसर, सरकारी भवन और विश्वविद्यालय शामिल हैं, जो कुल अपशिष्ट का लगभग 30% योगदान करते हैं।
- CPCB (2023–24) के अनुसार, भारत में लगभग 1.85 लाख टन/दिन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है।
- एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल अपशिष्ट के उत्पादन, संग्रह और निपटान की निगरानी करेगा और भौतिक रिपोर्टिंग को डिजिटल ऑडिट्स से बदल देगा।
- इसमें आवासीय परिसर, सरकारी भवन और विश्वविद्यालय शामिल हैं, जो कुल अपशिष्ट का लगभग 30% योगदान करते हैं।
- विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक ज़िम्मेदारी (EBWGR): नियमों में EBWGR की शुरुआत की गई है, जिसके तहत बड़े अपशिष्ट उत्पादकों को गीले अपशिष्ट का स्थान पर ही प्रसंस्करण करना अनिवार्य है, यदि स्थान पर प्रसंस्करण संभव न हो तो ज़िम्मेदारी प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।
- रिफ्यूज़-व्युत्पन्न ईंधन (RDF) अनिवार्यता: चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये उद्योगों (सीमेंट/वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट) को ठोस ईंधन की जगह RDF का उपयोग छह वर्षों में 5% से बढ़ाकर 15% करना अनिवार्य होगा।
- RDF एक उच्च-ऊर्जा वाला ईंधन है, जिसे गैर-पुनःचक्रणीय नगर निगम ठोस अपशिष्ट को काटने, सुखाने और छोटे गोले (पेललेट्स) बनाने की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। यह सीमेंट भट्टियों और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट जैसे उद्योगों में जीवाश्म ईंधन का टिकाऊ और पर्यावरण-सहायक विकल्प प्रदान करता है।
- लैंडफिल प्रतिबंध: लैंडफिल केवल गैर-पुनःचक्रणीय और जड़ (इनर्ट) अपशिष्ट तक सीमित होंगे और अविभाजित अपशिष्ट जमा करने पर अधिक शुल्क लागू होगा।
- पुराने अपशिष्ट का प्रबंधन: पुराने डंप साइट्स पर समय-सीमित बायोमाइनिंग और बायोरिमेडिएशन अनिवार्य होगा, साथ ही तिमाही आधार पर रिपोर्टिंग करनी होगी।
- पहाड़ी क्षेत्रों के लिये विशेष प्रावधान: पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में स्थानीय निकाय पर्यटकों से उपयोग शुल्क वसूल सकते हैं और अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता के अनुसार आगंतुकों के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं।
- संस्थागत तंत्र: राज्य स्तर पर उद्योग-नेतृत्व वाली समितियाँ बनाई जाएँगी, जिनकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे और ये लागू होने वाली योजनाओं की निगरानी करेंगी।
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और पढ़ें: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का मुद्दा |
SIDBI में इक्विटी पूंजी निवेश
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिये स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) में ₹5,000 करोड़ की इक्विटी पूंजी निवेश (अगले 3 वर्षों में) को मंज़ूरी दी है।
- अपेक्षित प्रभाव: यह पूंजी निवेश FY 25 में 76.26 लाख MSME लाभार्थियों की संख्या को FY 28 तक बढ़ाकर लगभग 102 लाख करने का अनुमान है, जिससे लगभग 25.74 लाख नए MSME जुड़ेंगे।
- रोज़गार सृजन: भारत के लगभग 6.9 करोड़ MSME में 30.16 करोड़ लोग कार्यरत हैं अर्थात औसतन प्रति इकाई 4.37 व्यक्ति। नए लाभार्थियों से FY 2027-28 तक लगभग 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोज़गार सृजित होने की संभावना है।
- मज़बूत CRAR: अतिरिक्त पूंजी निवेश से SIDBI को पूंजी-से-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) सुदृढ़ बनाए रखने में सहायता मिलेगी, क्योंकि MSME ऋण विस्तार के साथ जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में वृद्धि होने की संभावना है।
SIDBI
- परिचय: SIDBI भारत में MSME के वित्तपोषण और विकास को बढ़ावा देने तथा उसके समन्वय हेतु शीर्ष वित्तीय संस्था है, जो वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
- कानूनी एवं विनियामक ढाँचा: इसे भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 के अंतर्गत स्थापित किया गया था। यह RBI द्वारा विनियमित पाँच अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (AIFI) में से एक है तथा इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित अन्य चार अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएँ (AIFI) हैं, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (EXIM Bank), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) तथा नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID)।
- मुख्य दायित्व: MSME के संवर्द्धन, वित्तपोषण और विकास के त्रि-आयामी एजेंडे को क्रियान्वित करना, जिसमें पूंजी तक पहुँच, मूल्य शृंखला में एकीकरण तथा सतत विकास पर विशेष बल दिया जाता है।
- प्रमुख कार्य: SIDBI बैंकों और MSME को पुनर्वित्त तथा प्रत्यक्ष वित्तपोषण उपलब्ध कराता है, जिसमें टर्म लोन और कार्यशील पूंजी शामिल हैं।
