जैव-आधारित रसायन
चर्चा में क्यों?
जैव-आधारित रसायन भारत के लिये एक रणनीतिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये देश के विशाल कृषि-आधार का उपयोग करने, पेट्रो-रसायनों पर आयात-निर्भरता को घटाने तथा वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप औद्योगिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने की क्षमता रखते हैं।
जैव-आधारित रसायन क्या हैं?
- परिचय: जैव-आधारित रसायन ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो जीवाश्म ईंधन, जैसे- पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस या कोयले के बजाय नवीकरणीय जैविक संसाधनों (पौधे, कृषि अवशेष, वानिकी सामग्री, समुद्री स्रोत, शैवाल) से पूर्णतः या आंशिक रूप से प्राप्त होते हैं।
- एंज़ाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जिनका उपयोग व्यापक रूप से डिटर्जेंट, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, लुगदी एवं कागज़ उद्योग तथा जैव-उत्पादन में किया जाता है। ये निम्न तापमान एवं दाब पर कार्य करते हैं, जिससे ऊर्जा-उपभोग तथा उत्सर्जन में कमी आती है।
- उत्पादन विधियाँ: उत्पादन में आमतौर पर बायोरिफाइनरी शामिल होती हैं जहाँ बायोमास किण्वन, एंज़ाइम रूपांतरण, थर्मोकेमिकल उपचार या उत्प्रेरक उन्नयन जैसी प्रक्रियाओं से गुज़रते हैं।
- सामान्य विधियों में शर्करा अथवा स्टार्च का सूक्ष्मजीवी किण्वन कर कार्बनिक अम्ल एवं अल्कोहल का उत्पादन या पौधे से प्राप्त तेल तथा लिग्नो-सेल्यूलोजिक पदार्थों का निष्कर्षण एवं संशोधन सम्मिलित हैं।
जैव-आधारित रसायनों के उदाहरण:
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रासायन |
उत्पादन विधि |
अनुप्रयोग |
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लैक्टिक एसिड |
कार्बोहाइड्रेट का किण्वन |
जैव-अपघटनीय प्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड), खाद्य परिरक्षक, सौंदर्य प्रसाधन |
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सक्सीनिक अम्ल |
ग्लूकोज़/शर्करा से प्राप्त |
पॉलिमर, विलायक और औषधियों हेतु घटक उत्पाद के रूप में |
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जैव-आधारित ग्लिसरॉल |
बायोडीज़ल उत्पादन का उप-उत्पाद |
औषधि, व्यक्तिगत देखभाल, रासायनिक कच्चा माल |
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बायो-इथेनॉल और बायो-ब्यूटेनॉल |
किण्वन |
विलायक, ईंधन एवं रसायन निर्माण |
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1,3-प्रोपेन डाइअल |
ग्लिसरॉल/शर्करा से किण्वित |
वस्त्र, सौंदर्य प्रसाधन और औद्योगिक उपयोगों के लिये पॉलिएस्टर |
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जैव-आधारित सर्फेक्टेंट और स्नेहक |
पौधों के तेल से प्राप्त |
डिटर्जेंट, पेंट, चिपकने वाले पदार्थ |
- भारत की वर्तमान स्थिति एवं संभावनाएँ: भारत इस क्षेत्र में सुदृढ़ता रखता है। भारत के पास एक बड़ा कृषि आधार, औषधि एवं टीका उद्योग से संबंधित किण्वन में गहरी विशेषज्ञता और तीव्र गति से विकसित हो रहा विनिर्माण क्षेत्र है।
- इस क्षेत्र का विस्तार करने से पेट्रोकेमिकल्स पर आयात निर्भरता कम हो सकती है (उदाहरण के लिये, भारत ने वर्ष 2023 में 479.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का एसिटिक अम्ल आयात किया), कृषि उत्पादों के लिये नए बाज़ार सृजित हो सकते हैं तथा सतत औद्योगिक आगतों के प्रतिस्पर्द्धी आपूर्तिकर्त्ता के रूप में भारत की स्थिति सुदृढ़ हो सकती है।
- भारत ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग की बायो ई-3 नीति के तहत जैव-आधारित रसायनों और एंज़ाइमों को प्राथमिकता दी है।
- वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम पद्धतियाँ:
- यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ की जैव-अर्थव्यवस्था रणनीति और कार्ययोजना चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था लक्ष्यों के हिस्से के रूप में जैव-आधारित रसायनों के लिये समन्वित समर्थन प्रदान करती है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका: USDA का बायोप्रेफर्ड प्रोग्राम प्रमाणित जैव-आधारित उत्पादों के लिये संघीय खरीद वरीयता को अनिवार्य बनाता है, जिससे उत्पादकों के लिये बाज़ार की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
- चीन: चीन ने राष्ट्रीय जैव-अर्थव्यवस्था विकास योजनाओं में उच्च मूल्य वाले जैव-आधारित रसायनों और एंज़ाइम प्रौद्योगिकियों को रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी है।
- लाभ: प्रमुख लाभों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, गैर-नवीकरणीय संसाधनों पर निर्भरता में कमी, जैव-अपघटनीयता में वृद्धि और कृषि एवं औद्योगिक अपशिष्ट शृंखलाओं के मूल्यवर्द्धन के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों के साथ संरेखण शामिल हैं।
- जोखिम और चुनौतियाँ: प्रमुख जोखिमों में पेट्रोकेमिकल्स के मुकाबले कम लागत वाली प्रतिस्पर्द्धात्मकता शामिल है, जो उत्पादन बढ़ाने के दौरान निजी निवेश को हतोत्साहित करती है। इसके अतिरिक्त विश्वसनीय फीडस्टॉक की उपलब्धता और बुनियादी ढाँचे संबंधी अनिश्चितताएँ भी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
- बाज़ार स्वीकृति में चुनौती, क्योंकि विनिर्माता तुलनात्मक लागत होने पर भी मौजूदा आगतों को बदलने में अनिच्छुक हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. जैव-आधारित रसायन क्या होते हैं?
