अमेरिका - इज़रायल - ईरान युद्ध में संघर्ष क्षेत्र | 06 Mar 2026

प्रिलिम्स के लिये: खाड़ी सहयोग परिषद, फारस की खाड़ी, हिज़बुल्लाह, हूती विद्रोही, ओमान की खाड़ी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, भूमध्य सागर, गोलान हाइट्स 

मेन्स के लिये: पश्चिम एशिया की भू-राजनीति और बदलता हुआ शक्ति संतुलन, अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों में प्रॉक्सी युद्ध और गैर-राज्यकर्मी अभिनेता, समुद्री जाम-बिंदुओं का रणनीतिक महत्त्व

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर समन्वित हमले किये, जिससे ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में आर्थिक लक्ष्यों पर प्रतिशोधी हमले किये।

  • फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव के कारण  भारत के बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने भारतीय जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षा के लिये निगरानी को सशक्त किया है, जबकि हिज़बुल्लाह ने लेबनान से इज़रायल के साथ संघर्ष तेज़ कर दिया है।

सारांश

  • संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष अब एक बहु-मोर्चीय संकट का रूप ले चुका है, जिसमें क्षेत्रीय खिलाड़ी और प्रॉक्सी समूह जैसे- हिज़बुल्लाह और हूती शामिल हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है।
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य, लाल सागर और फारस की खाड़ी जैसे रणनीतिक समुद्री जाम-बिंदु महत्त्वपूर्ण संकट स्थल बन गए हैं, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, नौवहन मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिये खतरा उत्पन्न कर रहे हैं।

US-इज़रायल-ईरान संघर्ष से जुड़े मुख्य लोग कौन हैं?

राज्य कार्यकर्त्ता

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल: ईरान की परमाणु क्षमताओं और प्रॉक्सी नेटवर्क को कमज़ोर करने तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पुनर्संरचित करने के उद्देश्य से इसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। 
    • अमेरिका ने ईरानी लोगों को वहाँ की शासन व्यवस्था (सत्ता) को उखाड़ फेंकने के लिये प्रोत्साहित करने का लक्ष्य भी व्यक्त किया।
  • ईरान: अपनी शासन व्यवस्था (सत्ता) के अस्तित्व को बचाने के लिये संघर्ष कर रहा है, साथ ही अपनी क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शित करने और आगे के हमलों को रोकने हेतु अपने क्षेत्रीय नेटवर्क (प्रॉक्सी समूहों) का उपयोग कर रहा है।
    • ईरान युद्ध की लागत को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिये बढ़ाने के उद्देश्य से उसने संघर्ष बहु-मोर्चीय विस्तार दिया है, ताकि संघर्ष लंबा चले और उसके राजनीतिक तथा सैन्य प्रभाव को बढ़ाया जा सके। 
    • इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका उत्पन्न करना है, ताकि वैश्विक समुदाय वाशिंगटन पर दबाव बना सके और उसे सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिये मज़बूर किया जा सके।
  • GCC देश: UAE, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान ईरान के साथ फारस की खाड़ी साझा करते हैं और इस संघर्ष के बीच में फँसे हुए हैं।
    • इनमें से कई देशों में प्रमुख अमेरिकी सैन्य आधार स्थित हैं, जैसे– अल उदीद एयर बेस (कतर), नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन – US फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर (बहरीन), अल धफरा एयर बेस (UAE) और दुकम पोर्ट फैसिलिटी (ओमान)। 
    • ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई के तहत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के कई देशों में तेल और गैस सुविधाओं, बंदरगाहों, हवाई अड्डों तथा विदेशी मिशनों सहित आर्थिक एवं नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाया, ताकि क्षेत्र में अस्थिरता फैलाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला जा सके व संयुक्त राज्य अमेरिका–इज़रायल अभियान के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप को मजबूर किया जा सके

गैर-राज्य कार्यकर्त्ता ("प्रतिरोध की धुरी")

