प्रिलिम्स फैक्ट्स (19 Jan, 2026)



केंद्रीय सतर्कता आयोग

स्रोत: पीआईबी

राष्ट्रपति ने केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 की धारा 4(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री प्रवीण वशिष्ठ को केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग क्या है?

  • परिचय: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) भारत सरकार के भीतर भ्रष्टाचार से निपटने और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये गठित शीर्ष वैधानिक संस्था है। यह एक कार्यकारी सिफारिश से विकसित होकर भारत के सतर्कता ढाँचे का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
  • उत्पत्ति और विकास: संथानम समिति (1962–64) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1964 में इसकी स्थापना की गई थी और प्रारंभ में यह गैर-वैधानिक संस्था थी।
    • इसे वर्ष 1998 में केंद्र सरकार के अध्यादेश के माध्यम से वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और बाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के तहत औपचारिक रूप से स्थापित किया गया।
  • संरचना और नियुक्ति: यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है, जिसमें एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं। इनका कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।
  • स्वतंत्रता: केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का वेतन और सेवा-शर्तें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष के समान होती हैं, जबकि सतर्कता आयुक्तों की सेवा-शर्तें UPSC के सदस्यों के समान निर्धारित हैं। दोनों ही मामलों में नियुक्ति के पश्चात इनमें परिवर्तित नहीं किया जा सकता
    • CVC का सारा खर्च—जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, अन्य सतर्कता आयुक्तों और कर्मचारियों का वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं— भारत की संचित निधि द्वारा जारी किया जाता है और यह संसदीय अनुमोदन के अधीन नहीं होता
  • हटाने का प्रावधान: राष्ट्रपति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या किसी भी सतर्कता आयुक्त को निम्न कारणों से पद से हटा सकते हैं: दिवालियापन, नैतिक अपवित्रता से संबंधित दोषसिद्धि, वेतनभोगी बाहरी नौकरी, शारीरिक अक्षमता या हानिकारक वित्तीय हित
    • इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या किसी भी सतर्कता आयुक्त को सिद्ध अनुचित आचरण या अक्षमता के आधार पर पद से हटा सकते हैं। ऐसे मामलों को जाँच के लिये सर्वोच्च न्यायालय के पास भेजा जाना चाहिये और पद से हटाने की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब सर्वोच्च न्यायालय आरोपों की पुष्टि कर दे और उन्हें हटाने की अनुशंसा करे।
  • मुख्य कार्य: इसके दायित्वों में शामिल हैं:
    • केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवा (AIS) अधिकारियों और निर्दिष्ट सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों की जाँच करना।
    • भ्रष्टाचार के मामलों में CBI पर अधीक्षण की शक्ति का प्रयोग करना और उसकी जाँचों की समीक्षा करना।
    • जनहित प्रकटीकरण और मुखबिरों के संरक्षण (PIDPI) रेज़ोल्यूशन के तहत सूचना प्रदाता/व्हिसल ब्लोअर शिकायतों के लिये नामित एजेंसी के रूप में कार्य करना।
    • जनहित प्रकटीकरण और सूचना प्रदाता संरक्षण (PIDPI) प्रस्ताव के तहत 'व्हिसलब्लोअर' (Whistle-blower) शिकायतों के लिए नामित एजेंसी के रूप में कार्य करना।
    • सतर्कता मामलों में केंद्रीय सरकार को परामर्श देना और अभियोजन अनुमोदन के अनुरोधों की समीक्षा करना।
    • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत संदिग्ध लेन-देन के लिये नामित प्राधिकरण के रूप में कार्य करना।
  • लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के बाद की भूमिका: लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को यह अधिकार दिया कि वह लोकपाल (राष्ट्रीय भ्रष्टाचार-रोधी लोकपाल) द्वारा भेजी गई शिकायतों पर समूह A, B, C और D के कर्मचारियों के विरुद्ध प्रारंभिक जाँच कर सके तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों की अनुशंसा कर सके।   
  • अधिकार क्षेत्र: इसमें अखिल भारतीय सेवाएँ (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति), समूह A के अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) और बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
  • संगठनात्मक संरचना: यह एक सचिवालय के माध्यम से कार्य करता है, तकनीकी ऑडिट के लिये मुख्य तकनीकी परीक्षक शाखा होती है तथा विभागीय जाँच के लिये विभागीय जाँच आयुक्त (CDI) नियुक्त किये जाते हैं।
  • कार्यप्रणाली एवं प्रतिवेदन: इसे सिविल न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त हैं, यह विभागों को आवश्यक कार्रवाई पर परामर्श देता है और इसके परामर्श को या तो लागू करना होता है अथवा अस्वीकार करने के कारण लिखित रूप में दर्ज करने होते हैं। यह अपनी वार्षिक रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे बाद में संसद के समक्ष रखा जाता है।
  • सतर्कता नेटवर्क: प्रत्येक मंत्रालय में एक मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) नियुक्त होता है, जो विभाग, केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के बीच समन्वय की कड़ी के रूप में कार्य करता है तथा आंतरिक सतर्कता से जुड़े कार्यों का संचालन करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) क्या है?
CVC केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार को रोकने और सतर्कता प्रशासन की निगरानी करने के लिये गठित सर्वोच्च वैधानिक सतर्कता निकाय है।