- यह ऋण गारंटी सहायता प्रदान करता है तथा क्षमता निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने जैसी प्रोत्साहनात्मक गतिविधियाँ भी करता है।
- परिचालन भूमिका: यह उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं तथा डिजिटल क्रेडिट प्लेटफॉर्म जैसे प्रमुख सरकारी उपक्रमों के लिये शीर्ष समन्वयकारी निकाय के रूप में कार्य करता है।
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और पढ़ें: MSMEs के लिये ऋण वृद्धि |
लाला लाजपत राय की 161वीं जयंती
हाल ही में प्रधानमंत्री ने 28 जनवरी को लाला लाजपत राय की 161वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके बलिदानों को सम्मानित किया।
लाला लाजपत राय
- परिचय: लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को वर्तमान पंजाब के धुडिके गाँव में हुआ था। वे भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रवादी नेताओं में से एक थे तथा लोकप्रिय रूप से ‘पंजाब केसरी’ (पंजाब का शेर) के नाम से जाने जाते थे।
- प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा: उन्होंने लाहौर के सरकारी कॉलेज में कानून की पढ़ाई की और स्वामी दयानंद सरस्वती से गहनता से प्रभावित होकर आर्य समाज से जुड़ गए।
- राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका: बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर उन्होंने गरम दलीय नेताओं की प्रसिद्ध त्रयी लाल-बाल-पाल का गठन किया।
- योगदान: उनकी प्रमुख कृतियों में 'यंग इंडिया', इंग्लैंड्स डेट टू इंडिया, इंडिया विल टू फ्रीडम तथा मैसेज ऑफ द भगवत गीता शामिल हैं।
- उन्होंने 1894 में पंजाब नेशनल बैंक की सह-स्थापना की और कई शैक्षणिक व सामाजिक संस्थानों की स्थापना की।
- निधन: 1928 में लाहौर में साइमन कमीशन के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नेतृत्व करते समय हुए लाठी चार्ज में लगी चोटों के कारण उनका निधन हो गया।
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सेला झील और सेला दर्रा
हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के तवांग ज़िले में सेला दर्रे के पास स्थित एक उच्च ऊँचाई वाली हिमनद झील सेला झील अपने भौगोलिक, पारिस्थितिक और रणनीतिक महत्त्व के कारण चर्चा में रही है।
सेला झील
- परिचय: सेला झील एक उच्च ऊँचाई वाली हिमनद झील है (13,000 फीट से अधिक), जो पूर्वी हिमालय में तवांग क्षेत्र के सेला दर्रे के उत्तरी भाग में स्थित है।
- एक हिमनद झील जल का वह निकाय है जो हिमनद (ग्लेशियर) के पिघले हुए पानी से बनता है। यह पानी बर्फ, मोरेन (ग्लेशियर द्वारा लाए गए मलबे) या ग्लेशियर के कटाव से बनी चट्टानी दरारों में जमा हो जाता है।
- भौगोलिक विशेषताएँ: अत्यधिक विषम जलवायु परिस्थितियों के कारण यह क्षेत्र विरल अल्पाइन वनस्पतियों से घिरा हुआ है और इसका उपयोग गर्मियों में याक के चरागाह के रूप में किया जाता है।
- इसका पानी नूरानांग नदी में गिरता है, जो तवांग नदी की एक सहायक नदी है।
- सांस्कृतिक महत्त्व: अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण इसे "पैराडाइज़ लेक" (स्वर्ग की झील) के नाम से जाना जाता है। यह तिब्बती बौद्ध धर्म की पवित्र झीलों में से एक है और स्थानीय मोनपा समुदायों के लिये इसका गहरा आध्यात्मिक महत्त्व है।
सेला दर्रा
- परिचय: यह तवांग में स्थित एक उच्च ऊँचाई वाला पर्वतीय दर्रा है, जो तवांग को असम के मैदानी इलाकों से जोड़ने वाले एक रणनीतिक लॉजिस्टिक कॉरिडोर (सामरिक गलियारे) के रूप में कार्य करता है।
- यह भारत के सबसे ऊँचे मोटर-योग्य (वाहनों के चलने योग्य) दर्रों में से एक है और सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा पूरे वर्ष इसका रख-रखाव किया जाता है।
- सामरिक महत्त्व: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित होने के कारण इसने वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आज भी यह सैन्य रसद और सैनिकों की आवाजाही के लिये एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मार्ग बना हुआ है।
- सेला सुरंग सेला दर्रे के माध्यम से हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जो असम के तेजपुर को चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित तवांग से जोड़ती है।
- इसके समीप स्थित ‘जसवंत सिंह युद्ध स्मारक’ वर्ष 1962 में चीनी सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों की स्मृति में स्थापित किया गया है।
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लक्कुंडी की खुदाई से यूनेस्को दावेदारी को बढ़ावा
हाल ही में कर्नाटक के गदग ज़िले के लक्कुंडी गाँव में कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर के निकट उत्खनन के दौरान नवपाषाण काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिससे इस स्थल को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के प्रयासों को गति मिली है।
लक्कुंडी
- परिचय: लक्कुंडी, जिसे पहले लौक्किगुंडी कहा जाता था, गदग से लगभग 12 किमी. दूर स्थित है और ऐतिहासिक रूप से इसे “सौ कुओं और मंदिरों का गाँव” कहा जाता था।