  • हिज़बुल्लाह (लेबनान): हिज़बुल्लाह ईरान के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा एक शिया बहुल राजनीतिक और सैन्य संगठन है, जिसे इस संघर्ष में ईरान का प्रमुख सहयोगी माना जाता है। यह संगठन ईरान से व्यापक सैन्य, वित्तीय तथा रणनीतिक समर्थन प्राप्त करता है एवं लंबे समय से इज़रायल के खिलाफ संघर्ष में शामिल है, अक्सर ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क के रूप में कार्य करता है।
  • हूती (यमन): ईरान के समर्थन में और ‘प्रतिरोध की धुरी’ के व्यापक साझेदार के रूप में हूती अपनी  भौगोलिक स्थिति का उपयोग करके लाल सागर और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाज़ों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले करते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार में व्यवधान आता है और यह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों और अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है। 
  • पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ (PMF - इराक): ये समूह इराक और सीरियाई क्षेत्रों से अमेरिकी ठिकानों और इज़रायली हितों को निशाना बनाते हुए ‘समर्थन में हमले’ कर रहे हैं।
  • कुर्दिश मिलिशिया: कुछ कुर्द समूहों को ईरानी शासन के खिलाफ संभावित सहयोगियों के रूप में अमेरिका और इज़रायल का समर्थन प्राप्त है।
    • कुर्द विश्व का सबसे बड़ा बिना राज्य वाला नृजातीय समूह है, जिसकी अनुमानित जनसंख्या 25–35 मिलियन है।
    • वे तुर्की, इराक, सीरिया, ईरान और आर्मेनिया के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं, मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं और हर एक देश में अल्पसंख्यक ही बने हुए हैं।
    • अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से कुर्द समूहों, विशेषकर इराक और सीरिया में, का समर्थन किया है क्योंकि ये सैन्य सहयोगी के रूप में प्रभावी साबित हुए हैं।

अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष से जुड़े मुख्य चर्चित स्थल कौन-से हैं?

महत्त्वपूर्ण जलमार्ग एवं समुद्री चोकपॉइंट्स

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य: यह एक संकीर्ण चोकपॉइंट (55–95 किमी. चौड़ा) तथा सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो उत्तर में ईरान तथा दक्षिण में ओमान एवं संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है।

अधिक जानकारी के लिये पढ़िये: ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद किया

  • फारस की खाड़ी: फारस की खाड़ी पश्चिम एशिया में स्थित हिंद महासागर का एक सीमांत सागर है।
    • यह ओमान की खाड़ी का विस्तार है तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से हिंद महासागर से जुड़ती है।
    • यह खाड़ी दक्षिण-पश्चिम में अरब प्रायद्वीप तथा उत्तर-पूर्व में ईरान के मध्य स्थित है।
    • इसके सीमावर्ती देशों में ईरान, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत तथा इराक सम्मिलित हैं।
      • उत्तर-पश्चिम दिशा में यह शत्त अल-अरब डेल्टा से जुड़ती है, जहाँ यूफ्रेटीस नदी तथा टिगरिस नदी इस खाड़ी में प्रवाहित होती हैं।
    • फारस की खाड़ी की तटरेखा लगभग 5,117 किमी. लंबी है, जिसमें ईरान का तटवर्ती विस्तार सर्वाधिक है।
    • यह क्षेत्र विश्व के कुछ सबसे बड़े कच्चे तेल भंडारों का धारक है, जिनमें अल-सफानिया ऑयल फील्ड (विश्व का सबसे बड़ा अपतटीय तेल क्षेत्र) भी सम्मिलित है।
  • ओमान की खाड़ी: इसे मकरान की खाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह अरब सागर का पश्चिमी विस्तार है तथा हिंद महासागर से फारस की खाड़ी की ओर जाने वाला प्रमुख समुद्री प्रवेश-द्वार निर्मित करती है।
    • यह अरब सागर को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जोड़ती है, जिससे इसका विस्तार फारस की खाड़ी तक होता है।
    • इस खाड़ी के उत्तर में ईरान तथा पाकिस्तान, दक्षिण में ओमान, जबकि पश्चिम में संयुक्त अरब अमीरात स्थित हैं।
    • इसके प्रमुख बंदरगाहों में ओमान के सोहर, अल-खाबुरह, मस्कट तथा सूर, जबकि ईरान के जस्क एवं चाबहार सम्मिलित हैं।
  • लाल सागर: लाल सागर अफ्रीका और एशिया के मध्य स्थित एक समुद्री जल-प्रवेशिका है। इसके तटवर्ती देशों में मिस्र, सऊदी अरब, यमन, सूडान, इरिट्रिया तथा ज़िबूती सम्मिलित हैं।
    • यह सागर दक्षिण में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तथा अदन की खाड़ी के माध्यम से हिंद महासागर से जुड़ता है।
    • उत्तर में यह सिनाई प्रायद्वीप के आसपास दो भागों में विभाजित हो जाता है—अकाबा की खाड़ी तथा स्वेज़ की खाड़ी, जिनमें से स्वेज़ की खाड़ी आगे चलकर स्वेज़ नहर से जुड़ती है।
    • भूवैज्ञानिक दृष्टि से लाल सागर ग्रेट रिफ्ट वैली (अफ्रो-अरबियन रिफ्ट प्रणाली) के एक भाग में स्थित है।
  • भूमध्य सागर: भूमध्य सागर एक अंतरमहाद्वीपीय सागर है, जिसके उत्तर में यूरोप, पूर्व में एशिया तथा दक्षिण में अफ्रीका स्थित हैं।
  • हिंद महासागर: यह व्यापक महासागरीय क्षेत्र है, जहाँ भारत अपने समुद्री संचार मार्गों (सी लाइंस  ऑफ कम्युनिकेशन) तथा समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिये अपनी नौसैनिक उपस्थिति को सुदृढ़ कर रहा है।
    • एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी फ़्रिगेट आईआरआईएस डेना पर टॉरपीडो प्रहार कर उसे हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के निकट गॉल से लगभग 40 समुद्री मील की दूरी पर डुबो दिया, जिससे अमेरिका–इज़रायल–ईरान संघर्ष का विस्तार हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के और निकट पहुँच गया।