2. CVC कब एक वैधानिक निकाय बना?
इसे वर्ष 1998 में केंद्र सरकार के एक अध्यादेश के माध्यम से वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था और वर्ष 2003 के CVC अधिनियम के तहत इसे औपचारिक रूप दिया गया था।

3. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है?
भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की समिति की सिफारिश के आधार पर।

4. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत CVC की क्या भूमिका है?
यह CBI द्वारा की गई जाँचों की निगरानी करता है, अभियोजन संबंधी स्वीकृतियों की समीक्षा करता है और केंद्र सरकार एवं वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जाँच करता है।

5. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 ने CVC को कैसे प्रभावित किया?
इसने CVC को लोकपाल के संदर्भों पर प्रारंभिक जाँच करने का अधिकार दिया और CBI एवं प्रवर्तन निदेशालय की नियुक्तियों में इसकी भूमिका को सुदृढ़ किया।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)

  1. भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन [यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन (UNCAC)] का 'भूमि, समुद्र और वायुमार्ग से प्रवासियों की तस्करी के विरुद्ध एक प्रोटोकॉल' होता है।
  2. UNCAC अब तक का सबसे पहला विधितः बाध्यकारी सार्वभौम भ्रष्टाचार-रोधी लिखत है।
  3. राष्ट्र-पार संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन [यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम (UNTOC)] की एक विशिष्टता ऐसे एक विशिष्ट अध्याय का समावेशन है, जिसका लक्ष्य उन संपत्तियों को उनके वैध स्वामियों को लौटाना है जिनसे वे अवैध तरीके से ले ली गई थीं।
  4. मादक द्रव्य और अपराध विषयक संयुक्त राष्ट्र कार्यालय [यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC)] संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों द्वारा UNCAC और UNTOC दोनों के कार्यान्वयन में सहयोग करने के लिये अधिदेशित है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) केवल 2 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (c)


भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 लैब

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

केंद्रीय गृहमंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित बायो-सेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) लैब का शिलान्यास किया, यह कदम देश की स्वास्थ्य सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और घातक रोगजनकों से निपटने की तैयारियों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • BSL-4 लैबोरेटरी: BSL-4 जैविक संरक्षण का उच्चतम स्तर है, जिसे प्रायः प्रभावी वैक्सीन या उपचारों से रहित अत्यधिक संक्रामक और घातक रोगजनकों का अध्ययन करने के लिये डिज़ाइन किया गया है, जो सख्त अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होता है।
  • भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 सुविधा: यह भारत में दूसरी नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला होगी।
    • इसे गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) के तहत विकसित किया गया है और गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसने सर्वप्रथम SARS-CoV-2 जीनोम को डीकोड किया था।
    • इस परिसर में BSL-4, BSL-3, BSL-2, ABSL-4 और ABSL-3 जैसी विभिन्न मॉड्यूल इकाइयाँ शामिल होंगी, साथ ही उन्नत श्रेणी की उपयोगिताएँ और अत्याधुनिक जैव-नियंत्रण (कंटेनमेंट) प्रणालियाँ भी स्थापित की जाएँगी।
  • एनिमल बायो-सेफ्टी (ABSL-4): ABSL-4 इकाई जूनोटिक रोगों पर राज्य के भीतर परीक्षण और वैक्सीन रिसर्च की अनुमति देगी।
  • राष्ट्रीय सुविधा का दर्जा: जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने इसे एक राष्ट्रीय सुविधा घोषित करते हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं, जिससे संपूर्ण भारत के विशेषज्ञों और संस्थानों तक पहुँच संभव होगी।
  • भारत की मौज़ूदा हाई सिक्योरिटी लैब:
    • नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला: राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे।
    • डिफेंस BSL-4 प्रयोगशाला: DRDO, ग्वालियर।
    • भारत के पास वर्तमान में VRDL नेटवर्क के अंतर्गत 154 BSL-2 लैबोरेटरी और 11 BSL-3 लैबोरेटरी हैं (मार्च 2025 तक)।
  • भारत के लिये रणनीतिक महत्त्व: यह सीमित केंद्रीय सुविधाओं पर निर्भरता कम करते हुए घातक रोग प्रकोपों के प्रति त्वरित और वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रदान करता है।
    • इससे भोपाल स्थित ICAR-NIHSAD को पशुओं के सैंपल भेजने पर निर्भरता कम होती है, साथ ही घरेलू क्षमता भी सुदृढ़ होती है।
    • यह पशुओं से संबंधित मॉडलों का उपयोग करके वैक्सीन और चिकित्सकीय विकास का समर्थन करता है, जो भविष्य की महामारियों के लिये महत्त्वपूर्ण है।

और पढ़ें: भारत में सुदृढ़ R&D ईकोसिस्टम


निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI), 2024

स्रोत: पीआईबी

नीति आयोग ने निर्यात तैयारी सूचकांक (Export Preparedness Index–EPI), 2024 जारी किया है, जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की निर्यात तत्परता का आकलन करता है तथा वर्ष 2030 तक भारत के 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्तु निर्यात लक्ष्य और विकसित भारत @2047 के विज़न को प्राप्त करने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

  • निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI): पहली बार वर्ष 2020 में शुरू किया गया, यह सूचकांक प्रमाण-आधारित ढाँचे के माध्यम से राज्य और ज़िला स्तर पर निर्यात तैयारियों का आकलन करता है।
    • यह निर्यात वृद्धि, रोज़गार सृजन और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के एकीकरण में राज्यों तथा ज़िलों की अहम भूमिका को रेखांकित करता है तथा अवसंरचना विकास, प्रतिस्पर्द्धात्मक क्षमता एवं क्लस्टर-आधारित रणनीतियों पर विशेष बल देता है।
    • यह सूचकांक संघवाद और आर्थिक प्रदर्शन के बीच संबंध को दर्शाता है तथा ज़िला-आधारित निर्यात वृद्धि को प्रमुखता देता है, जिससे मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) और व्यापार प्रतिस्पर्द्धात्मकता को समर्थन मिलता है।
  • EPI 2024 का रूपरेखा और विवरण: यह 4 स्तंभों, 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों के आधार पर संरचित है।
    • चार मुख्य स्तंभ हैं: निर्यात अवसंरचना, बिज़नेस इकोसिस्टम, नीति व शासन और निर्यात प्रदर्शन
      • इन चारों में बिज़नेस इकोसिस्टम को सबसे अधिक 40 प्रतिशत वेटेज दिया गया है, जबकि शेष तीन स्तंभों को 20–20 प्रतिशत का भार प्रदान किया गया है। यह लागत दक्षता, MSMEs, वित्त तक पहुँच और नवाचार के बढ़ते महत्त्व को रेखांकित करता है, जो निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को मज़बूत करने में सहायक हैं।
    • तुलनात्मक आकलन के लिये राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बड़े राज्य, छोटे राज्य, पूर्वोत्तर राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश की श्रेणियों में विभाजित किया गया है। साथ ही उन्हें लीडर्स (उच्च निर्यात तत्परता), चैलेंजर्स (मध्यम तत्परता, सुधार की संभावना) एवं आस्पायरर्स (प्रारंभिक चरण की निर्यात पारिस्थितिकी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिससे पीयर लर्निंग, सहकारी संघवाद व लक्षित सुधारों को बढ़ावा मिलता है।
  • EPI, 2024 में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य और केंद्रशासित प्रदेश: बड़े राज्यों की श्रेणी में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश अग्रणी रहे हैं। वहीं छोटे राज्य, पूर्वोत्तर राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, दादरा और नगर हवेली, दमन एवं दीव तथा गोवा ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