जैव-आधारित रसायन औद्योगिक रसायन हैं जो जीवाश्म ईंधन के बजाय नवीकरणीय बायोमास (पौधे, अवशेष, शैवाल) से प्राप्त होते हैं और अक्सर किण्वन या एंज़ाइम प्रक्रियाओं के माध्यम से उत्पादित होते हैं।
2. जैव-आधारित रसायन क्षेत्र में एंज़ाइम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
एंज़ाइम जैविक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे डिटर्जेंट, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र और जैव-विनिर्माण में कम तापमान एवं कम ऊर्जा वाली औद्योगिक प्रक्रियाएँ संभव हो पाती हैं।
3. भारत जैव-आधारित रसायनों पर क्यों ध्यान केंद्रित कर रहा है?
भारत का लक्ष्य पेट्रोकेमिकल आयात पर निर्भरता को कम करना (उदाहरण के लिये, भारत ने वर्ष 2023 में 479.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एसिटिक अम्ल आयात किया था), अपने कृषि आधार का लाभ उठाना और बायो ई-3 नीति के तहत स्थिरता लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाना है।
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UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:
प्रश्न. माइकोराइजल (कवकमूलीय) जैव-प्रौद्योगिकी को निम्नीकृत स्थलों के पुनर्वासन में उपयोग में लाया गया है क्योंकि कवकमूल के द्वारा पौधों में: (2013)
- सूखे का प्रतिरोध करने एवं अवशोषण क्षेत्र बढ़ाने की क्षमता आ जाती है
- pH की अति सीमाओं को सहन करने की क्षमता आ जाती है
- रोगग्रस्तता से प्रतिरोध की क्षमता आ जाती है
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिये:
(A) केवल 1
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (D)
प्रश्न. पीड़कों के प्रतिरोध के अतिरिक्त वे कौन-सी संभावनाएँ हैं जिनके लिये आनुवंशिक रूप से रूपांतरित पादपों का निर्माण किया गया है? (2012)
- सूखा सहन करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना
- उत्पाद में पोषकीय मान बढ़ाना
- अंतरिक्ष यानों और अंतरिक्ष स्टेशनों में उन्हें उगने और प्रकाश संश्लेषण करने के लिये सक्षम बनाना उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाना
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3 और 4
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (c)
भारत विस्तार
हाल ही में, कृषि मंत्रालय ने दिल्ली में AI समिट के दौरान जयपुर, राजस्थान में AI-आधारित 'भारत विस्तार' योजना के प्रथम चरण का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है।
- परिचय: 'भारत विस्तार' एक बहुभाषीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित परामर्श प्रणाली है, जो किसानों को मोबाइल या स्मार्टफोन के माध्यम से कृषि-संबंधी प्रश्न पूछने और त्वरित समाधान प्राप्त करने की अनुमति देती है।
- उद्देश्य: AI-आधारित व्यक्तिगत परामर्श के माध्यम से कृषि को सुलभ, किफायती और प्रौद्योगिकी-संचालित बनाना तथा किसानों की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना।
- हेल्पलाइन एक्सेस: किसान स्थानीय भाषा में (वर्तमान में हिंदी और अंग्रेज़ी, शीघ्र ही 11 भाषाओं में विस्तारित) त्वरित उत्तर प्राप्त करने और संपूर्ण भारत में मंडी के रियल टाइम मूल्यों की जाँच करने के लिये हेल्पलाइन नंबर 155261 डायल कर सकते हैं।
- एकीकृत मंच: यह एग्रीस्टैक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ज्ञान प्रणाली, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसमी आगतों, बाज़ार मूल्यों और सरकारी योजनाओं को एक डिजिटल इंटरफेस में सम्मिलित करता है।
- किसान ID: एक डिजिटल किसान पहचान पत्र किसानों के डेटा को संगृहीत करेगा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी सेवाओं को एकीकृत करेगा।
- सेवाएँ: मृदा परीक्षण, बीज, उर्वरक, सिंचाई, ऋण, बीमा और योजना लाभों पर मार्गदर्शन प्रदान करता है, साथ ही उत्पादकता में सुधार और जोखिम को कम करता है।
- अन्य पहलें: शुभारंभ के साथ ही, किसान-केंद्रित एआई हैकथॉन और एग्री कोश AI स्ट्रेटजी रोडमैप का अनावरण किया गया, ताकि कृषि प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
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SAHI & BODH स्वास्थ्य AI पहल
हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भारत के स्वास्थ्य AI पारिस्थितिक तंत्र को मज़बूत करने के लिये इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 दो महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल – भारत के स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की रणनीति (सिक्योर एआई फॉर हेल्थ इनिशिएटिव- SAHI) और स्वास्थ्य आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिये बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म (बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई- BODH) का शुभारंभ किया।
- SAHI (शासन संबंधी ढाँचा): SAHI जवाबदेही, गोपनीयता संरक्षण और नागरिक-केंद्रित सुरक्षा उपायों के माध्यम से ज़िम्मेदार AI को अपनाने के लिये एक राष्ट्रीय रोडमैप और नीतिगत ढाँचे के रूप में कार्य करती है।
- BODH (वैलिडेशन प्लेटफॉर्म): BODH वह संरचित मंच है जिसका उपयोग AI-आधारित स्वास्थ्य समाधानों से पहले उनके प्रदर्शन, सुरक्षा और वास्तविक दुनिया की तैयारी का परीक्षण, बेंचमार्किंग और सत्यापन करने के लिये किया जाता है।
- उद्देश्य: स्वास्थ्य सेवा में AI समाधानों को सुरक्षित, विश्वसनीय, साक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित बनाना तथा जनता के विश्वास को मज़बूत करना।
- डिजिटल स्वास्थ्य आधार: ये पहलें राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (2020) के दृष्टिकोण पर आधारित हैं, जिसका उद्देश्य एक अंतरसंचालनीय और विस्तार योग्य डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण करना है।
- डेटा और अवसंरचना: यह ढाँचा डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास सुनिश्चित करने के लिये अंतरसंचालनीय और सहमति-आधारित स्वास्थ्य डेटा प्रणालियों को बढ़ावा देता है।
- सहयोग: यह स्वास्थ्य सेवा में AI समाधानों को ज़िम्मेदारी से एकीकृत करने के लिये सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग की समन्वित भागीदारी को सक्षम बनाता है।
- प्रभाव: AI उपकरण स्वास्थ्य सेवा वितरण को किफायती और सुलभ बनाते हुए निदान में सुधार, दवा खोज में तेज़ी और नैदानिक निर्णय लेने की क्षमता को मज़बूत कर सकते हैं।
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मधुमक्खी गलियारा
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक अद्वितीय पहल शुरू की है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पर परागणकारी या ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ विकसित किये जाएंगे, ताकि पारिस्थितिक अवसंरचना के विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
- परिचय: ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ में फूलों वाले पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास की एक निरंतर पट्टी होगी, जो मौसमी फूलों के चरणबद्ध चक्रों के माध्यम से पूरे वर्ष अमृत और पराग उपलब्ध कराएगी।
- उद्देश्य: इस परियोजना का लक्ष्य हाइवे पर पौधरोपण को सजावटी हरियाली से बदलकर जैव विविधता-सहायक वनस्पति में परिवर्तित करना है, ताकि मधुमक्खियाँ और अन्य परागणकारी जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- प्रजातियों का चयन: स्थानीय प्रजातियाँ, जैसे– नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सीरिस लगाए जाएंगे, साथ ही फूलने वाली जंगली घासें, सूखी लकड़ी तथा खोखले तनों को परागणकारी जीवों के निवास स्थान के रूप में रखा जाएगा।
- कार्यान्वयन योजना: कॉरिडोरों का विकास उपयुक्त हाइवे खंडों और खाली NHAI भूमि पर किया जाएगा, जिसमें हर 500 मीटर से 1 किमी. पर फूलों के समूह लगाए जाएंगे। यह दूरी मधुमक्खियों के भोजन खोजने की क्षमता के अनुसार तय की गई है।
- पौधरोपण लक्ष्य: वर्ष 2026–27 के दौरान लगभग 40 लाख पेड़ लगाने की योजना है, जिनमें से लगभग 60% पेड़ ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ पहल के तहत लगाए जाएंगे। प्रारंभिक चरण में कम-से-कम तीन परागणकारी कॉरिडोर विकसित किये जाएंगे।
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मिलन सैन्य अभ्यास 2026
भारतीय नौसेना ने 13वें मिलन सैन्य अभ्यास 2026 में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के मध्य सांस्कृतिक एवं सामाजिक आदान-प्रदान को सुगम बनाने के उद्देश्य से विशाखापत्तनम में एक समर्पित मिलन विलेज की स्थापना की है।
- मिलन सैन्य अभ्यास के 13वें संस्करण में 70 से अधिक देशों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिनमें जर्मनी, फिलीपींस तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश, जो पहली बार इसमें हिस्सा ले रहे हैं, भी सम्मिलित हैं।