ईरानी पठार

  • तेहरान और कराज: ईरान की राजधानी और उसके निकटवर्ती उपनगर, जो इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के रणनीतिक नेतृत्व परिसरों और सैन्य कमान केंद्रों के लिये लक्षित हैं।
  • इस्फहान और नतांज़: मध्य ईरान में स्थित हैं। इस्फहान प्रमुख वायुसैनिक अड्डों और मिसाइल उत्पादन सुविधाओं का घर है, जबकि नतांज़ ईरान के यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम का अत्यधिक दृढ़ भूमिगत केंद्र है।
  • बंदर इमाम खुमैनी और अबादान: फारस की खाड़ी के पास तेल-समृद्ध खुज़ेस्तान प्रांत में स्थित, ये शहर महत्त्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और रिफाइनरियों की मेज़बानी करते हैं जो ईरान की निर्यात अर्थव्यवस्था को चलाते हैं।
  • शाहरूद अंतरिक्ष केंद्र: सेमनान प्रांत में स्थित, यह बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन और परीक्षण का केंद्र है।

लेवंट क्षेत्र

  • लेबनान:
    • बेरुत: लेबनान की राजधानी, जिसके दक्षिणी उपनगर हिज़्बुल्लाह के कमांड सेंटर के रूप में कार्य करते हैं।
    • लितानी नदी: माउंट लेबनान और एंटी-लेबनान पर्वत शृंखलाओं के बीच स्थित है। यह दक्षिण की ओर प्रवाहित होने से पहले पश्चिम की ओर तीखा मोड़ लेती है, जो टायर शहर के उत्तर में भूमध्य सागर में विसर्जित होती है।
    • यह नदी एक महत्त्वपूर्ण भौगोलिक सीमा के रूप में कार्य करती है। वर्ष 2006 के लेबनान युद्ध के बाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के प्रस्ताव 1701 के अंतर्गत ब्लू लाइन (इज़रायल के साथ सीमा) और लितानी नदी के बीच का क्षेत्र लेबनानी सशस्त्र बलों और लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के अलावा यह किसी अन्य देश के सशस्त्र कर्मियों से मुक्त होना चाहिये।
  • इज़रायल
    • हाइफा: यह एक प्रमुख गहरे जल का बंदरगाह शहर और औद्योगिक केंद्र है, जो प्रायः अपने रणनीतिक नौसैनिक अड्डे और लेबनानी सीमा से निकटता के कारण लक्षित होता है
    • तेल अवीव: केंद्रीय इज़रायली तटीय मैदान में स्थित है। यह तकनीकी और वित्तीय राजधानी है, जो देश के प्राथमिक आर्थिक इंजन के रूप में कार्य करता है।
    • अश्कलोन: गाज़ा पट्टी के ठीक उत्तर में तटीय मैदान में स्थित है। दक्षिणी संघर्ष क्षेत्रों से इसकी निकटता के कारण, यह अत्यधिक दृढ़ है, लेकिन अक्सर कम दूरी के प्रक्षेपास्त्रों की सीमा में आता है।