और पढ़ें: भारत की नई निर्यात योजनाओं की पुनर्कल्पना


काज़ीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और बागुरुम्बा दोहो

स्रोत: पीआईबी 

हाल ही में असम के दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी में बागुरुम्बा दोहो- 2026 सांस्कृतिक कार्यक्रम में काज़ीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का शिलान्यास किया तथा दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को वर्चुअली हरी झंडी दिखाई।

  • बागुरुम्बा दोहो: यह गुवाहाटी में प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार है, जिसे बोडो समुदाय विरासत के रूप में मनाता है।
    • बागुरुम्बा नृत्य एक पारंपरिक बोडो लोक नृत्य का रूप है जो प्रकृति से प्रेरित है, मनुष्यों और पर्यावरण के बीच सामंजस्य का प्रतीक है।
    • मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा पुरुष संगीतकारों के साथ किया जाने वाले इस नृत्य में गोलाकार और रेखीय संरचनाओं के माध्यम से तितलियों, पक्षियों और फूलों की नकल की जाती है, यह शांति, उर्वरता एवं सामूहिक आनंद का प्रतिनिधित्व करता है, जो ब्विसागु (बोडो नव वर्ष) जैसे त्योहारों के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है।
  • काज़ीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: इसका उद्देश्य काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभ्यारण्य में वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना है, जहाँ विश्व की सबसे अधिक संख्या में पाए जाने वाले एक सींग वाले गैंडे और लगभग 500 पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, साथ ही वाहनों से जानवरों के टकराव को कम करना, सड़क सुरक्षा में सुधार करना, भीड़भाड़ कम करना तथा ऊपरी असम की कनेक्टिविटी को मज़बूत करना है।
    • यह ब्रह्मपुत्र बाढ़ के मैदानों के साथ NH-715 के 86.675 किमी. वाले कलियाबोर-नुमालीगढ़ खंड के चार-लेन का हिस्सा है, जिसमें जखलाबंधा और बोकाखात में बाईपास के साथ लगभग 34.5 किमी. लंबा उन्नत वन्यजीव-अनुकूल गलियारा शामिल है।
  • रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा: क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिये, प्रधानमंत्री ने दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों, कामाख्या-रोहतक और डिब्रूगढ़-गोमती नगर (लखनऊ) को भी हरी झंडी दिखाई, जो पूर्वोत्तर और उत्तरी भारत के बीच लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी को काफी बेहतर बनाएँगी, यात्रा के समय को कम करेंगी तथा आधुनिक यात्री सुविधाएँ प्रदान करेंगी।

और पढ़ें: बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR)


ESIC से जुड़े 1.03 करोड़ नए कर्मचारी

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने घोषणा की कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में सुधारों, विशेषकर नियोक्ताओं/कर्मचारियों के पंजीकरण को बढ़ावा देने की योजना (SPREE) के माध्यम से एक करोड़ से अधिक नए कर्मचारियों तक सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार हुआ है।