- ऐतिहासिक महत्त्व: लक्कुंडी का उल्लेख 11वीं–12वीं शताब्दी के अभिलेखों में मिलता है और समृद्धि के कारण इसकी तुलना कभी इंद्र की राजधानी अमरावती से की जाती थी।
- सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत: यह गाँव जैन दानी और धर्मप्रचारक रानी अट्टिमब्बे की कर्मभूमि रहा है, जो मंदिरों, जैन बसदियों और कुओं के निर्माण के लिये प्रसिद्ध थीं।
- उनके सम्मान में राज्य सरकार ने “दाना चिंतामणि अट्टिमब्बे प्रशस्ति” नामक पुरस्कार की स्थापना की है।
- जैन धर्म के उत्कर्ष के साथ-साथ लक्कुंडी ने 12वीं शताब्दी के शरण, जैसे– अजगंण्ण और मुक्तायक्क को भी पोषित किया, जो बसवेश्वर के सुधारवादी आंदोलन से संबंध रखते थे।
- स्थापत्य विशेषताएँ: यद्यपि कई संरचनाएँ अब अस्तित्व में नहीं हैं, अभिलेखों में कल्याण चालुक्य स्थापत्य शैली के 13 विद्यमान मंदिरों तथा सुंदर नक्काशीदार बावड़ियों (सीढ़ीदार कुओं) का उल्लेख मिलता है।
- समर्थन: राज्य सरकार भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) के सहयोग से लक्कुंडी के स्मारकों को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों (WHS) की संभावित सूची में शामिल करने हेतु प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रही है।
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राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली
केंद्रीय गृहमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS) का उद्घाटन किया, जिसके माध्यम से वर्ष 1999 से अब तक हुए सभी बम विस्फोटों का देश का पहला केंद्रीकृत राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस स्थापित किया गया है।
राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS)
- परिचय: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) द्वारा विकसित NIDMS एक सुरक्षित, राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य इंप्रोवाइज एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से संबंधित डेटा का व्यवस्थित संग्रह, संकलन और प्रसार सक्षम करना है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- यह दोतरफा, एकीकृत और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो NIA, ATS, राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और अन्य एजेंसियों के लिये सुलभ होगा।
- रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की सुविधा के माध्यम से तेज़, साक्ष्य-आधारित जाँच और अभियोजन में सहायता मिलेगी।
- ‘वन नेशन, वन डेटा रिपॉज़िटरी’ दृष्टिकोण के तहत IED से संबंधित डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा की संपत्ति माना जाएगा।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से NIDMS विभिन्न डेटा स्रोतों को एकीकृत कर एक मज़बूत राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड तैयार करेगा।
- यह ICJS-2 (इंटर-ओपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम – फेस-II) ईकोसिस्टम से एकीकृत होगा, जो ‘वन डेटा–वन एंट्री’ आर्किटेक्चर (CCTNS, e-Prisons, e-Forensics, NAFIS आदि) के अनुरूप है।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड
- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) भारत का संघीय आकस्मिक आतंकवाद-रोधी बल है, जिसकी स्थापना वर्ष 1984 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद की गई और वर्ष 1986 में इसे औपचारिक रूप से संगठित किया गया। इसका गठन संपूर्ण देश में सभी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिये किया गया है।
- ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद ऐसे विशेष बल की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके परिणामस्वरूप NSG का गठन किया गया।
- यह बल तीव्र कार्रवाई और शीघ्र वापसी के सिद्धांत पर कार्य करता है और UK की SAS तथा जर्मनी की GSG-9 के मॉडल पर आधारित एक अत्यंत विशिष्ट कार्य-उन्मुख बल है।
- NSG दो पूरक घटकों से मिलकर बना है — स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG): जिसमें सेना से लिये गए कर्मी होते हैं और जो प्रत्यक्ष आतंकवाद-रोधी अभियानों को अंजाम देते हैं। स्पेशल रेंजर ग्रुप्स (SRG): जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा राज्य पुलिस बलों से लिये गए कर्मी होते हैं और अभियानों के परिचालन में समर्थन प्रदान करते हैं।
- NSG के क्षेत्रीय हब देश के विभिन्न हिस्सों — मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और अहमदाबाद में स्थित हैं, अयोध्या में भी एक नया हब स्थापित किया जा रहा है।
- NSG के अधीन नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर (NBDC) एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, जो भारत और विदेशों में रिपोर्ट की गई सभी आतंकवादी बम विस्फोट गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं का संग्रह, संकलन, विश्लेषण और मूल्यांकन करता है।
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