    • दिमोना: ईरान धमकी देता है कि यदि इज़रायल और अमेरिका ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने का प्रयास करते हैं तो वह दिमोना परमाणु स्थल पर हमला करेगा।
    • भौगोलिक संरेखण: हाइफा, तेल अवीव और अश्कलोन भूमध्य सागर के लेवेंटाइन बेसिन स्थित प्रमुख तटीय शहर हैं।
  • गोलन हाइट्स (सीरिया):
    • भौगोलिक स्थिति: दक्षिण-पश्चिमी सीरिया में स्थित एक रणनीतिक, चट्टानी बेसाल्टिक पठार।
    • महत्त्वपूर्ण सीमा: गोलन हाइट्स उत्तर में माउंट हेर्मोन (इसे लेबनान से अलग करता है), दक्षिण में यरमौक नदी (इसे जॉर्डन से अलग करती है), पश्चिम में जॉर्डन नदी एवं गैलील सागर और पूर्व में मौसमी वादी अल-रुक्कद से लगती हैं।
    • स्थलाकृतिक लाभ: पठार पश्चिम में जॉर्डन रिफ्ट वैली और उत्तरी इज़रायल एवं पूर्व में सीरियाई राजधानी दमिश्क पर एक कमांडिंग व्यू प्रदान करता है।
    • ऐतिहासिक संदर्भ: गोलन हाइट्स पर छह-दिवसीय युद्ध (1967) के दौरान इज़रायल द्वारा सीरिया से छीन लिया था। 
      • सीरिया ने योम किप्पुर युद्ध (1973) के दौरान इसे पुनः हासिल करने का प्रयास किया लेकिन असफल रहा। 1974 में, दोनों देशों ने इज़रायल-सीरिया विखंडन समझौते पर हस्ताक्षर किये, जिसने एक संघर्ष विराम बनाया और बफर ज़ोन की निगरानी के लिये संयुक्त राष्ट्र विखंडन पर्यवेक्षक बल की स्थापना की।
      • इज़रायल ने वर्ष 1981 में औपचारिक रूप से क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया, यह एक ऐसा कदम है जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं है, हालाँकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने वर्ष 2019 में इज़रायली संप्रभुता को मान्यता दी।
      • यह क्षेत्र इज़रायली और सीरियाई सेनाओं के बीच संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले विसैन्यीकृत क्षेत्र द्वारा विभाजित है, जबकि सीरिया इस क्षेत्र की वापसी की मांग लगातार जारी रखे हुए है।
  • जॉर्डन: इसने अपने क्षेत्र को लक्षित करने वाली ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को रोका है।
    • भौगोलिक रूप से सीधे इज़रायल और ईरान/इराक के बीच स्थित, जॉर्डन का प्राथमिक उद्देश्य अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना और अपने हवाई क्षेत्र को युद्ध का रंगमंच बनने से रोकना है।
  • साइप्रस: कई हमले, जिनके बारे में माना जाता है कि वे या तो ईरान या उसके लेबनानी प्रॉक्सी हिज़्बुल्लाह से थे, साइप्रस द्वीप पर हुए, जो पूर्वोत्तर भूमध्य सागर में यूरोप, एशिया और अफ्रीका के चौराहे पर स्थित एक यूरेशियन द्वीप देश है।