मिलन सैन्य अभ्यास
- परिचय: मिलन (MILAN) भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक (प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित) बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है। इसका प्रारंभ वर्ष 1995 में अंडमान एवं निकोबार कमान के अधीन केवल चार विदेशी नौसेनाओं इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका तथा थाईलैंड की सहभागिता के साथ हुआ था। समय के साथ इसका विकास हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सर्वाधिक व्यापक समुद्री सैन्य सहभागिताओं में से एक के रूप में हुआ।
- मुख्य उद्देश्य: यह अभ्यास समुद्री साझेदार देशों के मध्य परस्पर समझ, विश्वास तथा पेशेवर संवाद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है, जिससे एक स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।
- संरचनात्मक चरण: इस अभ्यास के अंतर्गत दो मुख्य चरण (फेज़) शामिल हैं: हार्बर फेज़ (संगोष्ठियाँ, विषय-विशेषज्ञों के मध्य विचार-विमर्श तथा ज्ञान-साझेदारी) और सी फेज़ (अंतःक्रियाशीलता, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), पनडुब्बी-रोधी युद्धक्षमता तथा सामरिक संचालनाभ्यास)।
- नीतिगत सामंजस्य: यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी 2014, महासागर विज़न एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में उसकी भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
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एआई-प्रेन्योर्स ऑफ इंडिया
नीति आयोग के अंतर्गत अटल इनोवेशन मिशन ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट, 2026 में "एआई-प्रेन्योर्स ऑफ इंडिया" नामक एक प्रमुख कॉफी टेबल बुक का अनावरण किया।
- पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ: यह पुस्तक अटल इन्क्यूबेशन सेंटर्स के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क से चयनित 45 अग्रणी एआई स्टार्टअप्स की उद्यम यात्राओं का विवरण प्रस्तुत करती है।
- इस पुस्तक के अंतर्गत ‘फाउंडर-फर्स्ट’ दृष्टिकोण को अपनाया गया है, जिसमें केवल तकनीकी उपलब्धियों पर बल देने के स्थान पर संस्थापकों की प्रेरणा, धैर्य, संघर्ष तथा नवाचार-यात्रा के अनुभवों को रेखांकित किया गया है।
अटल इनोवेशन मिशन (AIM)
- परिचय: नीति आयोग द्वारा वर्ष 2016 में शुरू किया गया अटल इनोवेशन मिशन भारत सरकार की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
- यह विद्यार्थियों में समस्या-समाधान अभिवृत्ति को विकसित करता है तथा विद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों में नवाचार एवं उद्यमिता पारितंत्र को सुदृढ़ करता है।
AIM के अंतर्गत प्रमुख कार्यक्रम:
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कार्यक्रम |
लक्षित समूह |
मुख्य विशेषताएँ/ उद्देश्य |
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अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) |
कक्षा 6–12 के विद्यार्थी |
विद्यालयों में 3डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उपकरणों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने हेतु स्थापित किया गया है। |
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अटल इन्क्यूबेशन सेंटर (AICs) |
स्टार्टअप और उद्यमी |
बिजनेस इन्क्यूबेटर वे संस्थान हैं जो मेंटरशिप, फंडिंग और तकनीकी सहायता प्रदान करके स्टार्टअप को बढ़ावा देते हैं। |
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अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र (ACICs) |
अविकसित एवं वंचित क्षेत्र |
टियर-2/3 शहरों, जनजातीय क्षेत्रों तथा वंचित समुदायों में नवाचार को बढ़ावा। |
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अटल न्यू इंडिया चैलेंजेज़ (ANIC) |
प्रौद्योगिकी-आ-धारित नवोन्मेषक |
राष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों का समाधान करने वाले नवाचारों को वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन। |
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मेंटर इंडिया |
उद्यमी एवं नवोन्मेषक |
AIM कार्यक्रमों के तहत उद्यमियों और नवोन्मेषकों का मार्गदर्शन करने हेतु विभिन्न क्षेत्रों में 6,200 से अधिक मेंटर्स को शामिल किया गया है। |
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और पढ़ें: अटल इनोवेशन मिशन 2.0 |