  • SPREE के अंतर्गत एकमुश्त, दंड-मुक्त अवसर प्रदान किया गया, जिससे अब तक गैर-पंजीकृत नियोक्ता और कर्मचारी बगैर किसी पिछली देनदारी के ESIC सिस्टम में शामिल हो सके। इसके परिणामस्वरूप 11 जनवरी, 2026 तक 1.17 लाख नियोक्ताओं और 1.03 करोड़ कर्मचारियों का पंजीकरण किया गया।
    • कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI) का संचालन करता है, इसके माध्यम से बीमित श्रमिकों और उनके आश्रित परिवारों को बीमारी, मातृत्व, दिव्यांगता तथा कार्य स्थल पर दुर्घटना संबंधी जोखिमों के विरुद्ध सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है, साथ ही उन्हें समुचित चिकित्सकीय देखभाल भी सुनिश्चित की जाती है।
  • समानांतर रूप से EPFO में किये गए सुधारों से भविष्य निधि लाभों तक पहुँच सरल हुई है। अब सदस्य शेष राशि का 75% तक आहरण कर सकते हैं, जबकि 25% राशि सेवानिवृत्ति के लिये सुरक्षित रहती है। इसके साथ ही, सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से दावों के स्वचालित निपटान (ऑटो-सेटलमेंट) का दायरा भी बढ़ाया गया है।
    • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, जो कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत भविष्य निधि और पेंशन योजनाओं का प्रशासन करता है, यह विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है।

और पढ़ें: कर्मचारी राज्य बीमा


कोंडागई झील से मिले जलवायु संबंधी रिकॉर्ड

स्रोत: पीआईबी

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने कोंडागई झील, शिवगंगा से प्राप्त तलछट के माध्यम से भारत के सबसे विस्तृत अंतर्देशीय जलवायु रिकॉर्डों में से एक का पुनः आकलन किया है। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर मानसून के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।

  • मुख्य निष्कर्ष: इस अध्ययन में कोंडागई झील से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर लेट होलोसीन काल के 4,500 वर्षों के जलवायु का पुनः आकलन किया गया। इसके लिये मल्टी-प्रॉक्सी तकनीकों, जैसे– स्थिर समस्थानिक विश्लेषण, पराग अध्ययन, कण आकार माप और रेडियोकार्बन डेटिंग का उपयोग किया गया।
    • इस अध्ययन में तीन अलग-अलग जलवायु चरणों की पहचान की गई, इसने 4.2 हज़ार वर्ष पहले की शुष्क घटना, 3.2 हज़ार वर्ष पहले के शुष्क चरण और रोमन उष्‍ण काल का दस्तावेज़ीकरण किया है और इस क्षेत्र में मानसून की परिवर्तनशीलता, झील जल-विज्ञान और मानव गतिविधियों से उनके प्रत्यक्ष संबंधों को स्थापित किया है।
    • यह दीर्घकालिक जलवायु अभिलेख पूर्वोत्तर मानसून के व्यवहार को समझने के लिये एक सुदृढ़ आधार प्रदान करता है, वैगई बेसिन में बाढ़ जोखिम मानचित्रण को समर्थन देता है, झील-स्तर और भूजल परिवर्तनों की जानकारी के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन का मार्गदर्शन करता है तथा आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन एवं जैव विविधता संरक्षण योजना को सशक्त बनाता है।
  • होलोसीन युग: होलोसीन वर्तमान भूवैज्ञानिक युग है, जिसकी शुरुआत लगभग 11,700 वर्ष पूर्व अंतिम प्रमुख हिमयुग के अंत में हुई थी। यह अपेक्षाकृत स्थिर एवं गर्म जलवायु के साथ-साथ मानव सभ्यता के विकास की विशेषता है। होलोसीन प्लेइस्टोसिन युग का अनुसरण करता है, जो बड़े चतुर्धातुक युग का हिस्सा है।
  • कोंडागई झील: कोंडागई तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले में स्थित एक अंतर्देशीय झील है। यह कीलाडी (Keeladi) पुरातात्त्विक स्थल के निकट स्थित है, जो संगमकालीन सभ्यता से संबंधित है और जिसकी तिथि लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व मानी जाती है।
    • यह झील प्राचीन बसाहट क्षेत्र में स्थित है और अतीत की मानसून परिवर्तनशीलता, पारिस्थितिक तंत्र की प्रतिक्रियाओं तथा मानव–पर्यावरण अंतःक्रिया के सबंध में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करती है।

Kondagai_Lake

और पढ़ें: कार्बन डेटिंग