अरब प्रायद्वीप और संबंधित सैन्य बेस 

  • दुबई और अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात): वैश्विक विमानन और आर्थिक केंद्र, जिनके बुनियादी ढाँचे को वैश्विक पारगमन और व्यापार को बाधित करने के लिये ईरानी जवाबी हमलों द्वारा लक्षित किया गया था
  • मनामा (बहरीन): राजधानी शहर जो संयुक्त राष्ट्र की नौसेना के पाँचवें बेड़े की मेज़बानी करता है, जो इसे क्षेत्र में पश्चिमी नौसैन्य प्रक्षेपण के लिये एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बनाता है।
  • इरबिल (इराक): उत्तरी इराक में कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी। इरबिल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक अमेरिकी सैन्य बेस की मेज़बानी करता है, जिसे पश्चिमी सैन्य और खुफिया कर्मियों की उपस्थिति के कारण अक्सर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों द्वारा लक्षित किया जाता है।
  • अक्रोटिरी और ढेकेलिया (साइप्रस): पूर्वी भूमध्य सागर में यूनाइटेड किंगडम द्वारा नियंत्रित दो संप्रभु आधार क्षेत्र, जिनका उपयोग टोही उड़ानें शुरू करने और क्षेत्रीय प्रक्षेपास्त्रों को रोकने के लिये किया जाता है।
  • तुर्किये: उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) वायु रक्षा प्रणालियों ने तुर्की हवाई क्षेत्र की ओर जा रहे एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोका। मिसाइल का अपशिष्ट दक्षिणी तुर्की में इंसिरलिक में अमेरिकी एयर बेस के पास हताय प्रांत में गिरा।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. "अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष ने पश्चिम एशिया को एक बहु-आयामी भू-राजनीतिक थिएटर में बदल दिया है।" इस संघर्ष को आकार देने में राज्य और गैर-राज्य अभिकर्त्ताओं की भूमिका का परीक्षण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. होर्मुज़ जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% भाग यहाँ से गुज़रता है, जो इसे विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट्स में से एक बनाता है।

2. "प्रतिरोध की धुरी" (Axis of Resistance) क्या है?
यह ईरान के नेतृत्व में एक अनौपचारिक गठबंधन है, जिसमें हिज़बुल्लाह, हूथी और पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ जैसे समूह शामिल हैं। यह गठबंधन पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़रायल के प्रभाव का विरोध करता है।

3. गोलन हाइट्स रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
गोलन हाइट्स उत्तरी इज़रायल और दक्षिणी सीरिया पर एक प्रमुख सामरिक दृष्टि-बिंदु प्रदान करता है, जो इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाता है।

4. यह संघर्ष वैश्विक व्यापार मार्गों को कैसे प्रभावित करता है?
लाल सागर और अदन की खाड़ी के पास होने वाले हमले उन शिपिंग लेन के लिये खतरा उत्पन्न करते हैं जो यूरोप और एशिया को जोड़ते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी सप्लाई चैन बाधित हो सकती है।

5. फारस की खाड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
फारस की खाड़ी में विश्व के कुछ सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडार हैं और यह वैश्विक ऊर्जा निर्यात और समुद्री व्यापार का केंद्र है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स

प्रश्न 1. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2018)

कभी-कभी समाचारों में उल्लिखित शहर

देश

1.

अलेप्पो

सीरिया

2.

किरकुक

यमन

3.

मोसूल

फिलिस्तीन

4.

मज़ार-ए-शरीफ

अफगानिस्तान

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?


(a) 1 और 2
(b) 1 और 4
(c) 2 और 3
(d) 3 और 4


उत्तर: (b)


प्रश्न 2. दक्षिण-पश्चिमी एशिया का निम्नलिखित में से कौन-सा एक देश भूमध्यसागर तक फैला नहीं है? (2015)

(a) सीरिया

(b) जॉर्डन

(c) लेबनान

(d) इज़रायल

उत्तर: (b)


प्रश्न 3. 'गोलन हाइट्स' के नाम से जाना जाने वाला क्षेत्र निम्नलिखित में से किससे संबंधित घटनाओं के संदर्भ में यदा-कदा समाचारों में आता है? (2015)

(a) मध्य एशिया

(b) मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट)

(c) दक्षिण-पूर्व एशिया

(d) मध्य अफ्रीका

उत्तर: (b)


प्रश्न 4. योम किप्पुर युद्ध किन पक्षों/देशों के बीच लड़ा गया था? (2008)

(a) तुर्किये और ग्रीस

(b) सर्ब और क्रोएट्स

(c) इज़रायल, मिस्र और सीरिया के नेतृत्व वाले अरब देश

(d) ईरान और इराक

उत्तर: (c)


मेन्स 

प्रश्न. "भारत के इज़रायल के साथ संबंधों ने हाल में एक ऐसी गहराई एवं विविधता प्राप्त कर ली है, जिसकी पुनर्वापसी नहीं की जा सकती है।" विवेचना कीजिये। (2018)